प्रेग्नेंट होने के लक्षण - Early Pregnancy Symptoms in Hindi, प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण | POPxo

जानिए प्रेग्नेंट होने के लक्षण कौन-कौन से होते हैं - Pregnancy Symptoms in Hindi

जानिए प्रेग्नेंट होने के लक्षण कौन-कौन से होते हैं - Pregnancy Symptoms in Hindi

कहते हैं एक महिला के लिए प्रेग्नेंट होने की खुशी दुनिया की हर खुशी से बढ़कर होती है। गर्भवती होने की सूचना मिलते ही उसके खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। एक महिला के जो कंसीव करने की सोच रही है उसे पीरियड मिस होते ही मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि कहीं वो गर्भवती तो नहीं है? क्योंकि गर्भवती महिला में मां बनने को लेकर बड़ी उत्सुकता होती है। लेकिन कई बार बहुत सी महिलाओं को इस बात को लेकर कई ग़लतफ़हमियाँ होने लगती हैं कि वो प्रेगनेंट हैं। इसलिए अगर आपको लगता है कि आपके शरीर में अचानक कुछ बदलाव आ रहे हैं या प्रेगनेंसी के लक्षण (pregnancy ke lakshan) जैसे दिख रहे हैं तो आप संबंध बनाने के 21 दिनों के अंदर ही अंदर प्रेगनेंसी टेस्ट कर सकते हैं। अगर किसी कारण आप 21 दिनों के अंदर टेस्ट न कर पाएं तो ऐसी स्थिति में गर्भावस्था के संकेतों को जान लेना बेहतर होता है। इस लेख में हम आपको तमाम उन प्रेगनेंसी के लक्षण (pregnancy signs in hindi), गर्भावस्था के सप्ताह के अनुसार लक्षण व शुरूआती गर्भ ठहरने के लक्षण के बारे में विस्तार से बता रह हैं ताकि आपको किसी भी तरह की कोई गलतफहमी न रहें।

Table of Contents

    प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण - Early Pregnancy Symptoms in Hindi

    सामान्य तौर पर पीरियड यानि कि माहवारी न आना संकेत होता है कि आप गर्भ धारण हो चुका है और आप गर्भवती हैं। लेकिन ज्यादातर महिलाओं का या तो अनियमित पीरियड्स के चलते गलतफहमी रहती हैं कि वो प्रेग्नेंट हैं या फिर उन्‍हें इसका तब पता चलता है जब वे 10 हफ्ते या इससे ज्‍यादा समय से प्रेग्‍नेंट होती हैं। लेकिन इस विषय में डॉक्टर्स का कहना है कि संबंध बनाने के दौरान अगर अंडा निषेचित हो जाता है तो यह गर्भाशय से जुड़ जाता है और महिला के शरीर में ह्यूमन कोरियोनिक गॉनाडोट्रोपिन (एचसीजी) हार्मोन बनना शुरू कर देता है। माना जाता है कि ये प्रक्रिया 10-15 दिन बाद होना शुरू होती है। HCG हार्मोन का बनना प्रेगनेंसी के दौरान शुरू हो जाता है लेकिन ये प्रक्रिया प्रेगनेंसी के ग्यारहवें हफ्ते के दौरान रुक भी सकता है। इसीलिए यही वो समय होता है जब महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण (pregnancy ke lakshan) साफ तौर पर दिखने लगते हैं। 

    गर्भावस्था के सप्ताह - Pregnancy Week by Week in Hindi

    बहुत सी महिलाओं को ये पता नहीं चल पता है कि वो वास्तव में प्रेगनेंट है या ये नॉर्मल पीरियड मिस हुआ है। इस अभाव में आप न तो यह जानते हैं कि क्या खाना है, क्या सावधानियां बरतनी है। प्रेग्नेंसी का एहसास हर महिला के लिए सबसे अहम पल माना जाता है। इसकी जांच के लिए बाजार में कई सारी दवाइयों के साथ ही उपकरण भी मौजूद हैं। हालांकि, ये तमाम चीजें गर्भ ठहरने के पहले महीने (गर्भावस्था के सप्ताह) से ही दी जाने लगती हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट होने के लक्षण पहचाने बेहद जरूरी है ताकि आप सही समय पर सही खान-पान व दवाईयां ले सकें। यहां हम आपको मुख्य 1 से 5 सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षणों (pregnancy signs in hindi) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी जानकारी गर्भवती होने वाली हर महिला को होनी चाहिए -

