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Hindi Thriller Movies – किसी हाल में मिस नहीं करनी चाहिए बॉलीवुड की ये टॉप 15 बेहतरीन थ्रिलर फिल्में

Hindi Thriller Movies – किसी हाल में मिस नहीं करनी चाहिए बॉलीवुड की ये टॉप 15 बेहतरीन थ्रिलर फिल्में

बॉलीवुड फिल्मों में जहां लोगों को रोमांटिक फिल्में काफी पसंद आती हैं, वहीं थ्रिलर फिल्मों को मनोरंजन की श्रेणी में सबसे ऊपर माना जाता है। ऐसी ही कुछ बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों की लिस्ट हम यहां पेश कर रहे हैं, जिन्हें आपको बिलकुल मिस नहीं करना चाहिए।

Best Hindi Thriller Movies

  • वजीर (2016)
  • कहानी- 2 (2016)
  • रहस्य (2015)
  • दृश्यम (2015)
  • एन-एच 10 (NH10) (2015)
  • डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी (2015)
  • स्पेशल 26 (2013)
  • अग्ली – Ugly (2013)
  • कहानी (2012)
  • तलाश (2012)
  • 404 (2011)
  • कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (2010)
  • ए वेडनसडे A Wednesday! (2008)
  • जॉनी गद्दार (2007)
  • मनोरमा सिक्स फीट अंडर (2007)

वजीर (2016)

यह एक थ्रिलर फिल्म है जिसे शतरंज के खेल से जोड़ा गया है। रियल लाइफ में शतरंज के खेल की तरह बिसात बिछाई जाती है और एक अदना-सा प्यादा, बादशाह को मात देता है। प्यादे की ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि एक जगह पहुंचने के बाद वह वज़ीर जैसा ताकतवर हो जाता है। वजीर फिल्म की शुरुआत जबर्दस्त है, कहानी की रफ्तार तेज और पूरी तरह से ट्रैक पर है। वजीर की सबसे बड़ी खासियत अमिताभ बच्चन और फरहान अख्तर की बेहतरीन ऐक्टिंग है।

कहानी- 2 (2016)

कहानी 2 एक डार्क मूवी है, जिसमें थोड़ा रहस्य है, थोड़ा रोमांच है, कुछ खूबियां हैं तो कुछ कमजोरियां भी। सुजॉय घोष द्वारा निर्देशित फिल्म ‘कहानी’ (2012) बॉलीवुड की बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में से एक है। सुजॉय ने साबित किया कि बिना चेजिंग सीन, गन, स्टाइलिश लुक और लार्जर देन लाइफ के भी एक थ्रिलर फिल्म बनाई जा सकती है। कहानी पार्ट टू में नई कहानी और किरदार हैं। विद्या बागची इस बार विद्या सिन्हा (विद्या बालन) है, जिसकी बेटी मिनी का अपहरण हो जाता है और विद्या उसे ढूंढने निकलती है। रास्ते में वह दुर्घटना का शिकार होकर कोमा में पहुंच जाती है। मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह (अर्जुन रामपाल) अस्पताल पहुंचता है और वह विद्या की पहचान दुर्गा रानी सिंह के रूप में करता है जो एक अपराधी है जिसकी पुलिस को लंबे समय से तलाश है। क्या विद्या और दुर्गा एक ही है? दुर्गा अपराधी क्यों बनी? इंद्रजीत सिंह उसे कैसे जानता है? धीरे- धीरे सारी गुत्थियां सुलझती जाती हैं।

रहस्य (2015)

मनीष गुप्ता के निर्देशन में बनी फिल्म ‘रहस्य’ के बारे में निर्देशक ने भले ही कहा था कि इसकी कहानी आरुषि हत्याकांड पर आधारित नहीं है। लेकिन फिल्म देखकर यह जाहिर है कि फिल्म आरुषि केस से ही प्रभावित है। अंतर बस यह है कि यहां कहानी दिल्ली के बजाए मुंबई में घटती है। फिल्म में कत्ल की गई बच्ची आयशा की भूमिका निभाई है साक्षी सेम ने। आशीष विद्यार्थी और टिस्का चोपड़ा डॉक्टर मां-बाप के किरदार में हैं। जबकि केके मेनन बने हैं सीबीआई ऑफिसर, जो पूरे मामले की पड़ताल करते हैं।

दृश्यम (2015)

दृश्यम् वर्ष 2015 की निर्देशक निशिकांत कामत की थ्रिलर-ड्रामा आधारित बॉलीवुड फिल्म है। फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में अजय देवगन, श्रिया सरन एवं तब्बू सम्मिलित हैं और निर्माता की भागीदारी में कुमार मंगत पाठक, अजीत आंध्रे और अभिषेक पाठक सम्मिलित है। यह 2013 की मूल लेखक जीतु जोसेफ की मलयालम संस्करण फिल्म ‘दृश्यम’ की आधिकारिक हिन्दी रूपांतरण हैं।  फिल्म में अजय देवगन की पत्नी के किरदार में तमिल अभिनेत्री श्रेया सरन हैं। इसके अलावा फिल्म में अभिनेत्री तब्बू भी अहम किरदार निभा रही हैं।

