Tips For Pregnant Working Women In Hindi - वर्किंग प्रेगनेंट महिला के लिए टिप्स, Working out While Pregnant in Hindi, प्रेगनेंसी टिप्स, Pregnancy Diet Plan in Hindi, Exercise for Pregnant Women in Hindi | POPxo

प्रेगनेंसी के दौरान हर कामकाजी महिला को पता होनी चाहिए ध्यान में रखने वाली ये बातें - Tips For Pregnant Working Women In Hindi

प्रेगनेंसी के दौरान हर कामकाजी महिला को पता होनी चाहिए ध्यान में रखने वाली ये बातें - Tips For Pregnant Working Women In Hindi

प्रेगनेंसी हर महिला के लिए वह खास दौर है, जिसे वह बेफ्रिक होकर खुशी- खुशी जीना चाहती है। आने वाले नन्हे मेहमान के लिए उसके साथ उसका परिवार भी उतना ही उत्साहित होता है। ऐसे में हर किसी की नजर उस भावी मां पर ही बनी रहती है कि कहीं वो कोई ऐसी गलती या नासमझी न कर बैठे, जिससे होने वाले बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव पड़े। वहीं प्रेगनेंसी में ऑफिस जाने वाली कई महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि प्रेगनेंसी के दौरान काम करने से प्रेगनेंट महिला के साथ- साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की जान को 5 गुना ज्यादा खतरा होने की आशंका रहती है। लेकिन अगर आप काम के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखेंगे तो इस समस्या से बच सकते हैं।


प्रेगनेंट महिला के लिए डाइट टिप्स - Diet for Pregnant Women in Hindi


प्रेगनेंट महिला के लिए एक्सरसाइज टिप्स - Exercise For Pregnant Women in Hindi


प्रेगनेंट महिलाओं के लिए खास जरूरी टिप्स - Pregnancy Tips Women in Hindi


प्रेगनेंट वर्किंग विमेन द्वारा पूछे जाने वाले सवाल और जवाब - FAQ's


यहां हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं एक्सपर्ट द्वारा दिए गए कुछ टिप्स, जिन्हें फॉलो करके आप अपना प्रेगनेंसी पीरियड ऑफिस में भी बड़े आराम से एंजॉय कर सकती हैं। तो आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान कामकाजी महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए


वर्किंग प्रेगनेंट महिला के लिए डाइट टिप्स - Diet for Pregnant Working Women in Hindi


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भूलकर भी स्किप न करें ब्रेकफास्ट (Don't Skip Breakfast)


ऑफिस जाने की जल्दबाजी में ज्यादातर वर्किंग महिलाएं ब्रेकफास्ट इग्नोर कर देती हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान आपकी यह लापरवाही समस्या पैदा कर सकती है। ब्रेकफास्ट को दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान इसका महत्व और भी कई गुना बढ़ जाता है। नाश्ता न करने से आपके बच्चे पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसीलिए सुबह का नाश्ता भूलकर भी स्किप न करें। ध्यान रखें कि ब्रेकफास्ट में तरल पदार्थ जैसे कि जूस, शेक आदि लेने से बचना चाहिए। इससे जी मिचलाना और मतली आने जैसी समस्या हो सकती है।


पानी पिएं और खुद को रखें हाइड्रेट


प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को पर्याप्त पानी पीना जरूरी है और कामकाजी महिलाओं को खासतौर पर इस बात का ख्याल रखना चाहिए। प्रेगनेंसी में कम पानी पीना खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल प्रगेनेंसी के दौरान आपके शरीर में हो रहे बदलावों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक पानी पीने की आवश्यकता पड़ती है। यह आपको डिहाइड्रेशन से बचाता है।


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ऐसा होना चाहिए आपका डाइट चार्ट (Diet Chart)


ऑफिस और घर की भागदौड़ के बीच ज्यादा समय न मिल पाने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के पोषण के लिए एक्सट्रा केयर बहुत जरूरी है। इसलिए यहां हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं एक्सपर्ट द्वारा सुझाया गया डाइट चार्ट -


घर में ऐसा करें ब्रेकफास्ट


सुबह उठकर सबसे पहले ग्रीन टी पिएं ताकि दिनभर ताजगी बनी रहे। अंडे, दूध और हरी सब्जियों जैसे हेल्दी नाश्ते का सेवन करें। आप चपाती या फिर ओट्स भी कहा सकती हैं।


ऑफिस में ऐसा हो लंच


दोपहर के खाने में उन चीजों का सेवन करें, जिनमें भरपूर मिनरल्स और विटामिन्स हो। इससे आपको और होने वाले बच्चे को किसी भी तरह के पोषण की कमी नहीं होगी। दिन के खाने में दाल, रोटी, सब्जी, चावल और साथ में सलाद लें। भरपेट खाना खाएं।


