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एक्सपर्ट से जानिए प्रेगनेंसी के दौरान योग करना महिला और शिशु के लिए क्यों है फायदेमंद

Archana ChaturvediArchana Chaturvedi  |  Jun 20, 2021
गर्भवती महिलाओं के लिए योग मुद्राएं, Yoga Poses in Pregnancy in Hindi

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गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ और फिट बने रहने के प्रयास में महिलाएं अच्छे परिणाम के लिए योगा का सहारा ले सकती हैं। योगा से गर्भवती महिलाओं और उनके पेट में पल रहे नवजात शिशु को कई तरह से मदद मिलती है। इससे चिंता घटती है और महिला को गर्भावस्था और फिर प्रसव काल के दौरान भी शांत और चिंतामुक्त रहने में मदद मिलती है। गर्भावस्था के दौरान, ज्यादातर महिलाओं का मूड बदल जाता है, सांस संबंधित समस्याएं होती हैं, थकान और कमजोरी महसूस होती है। योगा (yoga quotes in hindi) से ये सभी समस्याएं घटती हैं जिससे एक आसान डिलीवरी में मदद मिलती है।
नियमित रूप से योगा करने वाली महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान हार्मोन संबंधित परिवर्तन की स्थिति में अपने योगा रुटीन में सिर्फ मामूली बदलाव लाने की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान योगा (Benefits of Yoga in Hindi) का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिला को प्रसव के वक्त काफी कम जोखिमों से जूझना पड़ता है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधित जटिलता का भी सामना कम करना पड़ता है। गर्भावस्था के हर एक चरण में योगा की मुद्राएं और व्यायाम अलग-अलग होते हैं। इसलिए आपको अपने डॉक्टर से सलाह लेने के बाद किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ की निगरानी में योगा करना चाहिए। यहां डॉ. अरुणा कालरा से बातचीत के आधार पर हम बता रहे आपको गर्भावस्था के दौरान योग (Yoga in Pregnancy) करने से होने वाले फायदों के बारे में – 

गर्भावस्था और योगा Pregnancy and Yoga in Hindi

योगा गर्भावस्था के दौरान दर्द दूर करने का अच्छा तरीका है। गर्भावस्था के दौरान योगा करने वाली महिलाएं निम्नलिखित समस्याओं में आराम महसूस कर सकती हैं –

Pregnancy and Yoga in Hindi

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  • कमर दर्द
  • प्रीक्लेम्पसिया जोखिम, या गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर
  • प्रसव दर्द, संभावित तौर पर कोर स्ट्रेंथ की वजह से

गर्भावस्था के दौरान योगा करने के फायदे Benefits of Prenatal Yoga in Hindi

योगा गर्भवती महिला के लिए गई मनोवैज्ञानिक लाभ भी प्रदान करता है, जैसे चिंता और अवसाद के स्तर में कमी, जिससे एक खुषहाल और संतुलित गर्भावस्था को बढ़ावा मिल सकता है। प्रसव कक्ष में भी, सांस लेने और आराम की मुद्रा से संबंधित तकनीकों से प्रसव के दौरान दर्द घटाने में मदद मिल सकती है। डिलिवरी के बाद होने वाले अवसाद को दूर करने में भी योग मदद करता है। खासतौर पर जो कई महिलाओं में गंभीर समस्या होती है। योगा कोर स्ट्रेंथ फिर से हासिल करने में मदद कर सकता है, जिससे बच्चे के जन्म से संबंधित पेल्विक फ्लोर की अनियमितताओं का जोखिम कम होता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए योग मुद्राएं Yoga Poses in Pregnancy in Hindi

नीचे ऐसी कुछ योग मुद्राएं बताई गई हैं जिनसे गर्भावस्था संबंधित समस्याओं को कम करने या ताकत बढ़ाने में मदद मिल सकती है – 

Yoga Poses in Pregnancy in Hindi

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1. कैट काउ पोज – कमर मोड़ने वाली यह तकनीक कमर दर्द दूर करने के लिए बेहद कारगर है।
2. मालासन  – यह डीप स्क्वैट बच्चे को नीचे की ओर उचित स्थिति में लाने में मददगार है।
3. आनंद बालासन –  यह योग मुद्रा पीठ की नीचे की मांसपेशियों को आराम दिलाने में मदद करती है। यह उलटी मुद्रा है, इसलिए इसे आजमाने से पहले अपने डॉक्टर और योगा शिक्षक से सलाह जरूर लें।
4. लेग-अप-द​-वॉल पोज़ – इस उलटी मुद्रा से आपके पैरों और एडि़यों में सूजन घटाने में मदद मिल सकती है। इसे करने से पहले अपने डॉक्टर और योगा शिक्षक से सलाह जरूर लें।
5. प्लैंक – इससे पेट के निचले हिस्से को मजबूत बनाने में मदद मिलती है, जो प्रसव और उसके बाद रिकवरी के लिए जरूरी है। प्लांक्स को करना कठिन हो सकता है, क्योंकि गर्भावस्था के बढ़ते चरण में प्रवेश करती हैं, इसलिए अपने आप पर ज्यादा जोर न डालें। 
6. वीरभद्रासन – यह खड़ी मुद्रा संपूर्ण ताकत पैदा करने के लिए की जाने वाली सामान्य प्रक्रियाओं में शामिल है। आप समान समय में कीगल व्यायाम करते पर डबल ड्यूटी भी कर सकती हैं, जिससे प्रसव और बच्चे के जन्म के बाद रिकवरी में मदद मिलती है।
 
इन आसानों के बारे में विस्तारपूर्वक जाननें के लिए यहां पर क्लिक करें –

प्रेगनेंसी के दौरान योग करते समय इन सावधानियों का ध्यान रखें –

1. यदि आप ऐसी योगा क्लास में शामिल हो रही हैं जो गर्भवती महिला के लिए उपयुक्त नहीं हो तो अपने योगा शिक्षक को अपनी गर्भावस्था के बारे में बता दें।
2. पहले ट्राइमेस्टर के बाद कमर से संबंधित किसी तरह की योग मुद्रा से परहेज किया जाना चाहिए। इससे गर्भाशय की ओर रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
3. अपनी मांसपेशियों को बहुत ज्यादा खींचने से परहेज करें।
4. योग मुद्राएं उतनी ही देर करें जितनी कि आप आराम से कर सकें। अपने आप पर बहुत ज्यादा जोर न डालें। अपने शरीर का भी सावधानी से ध्यान रखें, जिससे कि किसी तरह की असहजता पैदा न हों।
5. अपने घुटनों का ध्यान रखें। इन्हें बहुत ज्यादा न फैलाएं।
6. गर्भावस्था के दौरान योगा का अभ्यास सिर्फ विषेशज्ञ के मार्गदर्शन में ही करें। डीवीडी और वीडियो की नकल करने से बचें, क्योंकि ये आपके द्वारा की जाने वाली गलतियों को पहचानने में सक्षम नहीं होंगे और इससे आपके स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो सकता है।
7. स्वयं पर बहुत ज्यादा जोर न डालें और आराम करना न भूलें। अपने शरीर में थकान पर ध्यान दें। यदि आप थकी हुई महसूस कर रही हों तो कुछ समय आराम करें।
(लेख साभार  – डॉ. अरुणा कालरा, ऑब्स्टट्रिशन एंड गयनेकोलॉजिस्ट, सी.के बिरला हॉस्पिटल, गुरुग्राम)