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Hartalika Teej kab hai

Hartalika Teej kab hai – हरतालिका तीज कब है, व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि

सावन के महीने को काफी पवित्र माना जाता है और इसीलिए सावन से सुहागिनों के लिए कई खास पर्वों की शुरुआत हो जाती है। सावन के खत्म होते ही हरतालिका तीज पर्व (Hartalika Teej 2022) की तैयारी शुरू हो जाती है। जहां कई महिलाएं तीज के पर्व को हरतालिका के रूप में मनाती हैं तो वहीं सिंधी महिलाएं इसे अलग तरह से मनाती हैं। कई जगह हरियाली तीज भी मनाई जाती है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में हरतालिका तीज मनाई जाती है। इसके अलावा कजरी तीज भी काफी लोकप्रिय है। सिंधी महिलाएं इसे तीजरी के तौर पर मनाती हैं। हालांकि सबसे अधिक हरतालिका तीज ही मनाई जाती है। यही वजह है कि इस आलेख में हम आपको सुहागिनों के प्रमुख पर्व हरतालिका तीज से जुड़ी सारी अहम जानकारी देंगे। तो आइए जान लेते हैं हरतालिका तीज व्रत विधि और महत्व के बारे में। तीज के मौके पर आप अपने घर परिवार और पतिदेव संग हरतालिका तीज कोट्स (Teej Quotes in Hindi), तीज स्टेटस (Teej Status in Hindi) और तीज शायरी (Teej Shayari for Husband in Hindi) भी शेयर कर सकते हैं। हरतालिका तीज की विशेषता है की यह व्रत विवाहित महिलाओं के साथ साथ कुवारी कान्ये भी रख सकती है। अगर आप पहली बार हरतालिका तीज का व्रत रखने जा रही हैं तो यहाँ दिए गए हरतालिका तीज 2022 मेहँदी डिजायन जरूर ट्राय करें। 

Hartalika Teej kab hai 2022 – हरतालिका तीज कब है

Hartalika Teej kab hai
                                                    Hartalika Teej kab hai

2022 में हरितालिका तीज अगस्त 30 को पड़ेगी। इस दिन भगवान शंकर की मिटटी से प्रतिमा बना कर पूजन करने का विधान होता है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है, तीज स्पेशल मेहँदी लगवाती है और मंगल गीत जाती है। ऐसा माना जाता है इस दिन शुभ मुहूर्त में विधि विधान से पूजा करने से विवाहित जोड़ों में प्यार हमेशा बना रहता है। इस दिन सूर्योदय के साथ ही व्रत का संकल्प लिया जाएगा। इस बार पूजा के लिए लगभग 2 घंटे का शुभ मुहूर्त है। इस दिन सुबह साढ़े छह बजे से लेकर 8 बजकर 32 मिनट तक पूजा की जा सकेगी। वहीं जो महिलाएं दिनभर व्रत रहने के बाद शाम में पूजा करती हैं वे प्रदोष पूजा ज्योतिष पंचांग के अनुसार शाम के वक्त 6 बजकर 32 मिनट से लेकर रात को 8 बजकर 52 मिनट तक पूजा कर सकेंंगी। प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व होता है।

Teej kyu Manaya Jata Hai – हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है

Teej kyu Manaya Jata Hai
                                            Teej kyu Manaya Jata Hai

हरतालिका तीज को सबसे कठिन व्रत माना जाता है। पूरे दिन जल और अन्न त्याग कर व्रत रहने वाले इस पर्व को लेकर मन में ये ख्याल आना जाहिर है कि आखिर हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है। तीज का व्रत खुशहाल शादीशुदा जीवन और संतान सुख के लिए मनाया जाता है। महिलाएं इसे पति की लम्बी उम्र के लिए भी किया जाता है। इस पावन व्रत को गिरिराज हिमालय की पुत्री पार्वती ने किया था जिसके फलस्वरूप भगवान शंकर उन्हें पति के रूप में प्राप्त हुए। तीज के दिन व्रत करने वाली महिलाओं को नए कपड़े ही पहनने चाहिए। यह बेहद जरूरी है कि साफ़-सुथरे और शुद्ध कपड़े पहनकर ही पूजा की जाए। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए तो कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। यह व्रत कुछ कुछ करवा चौथ की तरह होता है। 

