प्रेगनेंसी के दौरान दर्द को दूर करने के टिप्स - How to Deal with pain during pregnancy

प्रेगनेंसी के दौरान दर्द को दूर करने के टिप्स - How to Deal with pain during pregnancy

महिलाओं के जीवन में गर्भावस्था सबसे अहम वक्त होता है, जब वे एक नयी जिंदगी को आकार दे रही होती हैं। इस क्रम में नौ महीनों में उन्हें कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता है। इस दौरान उन्हें कई तरह के दर्द का भी सामना करना पड़ता है। शरीर के लगभग हर अंग में अलग तरह का दर्द होता है, जिसे कई बार बर्दाश्त कर पाना भी कठिन होता है। इस दर्द की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि 9 महीने के दौरान यह कभी भी, किसी भी हिस्से में, किसी भी वक्त होने लगता है। जाहिर है कि ऐसे में हर वक्त डॉक्टर के पास जाना संभव नहीं होता। इसलिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि उस दर्द से निजात कैसे पाई जा सकती है। तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होने वाली परेशानी (pregnancy me body pain in hindi) और उससे छुटकारा पाने के उपाय के बारे में।

Table of Contents

    प्रेगनेंसी में गर्दन में दर्द के उपाय - Tips to Rid of Neck Pain During Pregnancy

    गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को गर्दन का दर्द जकड़ लेता है। फिर वे इससे इस कदर परेशान हो जाती हैं कि समझ ही नहीं पाती हैं कि इससे राहत कैसे पाई जाए? गर्दन में दर्द की बड़ी वजह यह भी होती है कि पेट बाहर निकलने के कारण शरीर का संतुलन बनाने के लिए शरीर का ऊपरी भाग पीछे चला जाता है, जिससे गर्दन में दर्द की समस्या शुरू हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर्स कभी भी दर्द निवारक दवाएं लेने के लिए नहीं कहते हैं। वे यही सलाह देते हैं कि उसे बर्दाश्त किया जाये। हालांकि, कुछ घरेलू उपायों से इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

    शरीर की मालिश

    हालांकि डॉक्टर्स यही सलाह देते हैं कि शरीर के सभी हिस्सों में ज्यादा प्रेशर देकर मालिश नहीं करवानी चाहिए। ऐसे में हल्के हाथों से शरीर, खासतौर से गर्दन के पास वाले हिस्से में, मालिश करवाई जा सकती है। वहीं इसके अलावा गर्दन में अगर ज्यादा दर्द होता है तो गर्म पानी से नहा कर अच्छे से, हल्के हाथों से मसाज करायें। ऐसा करने से दर्द से आराम मिलेगा।

    सही तकिये का इस्तेमाल

    गर्दन में होने वाले दर्द का बड़ा कारण सही तरीके से नहीं सोना या गलत तरीके से तकिये का इस्तेमाल करना भी होता है। कोशिश करें कि गले को तकिये पर सीधा रख कर ही सोयें। इससे आपको अच्छी नींद तो आयेगी ही, पीठ और गर्दन के दर्द से छुटकारा भी मिलेगा। कुछ लोग रिक्लाइनर का भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि अपने गले के दर्द को हमेशा के लिए दूर कर सकें। यही नहीं, कुछ लोग इन दिनों प्रेगनेंसी पिलो का भी इस्तेमाल करते हैं, जो कि काफी हल्का और आरामदायक होता है।

    नीचे की तरफ देखना हानिकारक

    प्रेगनेंसी के दौरान गर्दन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर्स की भी सलाह होती है कि गर्भवती महिलाएं लगातार नीचे की तरफ न देखें । इससे उनकी पीठ और गर्दन में दर्द की समस्या आ सकती है। ऐसे में यही सलाह दी जाती है कि अगर आप लैपटॉप पर लगातार काम कर रही है तो आपको इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आपके लैपटॉप की स्क्रीन आपकी आंखों के लेवल में रहें, ताकि आपको ज्यादा देर तक गले को झुका कर रखने की नौबत न आये।