    Pregnancy Week by Week in Hindi

    पहले सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षण

    गर्भावस्था का पहला सप्ताह ज्यादातर महिलाओं को किसी भी तरह के कोई लक्षण महसूस नहीं होते हैं। वहीं आमतौर पर पहले सप्ताह से गर्भवती महिलाएं अंजान ही होती हैं। बता दें कि माहवारी बंद होने को गर्भावस्था का लक्षण माना जाता है और यही पहले सप्ताह की गर्भावस्था का मुख्य लक्षण (प्रेगनेंसी के लक्षण इन फर्स्ट वीक) है। पहले सप्ताह (1 Week of Pregnancy) में महिला के शरीर में बहुत से बदलाव चल रहे होते हैं। इसमें भ्रूण बनने की प्रक्रिया की शुरुआत होती है। जिसकी वजह से जी मचलना, उल्टी आना या फिर थकान महसूस होने जैसे लक्षण आमतौर पर दिखने लगते हैं। इस समय मुंह का स्वाद भी बदल जाता है। किसी भी खाई गई चीज के स्वाद का पता नहीं चलता है, सिर्फ अधिक खट्टी चीजों के स्वाद का ही पता चल पाता है।
    टिप्स - पहले सप्ताह में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता लेकिन फिर भी महिला को अपने खान- पान में सुधार कर लेना चाहिए। महिला को अपनी दिनचर्या सही कर लेनी चाहिए। यानि कि हर चीज समय पर। बासी खाना या फिर पैकेज्ड फूड खाने से बचें।
    2 Week of Pregnancy

    दूसरे सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षण

    गर्भावस्था के दूसरे सप्ताह के दौरान  दूसरे सप्ताह में डिम्ब गर्भाशय से निकलने और निषेचित होने के लिए तैयार होता है। निषेचित डिम्ब को स्वीकार करने के लिए आपका गर्भाशय बड़ा होने लगता है। दो सप्ताह की गर्भावस्था के समय आप समान लक्षणों का अनुभव करेंगी जैसा मासिक धर्म के दौरान करती हैं और अन्य लक्षणों में कुछ यह भी शामिल हो सकते हैं, जैसे स्तन मे दर्द, कमर में हल्का दर्द और थकान होना। प्रेगनेंसी के दूसरे सप्ताह (2 Week of Pregnancy) में गर्भधारण यानी के प्रेगनेंसी के पहले सप्ताह में जो बदलाव शुरू होते है वे बदलाव दूसरे हफ्ते में भी मौजूद रहते हैं। इस समय गर्भवती महिला के ब्रेस्ट में हल्की सूजन आने लगती है जिससे उनके आकार में फर्क नज़र आने लगता है। स्तन मुलायम व संवेदनशील हो जाते हैं।
    टिप्स - अपनी प्रेगनेंसी को कन्फर्म करने लिए आप स्त्री विशेषज्ञ का सहारा ले सकती हैं या फिर किसी मेडिकल स्टोर से होम प्रेगनेंसी किट खरीद सकती हैं और अपनी प्रेगनेंसी कंफर्म कर सकती हैं।
    3 Week of Pregnancy

    तीसरे सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षण

    प्रेगनेंसी के तीसरे सप्ताह (3 Week of Pregnancy) में महिला को दूसरे हफ्ते के मुकाबले अब अपने शरीर में ज्यादा बदलाव दिखाई देने लगते हैं। अब आंतरिक बदलाव के साथ साथ बाहरी बदलाव भी होने लगते है। इन बदलावों और लक्षणों को अक्सर कई बार गर्भवती महिलाएं पहचान नहीं पातीं है। गर्भावस्था के तीसरे हफ्ते में भी सामान्य लक्षण (pregnant hone ke lakshan) ही दिखाई देते हैं। लेकिन खुशखबरी की बात ये है कि तीसरे सप्ताह के दौरान आपका शिशु तेज़ी से द्विगुणित होती जा रहीं सैकड़ों कोशिकाओं के साथ एक छोटी सी गेंद के समान हो जाता है। इस छोटी गेंद, जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहते हैं वो आगे जाकर गर्भनाल के रूप में बदल जाता है। इस सप्ताह में गर्भावस्था के हार्मोन (HCG) का निर्माण शुरू कर देता है। इस समय कई महिलाएं मूड स्विंग और अपने चाल-ढाल में परिवर्तन महसूस करती हैं। साथ ही स्पॉटिंग भी होती है, जिसमें पीरियड की तरह खून नहीं आता बल्कि खून के दाग या धब्बे से दिखाई देते हैं। लेकिन ऐसा सभी महिलाओं के साथ नहीं होता है। 
    टिप्स - इस दौरान डॉक्टर के सपंर्क में रहें और बिना परामर्श के किसी भी तरह का कोई कदम न उठाएं।
    4 Week of Pregnancy

