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ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क

शिशु के लिए ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क, दोनों में से क्या है बेहतर

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि शिशु के लिए माँ के दूध से बेहतर कुछ नहीं है। प्रसव के बाद एक माँ की सबसे पहली जिम्मेदारी बच्चे को दूध पिलाना होती है। परंतु, कई दफा किसी गंभीर परेशानी के चलते एक माँ अपने शिशु को दूध नहीं पिला पाती है। वहीं,कुछ मामलों में शिशु के लिए माँ का दूध पर्याप्त नहीं होता है। ऐसे में शिशु को फॉर्मूला दूध यानी ऊपरी दूध देने की सलाह दी जाती है। लेकिन शिशु के लिए ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क में क्या है बेहतर, पहले यह जानते हैं।

शिशु को ऊपरी दूध पिलाने को लेकर कई माता-पिता के मन में दुविधा हो सकती है। फॉर्मूला दूध उनके बच्चों के लिए कितना सुरक्षित है, बच्चे की ग्रोथ इससे प्रभावित तो नहीं होगी, ये सवाल ज्यादातर पैरेंट्स के मन में होते हैं। यही वजह है कि आज हम ब्रेस्ट मिल्क और फॉर्मूला मिल्क से जुड़े आपके सभी सवालों को लेकर कुछ जानकारी शेयर कर रहे हैं।

ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क: शिशु के लिए कौन-सा दूध है बेहतर

ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क
ब्रेस्टफीडिंग

बच्चे को जन्म देने के बाद एक माँ को कई सारे फैसले लेने होते हैं। इसमें से एक यह है कि वह बच्चे को स्तनपान कराना चाहती हैं या ऊपरी दूध देना चाहती हैं। यह फैसला पूरी तरह से एक माँ का होता है। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो ब्रेस्टफीडिंग कराना माँ और शिशु दोनों की सेहत के लिए अच्छा होता है। डॉक्टर छह महीने तक शिशु को सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग कराने की सलाह देते हैं। चलिए लेख में आगे ब्रेस्टफीडिंग के फायदों के बारे में जानते हैं।

ब्रेस्टफीडिंग से होने वाले फायदे

नीचे शिशु के लिए ब्रेस्ट मिल्क के फायदों के बारे में बता रहे हैं:

  • माँ के दूध में वो सारे पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु के बढ़ने और स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक होते हैं।
  • ब्रेस्टमिल्क में मौजूद एंटीबॉडीज शिशुओं को बीमार होने से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
  • माँ का दूध शिशु को एलर्जी, एग्जीमा, कान में इंफेक्शन व पेट संबंधित परेशानियों से बचाव में सहायक होता है।
  • ब्रेस्ट मिल्क ब्रेन डेवलपमेंट में भी सहायक होता है।
  • जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं उनमें मोटापा व डायबिटीज होने का जोखिम कम होता है।
  • माँ का दूध बच्चे को आसानी से पच जाता है।
  • ब्रेस्ट मिल्क एसआईडीएस यानी सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम के जोखिम को कम करता है।
  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ओवेरियन कैंसर, डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, ब्रेस्ट कैंसर आदि परेशानियों का जोखिम कम होता है।
  • स्तनपान कराने से मांओं को पोस्ट प्रेग्नेंसी वजन कम करने में भी आसानी होती है।

क्या फॉर्मूला मिल्क से शिशु को किसी तरह का नुकसान हो सकता है?

फॉर्मूला मिल्क शिशुओं को ब्रेस्ट मिल्क के विकल्प के तौर पर दिया जाता है। जिन महिलाओं के स्तनों से पर्याप्त दूध नहीं बन पाता है, उन्हें फॉर्मूला मिल्क देने की सलाह दी जाती है। शिशुओं की आहार संबंधी आवश्यकता को पूरा कर बच्चों को स्वस्थ रखता है। 

हालांकि, एक्सपर्ट्स की मानें तो फॉर्मूला मिल्क में ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद इम्यूनिटी को बूस्ट करने वाले तत्व मौजूद नहीं होते हैं। इसके अलावा, शिशु के लिए फॉर्मूला मिल्क की तुलना में ब्रेस्ट मिल्क पचाना आसान होता है। कई बार फॉर्मूला मिल्क से शिशू को कब्ज व गैस की परेशानी हो सकती है।

क्या मैं शिशु को ब्रेस्ट मिल्क और फॉर्मूला मिल्क दोनों दे सकती हूं?

ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क
शिशु को स्तनपान कराते हुए महिला

डॉक्टर्स शिशु के जन्म के बाद पहले छह महीने तक विशेषरूप से ब्रेस्टफीडिंग कराने की सलाह देते हैं। शिशु को सर्वोत्तम पोषण माँ के दूध से ही मिल सकता है। शुरुआती छह महीने में शिशु को फॉर्मूला मिल्क देने से स्तनपान बाधिक हो सकता है। इससे ब्रेस्ट मिल्क में भी कमी आ सकती है। हालांकि, कुछ महिलाएं शिशु को ब्रेस्ट मिल्क अच्छी तरह से पिलाने के बाद फॉर्मूला मिल्क भी पीने के लिए देती हैं।

इस लेख को पढ़ने के बाद आप शिशु के लिए ब्रेस्ट मिल्क और फॉर्मूला मिल्क में क्या बेहतर है, यह अच्छे से जान गए होंगे। इसलिए, यदि आपको बच्चे को फॉर्मुला मिल्क देने की जरूरत लगती है, तो इसकी मात्रा को लेकर एक बार बाल चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। हालांकि, हमारी आपको यही राय है कि शिशु को शुरुआती छह महीने तक सिर्फ ब्रेस्टमिल्क ही दें।

चित्र स्रोत: Freepik

14 Jun 2022

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