स्वस्थ जीवन के लिए जानिए योग के लाभ - Benefits of Yoga in Hindi

स्वस्थ जीवन के लिए जानिए योग के लाभ - Benefits of Yoga in Hindi

अंग्रेजी में एक कहावत है, हेल्थ इज़ वेल्थ (health is wealth) यानी स्वास्थ्य ही धन है। अगर स्वास्थ्य अच्छा हो तो धन कभी भी कमाया जा सकता है। मगर आज के ज़माने में हम अपने स्वास्थ्य को दरकिनार कर सिर्फ पैसा कमाने की होड़ में लगे रहते हैं। स्वास्थ्य और मन अच्छा हो तो ज़िंदगी आसान हो जाती है। ज़िंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए ज़रूरी है कि हम मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहें। 
इसके लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है 'योग' (Yoga)। वो कहते हैं न 'योगा से ही होगा', यह बात शत- प्रतिशत सच है। योग के लाभ (yoga ke fayde) अनेक हैं। योग में हर बीमारी से बचने का इलाज छुपा है, फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। इतना ही नहीं, बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग से अच्छा ऑप्शन और कुछ नहीं है। इस ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ पर जानिए, योग के फायदे, योग का महत्व, योग के मानसिक लाभ, योगासन के स्वास्थ्य लाभ और भी बहुत कुछ। यानी योग के बारे में वह सब कुछ, जो आपका जानना बेहद ज़रूरी है। 

Table of Contents

    योग क्या है? - What is Yoga in Hindi

    योग के लाभ और उसके नियम जानने से पहले यह जान लेते हैं कि योग आखिर होता क्या है। योग, इस शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'युज' से हुई है, जिसका मतलब है 'जुड़ना'। कुछ लोगों को लगता है कि शरीर को मोड़ने, खींचने, आड़ा- तिरछा करने और सांस को अंदर- बाहर करने से ही योग हो जाता है। मगर ऐसा बिलकुल भी नहीं है। योग की दुनिया और इसका स्तर इससे कहीं वृहद है। योग से शरीर, मस्तिष्क और आत्मा का एक साथ मिलन होता है। कई बड़े योगियों, गुरुओं और ज्ञानियों ने योग को अपने- अपने तरीके से परिभाषित किया है। 
    "योग सिर्फ व्यायाम और आसन नहीं है। यह भावनात्मक एकीकरण और रहस्यवादी तत्व का स्पर्श लिए हुए एक आध्यात्मिक ऊंचाई है, जो आपको सभी कल्पनाओं से परे की एक झलक देता है।"- श्री श्री रवि शंकर 
    “योग को धर्म, आस्था और अंधविश्वास के दायरे में बांधना गलत है। योग विज्ञान है, जो जीवन जीने की कला है। साथ ही यह पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। जहां धर्म हमें खूंटे से बांधता है, वहीं योग सभी तरह के बंधनों से मुक्ति का मार्ग है।” - ओशो
    “मन को भटकने न देना और एक जगह स्थिर रखना ही योग है।” – बाबा रामदेव  

    ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ क्यों मनाया जाता है

    योग शब्द भारत से बौद्ध धर्म के साथ चीन, जापान, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया और श्रीलंका के अलावा पूरी दुनिया में फैल गया है। दुनिया भर में इसकी प्रसिद्धि को देखते हुए पहली बार 11 दिसंबर 2014 को 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' द्वारा हर साल 21 जून को "विश्व योग दिवस" (International Yoga Day) मनाने का फैसला लिया गया। 
    इस बारे में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, “योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है, यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है लेकिन अपने भीतर एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवनशैली में यह चेतना बनकर, हमें जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद कर सकता है। तो आइए एक ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ को गोद लेने की दिशा में काम करते हैं।"

    योगासन के स्वास्थ्य लाभ - Yoga for Health in Hindi

    योगासन के स्वास्थ्य लाभ एक नहीं अनेक हैं। योग न सिर्फ शरीर का लचीलापन बढ़ाता है बल्कि मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ वज़न घटाने में भी मदद करता है। जानिए योगासन के अन्य स्वास्थय लाभ।
    1- ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है।
    2- दिनभर तरोताजा व खुश रहने में मदद करता है।
    3- आपका ध्यान केंद्रित करने में मददगार।
    4- आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।
    5- ब्लड शुगर नाॅर्मल रहती है।
    6- अच्छी और गहरी नींद में सहायक।
    7- हर तरह की बीमारी व दवाओं से दूर रहने में मदद करता है।
    8- इम्यून सिस्टम को बेहतर कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
    9- एक स्वस्थ जीवनशैली प्रदान करता है।
    10- शरीर में किसी भी तरह के दर्द को कम करने में सहायक भूमिका निभाता है।