    चौथे सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षण

    गर्भधारण करने के चौथे सप्ताह (4 Week of Pregnancy) से जी मिचलाने की समस्या होने लगती है। ये वो समय होता है जब गर्भाशय में भ्रूण के आरोपण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती है। इस समय पूरी तरह से आप गर्भवती हो चुकी है, आपको थोड़ा काम करने पर ही थकान महसूस होने लगती है आप में चिड़चिड़ापन आने लगता है। चौथे सप्ताह में भ्रूण का आकार कबूतर के अंडे का आकार का होता है। चौथे हफ्ते में फर्टिलाइज्ड अंडा यूटेरस तक पहुंच जाता है और करीब 72 घंटे के बाद यह भूर्ण यूटेरस लाइनिंग में अपने लिए जगह बना लेता है। यूटेरस लाइनिंग की रक्त कोशिकाओं के अंडे को स्पर्श करने पर अंडे का विकास शुरू हो जाता है। प्रेगनेंसी के दूसरे महीने से उल्टी आने के लक्षण बढ़ने लगते हैं, जो 12 से 18 हफ्ते तक चलते हैं। कुछ महिलाओं में तो ये समस्या डिलीवरी होने तक जैसी की तैसी ही बनी रहती है। प्रेगनेसी के दौरान उल्टी होना स्वाभाविक होता है लेकिन अगर यह ज्यादा होने लगे तो शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इस दौरान डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
    टिप्स - बेहतर होगा कि इस समय डॉक्टर से परामर्श जरूर ले लें।
    5 Week of Pregnancy

    पांचवे सप्ताह की गर्भावस्था के लक्षण

    गर्भावस्था के पांचवे सप्ताह की बात करें तो गर्भवती महिला को ये एहसास होने लगता है कि वो प्रेग्नेंट है। उसे अपने शरीर में एक-दो नहीं बल्कि ढेरों बदलाव महसूस होने लगते है। गर्भ ठहरने के पांचवे सप्‍ताह से गर्भावस्‍था के दूसरे महीने की शुरुआत होती है। गर्भावस्था के पांचवें सप्ताह (5 Week of Pregnancy) में भूर्ण एक रेत के कण के बराबर का होता है। इस सप्‍ताह में आते ही प्रेगनेंसी के कुछ लक्षणों (प्रेगनेंसी के लक्षण इन फर्स्ट वीक) से राहत मिल सकती है तो कुछ नए लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं। ये वो समय है जब गर्भाधारण को 1 महीना पूरा हो चुका होता है और महिला को पूरी तरह से महसूस होने लगता है कि वो गर्भवती है। इस समय हार्मोन लेवल तेजी से बढ़ रहा होता है, जिसकी वजह से जी मचलाना, घबराहट होना और उल्टियां करना बेहद आम प्रेगनेंसी के लक्षण होते हैं। डॉक्टर्स की मानें तो यह समय किसी भी महिला के लिए बेहद मुश्किल भरे होते हैं। इसीलिए खाने-पीने से लेकर गर्भवती महिला को हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखना होता है ताकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही आराम से कट जाये। इस समय अपनी खान-पान की आदतों में ज़रूरी सुधार करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेकर प्रेगनेंसी डाइट चार्ट (pregnancy diet chart in hindi) बनाएं। हमेशा सकारात्मक सोचें और खुश रहने की कोशिश करें। 
    टिप्स - अब आप अपने होंने वाले बच्चे के स्वास्थ्य से संबंधित जरूरी आहार का ही सेवन करना शुरू कर दें और अगर आप आप धूम्रपान या शराब आदि का सेवन करती हैं तो इसे बंद कर दें।