Importance of Teej in Hindi- हरतालिका तीज का महत्व

Importance of Teej in Hindi
                                         Importance of Teej in Hindi

हरतालिका तीज पूजन को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस पर्व को हरतालिका तीज के अलावा सौभाग्यवती व्रत और अखंड सौभाग्यवती व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान तो मिलता ही है, साथ में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। मान्यता है कि यह पर्व वास्तव में सत्यम शिवम सुंदरम के प्रति आस्था और प्रेम का पर्व है। कहा जाता है कि इसी दिन शिव और पार्वती मिले थे। यह शिव-पार्वती के मिलन समारोह के रूप में मनाया जाता है। इसे सुहागिनों द्वारा शिव और पार्वती जैसे सुखी पारिवारिक जीवन जीने की कामना का पर्व माना जाता है। वास्तव में हरतालिका तीज सुहागिनों का त्योहार है लेकिन भारत के कुछ स्थानों में कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।

 Hartalika Teej ki Katha
Teej Ki Katha

Hartalika Teej ki Katha- हरतालिका तीज व्रत कथा

हरतालिका तीज व्रत कथा में माता पार्वती और भगवान शिव की एक कथा काफी प्रचलित है। इस कथा को सुनने के बाद ये समझना बेहद सहज है कि हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है। इसके बाद आप ये व्रत करें या न करें, हरतालिका तीज की शुभकामनाएं हर सुहागिन को जरूर भेजेंगी।

कुछ ऐसी है सबसे ज्यादा प्रचलित हरतालिका तीज व्रत कथा-

ऐसी मान्यता है कि जब पार्वती ने पिता के यज्ञ में अपने पति शिव का अपमान होता देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और उन्‍होंने खुद को यज्ञ की अग्नि में भस्‍म कर दिया। अगले जन्‍म में उन्‍होंने राजा हिमाचल के यहां जन्‍म लिया और इस जन्‍म में भी उन्‍होंने भगवान शंकर को ही पति के रूप में प्राप्‍त करने के लिए तपस्‍या की। देवी पार्वती ने तो मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था और वह सदैव भगवान शिव की तपस्‍या में लीन रहतीं थीं। पुत्री की यह हालत देखकर राजा हिमाचल को चिंता सताने लगी और इस संबंध में उन्‍होंने नारदजी से चर्चा की। उनके कहने पर उन्‍होंने अपनी पुत्री उमा का विवाह भगवान विष्‍णु से कराने का निश्‍चय किया। 

पार्वती जी विष्‍णु से विवाह नहीं करना चाहती थीं। उन्हें अत्यंत दुखी देखकर उनकी सखियां उन्‍हें लेकर घने जंगल में चली गईं। इस तरह सखियों द्वारा उनका हरण कर लेने की वजह से ही इस व्रत का नाम हरतालिका व्रत पड़ा है।

भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि के हस्त नक्षत्र मे माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग का निर्माण किया और भोलेनाथ की स्तुति में लीन होकर रात्रि जागरण किया, उन्होंने अन्न का त्याग भी कर दिया। ये कठोर तपस्या 12 साल तक चली, तब माता के इस कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छानुसार उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। 

प्रात:बेला में जब पार्वती पूजन सामग्री नदी में प्रवाहित कर रही थी तो उसी समय हिमालय राज उस स्थान पर पहुंच गयें। वे अपनी बेटी से पूछने लगे कि तुम यहां कैसे आ गई,  तब पर्वती ने उन्हें विष्णु विवाह न करने की इच्छा वाली कथा उन्हें सुना दी। सब जानकर वे पार्वती को घर लेकर आयें और शास्त्र विधि से उनका विवाह भगवान शिव के साथ करा दिया।

Hartalika Teej puja vidhi – हरतालिका तीज व्रत कथा पूजा विधि

Hartalika Teej puja vidhi
Hartalika Teej ki Pujan Vidhi

हरतालिका तीज पूजन विधि (Hartalika Teej puja vidhi) की खासियत है कि इसमें भगवान को अपने हाथों से बनाया जाता है। इस पूजन को ज्यादातर महिलाएं प्रदोष काल में करती हैं। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोष काल कहा जाता है। यह दिन और रात के मिलन का समय होता 

