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भारत में गर्भनिरोधक के रूप में किया जा रहा है आई-पिल का अत्यधिक उपयोग

भारत में गर्भनिरोधक के रूप में किया जा रहा है आई-पिल का अत्यधिक उपयोग

भारत में धीरे-धीरे सेक्स के प्रति बदल रहे व्यवहार ने फ्लेवर्ड कंडोम, सेक्स टॉय और लवमेकिंग फर्नीचर जैसी चीज़ों की मांग को बढ़ावा जरूर दिया है, लेकिन इसके बावजूद देश में सुरक्षित यौन संबंध और यौन स्वास्थ्य के बारे में बहुत सी गलत धारणाएं बरकरार हैं।

मॉर्निंग आफ्टर पिल का नियमित उपयोग

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय डेटा एनालिटिक्स फर्म यूगोव (YouGov) ने एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें हिस्सा लेने वाले भारतीयों में से केवल 15% ही जानते थे कि आई-पिल जैसी मॉर्निंग आफ्टर गोली को गर्भ निरोधक के रूप में नियमित रूप से उपयोग किया जाना सुरक्षित नहीं होता है। पिछले महीने सितंबर में किए गए इस सर्वेक्षण में 18 वर्ष से अधिक उम्र के 1,030 भारतीय शामिल थे।

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ज्यादा आई-पिल लेने के खतरे

आपको बता दें कि आई-पिल और अनवांटेड-72 जैसे ब्रांड की यह गोलियां अगर असुरक्षित सेक्स के 72 घंटों के अंदर खाई जाएं तो गर्भ को रोक सकती हैं। लेकिन अगर इनका इस्तेमाल काफी जल्दी- जल्दी किया जाए या फिर गर्भनिरोधक के रूप में नियमित रूप से किया जाए तो यह हार्मोनल समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा यह महिलाओं को यौन संक्रमित बीमारियों के खतरे में भी डाल सकती हैं।

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शर्मिंदगी की वजह से बढ़ी इनकी जरूरत

रूढ़िवादी भारत में, हालांकि, स्त्री रोग विशेषज्ञ के सामने अक्सर अविवाहित यौन सक्रिय महिलाएं शर्मिंदगी महसूस करती हैं, इसलिए इन्हें अक्सर इन आपातकालीन गोलियों का सहारा लेना आसान लगता है, जिन्हें बिना किसी डॉक्टर के पर्चे के खरीदा जा सकता है। इन गोलियों की लोकप्रियता ने भारत को ऐसी गोलियों के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बना दिया है।

मिले चौंकाने वाले जवाब

यूगोव के इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले 36% लोगों ने चौंकाने वाले जवाब दिये हैं जिसके अनुसार वे सोचते हैं कि इन इमरजेंसी पिल्स का उपयोग नियमित गर्भ निरोधक के रूप में भी किया जा सकता है। इसी तरह बड़ी संख्या में लोगों को कुछ और तरह की गलत धारणाएं भी की हैं। उनका मानना है कि मासिक धर्म के दौरान किये गये सेक्स से गर्भ नहीं ठहर सकता है और इसी तरह गर्भनिरोधक गोलियां यौन संक्रमित बीमारियों यानि सेक्स ट्रांसमिटेड डिज़ीज़ (STDs) को दूर रखती हैं।

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ग़लतफ़हमी                                                                                     मानने वाले लोगों का प्रतिशत
पेनीट्रेशन, इजेकुलेशन या ऑर्गैज़्म के बिना सेक्स सुरक्षित होता है                                      35
मासिक धर्म की अवधि के दौरान यौन संभोग कभी गर्भावस्था का कारण नहीं बन सकता है        34
क्लाइमेक्स से पहले निकाल लेने से गर्भ बिलकुल नहीं ठहर सकता                                      31
बर्थ- कंट्रोल पिल यानि जन्म नियंत्रण गोली भी यौन संक्रमित बीमारियों से बचाती है                  23
सेक्स के बाद मूत्र विसर्जन या डॉचिंग गर्भावस्था से बचाती है                                             19

भारत में यौन शिक्षा की जरूरत का संकेत

सर्वेक्षण के यह नतीजे रूढ़िवादी भारत में यौन शिक्षा की जरूरत का बड़ा संकेत हैं, जहां युवाओं को भी सुरक्षित सेक्स के बारे में पढ़ाना बेहद जरूरी है। हालांकि भारत सरकार काफी समय से देश के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में यौन शिक्षा को शामिल करने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा किशोरों को यौन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देने के लिए रिसोर्स किट भी लॉन्च किये गए हैं। लेकिन इसके बावजूद लाखों यौन सक्रिय लोगों तक जरूरी जानकारी नहीं पहुंच पाई है।

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कंडोम की बढ़ती लोकप्रियता

दूसरी ओर इस सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि देश में कंडोम खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले लगभग 60% लोगों ने कहा कि उन्होंने कंडोम का इस्तेमाल किया है। उच्चतम प्रतिशत (69%) वाले 18-19 वर्ष आयु वर्ग के युवा उत्तरदाताओं ने बताया है कि वे वर्तमान में कंडोम का उपयोग करते हैं।

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देश की बदलती मानसिकता

इससे एक ऐसे देश में मानक परिवर्तन का पता लगता है जहां गर्भनिरोधक का सबसे आम रूप महिलाओं की नसबंदी हुआ करती थी। इसका मतलब यह कि यहां पारंपरिक धारणा यह हुआ करती थी कि परिवार नियोजन की ज़िम्मेदारी महिला की है। सर्वेक्षण में यह भी पता चला कि 75% भारतीय मानते हैं कि पुरुषों के लिए जन्म नियंत्रण गोलियों की भी आवश्यकता है, और उन्हें महिलाओं के साथ समान रूप से परिवार नियोजन की ज़िम्मेदारी साझा करनी चाहिए।

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