    सही मुद्रा जरूरी

    प्रेगनेंट महिलाओं को अपनी मुद्राओं पर भी खास ध्यान देने की जरूरत होती है। इसे नजरअंदाज किया जाना सही नहीं है। शुरू में यह बात छोटी सी लगती है लेकिन बाद में परेशानी का सबब बन जाती है। जैसे- जैसे पेट का आकार बढ़ता है, वैसे ही गर्भस्थ महिला के शरीर की मुद्राएं बदलने लगती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी में भी परेशानी आने लगती है और इसका असर सीधे उनकी गर्दन पर पड़ता है।

    वर्कआउट जो हो आसान

    गर्भवती महिलाओं को कभी भी यह राय नहीं दी जाती है कि वे कठिन वर्कआउट करें। उन्हें यही समझाया जाता है कि उन्हें हमेशा आसान से वर्कआउट करने चाहिए, जिससे उन्हें किसी तरह का प्रेशर महसूस न हो। कुछ आसान से वर्कआउट कर गर्दन के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। जैसे, सबसे पहले अपने सिर को बायीं तरफ घुमाएं, जब तक खिंचाव न महसूस होने लगे। इसे 15 सेकेंड तक करते रहें। फिर ऐसे ही दायीं तरफ सिर को घुमाएं, जब तक खिंचाव न लगे। इसे 15  सेकेंड  से अधिक करने की जरूरत नहीं है। फिर वापस पहली मुद्रा में आ जायें।

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    प्रेगनेंसी में पीठ दर्द के उपाय

    प्रेगनेंसी के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी पीठ में ही होती है (back pain during pregnancy in hindi) । आये दिन इसमें दर्द उठता है और कई बार दर्द असहनीय हो जाता है। गर्भावस्था में कमर दर्द होने की सबसे बड़ी वजह यह होती है कि शरीर का संतुलन पूरी तरह से पीठ पर होता है और फिर इस दौरान लगातार खड़े होने में भी परेशानी होती है। ऐसे में डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सही मुद्रा में सोना सबसे महत्वपूर्ण होता है। सोते वक्त कम से कम एक तरफ से एक घुटने को मोड़ कर सोना चाहिए। सोते समय एक तकिया अपने घुटनों के बीच में और दूसरे तकिये को अपने पेट के नीचे लगा कर सोना चाहिए। प्रेगनेंसी पिलो का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एक खास बात का ख्याल रखना यह भी जरूरी है कि गर्भावस्था में कभी भी दोनों पैरों को सीधा खींच कर मत सोएं। खासतौर से तीसरे महीने के बाद, क्योंकि ऐसा करने से मांसपेशियों में तनाव अधिक हो सकता है।

    सही कपड़ों का चयन

    अमूमन इन बातों पर ध्यान नहीं जाता है लेकिन हकीकत यह है कि इस दौरान पहने जाने वाले कपड़ों का भी खास ख्याल रखना चाहिए। कपड़ों से भी दर्द हो सकता है। इस दौरान हल्के और ढीले- ढाले कपड़े ही पहनने चाहिए। टाइट कपड़े पहनने से बॉडी में ब्लड का सर्कुलेशन कम होने लगता है और फिर यही मासपेशियों में दर्द का कारण भी बनता है। इसलिए डॉक्टर्स राय देते हैं कि इस दौरान आरामदायक कपड़े पहने जाएं।

    अधिक वजन उठाना बंद

    गर्भावस्था के दौरान यह भी दर्द का कारण बनता है कि इस दौरान कई महिलाएं बिना सोचे- समझे वजन उठाने लगती हैं, जबकि इस दौरान अधिक वजन उठाना सही नहीं है। अगर फिर भी आपको कभी वजन उठाने की नौबत  आ जाये तो हमेशा अपने घुटनों पर झुक कर नीचे बैठ कर ही वजन उठाना चाहिए। साथ ही कमर के बजाय अपने घुटनों को झुकाएं और नीचे बैठ कर वजन उठाएं।