ऐसा होना चाहिए आपका डिनर


रात के भोजन में हल्का खाएं लेकिन इतना भी हल्का न हो, जिससे आप भूखे रह जाएं। रात में मसालेदार और भारी भोजन करने से बचें। रात में सोते समय दूध पीना बिल्कुल भी न भूलें।


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भूखे न रहें


अगर आपको प्रेगनेंसी के दौरान भूख कम लगती हो या फिर कुछ खाने का मन न होता हो तो किसी अच्छे डायटीशियन से परमार्श लें। इस दौरान खाने से समझौता करना सही नहीं है। आपको और आपके होने वाले बच्चे को सही मात्रा में सही पोषण मिलना बहुत जरूरी है।


जंक फूड को कहें न - Avoid Junk Food


ऑफिस में ज्यादा समय रहने के दौरान आपको भूख लगना स्वाभाविक है, ऐसे में ज्यादातर प्रेगनेंट महिलाएं भूख लगने पर जंक और पैकेट फूड या फिर अनहेल्दी चीजें खाने लगती हैं। ऐसे भोजन में कार्बोहाइड्रेट/वसा तो भरपूर होता है लेकिन पोषक पदार्थों की कमी होती है। एक नये शोध में पाया गया है कि गर्भावस्था के दौरान चिप्स, नूडल्स और बर्गर जैसे जंक फूड का सेवन होने वाले बच्चे के लिए उसी तरह घातक हो सकता है, जैसा कि धूम्रपान। इसीलिए जंक फूड को नजरअंदाज करें।


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वर्किंग प्रेगनेंट महिला के लिए एक्सरसाइज टिप्स - Exercise For Pregnant Working Women in Hindi


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प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर कामकाजी महिलाएं एक्सरसाइज के लिए समय नहीं निकाल पाती हैं। नतीजा होता है कि उनका स्वभाव आलसी होने लगता है और डिलीवरी के बाद वे मोटापे का शिकार हो जाती हैं। अगर इन सब दुष्परिणामों से बचना है तो प्रेगनेंसी के दौरान ऑफिस हो या फिर घर, खुद को फिट रखना ही पड़ेगा। तो आइए जानते हैं कि प्रेगनेंट वर्किंग महिलाएं किस तरह की कसरतें कर सकती हैं -


बॉडी स्ट्रेचिंग (Body Stretching)


प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचिंग करना काफी फायदेमंद साबित होता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि आप घर में ही स्ट्रेचिंग करें, आप चाहें तो इसे ऑफिस में भी कर सकती हैं। स्ट्रेचिंग से मांसपेशियां लचीली होती हैं, जिससे डिलीवरी के समय फायदा रहता है। इसके लिए ऑफिस चेयर पर बैठे- बैठे या फिर किसी शांत जगह पर कमर सीधी कर, अपने हाथों को ऊपर की ओर ले जाते हुए सांस अंदर की ओर खींचें। अब हाथों को नीचे करते हुए धीरे- धीरे सांस बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को एक दिन में कम से कम 6 से 7 बार दोहराएं।


ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Breathing Exercises)


प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर महिलाओं को थकान और घबराहट महसूस होती है। इसके लिए आप ऑफिस में अपनी जगह बैठे- बैठे ही गर्दन सीधी करके नाक से सांस अंदर भरें और 3 से 5 सेकेंड तक होल्ड करके रखें और फिर मुंह के जरिए सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को दिन में 3 से 4 घंटे के अंतराल पर 8 से 10 बार दोहराएं।


पैरों की स्ट्रेचिंग - Feet Stretching


काम के दौरान ज्यादा देर तक पैर लटकाकर बैठने से पैरों के पंजों में सूजन आ जाती है। इसके लिए दोनों पैरों को एक- एक कर के जमीन से थोड़ा ऊपर उठाकर कुछ देर तक होल्ड करें और पंजे से सर्कल बनाएं, फिर नीचे रख लें। ऐसा करने से पैरों में सूजन नहीं होगी।


कीगल एक्सरसाइज


इस एक्सरसाइज को करने से पेल्विक फ्लोर मसल्स मजबूत होते हैं। एक्सपर्ट की मानें तो कीगल एक्सरसाइज से प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और डिलीवरी के बाद यूरिन कंट्रोल करने में मदद मिलती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आप घर में लेट कर या फिर ऑफिस में कुर्सी पर बैठ कर अपनी वैजाइनल, यूरेथ्रल और एनल मसल्स को इस तरह सिकोड़ें जैसे कि यूरिन रोकते हुए करते हैं। इस पोजिशन में 5 सेकेंड तक बने रहें, फिर धीरे- धीरे नॉर्मल पोजिशन में वापस आयें। पूरे दिन में 2 से 3 बार इस प्रक्रिया को 10 बार दोहराएं।


