अर्जुन कपूर ने बताया कि उनके सपनों को सच करने के लिए बहन अंशुला ने किये कई सैक्रिफाइस

arjun kapoor with sister anshula kapoor

बहुत समय बाद अर्जुन कपूर  (Arjun Kapoor) और रकुल प्रीत सींह स्टार्टर फिल्म 'सरदार का ग्रेंडसन' आखिरकार नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है। साल 2012 में डेब्यू के बाद से अर्जुन कपूर की ये 16वीं फिल्म है। इससे ये साफ पता चलता है कि एक्टर के पास काम के लिए फिल्म भी है कई प्रोजेक्ट भी। लेकिन इसके बाद भी बॉलीवुड में अर्जुन कपूर की गिनती उन एक्टर्स में होती है जिनके पास कोई काम नहीं है। अर्जुन कपूर के लिए पिछले नौ साल जितने महत्वपूर्ण रहे हैं, यह भी एक कोशिश का दौर रहा है। 2012 में अर्जुन और अंशुला ने कैंसर की वजह से अपनी मां को खो दिया, उसी साल जब अर्जुन की पहली फिल्म इश्कजादे रिलीज हुई थी।
अर्जुन कपूर इस बात से सहमत हैं कि बॉलीवुड में एक अभिनेता का करियर हिट और मिस से परिभाषित होता है, क्योंकि यह फिल्म के व्यवसाय के माध्यम से स्टार की योग्यता का आकलन करने में मदद करता है। अर्जुन कपूर हाल ही में रेडियो होस्ट सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक इंटरव्यू में इस बारे में बात की। उन्होंने बताया, "मैं बहुत भाग चुका हूं। जब मैंने अपनी मां को खो दिया, तो मैं घर पर नहीं रहना चाहता था क्योंकि मुझे पता था कि मैं ऐसा करूंगा, मैं बोखला जाता हूं। मैंने छह फिल्में साइन कीं और मैं काम करता रहा," उन्होंने इससे जुड़ी चैट भी शेयर की।

वहीं जब अर्जुन कपूर से सवाल पूछा गया कि आखिर उनके सपने सच होने के पीछे किसका हाथ रहा है? एक्टर ने बहन अंशुला कपूर का नाम लेते हुए कहा, ''अंशुला ने मेरे लिए काफी सैक्रिफाइस किए हैं। मैं जब भी शूटिंग में व्यस्त रहता था तो वो ही घर संभालती थी।' 

अर्जुन ने यह भी माना कि यह सब उनके लिए इसलिए संभव हुआ है क्योंकि अंशुला चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। अपने सपनों को अपना बनाने के बारे में बात करते हुए, अर्जुन ने शेयर किया, "मैंने और मेरी बहन, अंशुला ने अपनी लाइफ में बहुत सी चीजों का त्याग किया है। खासतौर पर अंशुला ने मेरा करियर बनाने के लिए। उसने अमेरिका में एक कोर्स किया, उसने स्नातक किया और वह भारत चली गई ताकि मैं अकेला न रहूं। सने मेरी और अपनी, दोनों की जिंदगी देखी। उस पर ध्यान दिया वह घर चलाती है ताकि मैं काम कर सकूं।"

अर्जुन ने आगे ये भी कहा, "मां-बाप के बिना जीना आसान नहीं है, कम से कम एक बच्चे को थोड़ा जिम्मेदार होना चाहिए ताकि दूसरा एंजॉय कर सके, गैर-जिम्मेदार बन सके और दुनिया देख सके, क्योंकि एक्टिंग करना मतलब दुनिया को टेक ऑन करना। आपको अलग जगह रहना पड़ता है, अलग समय में रहना पड़ता है तो ऐसे में मुझे लगता है या महसूस होता है कि उसने बहुत त्याग किए हैं।"
ऐसी पहली बार नहीं है जब अर्जुन ने इस बारे में बात की है कि कैसे अंशुला ने अपने करियर में उन्हें सपोर्ट किया और अपनी मां के निधन के बाद इमोशलनली संभाला। यह अंशुला की ताकत और उसकी मैच्युरिटी के बारे में बहुत कुछ कहता है क्योंकि वह मुश्किल से 21 साल की थी जब उनकी मां का निधन हो गया था।

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