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ब्रेस्ट मसाज

Breastfeeding week: ब्रेस्ट मसाज से न्यू मॉम्स को मिलते हैं ये अद्भुत फायदे, जानें सही तरीका

ब्रेस्टमिल्क शिशु के लिए अमृत समान होता है। यही वजह है शुरुआती छह महीने शिशु को सिर्फ माँ के दूध पर रखा जाता है। लेकिन, कई बार माँ को ब्रेस्टफीडिंग कराते समय कुछ तकलीफों का सामना करना पड़ता है। जैसे पर्याप्त दूध न बनना, फीड कराते समय दर्द होना आदि। इन परेशानियों को दूर करने के लिए ब्रेस्ट मसाज को कारगर माना जाता है। इसे लैक्टेशन मसाज भी कहा जाता है, लेख में इसके बारे में विस्तार से जानकारी हासिल करेंगे।

लैक्टेशन मसाज क्या है? (What is Lactation Massage in Hindi)

लैक्टेशन मसाज से तात्पर्य है स्तनपान कराने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट की मसाज। इसमें अलग-अलग तरीके से न्यू मदर्स की ब्रेस्ट की मसाज की जाती है। इससे ब्रेस्टफीडिंग कराते समय स्तनों में होने वाला दर्द व पर्याप्त दूध न बनने जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। लैक्टेशन मसाज ब्रेस्ट के ऊतकों को आराम पहुंचाने के साथ स्तनपान के कारण स्तनों में होने वाली थकान को दूर करने में भी मदद मिलती है। 

ब्रेस्ट मसाज/लैक्टेशन मसाज के फायदे (Benefits of Lactation Massage in Hindi)

ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट मसाज करने से क्या फायदे होते हैं, नीचे इससे संबंधित जानकारी साझा कर रहे हैं:

1. दूध का प्रवाह बढ़ता है

ब्रेस्ट मसाज

ब्रेस्ट मसाज से ब्रेस्ट में सर्कुलेशन व दूध का प्रवाह बढ़ता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे दूध के प्रवाह के लिए ब्रेस्ट को उत्तेजित करने में मदद मिलती है। इसके लिए ब्रेस्ट के ऊपर अपना हाथ रखें व निप्पल पर उंगलियों की मदद से मालिश करें। इससे निप्पल्स के माध्यम से दूध आसानी से आता है।

2. दूध की ग्रंथियों को बंद होने से रोकने में करे मदद

दूध की ग्रंथियों से नलियों के माध्यम से दूध निप्पल्स तक आता है। कई बार दूध इन नलियों से ठीक से नहीं निकल पाता, जिस वजह से ब्रेस्ट को छूने भर से दर्द होने लगता है। कई बार इसके कारण नलियों में गांठ बन सकती है। नियमित रूप से लैक्टेशन मसाज से दूध की ग्रंथियों के बंद होने से बचाव होता है।

3. ब्रेस्‍ट इंगोर्जमेंट में होने वाले दर्द को करे कम

कई न्यू मॉम्स में ब्रेस्‍ट इंगोर्जमेंट (Breast engorgement) के कारण ब्रेस्ट में अत्यधिक पेन की शिकायत होती है। ब्रेस्‍ट इंगोर्जमेंट एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्रेस्ट मिल्क नलियों में जमा हो जाता है, जिस वजह से स्तन कठोर हो जाते हैं। कई बार इनमें सूजन आ जाती है। ब्रेस्ट मसाज करने से इस परेशानी में काफी हद तक राहत मिलती है।

4. दूध ज्यादा बनता है

कुछ महिलाओं में डिलीवरी के बाद कम दूध आने की शिकायत होती है। एक शोध में बताया गया है कि स्तनपान कराने वाली जो महिलाएं रोजाना 15 मिनट ब्रेस्ट मसाज करती हैं उन्हें स्तनों में दर्द न के बराबर होता है। साथ ही इससे उनके ब्रेस्टमिल्क की मात्रा के साथ क्वालिटी में भी सुधार होता है। शोध में साफ तौर से बताया गया है कि लैक्टेशन मसाज से दूध में सोडियम का स्तर कम और लिपिड्स, सॉलिड्स, कैसिन और एनर्जी का स्तर बढ़ता है।

लैक्टेशन मसाज करने का सही तरीका क्या है? (How to Perform Breast Massage for Lactation in Hindi)

स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट मसाज करने का तरीका सुनने में मुश्किल लग सकता है। लेकिन, यह बेहद आसान है। नीचे स्टेप बाय स्टेप हम इसकी जानकारी दे रहे हैं:

1. सही पोजीशन

सबसे पहले पीठ के बल बिस्तर पर इस तरह लेट जाएं कि आपकी कमर थोड़ी ऊपर हो। मतलब बिल्कुल सीधे नहीं लेटना है।

2. हाथों को गर्म करें

अब यह सुनिश्चित करें कि आपके हाथ गर्म होने चाहिए। आप चाहें तो दोनों हथेलियों को रब करके हाथों को गर्म कर सकते हैं। चाहें तो इसके लिए गर्म तौलिए का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके बाद सबसे पहले आर्मपिट यानी बगल में लिंप ग्लैंड्स को पंप करेंगे। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है।

3. लुब्रिकेशन के लिए ऑयल 

मसाज के लिए लुब्रिकेंट के तौर पर वर्जिन कोकोनट, ऑलिव या आलमंड ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप अपनी चॉइस के अनुसार मसाज के लिए ऑयल का चुनाव कर सकती हैं। यदि आप किसी नैचुरल और प्राकृतिक लोशन को लगाना चाहती हैं, तो वो भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

4. सर्कुलर मोशन में मसाज करें

लैक्टेशन मसाज

एक हाथ की चार उंगलियों को एक ब्रेस्ट के ऊपर रखें। इसी तरह दूसरे हाथ की चार उंगलियों के ब्रेस्ट के नीचे रखें। अब हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज शुरू करें। इस तरह बार अपवर्ड व डाउनवर्ड डायरेक्शन में मसाज करें। ध्यान रखें ब्रेस्ट पर अधिक दबाव न बनाएं। इससे दूध बनाने वाला ग्लैंड्यूलर टिश्यू (glandular tissue) डैमेज हो सकता है। एरेओला यानी निप्पल्स के पास की डार्क त्वचा पर उंगलियों के टिप्स से मसाज करें।

5. लाइट स्ट्रोक

ब्रेस्ट में द्रव प्रतिधारण (फ्लुइड रिटेंशन) होने पर मसाज के दौरान हल्के स्ट्रोक से आराम मिल सकता है। इससे सूजन को कम करने के साथ बेहतर परिसंचरण में मदद होतीहै।

अगर आप ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं और लेख में बताई गई किसी भी परेशानी से जूझ रही हैं, तो लैक्टेशन मसाज का सहारा ले सकती हैं। लेख में इसे करने का तरीका भी बताया गया है। इसे आप आराम से घर पर खुद कर सकती हैं। इसे लेकर आपके मन में किसी तरह का संशय है तो इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श करना बेहतर होगा।

चित्र स्रोत: Freepik & Pexel

02 Aug 2022

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