एन-एच 10 (NH10) (2015)

नवदीप सिंह द्वारा निर्देशित एन एच 10 एक भारतीय क्राइम थ्रिलर फिल्म है, जिसमें चतुराई से भारत में महिलाओं की स्थिति, पुरुष प्रधान समाज की विसंगतियां, ऑनर किलिंग और भारत में कानून की स्थिति को दर्शाया गया है। इसके मुख्य पात्रों में अनुष्का शर्मा और नील भूपलम हैं और इसके साथ ही अनुष्का शर्मा ने प्रोडक्शन में अपना डेब्यू किया है। यह फ़िल्म एक जोड़े के रोड ट्रिप को दर्शाती है जोकि खतरनाक गुंडों के साथ मिल जाने से अस्त व्यस्त हो जाता है।

डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी (2015)

फिल्‍म डिटेक्टिव ब्‍योमकेश बख्‍शी भारत के पहले जासूस के कारनामे पर बनी बॉलीवुड फिल्म है जिसे बंगाल के बेस्‍टसेलर लेखक शरादिंदो बंधोपध्‍याय ने बनाया है। दिबाकर बनर्जी द्वारा निर्देशित इस फिल्‍म में द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान 1940 के कलकत्‍ता को दिखाया गया हैा इसमें ब्‍योमकेश बख्‍शी के पहले साहसिक काम को दिखाया गया हैा वह कॉलेज से नया नया ही निकला है और वह अपने लिए गड्ढा तब खोद लेता है जब वह एक दुष्‍ट बुद्धिमान से मिलता है जो कि दुनिया का विनाश करना चाहता है। कत्‍ल की दुनिया में जिस खतरनाक अपराधी को दुनिया ने देखा है और जहां अंतर्राष्‍ट्रीय राजनीतिक साजिश और लालच है, वहां ब्‍योमकेश अपनी बुद्धिमत्‍ता से उस खतरनाक अपराधी तक पहुंचने की कोशिश करता है।

स्पेशल 26 (2013)

स्पेशल 26 एक ऐसी थ्रिलर फिल्म है, जिसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं है और यह फिल्म अस्सी के दशक में घटी कुछ ठगी की घटनाओं पर आधारित है। काला धन जमा करने वाले नेताओं और व्यापारियों के यहां कुछ लोगों का एक गैंग नकली सीबीआई ऑफिसर या इनकम टैक्स ऑफिसर बन छापा मारता है और नकद-गहने जब्त कर लेता है। बात इसलिए बाहर नहीं आती थी क्योंकि शिकार खुद अपराधी हैं। इन चालाक अपराधियों को ‘स्पेशल 26’ में हीरो बनाकर पेश किया है क्योंकि वे एक तरह से रॉबिनहुड की तरह हैं जो अमीरों को लूटते थे। यहां चोर और पुलिस दिमागी चालों से एक-दूसरे का सामना करते हैं।

अग्ली – Ugly (2013)

अनुराग कश्यप की फिल्मों को देखते समय कई सवाल और कई कहानियां एक साथ चलती हैं। इनसान के स्याह और सफेद पक्ष दोनों सामने आते हैं। कहानी में नयापन होता है और बहुत ही सामान्य-सी स्टारकास्ट के साथ बड़ा कमाल होता है। ऐसा ही कुछ ‘अग्‍ली’ में भी है। अनुराग की अधिकतर फिल्मों की तरह यह भी डार्क मूवी है, लेकिन कहानी बहुत ही आसान और बांधने वाली है। अनुराग ने इस फिल्म में मानवीय भावनाओं को उभारा है और आधुनिक जीवन की त्रासदियां और रिश्तों की जटिलताएं दर्शाई हैं। इस कहानी में एक 10 साल की बच्ची है, जो किडनैप हो जाती है। फिल्म के पात्रों के जीवन की कई सचाइयों को पेश करती जाती है और कहानी आपको बांधने लगती है। यह फिल्म बॉलीवुड की आम फिल्मों से एकदम उलट है। न लाउड म्यूजिक और न नाच-गाना।

कहानी (2012)

कहानी एक थ्रिलर फिल्म है, लेकिन बॉलीवुड की दूसरी तमाम थ्रिलर्स से बिलकुल अलग हटकर। इस फिल्म की कहानी हीरोइन के इर्दगिर्द घूमती है जो कि प्रेग्नेंट हैं। उसके साथ एक सामान्य-सा पुलिस ऑफिसर है और सिटी ऑफ जॉय कोलकाता शहर भी इस फिल्म में अहम भूमिका निभाता है। सेतु ने कोलकाता की गलियों में खूब कैमरा घूमाया है। संकरी गलियां, शानदार मेट्रो, खस्ताहाल ट्रॉम, पीले रंग की टेक्सियां, अस्त-व्यस्त ट्रैफिक और दुर्गा पूजा के लिए सजा हुआ कोलकाता कहानी में एक किरदार की तरह है। कहानी का सबसे मजबूत पहलू इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले है।