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वर्किंग प्रेगनेंट महिलाओं के लिए कुछ खास जरूरी टिप्स - Pregnancy Tips Working Women in Hindi


प्रेगनेंसी के समय कामकाजी महिलाओं को ऑफिस में कई तरह के उतार- चढ़ावों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि आप हर उन छोटी सी छोटी बातों का ख्याल रखें, जिनसे आपको आगे कोई परेशानी न झेलनी पड़े। आइए जानते हैं वर्किंग प्रेगनेंट महिलाओं के लिए कुछ खास जरूरी टिप्स के बारे में -


तनाव मुक्त रहें - Live Stress Free


ऑफिस में प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला को जिस सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है, वो है स्ट्रेस यानि कि तनाव। ऑफिस की पॉलिटिक्स, काम का दबाव और आगे बढ़ने की होड़ के चलते दिमाग में कई निगेटिव ख्याल आने लगते हैं जोकि स्ट्रेस का रूप ले लेते हैं। बेहतर रहेगा कि इस दौरान आप सिर्फ अपने होने वाले बच्चे और खुद पर ध्यान दें, खुश रहें और फालतू की बातों से दूर रहें।


छोटे- छोटे ब्रेक हैं जरूरी


प्रेगनेंसी के दौरान लगातार ऑफिस की कुर्सी पर 8 से 9 घंटे मत बैठें। ऐसा करने से आपके बॉडी पोश्चर और पीठ में दर्द की शिकायत बढ़ सकती है। काम के बीच- बीच में थोड़ा ब्रेक जरूरी है। पानी पीने के लिए उठें या फिर कॉरिडोर में फ्रेंड्स के साथ गॉसिप करते हुए थोड़ा टहलें।


भागदौड़ करने से बचें


प्रेगनेंसी के दौरान ऑफिस में आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आप ऐसा कोई काम न करें, जिसमें भागदौड़ ज्यादा हो। ऐसा करने से आपको कॉम्प्लीकेशंस भी हो सकते हैं। धीमे- धीमे चलें और बार- बार सीढ़ी चढ़ने- उतरने से बचें।


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आरामदायक कपड़े पहने


प्रेगनेंसी के दौरान टाइट कपड़े इग्नोर करने चाहिए। अपने कपड़ों को इस समय ज्यादा प्राथमिकता दें। ऑफिस के दौरान ऐसे कपड़े पहनें, जो आरामदायक भी हों और पेट पर ज्यादा टाइट भी न हों। ढीले कपड़े पहनने से सांस लेने में दिक्कत नहीं होती है और स्ट्रेस भी नहीं होता।


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हील्स को कहें टाटा


प्रेगनेंसी के दौरान आरामदायक फ्लैट फुटवियर ही चुनें। हाई हील्स पहनने के कारण होने वाले बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। ये प्रेगनेंट महिला के पोश्चर को भी प्रभावित करता है, खासतौर पर डिलीवरी के बाद हिप ज्यादा निकलते की आशंका बढ़ जाती है। अच्छा रहेगा कि प्रेगनेंसी के पूर महीनों में हाई हील्स न पहनें।


रेडिएशन से बनाएं दूरी


प्रेगनेंसी में कोशिश करें कि उन चीजों से दूर रहें, जिनसे रेडिएशन का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। सोते समय मोबाइल को खुद से दूर रखें, गोद में लैपटॉप लेकर काम न करें और ऑफिस में सर्वर रूम के आस- पास जाने की कोशिश भी न करें।


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बैठते समय पैरों को नीचे से सपोर्ट दें


ऑफिस में कुर्सी पर बैठकर काम करते समय पैरों को लटकाकर न रखें। अपनी टेबल के नीचे स्टूल या लेग सपोर्ट रखवा लें। जब भी कुर्सी पर बैठें तो अपने पैरों को इनके ऊपर ही रखें। इससे पैरों में सूजन और एड़ियों में दर्द नहीं होता है।


अंतिम महीनों में अवकाश लें


वैसे तो ज्यादातर प्रेगनेंट महिलाएं डिलीवरी होने के कुछ दिन पहले तक ऑफिस आती हैं लेकिन अगर आपको प्रेगनेंसी के अंतिम महीनों में ऑफिस आना असुविधाजनक लग रहा है तो पहले ही मैटरनिटी लीव ले लें। इस दौरान किसी भी तरह का कोई रिस्क न लें।


सुविधाजनक रास्ते से ही ट्रैवल करें


आप डिलीवरी के 3 महीने बाद से ट्रैवल कर सकती हैं। डॉक्टर भी 3 से 6 महीने के बीच का समय सफर की दृष्टि से सुरक्षित मानते हैं। अगर आपके घर और ऑफिस की दूरी ज्यादा है तो अपने साथ पानी जरूर रखें, जिससे कि शरीर में पानी की कमी न होने पाए। साथ में ऐसा रास्ता चुनें, जिसकी सड़क सही बनी हो। ध्यान रहे कि आप ऊबड़- खाबड़ रास्तों से ट्रैवल न करें।


