योग करे हर रोग दूर, जानिए योगासन के प्रकार - Yogasana in Hindi

योगासन के प्रकार, Yogasana in Hindi, योग के प्रकार चित्र सहित, Types of Yogasana in Hindi

कहते हैं 'योग करे हर रोग दूर'। सच भी है, योग आपके पूरे जीवन को बदल सकता है। आजकल की दौड़ती-भागती जिंदगी में हमें अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखने का समय कम ही मिल पता है। मगर योग इन दोनों का ख्याल रखता है। योगासन के फायदे कई सारे हैं, सुबह आधे घंटे के लिए ही सही मगर किया गया योग पूरे दिन शरीर में स्फूर्ति बनाये रखता है और मन को भी शांत रखता है। शिल्पा शेट्टी से लेकर बिपाशा बासु तक बॉलीवुड की कई एक्ट्रेसेस अपने मन और शरीर को फिट बनाये रखने के लिए योग का सहारा लेती हैं। योग एक साधना है, जिसे करने के लिए योगासन (Yogasana in Hindi) करने बेहद जरूरी हैं। योगासन के प्रकार (types of yogasana in hindi) कई होते हैं। योगासन करने के लिए इनका पता होना जरूरी है। International Yoga Day के मौके पर हम योग कोट्स के जरिये एक दूसरे को ग्रीट कर सकते  हैं। आइये जानते योगासन कितने प्रकार के होते हैं।

योगासन के प्रकार - Types of Yogasana in Hindi

योग करने के लिए सबसे बेहतर समय सुबह का होता है। योगासन के प्रकार जानना योग साधना करने के लिए बेहद जरूरी है। योग से बनता है योगासन और योगासन कई प्रकार के होते हैं। हर योगासन का अपना एक अर्थ, महत्त्व और फायदा होता है। इसे जान लिया तो बस समझ लीजिये कि योग से आप हर रोग दूर कर सकते हैं। मगर ध्यान रखें कि योग हमेशा खाली पेट ही करें। सुबह नहीं भी कर पा रहे हैं तो शाम के समय सूरज ढलने के बाद आप इसे करने कर सकते हैं मगर शाम के समय आपके खाने और योगासन के बीच कम से कम 4-5 घंटे का असर जरूर होना चाहिए। योग एक साधना है और साधना के लिए हमेशा साफ-सुथरा होकर ही जाना चाहिए। इसके अलावा योग करने के तुरंत बाद कभी नहीं नहाना चाहिए। आधे घंटे का ब्रेक लेने के बाद ही नहाने जाएं। अब जान लेते हैं योग के प्रकार चित्र सहित (types of yogasana in hindi)।

सुखासन - Sukhasana

यह योगासन बिगिनर्स यानी उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है, जिन्होंने अभी-अभी योग करना शुरू किया है। सुखासन का अर्थ है, सुख देने वाला आसन। इसे करने के लिए आपको बस पालथी मारकर आराम से बैठ जाना है। यह आसन मन की शांति और सुख देने वाला है। यही वजह है कि इसे सुखासन कहा जाता है।

सुखासन करने के फायदे

इस आसन को रोज करने से आपको रीढ़ की हड्डियों की परेशानी से छुटकारा मिल सकता है। इतना ही नहीं इसे करने से मन में शांति और एकाग्रता भी बढ़ती है। यह आसन छाती और पैर को मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। साथ ही पूरे दिन शरीर ऊर्जा से भरा रहता है। सुखासन की मुद्रा में बैठकर खाना खाने से मोटापा, कब्ज आदि पेट संबंधित बीमारियों से निजात मिलती है। इससे न सिर्फ मन में सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति होती है बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है

बाल आसन - Balasana

आपने छोटे बच्चों को बैठते हुए तो देखा ही होगा। वे अक्सर अपना शरीर और हाथ आगे की तरफ झुका कर बैठ जाते हैं। बाल आसन में आपको भी कुछ ऐसा ही करना है। एक बच्चे की तरह अपने हाथों और शरीर को आगे की तरफ झुका कर कुछ देर के लिए बैठ जाइये।

