रोजा खोलने की दुआ और रोजा रखने की दुआ - Roze ki Niyat ki Dua, Roza Kholne ki Dua

रोजा रखने की दुआ, रोजा खोलने की दुआ - Roze ki Niyat ki Dua, Roza Rakhne ki Dua

“रमजान आया है, रमजान आया है ... रहमतों-बरकतों का महीना आया है, लूट लो नेकियां जितनी लूट सकते हो, पूरे एक साल बाद रमजान करीम का यह महीना आया है।” हर साल मुसलमान माहे रमजान का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं और ऐसा हो भी क्यों न, यह महीना होता ही इतना खास है! कहते हैं कि रमजान के महीने में अल्लाह की रहमत बरसती है। बुराई पर अच्छाई हावी हो जाती है। इस महीने मुसलमान अपनी चाहतों पर नकेल कस सिर्फ अल्लाह की इबादत करते हैं। यह महीना सब्र का महीना भी माना जाता है। इस बात का ज़िक्र इस्लाम की धार्मिक किताब कुरआन में किया गया है। रमजान करीम (ramadan kareem) यानी रमजान के पवित्र महीने में दुनिया का हर मुसलमान भूखा-प्यासा रहकर 30 दिन तक रोजे रखता है। आम दिनों में इंसान का पूरा ध्यान खाने-पीने व शरीर की बाकी ज़रूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है और इसी की पाकीज़गी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाए हैं।

Table of Contents

    रोजा रखने की नीयत - Roza Rakhne ki Niyat

    नीयत का मतलब होता है इरादा करना। इस्लाम में नीयत की बहुत अहमियत है क्योंकि नीयत के बिना न नमाज़ कबूल होती है और न ही रोजा। रात में सोने से पहले यह नीयत कर लेनी चाहिए कि मैं कल रोजा रखूंगी। सुबह सहरी में उठने की नीयत करके सोना भी रोजे की नीयत में शुमार है। अगर रात में नीयत करना भूल गए तो सहरी के वक्त भी रोजे की नीयत कर सकते हैं। लेकिन अगर आपने रोजा रखने से पहले इरादा नहीं किया तो रोजा रखने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि बिना नीयत के दिन भर भूखे-प्यासे रहने से भी रोजा कबूल नहीं होता।

    रोजा रखने की दुआ - Roza Rakhne ki Dua

    इस्लाम में हर काम करने से पहले दुआ पढ़ी जाती है, फिर वह खाने से पहले की दुआ हो या घर से कहीं बाहर जाने की। इसी तरह रमजान की दुआ यानी रमजान में रोजा रखने से पहले भी दुआ (roze ki dua) पढ़ना ज़रूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि बिना दुआ पढ़े रोजा कबूल नहीं होता। सहरी खाने के बाद यानी सुबह की नमाज से कम से कम 10 मिनट पहले यह दुआ (Ramzan ki Dua) पढ़ लेनी चाहिए।

    Roza Rakhne ki Dua

    हिंदी में रोज़ा रखने की दुआ

    ‘'व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान’’

    इंग्लिश में रोजा रखने की दुआ

    "Wa bisawmi ghadin nawaitu min shahri ramadan"

    अरबी में रोजा रखने की दुआ

    وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ.

    हिंदी में दुआ का मतलब

    मैंने रमजान के कल के रोजे की नीयत की।

    रोजा खोलने की नीयत - Roza Kholne ki Niyat

    रोजा रखने की नीयत की तरह ही रोजा खोलने की नीयत करना भी ज़रूरी है। नीयत के लिए लफ्ज़ों का होना ज़रूरी नहीं है। हालांकि लफ्ज़ों में नीयत करना बेहतर होता है। अगर दोपहर में नीयत कर ली जाए कि इफ्तार में मेरा रोजा पूरा हो जाएगा तो इसका मतलब यह बिलकुल नहीं होता कि आप उसी वक्त से खाना शुरू कर दें। ऐसा करने से आपका रोजा टूट जाएगा और रोजे का कोई सवाब भी नहीं मिलेगा। कुछ लोगों का मानना है कि हर दिन रोजा रखने व खोलने की नीयत ज़रूरी नहीं है अलबत्ता वे रोजाना रोजा रखने और खोलने का इरादा करने के बजाय रमजान की शुरुआत में पूरे महीने रोजे रखने की नीयत कर लेते हैं। वैसे हर दिन नीयत करना बेहतर माना जाता है।