जरूरी कामों की बनाएं एक सूची


एक प्रेगनेंट वर्किंग महिला के लिए घर और ऑफिस, दोनों संभालना काफी मुश्किल होता है और ऐसे में अपनी हेल्थ और होने वाले बच्चे की देखभाल भी जरूरी होती है। तो अपने सभी जरूरी कामों की एक सूची तैयार कर लें, जैसे कि डॉक्टर को कब दिखाना है, इंजेक्शन, दवाई, ऑफिस टास्क और साथ में घर के कामों को भी अन्य सदस्यों के साथ बांट लें। इससे आपके सभी काम तय समय में बिना किसी परेशानी के आराम से पूरे हो जायेंगे।


प्रेगनेंट वर्किंग विमेन द्वारा पूछे जाने वाले आम सवाल और उनके जवाब - FAQ's


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प्रेगनेंसी के दौरान ऑफिस जाना सही है क्या ?


बहुत सी वर्किंग विमेन हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान ऑफिस जाती हैं। इससे न तो उनके बच्चे पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है और न ही उनकी सेहत पर। लेकिन यह सब कुछ निर्भर करता है आपकी रिपोर्ट्स और डॉक्टर की सलाह पर। अगर आप हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दौर से गुजर रही हैं तो शायद आपके लिए रोजाना ऑफिस जाना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके लिए बेहिचक अपनी डॉक्टर से परामार्श लें, ताकि आपको किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।


अगर किसी प्रेगनेंट वर्किंग वुमन को ऑफिस में कोई दिक्कत है तो उसकी शिकायत कैसे करें?


अगर किसी गर्भवती महिला कर्मचारी के साथ ऑफिस वाले गलत व्यवहार करते हैं तो आप ऑफिस मैनेजमेंट या फिर श्रम विभाग से शिकायत करें। प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी दफ्तर महिला को किसी भी काम या ट्रैवल के लिए जबर्दस्ती फोर्स नहीं कर सकता है और न ही निष्कासित।


मैटरनिटी लीव बिल क्या है ?


यह बिल प्रेगनेंट वर्किंग महिलाओं के लिए है। केंद्र सरकार ने मार्च 2017 में कामकाजी महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव बिल 2016 को लोकसभा व राज्यसभा दोनों में पास कर दिया है। इस बिल के मुताबिक, अब मैटरनिटी लीव को 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया गया है। यह अवकाश पहले दो बच्चों के लिए ही मिलेगा। वहीं तीसरे या उसके बाद के बच्चों को लिए हर कंपनी को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव देनी होगी। अगर कोई कंपनी ऐसा करने से मना करती है तो उसके खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान भी है।


प्रेगनेंट होने के कितने हफ्तों के बाद से ऑफिस जाना बंद कर देना चाहिए ?


ज्यादातर केस में देखा गया है कि प्रेगनेंट महिलाएं डिलीवरी होने के 1 हफ्ते पहले तक ऑफिस जाती हैं। अगर आपका डॉक्टर इजाजत देता है तो आप भी बेशक ऐसा कर सकती हैं। बहुत सी महिलाएं 8वां महीना लगते ही ऑफिस से मैटेरनिटी लीव ले लेती हैं। यह सबकुछ पूरी तरह से आपकी और आपके बच्चे की हेल्थ रिपोर्ट्स पर निर्भर करता है।


क्या प्रेगनेंसी के दौरान वर्किंग महिलाओं का स्ट्रेस ज्यादा बढ़ जाता है?


यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी सहनशक्ति और लाइफस्टाइल कैसी है। अगर आप घर और ऑफिस, दोनों में ही खुश रहकर सारे काम करती हैं तो आपको स्ट्रेस की शिकायत नहीं होनी चाहिए। दूसरी बात सहनशक्ति इसलिए कि लगभग ज्यादातर कंपनी में प्रेगनेंट कर्मचारी को अन्य कर्मचारियों की तुलना में फ्यूचर सक्सेस के मौके कम मिलते हैं। उनका टीम लीड यह नहीं चाहता कि प्रेगनेंसी के दौरान उसे कोई तकलीफ हो या फिर उसपर काम का प्रेशर ज्यादा पड़े। लेकिन अधिकतर कामकाजी महिलाओं को ऐसा लगता है कि प्रेगनेंट होने की वजह से उनकी नौकरी को खतरा है या फिर उन्हें आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिल रहे हैं, जिसकी वजह से उनका स्ट्रेस लेवल और भी ज्यादा बढ़ जाता है।


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