    वॉक करें

    इस दौरान पीठ दर्द से निजात पाने के लिए टहलने और थोड़ी स्ट्रेचिंग करने के लिए कहा जाता है। यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि इसे करते वक्त आपके लिगामेंट्स में ज्यादा खिंचाव न हो। घर पर आसान योग से भी मदद मिलेगी।

    हाई हील को कहें टाटा- बाय-बाय

    जी हां, गर्भावस्था में हमेशा यह राय दी जाती है कि कभी भी हाई हील्स न पहनें। दरअसल, हाई हील चप्पल या जूते भी कमर की मांसपेशियों पर असर डालते हैं, जिस कारण दर्द होता है।

    पीठ दर्द से निजात पाने के लिए सही मुद्रा

    गर्भावस्था के दौरान पेट का जो भार होता है, वह ज्यादातर नीचे की ओर होता है। ऐसे में पेट के नीचे होने के कारण मांसपेशियों में दबाव बहुत होता है। ऐसे में सही मुद्रा रखना जरूरी है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि टहलने के साथ-साथ सीधे बैठें और पैरों को खींचने या नीचे की ओर झुकने की कोशिश न करें।

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    पांव में दर्द सहा नहीं जाये तो ऐसा करें

    गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के ऊपरी हिस्से का वजन बढ़ जाता है, जिसकी वजह से प्रेगनेंसी में पैर में दर्द होना आम बात है। इस वजन को हड्डियां सह नहीं पाती हैं और इसकी वजह से हमेशा ही पैरों में दर्द बना रहता है। डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि गर्म पानी में हर रात थोड़ा रोज़ वॉटर डाल कर पैरों को उसमें सेंकना चाहिए। इससे पैर दर्द में काफी आराम मिलता है। इस अवस्था में अगर आप अधिक कार्बोहाइड्रेट ले रही हैं तो इसे कम करें। गर्भावस्था में कई बार शरीर में विटामिन, मिनरल, मैग्नीशियम और पोटैशियम की कमी के कारण भी दर्द होता है। पैरों के दर्द से निजात पाने के लिए कुछ सरल उपाय भी हैं, इस दौरान रात में सोने से पहले कभी भी पानी पीना न भूलें क्योंकि ऐसी अवस्था में शरीर से तरल पदार्थ निकलते हैं। साथ ही टहलना भी बेहद जरूरी है। कभी भी एक अवस्था में बैठे रहने की कोशिश न करें।

    एसिडिटी और उससे निजात

    गर्भावस्था में एसिडिटी की समस्या एक बड़ी समस्या होती है, जिसकी वजह से अक्सर गर्भावस्था में पेट दर्द होता रहता है और जी मचलने लगता है। ऐसे में इससे निजात पाने का सबसे सरल उपाय है (pregnancy me acidity se chutkara pane ke gharelu upay) कि कभी हेवी डिनर न करें और न ही बहुत देर से डिनर करें। फास्ट फूड बिल्कुल न खाएं। मेडिटेशन से भी आराम मिलता है।

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    गर्भावस्था में सिर दर्द के उपाय

    गर्भावस्था के दौरान सिर दर्द होना भी आम बात है। ऐसी अवस्था में डॉक्टर कभी भी पेनकिलर खाने की सलाह नहीं देते हैं। खासतौर से सुबह के वक्त यह तकलीफ सबसे अधिक हो जाती है। इसका कारण यह भी है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को ठीक समय पर और नियमित नींद नहीं आती है। नींद पूरी नहीं होने पर सिर में अक्सर  दर्द बना रहता है। ऐसे में सही नींद पूरी करना और स्ट्रेस फ्री रहना बेहद जरूरी है। सिर दर्द दूर करने के लिए योगासन भी कर सकते हैं। 