    गर्भ ठहरने के लक्षण क्या है? - Pregnant Hone ke Lakshan

    सबसे सामान्य और कारगर तरीका जिससे आपको यह शक होना लाजमी है कि आप गर्भवती हैं वह है पीरियड मिस होना। लेकिन इसके अलावा अन्य लक्षण भी जानने जरूरी है कि आप गर्भवती हैं भी या नहीं। इसके लिए आपको अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे हार्मोनल बदलावों के बारे में जानना होगा। यहां हम आपको गर्भाधारण से जुड़े तमाम ऐसे मुख्य लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिनके दिखने पर आपको तुरंत प्रेगनेंसी टेस्ट कर लेना चाहिए और कंफर्म हो जाना चाहिए कि आप प्रेगनेंट ही हैं। तो आइए जानते हैं कि गर्भ ठहरने के लक्षण क्या-क्या होते हैं -

    Girl has missed her period

    पीरियड का मिस होना

    अगर आपके पीरियड आमतौर पर समय से रहते हैं और इस बार समय पर नहीं आये तो पूरे- पूरे चांस है कि आप प्रेगनेंट हैं। लेकिन अगर आपके पीरियड हमेशा से अनियमित रहते हैं तो फिर प्रेगनेंसी के चांस थोड़े कम हैं। हर महिला को पता होता है कि उसके पीरियड्स महीने के किस तारीख को होंगे। क्योंकि अक्सर पीरियड साइकिल 28 दिन का होता है, 28 या 30 दिन के बाद फिर से पीरियड्स आते हैं। वहीं जब 28-30-40 दिन हो जाते हैं और उसके बाद भी पीरियड्स नहीं आते हैं तो परेशान होना स्वाभाविक है।  

    शरीर का तापमान ज्यादा होना

    गर्भवती होने पर शरीर का तापमान अक्सर सामान्य तापमान से अधिक हो जाता है। जैसे कि इंसान के शरीर का सामान्‍य तापमान लगभग 98.3 फारेनहाइट होता है। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है। ये लगभग 0.5 फारेनहाइट से लेकर 1 फारेनहाइट तब बढ़ सकता है। अगर आपको बीते कई दिनों से लगातार शरीर के तापमान में परिर्वतन नजर आ रहा है तो एक बार प्रेगनेंसी की पुष्टि जरूर कर लें।

    पेट फूलना या दर्द होना

    पीरियड्स नहीं आएं और फिर भी पेट में बार-बार मरोड़ उठ रहा है। ब्लोटिंग यानि कि पेट फूलने जैसी समस्या महसूस होती है। यह फूलापन गर्भाधारण के समय हॉर्मोन परिवर्तन के कारण भी होता है। दरअसल, गर्भावस्था की शुरुआत में शरीर प्रोजेस्टेरॉन की जितनी मात्रा उत्पन्न करता है, वह शरीर की मांसपेशियों को शिथिल कर देता है। इससे पाचन क्रिया की गति धीमी पड़ जाती है और उसका नतीजा पेट फूलना, गैस, डकार आना और बैचेनी जैसी समस्या के साथ सामने आता है। खासतौर पर खाना खाने के बाद।

    उल्टी आना या जी मचलाना

    अगर आप बीते कई दिनों से उल्टी आना या फिर जी मचलाना जैसी समस्या महसूस कर रही हैं तो हो सकता है कि आप प्रेगनेंट हों। क्योंकि सुबह उठते ही उबकाई या उल्टी आना प्रेगनेंट होने का एक अहम लक्षण है। वैसे ये शरीर - शरीर पर निर्भर करता है। बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें प्रेगनेंसी के दौरान  उल्टियां नहीं आती और वहीं कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं जिन्हें गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक उल्टियां आना और जी मचलाने की शिकायत बनी ही रहती है।

    मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन

    गर्भाधारण के दौरान अचानक आपके मूड यानि कि मनोदशा में बदलाव नजर आने लगेगा। कई तरह के इमोशनल उतार- चढ़ाव होने लगते हैं। कभी एकदम गुस्सा आ जाता है तो कभी एकदम हंसी और कभी पल में मन उदास हो उठता है तो कभी पल भर में खुशी का ठिकाना नहीं रहता। दरअसल ऐसा इसलिए होता है कि गर्भावस्था के दौरान खून में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन की मात्रा बढ़ने के कारण शरीर में हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ता है। ये बढ़ा हुआ हार्मोन का स्तर ही आपकी मनोदशा को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान बार-बार चिंता और चिड़चिड़ापन होना तो आम है।

    girl feel pain in her breast

    स्तन में भारीपन व दर्द महसूस होना

    स्तनों में भारीपन, सूजन या फिर दर्द महसूस होना भी प्रेगनेंट होने के लक्षण हैं। जिस तरह से पीरियड के दौरान स्तन संवेदनशील महसूस होते हैं ठीक वैसे ही प्रेगनेंसी के दौरान भी होता है। लेकिन छठे हफ्ते तक स्तन और भी ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। अगर आपको अपने स्तनों की त्वचा में नीली नसें साफ दिखाई दे रही और निप्पल गहरे काले रंग के नजर आ रहे हैं तो ये प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं। क्योंकि गर्भावस्था के हार्मोन स्तनों में रक्त आपूर्ति बढ़ा देते हैं, इसलिए निप्पल के आसपास सनसनाहट सी महसूस हो सकती है।