तलाश (2012)

तलाश एक अच्छी थ्रिलर फिल्म है, जिसमें पुलिस ऑफिसर सुर्जन शेखावत (आमिर खान) एक फिल्म स्टार की कार दुर्घटना में हुई मौत की जांच कर रहा है। साथ ही अपनी पर्सनल लाइफ में वह बुरे हालात से गुजर रहा है। उसके आठ वर्षीय बेटे की मौत हो गई है, जिसके कारण उसकी पत्नी रोशनी (रानी मुखर्जी) और उसके संबंध अब ठीक नहीं रहे हैं। क्लाइमेक्स में जब सारी रहस्य खुलते हैं तो दर्शक चौंक जाते हैं क्योंकि इस तरह के अंत की उन्होंने उम्मीद नहीं की होगी। पूरी फिल्म में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है कि यह जिंदगी के करीब लगे।

404 (2011)

हॉरर को लेकर हो रहे तरह-तरह के प्रयोगों के दौर में फिल्म 404 एक अच्छी फिल्म है, जिसमें विज्ञान और परालौकिक शक्तियों के द्वंद्व को काफी इंटेलिजेंट ढंग से दिखाया गया है। फिल्म की शुरुआत दर्शाती है कि प्रवाल ने ये फिल्म बी-टाउन के रुटीन हॉरर मेनिया से हट कर बनाई है। डर के दृश्यों को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने तेज म्युजिक का सहारा नहीं लिया है, फिर भी फिल्म की कहानी में रहस्य बना रहता है।

कार्तिक कॉलिंग कार्तिक (2010)

सस्पेंस थ्रिलर फिल्म कार्तिक कॉलिंग कार्तिक के अंत से आप भले ही सहमत ना हो, लेकिन उम्दा प्रस्तुतिकरण और बेहतरीन अभिनय के कारण यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। फिल्म के राइटर और डायरेक्टर विजय ललवानी ने कहानी को स्क्रीन पर अच्छे से पेश किया है। फिल्म बांधकर रखती है और दर्शक का फिल्म में इंट्रेस्ट बना रहता है। फिल्म का लुक यूथफुल है और मेट्रो कल्चर को कैरेक्टर अच्छी तरह से पेश करते हैं। फरहान और दीपिका के रोमांस को बेहतरीन तरीके से पेश किया गया है। दोनों की कैमेस्ट्री अच्छी लगती है। एक हॉट तो दूजा कूल।

ए वेडनसडे A Wednesday! (2008)

फिल्म ‘ए वेडनसडे’ एक आम आदमी की अवस्था और ताकत की बात करती है। इस फिल्म में एक बुधवार को मुंबई में दोपहर 2 से 6 बजे के बीच होने वाली घटनाओं को दर्शाया गया है। ऐसी घटनाएं जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। फिल्म की कहानी प्रभावशाली है। लेखक और निर्देशक नीरज पांडे ने इसे बेहतरीन तरीके से परदे पर प्रस्तुत किया है। पूरी फिल्म अंत तक बांधकर रखती है। कई उतार-चढ़ाव आते हैं और हर कदम पर नई चुनौती सामने आती है। डेढ़ घंटे की इस फिल्म में न कोई गाना है, न कोई मसाला है और न ही फालतू दृश्य। नसीरूद्दीन शाह की यादगार फिल्मों में ‘ए वेडनेसडे’ का नाम भी जरूर शामिल होगा।

जॉनी गद्दार (2007)

‘जॉनी गद्दार’ एक बेहतरीन थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की कहानी जेम्स हैडली चेज़ के उपन्यास को आधार बनाकर लिखी गई है। पूरी फिल्म सिंगल ट्रैक पर चलती है। कोई कॉमेडी नहीं। कोई रोमांस नहीं। कोई नाच-गाना नहीं, इसके बावजूद फिल्म बोर नहीं करती और दर्शक को बांधे रखती है। फिल्म के हर कलाकार ने शानदार अभिनय किया है। नील मुकेश ने अपने कॅरियर की शुरूआत नकारात्मक भूमिका से की है, लेकिन उन्हें शानदार रोल मिला है।

मनोरमा सिक्स फीट अंडर (2007)

निर्देशक नवदीप सिंह ने अभय को लेकर ‘मनोरमा : सिक्स फीट अंडर’ फिल्म बनाई है। इस फिल्म में थ्रिल और मर्डर मिस्ट्री के साथ-साथ मनुष्य और समाज से जुड़े कुछ मुद्दे भी उठाए गए हैं। यह एक ऐसे गैरपेशेवर जासूस  की कहानी है जो एक मामले की तह में जाने की कोशिश करते- करते उसमें ही फंस जाता है। इसके बाद फिल्म में कई सवाल सामने आते हैं जैसे – क्या जासूस यानि एसवी के खिलाफ कोई साजिश हो रही है? क्या वह झूठ और हत्या के जाल में फंस जाएगा? इन सवालों के जवाब धीरे- धीरे सामने आते हैं।

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