बाल आसन करने के फायदे

बाल आसन करने का सबसे तगड़ा असर कमर की मांसपेशियों पर पड़ता है। इससे मांसपेशियों के दर्द में आराम मिलता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है। बाल आसन को करने के कई फायदे हैं। जैसे- तनाव से मुक्ति, रीढ़ की हड्डी को बेहतर लचीलापन, ब्लड सर्कुलेशन संतुलन, थकान दूर होना या फिर पीरियड में होने वाले दर्द से निजात पा लेना। 

शवासन - Shavasana

सुखासन के बाद यह एक और सबसे आसान योगासन है। इसका नाम है शवासन। शव का अर्थ है मृत, यानि इस आसन में शरीर को मृत शरीर की अवस्था में बनाकर लेट जाना है। क्योंकि यह योगासन करने में बेहद आसान है इसलिए इसे हर उम्र के लोग कर सकते हैं। 

शवासन करने के फायदे

शवासन में शरीर सीधा लेटा होता है। यह एक बेहद आरामदायक स्थिति होती है। आराम में होने के चलते मन और शरीर दोनों तनाव मुक्त होने लगते हैं। इतना ही नहीं, अगर आप अपनी सेक्स लाइफ को और भी शानदार बनाना चाहते हैं तो शवासन से बेहतर कुछ और नहीं। दरअसल, सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए मस्तिष्क का शांत रहना बेहद जरूरी है। इसलिए सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए शवासन करें।

अर्ध चंद्रासन - Ardha Chandrasana

जैसा कि नाम से ही जाहिर है, अर्ध चंद्रासन करते समय शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है। इस आसन को खड़े होकर किया जाता है। एक हाथ और पैर धरती को छूते हैं। वहीं दूसरा हाथ ऊपर रहता है और दूसरा पैर एकदम सीधा। अगर अभी भी समझ नहीं आया तो आप तस्वीर के माध्यम से इसे समझ सकते हैं।

अर्ध चंद्रासन करने के फायदे

अर्ध चंद्रासन करने के एक नहीं कई फायदे हैं। यह आसन घुटने, किडनी, छोटी आंत, लीवर, छाती, लंग्स और गर्दन के लिए फायदेमंद होता है। इससे एक समय पर लगभग सभी अंगों का व्यायाम साथ में हो जाता है। यही वजह है कि इसे करने से शरीर रोगमुक्त रहता है।

मार्जरी आसन - Marjariasana

आपने कभी गौर से बिल्ली को बैठे हुए देखा है। अगर आपका जवाब हां है तो मार्जरी आसन में बस आपको ऐसे ही बैठना है। दरअसल, मार्जरी आसन को बिल्ली आसन भी कहा जाता है। इस आसन में बिल्ली की तरह आकार बनाते हुए अपने घुटनों और हाथों के बल बैठ जाएं और शरीर को एक मेज की तरह बना लें। गर्दन ऊपर की और रखें।  

मार्जरी आसन करने के फायदे

मार्जरी आसन करने से शरीर दिनभर ऊर्जावान और सक्रिय बना रहता है। इस योगासन को करने के कई फायदे हैं। इससे न सिर्फ कंधें और कलाई मजबूत बनते हैं बल्कि पाचन प्रक्रिया में भी सुधार आता है। पेट को सुडौल बनाना चाहते हैं तो भी इस योगासन को कर सकते हैं। इसके अलावा यह शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और मन शांत रखने में भी मदद करता है।

वज्रासन - Vajrasana Benefits in Hind

सुखासन और शवानन की तरह ही वज्रासन भी बेहद आसान है। साथ ही कई फायदों से भरपूर भी है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है, वज्र और आसन, वज्र का मतलब होता है कठोर या मजबूत। सभी योगासनों में वज्रासन सबसे अधिक प्रभावशाली है। इसे करने के लिए पैर मोड़ कर घुटनों के बल आराम से बैठ जाइए। 