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    ब्रेस्ट पेन और उससे निजात

    यह बात सभी जानते हैं कि इस दौरान कई तरह के हॉर्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकी वजह से ब्रेस्ट बड़े और कड़े हो जाते हैं और उनमें अक्सर दर्द होता है। ऐसे में कोशिश करें कि थोड़ा चलें- फिरें। हॉर्मोनल बदलाव के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

    गर्भावस्था में पेड़ू में दर्द का उपाय

    आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पेड़ू में भी काफी दर्द होता है। इसकी वजह यह है कि गर्भावस्था के दौरान पेट में भारीपन और गैस के कारण आपको पेट के निचले हिस्से में तनाव व खिंचाव महसूस होने लगेगा। कई बार यह दर्द शरीर में पानी की कमी के कारण भी होता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीना बहुत जरूरी है। कई बार महिलाएं ज्यादा स्ट्रेस लेने लगती हैं, जिसकी वजह से भी पेड़ू में दर्द होता है। एक खास बात का ध्यान यह भी जरूरी है कि अगर किसी कारणवश प्लेसेंटा यूटरस से अलग हो जाता है तो आपको पेड़ू में अत्यधिक दर्द होता है। ऐसे में बिना वक्त गंवाये फौरन डॉक्टर से मिलना जरूरी है। कई बार यूरिन इंफेक्शन की वजह से भी पेड़ू में दर्द होता है।

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    प्रेगनेंसी में हिप्स में दर्द और उससे निजात

    कई बार महिलाओं को प्रेगनेंसी में हिप्स में दर्द का भी सामना करना पड़ता है। कुछ महिलाओं को तो पूरे 9 महीने दर्द होता है। इसकी वजह डॉक्टर कई बार बवासीर बताते हैं। दरअसल, इस दौरान अक्सर महिलाएं काफी दवाइयां खाती हैं तो कब्ज की वजह से उन्हें बवासीर की समस्या हो जाती है। कई बार बच्चे के विकास और यूटरस के बढ़ते आकार के कारण भी प्रेशर बनता है और उससे यह समस्या हो जाती है। ऐसे में अगर यह दर्द बढ़ जाये तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही ब्लड की जांच भी करानी चाहिए। डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि बवासीर से बचने के लिए खूब सारा पानी पियें। अधिक देर तक एक जगह खड़े न हों। फाइबर फूड खाएं। सोने के दौरान अपने पेट के नीचे और पैरों के बीच तकिया जरूर रखें। साथ ही पेल्विक को सपोर्ट करने वाली बेल्ट पहनना भी काफी सहायक होगा।

    हड्डियों में दर्द और उससे निजात

    गर्भावस्था के दौरान जहां आपकी मांसपेशियों में दर्द होता है, वहीं कई बार हड्डियों में भी काफी दर्द होता है। यह परेशानी आखिरी दिनों में होती है, खासतौर से घुटने में सबसे अधिक दर्द होता है (pregnancy me ghutno me dard) और उठने- बैठने में भी परेशानी बढ़ती है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप फिजियोथेरेपिस्ट से राय- मशविरा लें। अपने पैरों को कभी भी एक साथ न हिलाएं। दर्द को कम करने के लिए हॉट वाटर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हल्का व्यायाम करें। 

    गर्भवती महिला के लिए बेस्ट एक्सरसाइज

    गर्भावस्था में कई डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर आपको स्विमिंग आती है तो तिमाही में आप स्विमिंग कर सकती हैं। हां, मगर इस बात का ख्याल रखना जरूरी है कि स्विमसूट ज्यादा कसा हुआ न हो और खुद को अधिक न थकाएं । चाहें तो एक इंस्ट्रक्टर रख लें। पूल में अंदर- बाहर करते हुए ध्यान रखें। इस अवस्था में स्विमिंग के कई फायदे होते हैं। इससे खून का संचार बना रहेगा। इससे सहनशीलता और शक्ति भी बनी रहती है। इससे आपका दिल और फेफड़ा, दोनों ही अच्छा काम करते हैं। कैलोरी बर्न करने में भी मदद मिलती है। अच्छी नींद आती है। एक बात का ध्यान रखें कि पानी का तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक न हो। स्विमिंग से आपको कई तरह के दर्द से निजात मिल सकती है।

