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Hartalika Teej kab hai – हरतालिका तीज कब है और इसका महत्व

Pooja MishraPooja Mishra  |  Aug 26, 2019
तीज कब है ( Hartalika teej kab hai)  और तीज मानाने का कारण (Teej kyu Manaya Jata Hai)

सावन के महीने को काफी पवित्र माना जाता है और इसीलिए सावन से सुहागिनों के लिए कई खास पर्वों की शुरुआत हो जाती है। सावन के खत्म होते ही तीज पर्व की तैयारी शुरू हो जाती है। जहां कई महिलाएं तीज के पर्व को हरतालिका के रूप में मनाती हैं तो वहीं सिंधी महिलाएं इसे अलग तरह से मनाती हैं। कई जगह हरियाली तीज भी मनाई जाती है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में हरतालिका तीज मनाई जाती है। इसके अलावा कजरी तीज भी काफी लोकप्रिय है। सिंधी महिलाएं इसे तीजरी के तौर पर मनाती हैं। हालांकि सबसे अधिक हरतालिका तीज ही मनाई जाती है। यही वजह है कि इस आलेख में हम आपको सुहागिनों के प्रमुख पर्व हरतालिका तीज से जुड़ी सारी अहम जानकारी देंगे। तो आइए जान लेते हैं इस व्रत की विधि और इसे मनाने के सभी तरीकों के बारे में। तीज के मौके पर आप अपने घर परिवार और पतिदेव संग हरतालिका तीज कोट्स (Teej Quotes in Hindi), तीज स्टेटस (Teej Status in Hindi) और तीज शायरी (Teej Shayari for Husband in Hindi) भी शेयर कर सकते हैं।

हरतालिका तीज कब है – Hartalika Teej kab hai

Hartalika Teej kab hai

Hartalika Teej kab hai

इस वर्ष हरितालिका तीज बृहस्पतिवार, अगस्त 11, 2021 को पड़ेगी। इस दिन भगवान शंकर की मिटटी से प्रतिमा बना कर पूजन करने का विधान होता है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है, तीज स्पेशल मेहँदी लगवाती है और मंगल गीत जाती है। आपको बता दें की द्रिक पंचांग के अनुसार हरितालिका तीज का मुहूर्त प्रातःकाल  – 06:03 ए एम से 08:33 ए एम से लेकर 02 घण्टे 30 मिनट्स की अवधि तक रहेगा।

हरतालिका तीज क्यों मनाते हैं – Teej kyu Manaya Jata Hai

Teej kyu Manaya Jata Hai

Teej kyu Manaya Jata Hai

तीज का व्रत पतियों की लम्बी उम्र के लिए किया जाता है। तीज के व्रत शादीशुदा जोड़ों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन व्रत को गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने किया था जिसके फलस्वरूप भगवान शंकर उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए। तीज के दिन व्रत करने वाली महिलाओं को नए कपड़े ही पहनने चाहिए। यह बेहद जरूरी है कि साफ़-सुथरे और शुद्ध कपड़े पहनकर ही पूजा की जाए। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए तो कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। यह व्रत कुछ कुछ करवा चौथ की तरह होता है। 

हरतालिका तीज का महत्व – Importance of Teej in Hindi

Importance of Teej in Hindi

Importance of Teej in Hindi

हरतालिका तीज पूजन को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस पर्व को हरतालिका तीज के अलावा सौभाग्यवती व्रत और अखंड सौभाग्यवती व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान तो मिलता ही है, साथ में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। मान्यता है कि यह पर्व वास्तव में सत्यम शिवम सुंदरम के प्रति आस्था और प्रेम का पर्व है। कहा जाता है कि इसी दिन शिव और पार्वती मिले थे। यह शिव-पार्वती के मिलन समारोह के रूप में मनाया जाता है। इसे सुहागिनों द्वारा शिव और पार्वती जैसे सुखी पारिवारिक जीवन जीने की कामना का पर्व माना जाता है। वास्तव में हरतालिका तीज सुहागिनों का त्योहार है लेकिन भारत के कुछ स्थानों में कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।

हरतालिका तीज से जुड़ें सवाल जवाब

1. सवाल : हरतालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर होता है?
 हरतालिका तीज जहां भाद्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है, वहीं हरियाली तीज सावन पर्व की शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि में मनाई जाती है। हालांकि इसमें भी भगवान शिव की ही पूजा की जाती है। हरियाली तीज के बारे में यह भी मान्यता है कि इसे प्रकृति की खूबसूरती को समर्पित करते हुए भी मनाया जाता है क्योंकि सावन महीने में हर जगह हरियाली होती है।

2. सवाल : क्या तीज सिर्फ विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को कर सकती हैं लेकिन उन्हें इसकी पूजन विधि की पूरी जानकारी अपने घर के पुरोहित से ले लेनी चाहिए और विधि पूर्वक ही इस पूजा को करना चाहिए।

3. सवाल : क्या गर्भवती महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं?
नहीं, गर्भवती महिलाओं को यह व्रत नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्हें भूखा रहना मना होता है और इसमें पानी भी नहीं पिया जाता है। इसलिए उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। साथ ही अपने पुरोहित से बिना व्रत किए सिर्फ पूजन की विधि पूछ कर भी इस पूजा को किया जा सकता है।

4. सवाल : जिन महिलाओं के पास बहुत अधिक सामग्री जुटाने की स्थिति नहीं है, वे  सामान्य रूप से इस पर्व को किस तरह से मना सकती हैं?
पूजा कोई भी हो, श्रद्धा जरूरी होती है, न कि यह जरूरी है कि आपने भगवान को क्या चढ़ावा चढ़ाया या क्या पकवान बनाए। आप जितनी समर्थ हैं, आप उस अनुसार भगवान की पूजा कर सकती हैं। हां, मगर प्रतिमा के रूप में मिट्टी या रेत से शिव जी की मूर्ति ज़रूर बनाई जानी चाहिए। भगवान को धतूरा, थोड़ा दूध और बेलपत्र चढ़ा कर भी आप भगवान की पूजा कर  सकती हैं। फल न मिले तो गुड़ से भी भगवान की पूजा की जा सकती है।

5. सवाल : क्या हरतालिका पूजा घर पर की जाती है या फिर मंदिर जाना अनिवार्य है?
इस पूजा की यही खासियत है कि इसे घर में ही किया जाना चाहिए। आप खुद पूरी कथा पढ़ सकती हैं और पूरे विधि-विधान से इस पूजा को घर में कर सकती हैं।

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