वज्रासन करने के फायदे

इस आसन को करने से शरीर मजबूत बनता है। इस आसन के अभ्यास से पेट और कमर की चर्बी कम होती है। वैसे अगर आप इसे हर बार खाना खाने के बाद करेंगे तो पाचन क्रिया में काफी आसानी हो जाएगी। इसे रोजाना करने से साइटिका के दर्द में भी राहत मिलती है।

दंडासन - Dandasana Benefits in Hindi

यह आसन भी करने में बेहद आसान है। दंडासन को बैठ कर किया जाता है। इसके लिए जमीन पर बिछी मैट पर पैर को सीधा करके बैठ जाइए। इस दौरान आपकी पीठ का पाॅश्चर भी एकदम सीधा होना चाहिए। इस योगासन की खासियत यह है कि इसके फायदे कम समय में नज़र आने लगते हैं। 

दंडासन करने के फायदे

दंडासन एक ऐसा योगासन है, जिसे नियमित रूप से करने पर हाथ- पैर की मांसपेशियां में मजबूती आती है। यह आसन आपके सिटिंग पाॅश्चर यानी बैठने के तरीके को ठीक करने में भी काफी हद तक मददगार है। 

अधोमुख श्वानासन - Adhomukh Savasana Benefits in Hindi

अधोमुख श्वान को अंग्रेजी में डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज़ भी कहते हैं। यह योगासन तीन शब्दों से मिलकर बना है। अधो यानी नीचे की ओर गया हुआ, मुख यानी मुंह और श्वान यानी कुत्ता। इस आसन को करते समय आपके हाथ, पैर और सिर नीचे की तरफ होते हैं और कमर का भाग ऊपर की ओर। तस्वीर की मदद से आप इसे सही से समझ सकते हैं।

अधोमुख श्वानासन करने के फायदे

अधोमुख श्वानासन करने से सबसे ज्यादा फायदा आपकी बाजुओं, टांगों और कंधों को मिलता है। इससे मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है और अनिद्रा, थकान जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। सिर दर्द की समस्या को दूर करने के लिए भी आप इस योगासन को कर सकते हैं। ध्यान रहे, अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है या फिर आंखों की कोशिकाएं कमजोर हैं तो इस आसन को कतई न करें। इसके अलावा कंधे पर चोट लगने पर, दस्त से पीड़ित होने पर या फिर पीठ पर किसी तरह की चोट लगी होने पर भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।

गोमुख आसन - Gomukhasana Benefits in Hindi

गोमुख आसन करते समय शरीर में गाय के मुख के समान आकृति बनती है। इस आसन में गाय के मुंह की तरह ऊपर की तरफ पतली और नीचे की तरफ चौड़ी आकृति बनानी पड़ती है। यह दिखने में थोड़ा कठिन जरूर लग सकता है लेकिन अगर एक बार आपने इसे करना सीख लिया तो इसके कई फायदे हैं।

गोमुखासन करने के फायदे

महिलाओं खासतौर पर गोमुखासन करना चाहिए। यह उनके लिए बेहद फायदेमंद होता है। गोमुख आसन करने से पैरों की ऐंठन दूर होती, ढीले वक्ष स्थल कठोर होते हैं, कंधे मजबूत बनते हैं और रीढ़ की हड्डी में भी स्थिरता आती है। इसके अलावा मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कब्ज और पीठ दर्द जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।

भुजंग आसन - Bhujangasana in Hindi

भुजंग आसन पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में से एक है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग (सर्प) की तरह बनती है इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है। इससे पीठ दर्द की समस्या में काफी आराम मिलता है। 