    कब्ज और सीने में जलन

    गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में हो रहे बदलाव का असर उसकी पाचन क्रिया पर भी पड़ता है जिससे पेट में गैस की शिकायत अधिक होती है। पेट में गैस बनने की समस्या गर्भाधारण के पहले हफ्ते से नौ हफ्ते तक रह सकती है। पाचन क्रिया में बदलाव आने से सीने मे जलन होना भी आम है, ऐसे में आप अचानक से छाती में जलन महसूस भी कर सकते हैं। कब्ज और सीने में जलन प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण भी हैं।

     girl having craving

    क्रेविंग होना

    क्रेविंग होना यानि कि किसी खास चीज को खाने की लालसा भी गर्भवती होने का एक प्रमुख लक्षण है। गर्भवती महिला में किसी विशेष चीज के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है और हर वक्त वही खाने का दिल करने लगता है। इस दौरान देखा गया है कि महिलाएं अपने डेली रुटीन में ज्यादातर उन्हीं चीजों का सेवन करती हैं जो खासतौर पर उन्हें सबसे ज्यादा पसंद होती हैं। शुगर की क्रेविंग भी बहुत सी महिलाओं को हो जाती है। लेकिन प्रेगनेंसी का पता लगते ही महिला को प्रेगनेंसी डाइट चार्ट (pregnancy diet chart in hindi) जरूर बनवा लेना चाहिए।

    थकान व कमजोरी महसूस होना 

    थकान होना तो आम बात है लेकिन बहुत ज्यादा स्तर पर थकान व कमजोरी महसूस होना प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। क्योंकि गर्भावस्था के शुरुआती दौर से ही महिला का शरीर शिशु को सहारा देने के लिए खुद को तैयार करता है। इस दौरान थकान महसूस होना स्वाभाविक है सकता है।

    व्हाइट डिस्चार्ज 

    महिलाओं में अत्यधिक व्‍हाइट डिस्चार्ज एक साधारण बात है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान होनेवाले हार्मोनल बदलावों के कारण यह डिस्चार्ज काफी अधिक भी हो सकता है। भले ही आपको यह अच्छा न लगे लेकिन इसका एक अनजाना-सा फायदा भी है। जी हां, यही डिस्चार्ज आपको मूत्र विकारों से बचाता है। ऐसा प्रेगनेंसी के दौरान काफी बढ़ जाता है।

    सूंघने की शक्ति में वृद्धि

    अगर आपको ये महसूस हो रहा है कि आपकी नाक कुछ ज्यादा ही तेजी से काम कर रही हैं। यानि कि दूर- दूर की महक भी आसानी से सूंघ लेती हैं तो मामला कुछ और ही है। जी हां, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में सूंघने की शक्ति तेजी विकसित होने लगती है। इस समय हार्मोन बदलाव की वजह से सूंघने की शक्ति बढ़ जाती है।

    बार -बार पेशाब आने की फीलिंग

    प्रेगनेंसी में पेशाब का बार- बार आना एक अहम लक्षण है। ये दिक्कत प्रेगनेंसी के छठे सप्ताह से और भी ज्यादा बढ़ जाती है। दरअसल होता ये है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर में बन रहे हार्मोंस में बदलाव की वजह से किडनी में ब्लड सर्कुलेशन तेज होने लगता है और मूत्राशय में पेशाब जल्दी भर जाता है, जिस कारण पेशाब बार- बार होने की समस्या आती है। जैसे जैसे बच्चे का विकास होगा ये परेशानी और भी बढ़ने लगती है।

    सिर दर्द का बने रहना

    जब दिमाग में मौजूद रक्त शिरायें खून की ज्यादा होने की वजह से फैलता है, तब सिर दर्द या फिर माइग्रेन की समस्या जन्म लेती है। ये गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में से एक प्रमुख लक्षण है। ये दर्द कभी हल्का तो कभी बहुत ज्यादा तेज होता है। पर धीरे-धीरे ये खुद ही ठीक हो जाता है या फिर आप सिर दर्द के लिए योग भी कर सकते हैं। 