    रोजा खोलने की दुआ - Roza Kholne ki Dua

    जिस तरह रमजान में रोजा रखने की दुआ पढ़ना ज़रूरी है, उसी तरह शाम में इफ्तार करने से पहले रोजा खोलने की दुआ (roza kholne ki dua in hindi) पढ़ी जाती है। जब इफ्तार का समय हो जाए तो कुछ भी खाने-पीने से पहले रोजा खोलने की दुआ को ज़ुबान से पढ़ें और उसके बाद ही कुछ खाना शुरू करें।

    Roza Kholne ki Dua

    हिंदी में रोजा खोलने की दुआ

    '' अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू '' 

    इंग्लिश मे रोजा खोलने की दुआ

    "Allahumma Inni Laka Sumtu wa Bika Aamantu wa ‘Alayka Tawakkaltu wa ‘Ala Rizq-Ika Aftarthu."

    अरबी में रोजा खोलने की दुआ

    اَللّٰهُمَّ اِنَّی لَکَ صُمْتُ وَبِکَ اٰمَنْتُ وَعَلَيْکَ تَوَکَّلْتُ وَعَلٰی رِزْقِکَ اَفْطَرْتُ.

    दुआ का हिन्दी में मतलब

    ऐ अल्लाह, मैंने तेरी ही रज़ा के लिए रोजा रखा और तेरी ही रिज़्क पर इफ्तार किया

    रोजा रखने का तरीका - Roja Rakhne ka Tarika

    सुबह यानी फज्र की नमाज से पहले खाना खाने के वक्त को सहरी कहते हैं। हर दिन रोजा रखने से पहले सहरी खाई जाती है। इस्लाम में सहरी करना सुन्नत माना गया है। रोजा रखने का तय समय निर्धारित होता है। अगर तय समय के बाद खाना खाया जाता है तो वह रोजा नहीं माना जाता। रोजा रखने के बाद दिन भर में कुछ भी खाने-पीने की सख्त मनाही होती है। इस्लाम के मुताबिक, पानी का एक घूंट पीने व सिगरेट का एक कश लेने से भी रोजा टूट जाता है। रमजान में सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही काफी नहीं है बल्कि रोजेदार को खाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। साथ ही झूठ बोलने, चुगली करने, झूठी कसम खाने, लालच करने और अन्य बुरे काम करने से बचना चाहिए। इसके अलावा  रमजान में हर रोजेदार को 5 वक्त की नमाज़ पढ़ना (namaz time), कुरान पढ़ना अनिवार्य होता है।

    डाइट की बात करें तो सहरी के वक्त अपने आहार में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और प्रोटीन युक्त चीज़ें शामिल करें, जिससे आपके शरीर में एनर्जी बनी रहे। रोटी, चावल और आलू कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं। सेब, केला, खुबानी, छोले और ओट्स  में फाइबर उच्च मात्रा में पाया जाता है और प्रोटीन के लिए आप अपनी डाइट में दूध, अंडे, दही और दालें शामिल कर सकते हैं।

    Roja Rakhne ka Tarika

    रोजा खोलने का तरीका - Roja Kholne ka Tarika

    रोजा खोलने के समय को इफ्तार ( iftar time) कहते हैं, जो सूरज ढलने के बाद शुरू होता है। लगभग 1400 साल पहले पैगंबर मोहम्मद खजूर और पानी पीकर रोजा खोलते थे। आज भी मुसलमान रोजा खोलने के लिए वही तरीका अपनाते हैं और फिर मगरीब की नमाज़ अदा करने के बाद इफ्तार पार्टी में दोस्तों व रिश्तेदारों को शामिल किया जाता है। इफ्तार में खाना खाने ले पहले खुद को हाइड्रेट कर लें। इसके लिए आप पानी, जूस या दूध पिएं। इसके अलावा तरबूज, स्ट्रॉबेरी, संतरा, खीरा, सूप आदि को भी आहार में शामिल कर सकते हैं।

    Roja Kholne ka Tarika