    योग के प्रकार - Types of Yoga

    योग के कई आसन होते हैं। हर आसन का अपना अर्थ और फायदा होता है। किसी भी तरह के आसन को करने के लिए सबसे उपयुक्त समय सुबह का होता है। नियमानुसार योग को सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद करना चाहिए। योगासन हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए। अगर सूर्यास्त के बाद योग कर रहे हैं तो उससे तीन- चार घंटे पहले तक कुछ न खाएं। इसके अलावा योगासन करने के तुरंत बाद नहीं नहाना चाहिए, बल्कि कुछ देर इंतजार करना चाहिए। ध्यान रहे, योग किसी साफ- सुथरी जगह पर आरामदायक कपड़े पहनकर ही करना चाहिए।
    इन सबके बाद बारी आती है योग करने की। हम आपके लिए कुछ ऐसे फायदेमंद योगासन लेकर आए हैं, जिन्हें आप आसानी से अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं।

    अर्ध चंद्रासन - Ardha Chandrasana

    इस आसन को करते समय शरीर की स्थिति अर्ध चंद्र के समान हो जाती है, इसीलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहते हैं। इस आसन को खड़े होकर किया जाता है। 
    अर्ध चंद्रासन करने के फायदे
    यह आसन घुटने, किडनी, छोटी आंत, लीवर, छाती, लंग्स और गर्दन के लिए लाभदायक होता है। इस आसन द्वारा इन सभी अंगों का व्यायाम होता है और ये रोगमुक्त रहते हैं।

    भुजंग आसन - Bhujangasana

    आजकल के समय में पीठ दर्द एक आम समस्या बन गई है। इस पर ध्यान न दिया जाए तो बैठना तक मुश्किल हो जाता है। यह आसन पेट के बल लेटकर किये जाने वाले आसनों में से एक है। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग (सर्प) की तरह बनती है इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है। 
    भुजंग आसन करने के फायदे
    भुजंग आसन हमारी पीठ और रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद होता है। इसे करने से शरीर में फुर्ती आती है। ध्यान रहे, अगर इस आसन को करते समय आपके पेट में या शरीर के किसी अन्य हिस्से में अधिक दर्द हो तो इस आसन को न करें।

    गोमुख आसन - Gomukhasana

    गोमुखासन में गाय के मुख के समान आकृति बनती है। इस आसन में गाय के मुंह की तरह एक सिरे पर पतला और दूसरे सिरे पर चौड़ी आकृति बनानी पड़ती है। यही वजह है कि इसे गोमुख आसन कहा जाता है। 
    गोमुखासन करने के फायदे
    यह खासतौर पर महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद होता है। गोमुख आसन करने से पैरों की ऐंठन दूर होती, ढीले वक्ष स्थल कठोर होते हैं, कंधे मजबूत बनते हैं और रीढ़ की हड्डी में स्थिरता आती है। इसके अलावा मधुमेह, गठिया, कमर दर्द, कब्ज और पीठ दर्द जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।

    बाल आसन - Balasana

    बाल आसन में हम बैठकर एक बच्चे की तरह अपने हाथों और शरीर को आगे की तरफ झुकाते हैं। 
    बाल आसन करने के फायदे
    यह आसन कमर की मांसपेशियों को आराम देता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है। बाल आसन करने में जितना आसान है, उतना ही फायदेमंद भी है। तनाव से मुक्ति पानी हो, रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाना हो, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाना हो, थकान दूर करनी हो या फिर पीरियड में होने वाले दर्द से निजात पानी हो, बाल आसन इन सभी में फायदा पहुंचाता है।

    मार्जरी आसन - Marjariasana

    मार्जरी आसन को बिल्ली आसन भी कहा जाता है। इस आसन में बिल्ली की तरह आकार बनाते हुए अपने घुटनों और हाथों के बल आएं और शरीर को एक मेज की तरह बना लें। 
    मार्जरी आसन करने के फायदे
    यह योग आसन शरीर को ऊर्जावान और सक्रिय बनाए रखने के लिए बहुत फायदेमंद है। इस आसन के कई फायदे हैं। यह कंधों और कलाई की क्षमता बढ़ाता है, पाचन प्रक्रिया सुधारता है, पेट को सुडौल बनाता है, शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और मन शांत करता है।