    प्रेगनेंसी जैसे लक्षण दिखने के अन्य कारण

    अगर किसी महिला के पीरियड्स सामान्य दिनों की तरह नियमित रूप से न आएं, तो इस स्थिति में दिखने वाले लक्षणों को प्रेगनेंसी मान लेना सही नहीं है। जी हां, जब तक प्रेगनेंसी टेस्ट के माध्यम से ये न पता चल जाएं कि आप गर्भवती है तब तक खुद प्रेगनेंट समझना न समझी है। क्योंकि आजकल की बदलते लाइफस्टाइल में लोगों की खाने की आदतों में इतना बदलाव आ चुका है कि पीरियड्स का कुछ समय के लिए बंद हो जाना या अनियमित पीरियड्स की समस्या होना आज आम हो गया है। लेकिन इसके लिए घबराने की जरूरत नहीं है। प्रेगनेंसी के अलावा पीरियड्स में देरी होने के कुछ सामान्य कारण भी हो सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि कौन से हैं वो कारण, जिसमें गर्भवती न होने के बाद भी प्रेग्नेंट होने के लक्षण जैसे महसूस होते हैं -

    PCOS & PCOD

    पीसीओडी या पीसीओएस

    पीरियड्स लेट आने का एक कारण पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) या पीसीओडी (PCOD) यानि पॉलीसिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर भी हो सकता है। बदलते लाइफस्टाइल के चलते महिलाओं में होने वाली एक तरह की हॉर्मोनल गड़बड़ी है। यह समस्या होने पर चेहरे व छाती पर बाल उगने लगते हैं और वजन भी बढ़ने लगता है। आजकल कम उम्र में ही महिलाएं इस बीमारी की शिकार हो रही हैं। इसके लिए जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह लेना बेहद जरूरी है, नहीं तो इस समस्या के चलते हेयर फॉल, शुगर, बच्चा ना होना और दिल के रोग भी हो सकते हैं।

    वजन बढ़ना

    अगर आपका वजन सामान्य से ज्यादा है या कुछ दिनों से आप शरीर में भारीपन और खुद को फैटी फील कर रहे हैं तो आप मोटापे की गिरफ्त में हैं। और पीरियड्स लेट होने का एक कारण वजन का बढ़ना भी है। दरअसल वजन बढ़ने के कारण शरीर के हॉर्मोन्स सही तरीके से काम नहीं कर पाते जिसकी वजह से पीरियड्स ना आना या लेट होने की समस्या हो जाती है।

    थायरॉइड और क्रोनिक समस्या

    अगर किसी महिला को थायरॉइड की समस्या है तब भी पीरियड्स मिस हो सकते हैं। ऐसे में थायरॉइड ग्रंथि का ज्यादा काम करना या कम हार्मोन्स बनाना महिला के शरीर पर विपरीत प्रभाव डालता है। वहीं दूसरी तरफ कोई भी क्रोनिक समस्या हो जैसे लंबे समय तक लीवर या किडनी की समस्या, तब भी पीरियड्स देरी से आते हैं ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है।

    हार्मोनल असंतुलन

    बदलती लाइफस्टाइल से सबसे ज्यादा बदलाव शरीर के हार्मोन्स में आता है जिस वजह से महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनमें से एक अनिमियत पीरियड्स का होनी भी है। दरअसल शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का असंतुलन होने पर भी पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। इससे कई बार 2 महीने या इससे भी ज्यादा समय के बाद पीरियड्स आते हैं।

    गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन

    गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से या एक साल से ज्यादा समय ये गोलियां लेने की वजह से भी पीरियड्स तीन से चार महीने तक लेट हो जाते हैं या एकदम हल्के भी हो सकते हैं। लेकिन ऐसे में ये समस्या ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहती है।

    तनाव

    अचानक से डेली रुटीन में बदलाव आने या फिर किसी बात को लेकर मेंटल स्ट्रेस की वजह से भी पीरियड साइकिल गड़बड़ा जाता है। वर्किंग वुमन के साथ ये समस्या ज्यादा दिखाई देती है। 
    पीरियड्स लेट आना या मिस होना सामान्य नहीं है अगर आपको भी ऐसी ही समस्या हो तो इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप एक हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और अच्छी डाइट, एक्सरसाइज, योग द्वारा अपना वजन कंट्रोल में रखें। अगर फिर भी समस्या का समाधान न हो तो डॉक्टर से परामर्श लें।

