सोचिये आपके पेरेंट्स एक अनजान लड़के से आपकी मीटिंग करा दें और कहें कि कुछ ही देर में अपनी पूरी जिंदगी का फैसला कर लो, तो आपको कैसा फील होगा। सुनने में थोड़ा अजीब है न! लेकिन आज भी अरेंज मैरिज कुछ इसी तरह से होती हैं। जिस लड़के से आप कभी नहीं मिली उससे मिलकर कुछ ही मिनटों में शादी जैसा बड़ा फैसला करना पड़ता है। ऐसे में जब आप लड़के के सामने बैठी होती हैं तो बहुत सारी बातें आपके मन में चल रही होती हैं।
यहां कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताया गया है जो एक लड़की के मन में रिश्ता मीटिंग के समय चल रही होती हैं। उम्मीद है कि आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा…।
उफ्फ… मैंने साड़ी क्यों पहन रखी है ?
मैं साड़ी के अलावा कुछ और भी पहन सकती थी… सूट भी तो पहन सकती थी… बिलकुल बहनजी लग रही हूं मैं इस साड़ी में। क्या मुझे इस लड़के के सामने एक आदर्श बहू दिखना जरूरी है।
उम्मीद है कोई ये नहीं पूछेगा कि, “खाना बनाना आता है या नहीं”
क्या मुझे इनको यह बता देना चाहिए कि मुझे खाना बनाना नहीं आता है और मैं किसी के घर की कुक बनने के लिए शादी नहीं कर रही हूं। ये काफी पुराने विचारों वाला और काफी डराने वाला सवाल है।
किसी से पहली बार मिलने बैठा देना कितना अजीब है
मुझे तैयार करके एक अजनबी लड़के के सामने बैठा दिया गया है। ये कितना अजीब है… क्या उसके लिए भी ये उतना ही अजीब है जितना मेरे लिए ?
मुझे इससे पहला सवाल क्या करना चाहिए
समझ नहीं आ रहा कि कहां से बात शुरू की जाए, ये भी तो कुछ नहीं पूछ रहा। मैं ही पहले सवाल कर लूं क्या… लेकिन क्या पूछूं?
इसे देखकर लगता है ये रोज जिम जाता होगा
इसकी मसल्स तो काफी अच्छी हैं। लगता है रोज जिम जाता है। मुझे नहीं लग रहा है कि मैं इसके साथ पूरी जिंदगी बिताने वाली हूं।
ये मुझे देखकर क्या सोच रहा होगा ?
उफ्फ… ये तो मुझे ही देखे जा रहा है। क्या चल रहा होगा इसके मन में ? मेरे बारे में ये क्या सोच रहा होगा ? मैं इसे अच्छी तो लगी न… कही ये मुझे रिजेक्ट न कर दे।
क्या मुझे इसको स्नैक्स के लिए पूछना चाहिए
सब हमारे सामने स्नैक्स तो रख कर चले गए, पर इस वक्त मुझे ये खाने चाहिए या नहीं। क्या मुझे खा लेने चाहिए या फिर पहले इसको खाने के लिए पूछना चाहिए ?
क्या मुझे इसके साथ अपना करियर प्लान डिस्कस करना चाहिए
मैं शादी के बाद हाउस वाइफ बनकर नहीं रहना चाहती। क्या मुझे इसे ये बता देना चाहिए कि मैं शादी के बाद भी अपनी नौकरी नहीं छोडूंगी ?
अगर मैं ना कह दूं तो…
मैं एक मीटिंग में जिंदगी भर का फैसला बिलकुल नहीं कर सकती। क्या मुझे इस रिश्ते के लिए मना कर देना चाहिए या फिर बात आगे बढ़ाने के लिए और मीटिंग्स करनी चाहिए ?
क्या मैं पहली मीटिंग के बाद ‘हां’ बोलने वाली हूं ?
ये सच नहीं हो सकता। ये तो सिर्फ हिंदी फिल्मों में होता है। पहली मीटिंग में ही हमारा रिश्ता कैसे पक्का हो सकता है ?
क्या अब मैं मुस्कुराना बंद कर सकती हूं ?
उफ्फ्फ… इतनी देर से जबरदस्ती मुस्कुराते- मुस्कुराते मेरे गालों में दर्द होने लगा है। भगवान के लिए क्या अब मैं मुस्कुराना बंद कर सकती हूं।
अगर इसने मुझे रिजेक्ट कर दिया तो…
कहीं ये लड़का मुझे रिजेक्ट न कर दे.. अगर ऐसा हुआ तो मैं अपनी फ्रेंड्स को क्या मुंह दिखाउंगी। ओह गॉड! अब मुझे एक और लड़के से नहीं मिलना प्लीज… ।
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