    सुखासन - Sukhasana

    सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है, सुख देने वाला आसन। पालथी मारकर बैठने से ज्यादा आरामदायक और भला क्या हो सकता है। इस आसन को करने से आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है इसलिए इसे सुखासन कहा जाता है। अगर आप योग की शुरुआत कर रहे हैं तो यह आसन आपके लिए बेस्ट है क्योंकि यह सबसे सरल आसन है। 
    सुखासन करने के फायदे
    इस आसन को रोज करने से न सिर्फ मन में शांति और एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि रीढ़ की हड्डियों की परेशानी से भी छुटकारा मिलता है। इससे छाती और पैर भी मजबूत होते हैं। इस आसन से शरीर ऊर्जावान बना रहता है। सुखासन की मुद्रा में बैठकर खाना खाने से मोटापा, कब्ज आदि पेट संबंधित बीमारियों से निजात मिलती है। इससे न सिर्फ मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि मन में सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति भी होती है।

    वज्रासन - Vajrasana

    सुखासन की तरह ही वज्रासन भी बेहद आसान मगर कई फायदों से भरपूर है। पाचन क्रिया को सुधारना हो या फिर पेट की चर्बी कम करनी हो, सभी योगासनों में वज्रासन सबसे अधिक प्रभावशाली है। यह दो शब्दों से मिलकर बना है, वज्र और आसन, वज्र का मतलब होता है कठोर या मजबूत। 
    वज्रासन करने के फायदे
    इस आसन को करने से शरीर मजबूत बनता है। यह इकलौता ऐसा आसन है, जिसे खाना खाने के बाद भी कर सकते हैं। इस आसन को दिन या शाम, दोनों वक्त किया जा सकता है। इस आसन के अभ्यास से पेट और कमर की चर्बी कम होती है। इसे रोज़ाना करने से साइटिका के दर्द में भी फायदा मिलता है।

    दंडासन - Dandasana

    दंडासन बैठ कर किया जाने वाला योग आसन है। इस आसन की खासियत यह है कि इसके फायदे कम समय में नज़र आने लगते हैं। 
    दंडासन करने के फायदे
    इसको नियमित रूप से करने पर हाथ- पैर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। अगर आप अपना सिटिंग पाॅश्चर ठीक करना चाहते हैं तो यह आसन आपके लिए परफेक्ट है।

    शवासन - Shavasana

    शव का अर्थ होता है मृत, यानि इस आसन में शरीर को मृत शरीर की तरह ही बनाना होता है और इसलिए ही इसे शवासन कहा जाता है। यह आसन करने में बेहद आसान है और इसे हर उम्र के लोग कर सकते हैं। 
    शवासन करने के फायदे
    शवासन में शरीर आरामदायक स्थिति में होता है। इस वजह से शरीर तनाव से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, हमारी सेक्स लाइफ को खुशगवार बनाने में भी शवासन मदद करता है। सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए मस्तिष्क का शांत होना जरूरी है। शवासन शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है, इसलिए सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए शवासन करें।

    अधोमुख श्वानासन - Adhomukh Savasana

    अधोमुख श्वान आसन तीन शब्दों से मिलकर बना है। अधो यानि नीचे की ओर गया हुआ, मुख यानी मुंह और श्वान यानी कुत्ता। इसे अंग्रेजी में डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज़ भी कहते हैं। 
    अधोमुख श्वानासन करने के फायदे
    इस आसन को करने से बाजुओं, टांगों और कंधों को बहुत फायदा मिलता है। साथ ही यह आसन मस्तिष्क में रक्त संचार को बढ़ाता है और अनिद्रा, थकान आदि से राहत दिलाता है। यह सिर दर्द का योग भी है। 
    अधोमुख श्वान आसन को करने से फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि होती है। ध्यान रहे, अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है या फिर आंखों की कोशिकाएं कमजोर हैं तो इस आसन को कतई न करें। इसके अलावा कंधे पर चोट लगने पर, दस्त से पीड़ित होने पर या फिर पीठ पर किसी तरह की चोट लगी होने पर भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।

