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जानिए क्यों जरूरी है महिलाओं को जल्द से जल्द डायबिटीज की जांच कराना

Archana ChaturvediArchana Chaturvedi  |  Mar 12, 2021
महिलाओं में मधुमेह की जल्द जांच क्यों जरूरी है,  Why early diabetes screening in women is important, diabetes screening

डायबिटीज यानि कि मधुमेह रोग (Diabetes) का जल्द पता लगने और उपचार इस बीमारी से ग्रसित महिलाओं को स्वस्थ बनाए रखने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इससे उनमें समय से पहले होने वाली दिल की बीमारी और दौरा पड़ने, दृष्टिहीनता और किडनी फेल हो जाने का जोखिम घट सकता है। महिलाओं में डायबिटीज का जल्द पता लगाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लाइफस्टाइल बदवाव और दवाओं के जरिये मधुमेह की गंभीरता को कम किया जा सकता है। इसके अलावा डायबिटीज के जल्द उपचार से माइक्रोवास्कुलर एंड ऑर्गन कॉम्पलीकेशन की रोकथाम और बाद में गर्भावस्था में होने वाले खतरे को कम किया जा सकता है।

महिलाओं में मधुमेह की जल्द जांच क्यों जरूरी है? Why early diabetes screening in women is important

जागरूकता और डायबिटीज के इलाज एवं रोकथाम में विकास के बावजूद इस रोग से ग्रसित महिलाएं जांच से दूर बनी रहती हैं। वजन बढ़ने के मामलों में इजाफा होना मधुमेह रोगियों की संख्या में वृद्धि के मुख्य कारकों में से एक हैं। इसी तरह, पिछले दशक में गैस्टेशनल डायबिटीज मेलीटस (जीडीएम) के मामलों में तेजी देखी गई। मधुमेह की जल्द जांच बेहद जरूरी है क्योंकि इससे महिलाएं इस बीमारी को जल्द ठीक कर सकती हैं और इसकी गंभीर जटिलताएं शरू होने से पहले उनकी रोकथाम कर सकती हैं। 

महिलाओं को गर्भवती होने से कुछ सप्ताह पहले ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित रखने की कोशिश करनी चाहिए। स्वास्थ्य चिकित्सक आपकी लाइफस्टाइल में बदलाव का सुझाव दे सकती हैं जिससे आपको ग्लूकोज स्तर सामान्य रेंज में लाने में मदद मिलेगी। जीडीएम श्रेणी के मधुमेह से ग्रसित महिलाओं को प्रसव के 6-12 सप्ताह बाद जांच करानी चाहिए। यदि टेस्ट का परिणाम सामान्य है, तो हरेक 3 साल में मधुमेह की पुनःजांच करानी चाहिए। गंभीर हाइपरग्लेसेमिया वाली मधुमेह से शरीर में लंबे समय तक कमजोरी, नुकसान और अन्य विफलताओं को बढ़ावा मिल सकता है। गैर-जांच वाली टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित महिलाओं में अन्य गैर-मधुमेह वाली महिलाओं की तुलना में दिल का दौरा पड़ने, कोरोनरी हार्ट डिजीज, और पेरिफेरल वास्कुलर डिजीज का ज्यादा खतरा रहता है। उनमें डिस्लिपीडेमिया, हाइपरटेंशन, और मोटापा की ज्यादा आशंका रहती है। बीमारी का जल्द पता लगने और तुरंत उपचार से मधुमेह और उसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। इसलिए मधुमेह की जल्द से जल्द जांच बेहद महत्वपूर्ण है।

दिखने लगे अगर ये लक्षण 

टाइप-1 डायबिटीज के लक्षणों में ज्यादा प्यास लगना या पेशाब आना, लगातार भूख लगना, कोशिश किए बगैर वजन घटना, आंखों की रोशनी कम होना, अत्यधिक थकान महसूस होना और टाइप-2 मधुमेह के लक्षणों में टाइप-1 के लक्षणों समेत घाव धीमी गति से भरना, त्वचा शुष्क रहना, पैरों में जलन या चुभन महसूस होना, संक्रमण आदि मुख्य रूप से शमिल हैं।

डायबिटीज की जांच के लिए ये टेस्ट करवाने चाहिए

बढ़ते जोखिम या इन लक्षणों को महसूस करने वाली महिलाओं के लिए, मधुमेह का पता लगाने के लिए निम्नलिखित कई टेस्ट कराने की जरूरत होती है –

– फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट रक्त में ग्लूकोज का स्तर मापता है और इसे कराने से पहले कम से कम 8 घंटे पहले कुछ नहीं खाया जाता है।
– हीमोग्लोबिन ए1सी या ग्लाइसेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट के नाम से भी चर्चित एचबीए1सी टेस्ट एक ऐसा महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट है जो इसका संकेत देता है कि कितनी जल्द आपकी मधुमेह मीबारी नियंत्रित हो रही है। इसमें तीन महीने के ग्लूकोज स्तर के औसत को मापा जाता है।
– ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट में ब्लड ग्लूकोज को मापा जाता है और इस टेस्ट से कम से कम 8 घंटे पहले और ग्लूकोज-आधारित पेय पीने के बाद दो घंटे बाद कुछ नहीं खाया जाता है।
– रैंडम प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट में, ब्लड ग्लूकोज जांचा जाता है और इसमें इसका ध्यान नहीं रखा  जाता है कि इस टेस्ट से पहले कुछ खाया है या नहीं। खास लक्षण की उपस्थिति में 200 एमगी/डीएल या इससे ज्यादा वैल्यू मधुमेह की जांच का संकेत देती है। इन लक्षणों में ज्यादा पेशाब आना या प्यास लगना और स्वयं ही वजन घटना आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।

ऐसे रखें शुगर लेवल पर कंट्रोल

ऐसे कुछ सामान्य तरीके हैं जिनके जरिये महिलाएं डायबिटीज को कंट्रोल कर सकती हैं। इनमें वजन को एक सीमित दायरे में बनाए रखना, संतुलित आहार लेना और कॉलेस्टेरॉल, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना और सप्ताह के ज्यादातर दिनों में कम से कम 30 मिनट व्यायाम करना मुख्य रूप से शामिल हैं।
(लेख साभार – समीर भाटी, डायरेक्ट ऑफ स्टार इमेजिंग एंड पाथ लैब)

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