    प्रेगनेंसी की जानकारी या प्रेगनेंसी टेस्ट किट - Pregnancy ki Jankari

    प्रेगनेंसी हर महिला के लिए वह खास दौर है, जिसे वह बेफ्रिक होकर खुशी- खुशी जीना चाहती है। उन नौ महीनों ( 9 month pregnancy in hindi) के दौरान उसके शरीर में कई बदलाव आते हैं। बहुत सी महिलाएं हड़बड़ी में आकर जल्दी टेस्ट कर लेती हैं और बदले में मिलता है उन्हें विपरीत नतीजा। दरअसल, महिला के यूरिन में मौजूद एक हॉर्मोन HCG की मौजूदगी से पता चलता है कि महिला गर्भवती है या नहीं। यह हॉर्मोन शरीर में तभी पैदा होता है, जब निषेचित अंडाणु गर्भाशय की दीवार से खुद को जोड़ लेता है। इसीलिए पीरियड्स मिस होने के एक हफ्ते बाद ही टेस्ट करना चाहिए। अगर किसी महिला के पीरियड मिस हुए हैं और उसे उपरोक्त दिये गये गर्भ ठहरने के लक्षण (pregnancy signs in hindi) अपने शरीर में महसूस हो रहे हैं तो एक बार इस बात पर मुहर लागने के लिए आपको प्रेगनेंसी टेस्ट जरूर करवा लेना चाहिए। तो आइए जानते प्रेगनेंसी टेस्ट किट का प्रयोग कैसे करें और प्रेगनेंसी टेस्ट करने के घरेलू तरीके कौन-कौन से हैं -

    Pregnancy Test Kit

    प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें

    होम प्रेगनेंसी टेस्ट किट से आप घर पर ही यूरिन सैंपल की सहायता से ये पता कर सकती हैं कि आप प्रेगनेंट हैं या नहीं? प्रेगनेंसी टेस्ट किट का सही तरीके से इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है नहीं तो हड़बड़ी में रिजल्ट गड़बड़ आ सकता है। इसके लिए सबसे पहले तो ध्यान रखें कि आप जिस कंटेनर में यूरिन ले रहे हैं, वह साफ और सूखा हो। टेस्ट किट में दिये गये ड्रॉपर की मदद से स्ट्रिप बॉक्स पर यूरिन की तीन बूंदें डालें और उसके बाद 5 से 10 मिनट तक इंतजार करें। इस दौरान ध्यान रखें कि टेस्ट स्ट्रिप के बीच वाले हिस्से को गलती से भी न छुएं। अगर रिजल्ट पॉजिटिव है तो किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाएं और जांच कराएं। डॉक्टर महिला के पेट और योनि की जांच करती है और बच्चेदानी की ऊंचाई देखती है। गर्भधारण करने के बाद बच्चेदानी का बाहरी भाग मुलायम हो जाता है। इन सभी बातों को देखकर डॉक्टर महिला मां बनने का संकेत देती है।

    प्रेगनेंसी टेस्ट किट रिजल्ट्स फ़ैंट लाइन

    जब आपको प्रेगनेंसी टेस्ट किट रिजल्ट्स में फ़ैंट लाइन (हल्की गुलाबी रेखा) दिखाई दे तो इसका मतलब हो सकता है कि आप गर्भवती हैं। दरअसल, प्रेगनेंसी टेस्ट किट में हल्की गुलाबी लाइन या फ़ैंट लाइन तब दिखाई देती है जब गर्भावस्था हार्मोन (HCG) का स्तर कम होता है। जैसे-जैसे गर्भावस्था आगे बढ़ती है हार्मोन का स्तर भी बढ़ता जाता है। इसीलिए प्रेग्नेंसी में हल्की गुलाबी रेखा या लाइन दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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    प्रेगनेंसी चेक करने के घरेलू उपाय - Pregnancy Test at Home in Hindi

    आजकल तो मार्केट में आसानी से प्रेगनेंसी टेस्ट किट मिल जाती है, जिससे आप मिनटों में जान सकती हैं कि आप गर्भवती है या फिर नहीं। वहीं पहले जब ऐसी सुविधाएं नहीं तो घरेलू चीजों से ही प्रेग्नेंसी टेस्ट कर लिया करते थे। तो आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी कंफर्म करने के पुराने घरेलू तरीके -

