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इस बार होली पर आयुर्वेद के अनुसार करें अपनी त्वचा, आंखों और बालों की सुरक्षा

Richa KulshresthaRicha Kulshrestha  |  Mar 20, 2019
इस बार होली पर आयुर्वेद के अनुसार करें अपनी त्वचा, आंखों और बालों की सुरक्षा

दुनिया में किसी भी देश में वसंत उतने उत्साह से नहीं मनाया जाता है जितने उत्साह से भारत में मनाया जाता है। होली (holi) से लेकर वसंत उत्सव और फिर बिहू तक पूरे देश में वसंत का जश्न बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस उत्साह और मौज मस्ती के साथ- साथ यह भी बहुत जरूरी है कि जब आप रंगों के त्योहार होली (holi) का आनंद लेते हैं, तो उससे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि होली के रंगों से आपकी त्वचा समेत आप भी पूरी तरह से सुरक्षित रहें। होली (holi) के रंगों से त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए यहां जीवा आयुर्वेद के निदेशक डॉ. प्रताप चौहान आपको कुछ आसान से आयुर्वेदिक उपचार (ayurvedic treatment) बता रहे हैं :-

1. होली से एक दिन पहले, पूरे शरीर पर सरसों या नारियल का तेल (coconut oil) जरूर लगाएं। चेहरे के अलावा हाथों और पैरों पर भी अच्छी तरह से तेल लगाएं क्योंकि ये ऐसे क्षेत्र हैं जहां रंग जरूर लगता है। नारियल तेल आपकी त्वचा को रंगों से पूरी तरह सुरक्षित रखेगा (ayurvedic skin care) और आप आसानी से इन रंगों को अपने शरीर से हटा सकेंगे।

2. अपने बालों में भी पर्याप्त मात्रा में नारियल (coconut oil) का तेल लगाएं। यह एक सुरक्षा एजेंट के रूप में कार्य करता है और रंगों को बालों की जड़ों में गहराई तक घुसने से रोकता है।

3.  अगर आप नारियल (coconut oil) का तेल नहीं लगाना चाहते तो इसके विकल्प के रूप में आप बॉडी लोशन का उपयोग भी कर सकते हैं। यह रंग खेलने के बाद रंगों को साफ करने में भी बहुत प्रभावी साबित होता है, और इससे गहरे रंग भी साफ हो जाते हैं।

होली पर पहले से ही इस तरह करें त्वचा और बालों की खास देखभाल

आंखों और मुंह की सुरक्षा के उपाय

अगर होली (holi) खेलते वक्त किसी तरह से सूखा रंग आपकी आंखों या मुंह में चला जाए तो तुरंत इसे पानी से धो लें। होली के दिन अपनी आंखों और मुंह को थोड़ी-थोड़ी देर के बाद पानी से धोते रहें। होली खेलने के बाद कुल्ला करें और अपनी आंखों में गुलाब जल (rose water) की कुछ बूंदें जरूर डालें और लेट जाएं। इससे आपकी आंखों को आराम मिलेगा।

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त्वचा की एलर्जी के उपचार

आज बाजार में उपलब्ध अधिकांश रंगों में केमिकल मिला होता है और इसीलिये यह आपकी स्किन के लिए सुरक्षित नहीं होते हैं। लेकिन यह बात आप अपने सभी मिलने वालों को नहीं समझा सकते और साथ ही साथ साल में एक दिन मनाये जाने वाले इस त्योहार होली न खेलकर इस मौज मस्ती को छोड़ भी नहीं सकते, इसलिए कोशिश करें कि आप ऑर्गेनिक रंगों से होली (organic holi colours) खेलें और अपने मिलने वालों से भी कहें कि वो ऑर्गेनिक रंगों का ही इस्तेमाल करें। (organic holi colours) इसके बावजूद अगर आपकी त्वचा पर होली के रंगों की वजह से चकत्ते हो जाते हैं, तो इन सरल उपायों (ayurvedic treatment) का पालन करें:-

1 यदि रंग को रगड़ कर लगाया गया है तो इसे हटाने के लिए साबुन के बजाय फेसवॉश का उपयोग करें। रंग को साफ करते समय हल्के हाथों से ही त्वचा को रगड़ें (ayurvedic treatment) क्योंकि इससे आपकी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।

2.  होली खेलने के लिए बाहर जाने से पहले करीब एक घंटे पहले कुछ मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगो दें। होली (holi) खेलने के बाद, प्रभावित हिस्सों पर मुल्तानी मिट्टी लगाएं। मुल्तानी मिट्टी से त्वचा को ठंडक मिलती है (ayurvedic treatment) और त्वचा पर एलर्जी के कारण हुए चकत्ते गायब हो जाते हैं।

3. एलर्जी को दूर करने के लिए आप यह घरेलू उपाय (ayurvedic treatment) भी आजमा सकती हैं। गुलाब जल में बेसन, खाद्य तेल और दूध की मलाई मिला कर गाढ़ा पेस्ट बना लें और उसे अपने चेहरे, हाथ और पैरों पर लगाएं। पेस्ट सूख जाने पर इसे रगड़ कर हटा दें। यह एलर्जी से होने वाले चकत्तों को ठीक करने का अच्छा तरीका है।

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जिद्दी रंगों को हटाने के आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय

कुछ रंगों को एसिड, शीशा जैसे हानिकारक केमिकल्स से तैयार किया जाता है जिन्हें हटाना खासा मुश्किकल होता है। यहां हम आपको कुछ घरेलू उपचार (ayurvedic treatment) बता रहे हैं जो इन कठोर रसायनों को हटाने में मदद करेंगे।

1. आधा कटोरी दही में दो चम्मच नींबू का रस मिला लें। रंग वाले हिस्सों पर इसे लगाएं और गुनगुने पानी से स्नान करें।

2. उबटन होली के रंगों को हटाने के लिए एक और अच्छा उपाय है।

3. त्वचा को ज्यादा रगड़ने से बचें, क्योंकि सिंथेटिक रंग (synthetic color) के संपर्क में आने पर हमारी त्वचा संवेदनशील हो जाती है। रगड़ने से इसकी स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।

4. रंग खेलने और स्नान करने के बाद धूप में बाहर जाने से बचें।

(डॉ. प्रताप चौहान से बातचीत पर आधारित। जीवा आयुर्वेद के निदेशक डॉ. प्रताप चौहान लेखक, सार्वजनिक वक्ता, टीवी व्यक्तित्व और आयुर्वेदाचार्य भी हैं।)

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