भुजंग आसन करने के फायदे

भुजंग आसन करने से पीठ दर्द की समस्या के साथ रीढ़ की हड्डी को भी काफी फायदा मिलता है। इसे करने से शरीर में फुर्ती आती है। ध्यान रहे, अगर इस आसन को करते समय आपके पेट में या शरीर के किसी अन्य हिस्से में अधिक दर्द हो तो इस आसन को न करें।

धनुरासन - Dhanurasana in Hindi

जैसा कि नाम से ही जाहिर है, धनुरासन करते समय शरीर की आकृति धनुष के समान बन जाती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब धनुष की आकृति बनाते हुए पीछे की तरफ से पैर उठाते हुए अपने हाथों से पैरों को पकड़ लें। ध्यान रहे पैर के पंजो को नहीं पकड़ना है। जितनी देर तक सहन हो सके इस आसन को करें। शुरुआत में इसे 15 से 20 सेकंड के लिए ही करें।

धनुरासन करने के फायदे

धनुरासन करने से छाती, गर्दन और कंधों की जकड़न दूर होती है। इससे रीढ़ की हड्डी में भी लचीलापन आता है। तनाव और थकान को दूर भगाने के लिए भी यह योगासन परफेक्ट है। 

जानुशीर्षासन - Janushirshasana in Hindi

जानुशीर्षासन दो शब्दों से मिलकर बना हैं। पहला शब्द 'जानु' हैं जिसका अर्थ 'घुटना' हैं और दूसरा शब्द 'शीर्ष' यानी 'सिर' होता हैं। इस योगासन को बैठ कर किया जाता है। इस आसन में सिर पूरी तरह से आपके घुटनों को छूता चाहिए। इसे करने के लिए पैरों को सामने की ओर सीधे फैलाते हुए बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। अब बाएं घुटने को मोड़कर पैर के तलवे को दाहिनी जांघ के पास रखें। सांस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें, रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए ठुड्डी को पंजों की और बढ़ाएं। अब यही प्रक्रिया दूसरे पैर के साथ भी दोहराएं।

जानुशीर्षासन करने के फायदे

जानुशीर्षासन को करने से आपके पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही पूरे पैर पर एक साथ खिंचाव बनता है। जानुशीर्षासन मन को शांत रखता है और तनाव से भी राहत देता है। अगर जानुशीर्षासन को सही ढंग से किया जाए तो यह बुखार होने से भी बचाता है। महिलाओं में अगर मासिक धर्म से जुड़ी कोई समस्या है तो इस योगासन को करने से वह भी दूर हो जाती है।

शीर्षासन - Shirshasana Benefits in Hindi

शीर्षासन का नाम शीर्ष शब्द पर रखा गया है, जिसका मतलब होता है सिर। इसे सभी आसनों का राजा माना जाता है। आप इसे दीवार का सहारा लेकर करें। इसे करने के लिए जमीन पर योगा मैट, कंबल या कोई मोटा तौलिया बिछा लें। अब आगे की ओर झुककर दोनों हाथों की कोहनियों को जमीन पर टिका दें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में सख्ती से जोड़ लें। अब सिर को दोनों हथेलियों के बीच में धीरे से रखें। अब धीरे से पैरों को ऊपर लेकर आयें और पीठ को एकदम सीधा रखें। आसान शब्दों में आपको सिर के बल उल्टा खड़ा होना है। इसे करना कठिन ज़रूर लगत सकता है लेकिन इसके फायदे जानकर आप भी इसे करना चाहेंगे।

शीर्षासन करने के फायदे

शीर्षासन करने से दिमाग शांत रहता है और तनाव व हल्के अवसाद में राहत मिलती है। इससे हाथों, टांगों, और रीढ़ की हड्डियां मजबूत बनती है। इसे करने से फेफड़े की कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती है। यह रजोनिवृत्ति के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद करता है। इतना ही नहीं शीर्षासन अस्थमा, बांझपन, अनिद्रा, और साइनस जैसी समस्याओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं। 

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