    Checking Pregnancy with soap

    साबुन से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें
    जी हां, कई लोगों का कहना है कि साबुन से भी आप घर बैठे प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं। इसके लिए एक बर्तन में अपने पेशाब ले और उसमें साबुन मिलाएं। अगर साबुन में बुलबुले उठ रहे हैं या फिर झाग दिख रहा है तो इसका मतलब है कि आप गर्भवती हैं।
    नमक से प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें
    वहीं पहले के समय लोग नमक से गर्भवती होने की जांच करते थे और आज भी जहां मेडिकल सेवाएं उपलब्ध नहीं है वहां नमक से पता लगाया जाता है कि महिला गर्भवती है कि नहीं। नमक से प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए सबसे पहले एक साफ डिब्बे में यूरिन का सैंपल लें। फिर इसमें तीन चौधाई सफेद नमक मिलाएं। थोड़ा इंतजार करें और नमक में होने वाले रिएक्शन को देंखे। दरअसल, प्रेग्नेंट होने पर यूरीन में मौजूद HCG हार्मोन नमक के साथ मिलकर झाग छोड़ता है। अगर आप प्रेगनेंट नहीं है तो नमक पर कोई असर नहीं दिखाई देगा।
    नींबू से प्रेगनेंसी टेस्ट
    एक प्लास्टिक के कटोरी में अपना पेशाब लें और उसमें नींबू का रस डाल दें। अगर कुछ देर बाद नींबू के रस का रंग बदलने लगता है तो इसका मतलब है कि टेस्ट पॉजीटिव है और आप मां बनने वाली हैं।
    बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट
    पहले के समय में बेकिंग सोडा (khane ka soda) से भी प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता था। बेकिंग सोडा से प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए, एक कटोरे में दो चम्मच बेकिंग सोडा लें और इसमें यूरीन सैंपल मिलाएं। अगर इसमें आपको बुलबुले दिखाई देते हैं तो आप गर्भवती हो सकती हैं।
    लेकिन प्राकृतिक गर्भावस्था टेस्ट को 100% सही नहीं माना जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी टेस्ट किट या फिर डॉक्टर की सलाह लेकर ही गर्भावस्था की जांच कराएं।

    गर्भावस्था के लक्षणों के बारे में पूछे जाने वाले सवाल- FAQ’s

    Pregnancy ke Lakshan

    प्रेगनेंसी कितने दिन में पता चलती है

    प्रेगनेंसी के लक्षण महसूस होने का कोई सही समय नहीं होता है। सभी लोगों के शरीर की संरचना और सिस्टम अलग होता है। ये हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है। अगर आपको प्रेगनेंसी के लक्षण (प्रेगनेंसी के लक्षण इन फर्स्ट वीक) गर्भधारण के एक दिन बाद भी दिख सकते हैं या 1-2 महीनों के बाद भी दिख सकते हैं। अगर आपको दो महीने तक लक्षण नहीं दिखते हैं तो इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं होती है। इस दौरान भ्रूण को विकसित होने के लिए एक महीना और चाहिए होता है। और हो सकता है कि इसके बाद ही प्रेग्नेंट होने के लक्षण (pregnant hone ke lakshan) दिखने की संभावना हो।

    प्रेगनेंसी किट से कैसे पता करेंगे?

    आज घर बैठे एक साधारण सी किट से अपने प्रेगनेंट (गर्भवती) होने का पता लगाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि टेस्‍ट करने की सही जानकारी मालूम हो। अगर आप प्रेग्नेंसी टेस्ट किट में 1 पिंक लाइन दिखती है तो इसका मतलब है कि प्रेग्नेंट नहीं हैं। वहीं अगर आप 2 पिंक लाइन नजर आती है तो आप गर्भवती हैं। इसके अलावा अगर दूसरी लाइन हल्की गुलाबी भी है तो आप खुद को प्रेग्नेंट मान सकती हैं।

    माहावारी से पहले की स्थिति के क्या लक्षण हैं?

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रेग्नेंसी और माहावारी दोनों के शुरुआती लक्षण (pregnancy ke lakshan) लगभग सामान होते हैं। पीरियड शुरू होने से 2-3 दिन पहले ही स्ट्रेस, चिड़चिड़ापन, कमर और पेडू में दर्द और स्तनों में तनाव महसूस होने लगता है।

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