1. पूजा के लिए पहले भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की रेत व काली मिट्टी से प्रतिमा हाथों से बनाएं। साथ ही माता का सिंदूर दानी भी बनाए। जहां रेत व बालू उपलब्ध न हों वहां प्रतिमा गमले की मिट्टी या आटे से भी बनाकर पूजा कर सकते हैं।

2. पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें और उस चौकी पर केले के पत्ते रखकर भगवान शंकर, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद देवताओं का आह्वान करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करें। माता के सिंदूर दानी में सिंदूर भरकर रखें।

3. सुहाग की टोकरी में सुहाग की सारी वस्तु रखकर माता पार्वती को चढ़ाना इस व्रत की मुख्य रूप से किया जाता है।

4. इसमें शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री घर के बड़ी महिलाओं जैसे मां, सास के चरण स्पर्श करने के बाद ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए।  माता के सिंदूर दानी में रखी सिंदूर को अपनी सिंदूर की डिबिया में भर लें।

5. इस प्रकार पूजन के बाद कथा सुनने और रातभर जागरण करने का नियम है। आरती के बाद सुबह माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोलें।

Hartalika Teej 2022 in Hindi – हरतालिका तीज व्रत का पारण कब है

30 अगस्त को हरतालिका तीज व्रत करने और विधिवत पूजा करने के बाद 31 अगस्त को तड़के स्नान करके पूजा करने के बाद और बड़ों का आशीर्वाद लेने के बाद कभी भी पारण कर सकते हैं। हरतालिका तीज में पारण का कोई खास समय का नियम नहीं माना जाता है।

हरतालिका तीज से जुड़ें सवाल जवाब – FAQ’s 

1. सवाल : हरतालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर होता है?
 हरतालिका तीज जहां भाद्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है, वहीं हरियाली तीज सावन पर्व की शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि में मनाई जाती है। हालांकि इसमें भी भगवान शिव की ही पूजा की जाती है। हरियाली तीज के बारे में यह भी मान्यता है कि इसे प्रकृति की खूबसूरती को समर्पित करते हुए भी मनाया जाता है क्योंकि सावन महीने में हर जगह हरियाली होती है।

2. सवाल : क्या तीज सिर्फ विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को कर सकती हैं लेकिन उन्हें इसकी पूजन विधि की पूरी जानकारी अपने घर के पुरोहित से ले लेनी चाहिए और विधि पूर्वक ही इस पूजा को करना चाहिए।

3. सवाल : क्या गर्भवती महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं?
नहीं, गर्भवती महिलाओं को यह व्रत नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्हें भूखा रहना मना होता है और इसमें पानी भी नहीं पिया जाता है। इसलिए उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। साथ ही अपने पुरोहित से बिना व्रत किए सिर्फ पूजन की विधि पूछ कर भी इस पूजा को किया जा सकता है।

4. सवाल : जिन महिलाओं के पास बहुत अधिक सामग्री जुटाने की स्थिति नहीं है, वे  सामान्य रूप से इस पर्व को किस तरह से मना सकती हैं?
पूजा कोई भी हो, श्रद्धा जरूरी होती है, न कि यह जरूरी है कि आपने भगवान को क्या चढ़ावा चढ़ाया या क्या पकवान बनाए। आप जितनी समर्थ हैं, आप उस अनुसार भगवान की पूजा कर सकती हैं। हां, मगर प्रतिमा के रूप में मिट्टी या रेत से शिव जी की मूर्ति ज़रूर बनाई जानी चाहिए। भगवान को धतूरा, थोड़ा दूध और बेलपत्र चढ़ा कर भी आप भगवान की पूजा कर  सकती हैं। फल न मिले तो गुड़ से भी भगवान की पूजा की जा सकती है।

5. सवाल : क्या हरतालिका पूजा घर पर की जाती है या फिर मंदिर जाना अनिवार्य है?
इस पूजा की यही खासियत है कि इसे घर में ही किया जाना चाहिए। आप खुद पूरी कथा पढ़ सकती हैं और पूरे विधि-विधान से इस पूजा को घर में कर सकती हैं।

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26 Aug 2019

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