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जानिए बाल श्रम क्या है और बाल मजदूरी रोकने के उपाय- How to Stop Child Labour in Hindi

Deepali PorwalDeepali Porwal  |  Apr 27, 2020
How to Stop Child Labour in Hindi, Bal Majduri Rokne ke Upay in Hindi

अपने घरों में, बाज़ारों में, चाय की दुकानों पर या ढाबे पर आपने अक्सर छोटे बच्चों को बाल मजदूरी करते हुए देखा होगा। ये बच्चे स्कूल न जाकर छोटी उम्र से ही काम-काज के बारे में सोचने लगते हैं। कई बार तो 14 वर्ष की आयु से छोटे बच्चे ईंटें ढोते व अन्य खतरनाक और बड़े काम करते हुए भी नज़र आ जाते हैं। देश-दुनिया कितनी भी तरक्की कर लें पर समाज का एक तबका आज भी अपने कई अधिकारों से वंचित है। बाल श्रम (bal shram) को खत्म करने के लिए (How to Stop Child Labour in Hindi) कई कानून तो बनाए गए मगर उनका पालन भी ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा है। भारत में भी हर क्षेत्र में बाल मजदूर देखे जा सकते हैं। बाल श्रम को रोकने और लोगों को जागरूक करने के लिए 12 जून को एंटी चाइल्ड लेबर डे (child rights in hindi) मनाया जाता है।

बाल श्रम क्या है – About Child Labour in Hindi

14 वर्ष की आयु तक वाले बच्चों से करवाया गया कोई भी ऐसा काम, जो उनके राइट टु एजुकेशन यानि स्कूल जाने के अधिकार (child rights in hindi) से उन्हें वंचित रखता हो, बाल श्रम कहलाता है। यह बच्चों का बचपन छीनकर उन्हें उम्र से पहले बड़ा और ज़िम्मेदार बना देता है, जिसकी वजह से उनका उचित मानसिक और शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। आईएलओ (इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन-अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन) के मुताबिक, 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों से करवाया जाने वाला कोई भी ऐसा काम, जो उनके शारीरिक, मानसिक या सामाजिक विकास में बाधा डालता हो या उनके लिए खतरनाक साबित हो, बाल श्रम की श्रेणी में आता है। दुनिया में अब भी 15 करोड़ बाल मजदूर हैं।

ऐसा नहीं है कि छोटी उम्र में किया गया हर काम बाल श्रम ही कहलाए पर अगर काम की वजह से बच्चा स्कूल नहीं जा पा रहा है तो उसे बाल श्रम (bal shram) या बाल मजदूरी (bal majduri) ही माना जाएगा। घर के छोटे-मोटे कामों में मदद करना या घर के कामों के बदले पॉकेट मनी पाना बाल श्रम नहीं है। बाल श्रम को खत्म करने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 12 जून को वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है।

How to Stop Child Labour in Hindi

How to Stop Child Labour in Hindi

बाल श्रम के कारण – Causes of Child Labour in Hindi

आमतौर पर सभ्य समाज का कोई भी जागरूक अभिभावक अपने छोटे-छोटे बच्चों से मजदूरी नहीं करवाना चाहेगा। कई बार उन्हें मजबूरी में ऐसा करवाना पड़ जाता है तो कई बार अपनी नासमझी व दूसरों के बहकावे में आकर। बाल मजदूरी (bal majduri) करवाने के पीछे कई मुख्य कारण हैं। बाल श्रम को रोकने के लिए बाल श्रम की समझना ज़रूरी है। जानिए बाल श्रम के कारण।
1. बाल श्रम का मुख्य कारण गरीबी है। कई पेरेंट्स गरीबी के चलते अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते हैं और पैसा कमाने के लालच में उनसे बाल मजदूरी करवाने लगते हैं।
2. अशिक्षा और जागरूकता के अभाव में एक खास तबके को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाती है, जिसकी वजह से वे अपने साथ ही अपने बच्चों का भी शोषण करवाने लगते हैं।
3. बच्चों से दुकानों व अन्य जगहों पर काम करवाने को सस्ता श्रम कहा जाता है यानि कि उनसे कम पैसों में मजदूरी करवाई जा सकती है। दुकानदार, ढाबे वाले व ठेकेदार माता-पिता को इस सस्ते श्रम के लिए मना लेते हैं और इससे बाल मजदूरी को बढ़ावा मिलता है।
4. कई लोगों की नशे की लत का ख़ामियाज़ा भी उनके छोटे बच्चों को भरना पड़ता है। घर चलाने व आमदनी बढ़ाने के लिए वे बच्चों को फील्ड पर भेजने लगते हैं।
5. कई परिवारों में नशे की लत या अपंगता या अन्य कारणों से घर में कोई कमाने वाला नहीं होता है। ऐसे परिवार भी कमाई के लिए अपने बच्चों पर ही निर्भर होते हैं।

भारत में बाल श्रम – Child Labour in India in Hindi

बाल श्रम कानून की शुरुआत हो जाने के बावजूद देश के कई हिस्सों में बाल मजदूरी बेहद आम है। 2017 में यूनिसेफ (यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस एमर्जेंसी फंड) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 12 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी तरह से चाइल्ड लेबर में लिप्त हैं। 5 से 14 वर्ष के लगभग 12 मिलियन बच्चे बीड़ी, चूड़ी, पटाखे बनाने और कंस्ट्रक्शन जैसे खतरनाक काम करते हैं। बच्चों को उनके अधिकार दिलाने के लिए ही आईएलओ (इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन) ने 2002 में 12 जून को वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर (विश्व बाल श्रम निषेध दिवस) की शुरुआत की थी।