    योग के मानसिक लाभ - Yoga for Mental Health in Hindi

    योग सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थय के लिए भी बेहद फायदेमंद है। नियमित रूप से योग करने पर तनाव और अवसाद जैसी परेशानिया दूर रहती हैं। जानिए, योग के मानसिक लाभ। 
    1- योग की मदद से याददाश्त और एकाग्रता में सुधार होता है।
    2- चिंता और अवसाद को कम करने में मददगार है।
    3- योग मानसिक आराम और भावनात्मक नियंत्रण बनाए रखता है।
    4- आत्म नियंत्रण बनाए रखने में सहायक।
    5- गुस्सा शांत रखने में मददगार।
    6- मानसिक रूप रिश्तों में मधुरता कायम रखने में सहायक।
    7- आपके गुणों से अवगत कराता है।
    8- ज़िंदगी संबंधित सही व बेहतर निर्णय लेने में मददगार  

    जीवन में योग का महत्व - Importance of Yoga in our Life in Hindi

    भगवान श्री कृष्‍ण ने श्रीमद्भागवत गीता योग को परिभाषित करते हुए कहा है, "योग: कर्मसु कौशलम्’’ अर्थात् कर्मों की कुशलता का नाम योग है। हमारे जीवन में योग का बहुत महत्व है। योग का जन्म भारत में हुआ था और आज योग विदेशों तक पहुंच गया है। योग से मिलने वाले लाभों के चलते दिन प्रतिदिन योग का महत्त्व बढ़ता जा रहा है। पहले जहां केवल आयुर्वेदिक रूप से योग को महत्त्व दिया जाता था वही आज योग एक वैज्ञानिक रूप से भी उभरकर सामने आया है। यही वजह है कि डॉक्टर्स भी अपने मरीज़ो को योग के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
    योग के महत्त्व को समझना बेहद जरूरी है। यह न सर्फ आंतरिक बल्कि बाहरी शक्ति भी प्रदान करता है। योग नकारात्मक विचारों से छुटकारा दिलाकर सकारात्मक विचार पैदा करने करने में मदद करता है। यह तनाव और चिंता को खत्म करने के लिए एक रामबाण इलाज है। कहना गलत नहीं होगा कि आज के समय में योग जीवन जीने का एक तरीका बन चुका है।

    योग के उद्देश्य

    योग का उद्देश्य न सिर्फ शारारिक बल्कि मानसिक उपचार करना भी हैं। योग का उद्देश्य सभी जीवात्म विशेषकर मानवों को पूरी तरह स्वस्थ रखना है, जिससे आत्मा को परमात्मा से मिलाया जा सके। इसका अभ्यास करने की कला किसी भी व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती है। साथ ही बुरी आदतों से छुटकारा भी दिलाती है।

    योग से हानि - Side effects of Yoga in Hindi

    जिस तरह हर अच्छी चीज़ में थोड़ी बुराइयां होती हैं, उसी तरह अगर योग के लाभ हैं तो योग से हानि भी है। यह बात सही है कि योग करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है लेकिन अगर योग का अभ्यास आवश्यकता से अधिक, या फिर कहें की शरीर के लचीलेपन के विरूद्ध ज्यादा जोर दिया जाए तो शरीर की मांसपेशियां खिंच जाती हैं, जिससे शरीर के उस हिस्से में दर्द शुरू हो जाता है। जानिए और क्या-क्या है, योग से हानि।
    1- अति या फिर आदत हर चीज़ की बुरी होती है। योग की भी। एक बार योग करने की आदत पड़ जाए तो योग करे बिना अच्छा नहीं लगता। इसका परिणाम यह होता है कि जिस दिन योग ना करें, फ्रेश महसूस नहीं होता, शरीर में दिनभर आलस छाया रहता है और कहीं मन भी नहीं लगता है। 
    2- .योग करने से अगर शरीर के किसी हिस्से में दर्द की शिकायत होती है तो उसे तुरंत बंद कर दें। साथ ही डाॅक्टर से परामर्श लेना न भूलें। समय रहते अगर इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता तो शरीर का वह हिस्सा लकवाग्रस्त होने की आशंका बनी रहती है।
    3- योग हमेशा अच्छी गाइडेंस में ही करें क्योंकि योग करते समय चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। योग के दौरान लगने वाली चोटो में गर्दन , घुटने और कंधे की चोट शामिल हैं।