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    गर्भावस्था में होने वाले दर्द और उपायों से जुड़े सवाल और जवाब - FAQ's

    सवाल : रात को नींद नहीं आती है और काफी जी मचलने लगता है। ऐसे में क्या किया जाना चाहिए? पूरे शरीर में टूटन महसूस होती है

    जवाब: सबसे पहले तो आपको ध्यान देना होगा कि आप किस पोश्चर में सो रहे हैं। साथ ही आपको अपने बिस्तर को साफ रखना बेहद जरूरी है। अच्छी नींद के लिए आप अपने तकिये को भी देखें कि वह कैसा है। उसका सही आकार का होना बेहद जरूरी है। जी मचलने की समस्या इसमें आम होती है। जरूरी है कि यह आप समझें कि आपको क्या नहीं खाना है और क्या, कितनी मात्रा में खाया जाये। रात में पानी पीकर सोने की कोशिश करें।

    सवाल : गर्भावस्था में अगर पैरों में सूजन आये तो क्या किया जाना चाहिए?

    जवाब : सबसे पहले तो आप इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें। जांच के दौरान यह पता करने की कोशिश करें कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। पैरों में दर्द और सूजन की काफी सारी वजहें होती हैं। कई बार वजन अधिक बढ़ने और देर तक खड़े होने के कारण भी यह परेशानी होती है। ऐसे में हर रात दोनों पैरों के बीच एक मुलायम पिलो रखें और साथ ही हर रात को गर्म पानी में पैर डाल कर सिंकाई करें।

    सवाल : प्रेगनेंसी में एसिडिटी की समस्या का निदान क्या होना चाहिए?

    जवाब : अधिक खाने की वजह से कई बार पेट फूल जाता है। यह स्थिति सेहत के लिए खतरनाक होती है। कुछ घरेलू उपाय हैं इसके लिए, जैसे मेथी के दानों का इस्तेमाल  करने से पेट से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं। रात में मेथी के दानों को भिगोकर रख दें और सुबह उसका पानी पी लें। इससे काफी फायदा होगा। समय- समय पर पानी पीना भी बेहद जरूरी है। हल्के- फुल्के व्यायाम करें।

    सवाल : क्या गर्भावस्था में स्विमिंग की जा सकती है?

    जवाब : यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी डॉक्टर क्या सलाह देती हैं। वैसे आमतौर पर अगर आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह के कॉम्प्लीकेशन नहीं हैं तो स्विमिंग करने में कोई परेशानी नहीं है। हर व्यायाम की तरह स्विमिंग के कई फायदे होते हैं। आपका बढ़ा हुआ वजन पानी में महसूस  नहीं होता है। खासकर तीसरी तिमाही के बाद स्विमिंग एक अच्छा व्यायाम है।

    सवाल : गर्भावस्था में लोगों का कहना होता है कि हाई हील्स नहीं पहननी चाहिए। क्या यह बात सही है?

    जवाब : जी हां, गर्भावस्था में हाई हील्स नहीं पहननी चाहिए। इसको पहनने से काफी मुश्किलें आती हैं। आपके कमर, पीठ और पैरों, तीनों चीजों पर असर होता है। हाई हील वाली चप्पलें या जूते भी कमर की मांसपेशियों पर असर डालते हैं और उससे दर्द होता है। सो, जरूरी है कि आप अपनी सेहत के हिसाब से फ्लैट ही पहनें।

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