Child Labour in India in Hindi

Child Labour in India in Hindi

इससे वे बाल श्रम के वैश्विक स्तर को समझकर उसे खत्म करने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इसके लिए संगठन हर साल एक थीम निश्चित करता है और 2019 की थीम थी – ‘बच्चों को फील्ड पर नहीं बल्कि सपनों पर काम करना चाहिए’। इस पहल के साथ यूनाइटेड नेशंस 2025 तक बाल श्रम के किसी भी प्रकार को खत्म कर देना चाहता है। भारतीय एनजीओ चाहते हैं कि चाइल्ड लेबर पर लगे बैन को 18 साल तक के बच्चों पर भी मान्य कर देना चाहिए क्योंकि सेंसस के मुताबिक, देश के 74 प्रतिशत बाल श्रमिक 12-16 वर्ष की आयु के बीच हैं।

बाल श्रम कानून – Children’s Rights in Hindi

भारत के संविधान में बाल श्रम (bal shram) के विरुद्ध कई प्रावधान बनाए गए हैं। इनके माध्यम से भारत में बाल श्रम को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। जानिए बाल श्रम कानून (child labour laws) के बारे में।
1. फैक्ट्री कानून 1948 – यह कानून 14 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों के नियोजन को निषिद्ध करता है। भारत में बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप 1996 में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से आया, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों को खतरनाक प्रक्रियाओं और पेशों में कार्यरत बच्चों की पहचान करने, उन्हें काम से हटाने और गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

Children's Rights in Hindi

Children’s Rights in Hindi

2. बाल श्रम (निषेध व नियमनन) कानून 1986 – यह कानून 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी तरह के अवैध पेशों और 57 प्रक्रियाओं में, जिन्हें बच्चों की ज़िंदगी और स्वास्थ्य के लिए अहितकर माना गया है, नियोजन को निशिद्ध करार करता है। इन पेशों और प्रक्रियाओं का कानून की अनुसूची में विशेष उल्लेख है।
इन कानूनों के तहत (child labour act) बच्चों को ढाबे, होटल, मोटल, स्पा सेंटर्स और रेस्त्रां तक में काम करने की अनुमति नहीं है।

बाल मजदूरी रोकने के उपाय – How to Stop Child Labour in Hindi

बाल मजदूरी को रोकने के लिए (Bal Majduri Rokne ke Upay in Hindi) सरकार से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं व अन्य ज़िम्मेदार नागरिकों तक, सभी को आगे आना होगा। यह हम सभी की नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि देश को बाल श्रम से मुक्त कर दिया जाए, जिससे कि बच्चों को उनके बचपने को खुलकर जीने की आज़ादी मिल सके। जानिए बाल मजदूरी रोकने के उपाय।
1. बाल मजदूरी को रोकने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (shram vibhag) अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है। उनकी तरफ से 2229 ऐसी जगहों को पकड़ा जा चुका है, जहां 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे घरों या हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
2. राज्य सरकारों द्वारा 38,818 जांचें करने के बाद 211 प्रॉसिक्यूशंस फाइल की गई थीं।
3. भारत के 20 राज्यों की 250 जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रम प्रोजेक्ट की शुरुआत की जा चुकी है। इस प्रोजेक्ट के तहत बाल श्रम करने से बचाए गए बच्चों को शिक्षा, पोषण, वोकेशनल ट्रेनिंग, स्वास्थ्य सेवा और स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की जाती है।
4. अपने घरों में व आस-पास बाल श्रम को बढ़ावा देने से बचें। अगर कहीं बच्चे काम करते हुए मिलें तो उनके एंप्लॉयर को समझाने की कोशिश करें। उनके न समझने पर पुलिस, श्रम विभाग (shram vibhag) या एनजीओ को खबर दें।
5. अपने स्तर पर गरीब बच्चों व उनके माता-पिता को सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीम्स के बारे में बताकर उन्हें समझाने की कोशिश करें।

बालश्रम को लेकर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब

क्या बच्चों के भी अधिकार होते हैं?

जी बिलकुल, बच्चों को शिक्षा का मूलभूत अधिकार प्राप्त है। इसके तहत देश का हर बच्चा मुफ्त में शिक्षा ग्रहण कर सकता है।

क्या आम आदमी भी बाल मजदूरी को हटाने में अपना योगदान दे सकता है?

हां, आप चाहें तो बाल मजदूरी को खत्म करने में अपना योगदान दे सकते हैं। अपने घर के रोज़मर्रा के कार्यों के लिए किसी बच्चे को नियुक्त न करें और अगर आस-पास कोई बाल श्रमिक नज़र आए तो पुलिस या एनजीओ को सूचित करें।

क्या बाल मजदूरी करवाने वाले की शिकायत दर्ज की जा सकती है?

जी हां, अगर आपको किसी घर, होटल, दुकान, ढाबा, कंस्ट्रक्शन साइट आदि में 14 वर्ष की आयु तक का कोई बच्चा काम करता नज़र आए तो आप नियोक्ता की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

किस तरह के काम को बाल श्रम माना जाता है?

14 वर्ष की आयु तक के बच्चों द्वारा किया जाने वाला कोई भी ऐसा काम, जिसकी वजह से वे स्कूल न जा पा रहे हों या जो उनके शारीरिक व मानसिक विकास में बाधा डालता हो, उसे बाल श्रम माना जाता है।

मजदूर दिवस पर कुछ कोट्स और नारे

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