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रियल लाइफ मॉम स्टोरीज

माँ बनने वाली हैं, तो जरूर पढ़ें इन महिलाओं की रियल प्रेग्नेंसी स्टोरी

हर महिला के लिए माँ बनना एक सुखद एहसास है, लेकिन नौ महीने का यह सफर कितना तकलीफदेह होता है, यह सिर्फ एक महिला ही महसूस कर सकती है। माँ बनने के बाद जो शारीरिक और मानसिक मुश्किलें खड़ी होती हैं, उसका दर्द का अंदाजा एक गर्भवती को ही होता है। इस सफर के दौरान महिलाओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जो उन्हें लाइफ में नया अनुभव भी देता है। आज हम आपके साथ कुछ रियल लाइफ मॉम स्टोरीज शेयर करेंगे। 

यह परेशानियां गर्भावस्था तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि माँ बनने के बाद भी महिलाओं को कई तकलीफों से गुजरना पड़ता है। इनमें छोटी-छोटी कई शारीरिक परेशानी शामिल है, जो बड़ा दर्द देती हैं। महिलाओं के पास माँ बनने के बाद पहले जैसी शारीरिक ताकत भी नहीं रहती है। इस आर्टिकल में रियल लाइफ मॉम से उनकी प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस स्टोरीज के बारे में जानेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि इन महिलाओं के प्रेग्नेंसी एक्‍सपीरियंस से दूसरी गर्भवती महिलाओं को कुछ मदद मिले।

रियल लाइफ मॉम स्टोरीज (Real Life Mum Experience in Hindi)

गर्भावस्था के नौ महीने के सफर को लेकर हमने कुछ महिलाओं से बात की। यहां हम उन्हीं में से कुछ रियल लाइफ मॉम की प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस स्टोरीज शेयर कर रहे हैं।

1. पूनम रावत

रियल लाइफ मॉम स्टोरीज
अपने परिवार के साथ पूनम रावत

पूनम रावत एक पत्रकार हैं। अपने गर्भावस्था के सफर का अनुभव साझा करते हुए पूनम ने बताया कि उन्हें जब यह मालूम हुआ था कि वह गर्भवती हैं, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। परंतु, कुछ दिन बाद जब उन्हें उल्टी व जी मिचलाने की शिकायत होने लगी तो उनका यह अनुभव बहुत खराब था।

उन्होंने बताया कि फिल्मों में उल्टी और गर्भावस्था के कनेक्शन को खूबसूरती से परोसा जाता है। देखने में तो यह बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असल जिंदगी में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। इस बात का अहसास उन्हें खुद प्रेग्नेंट होने के बाद हुआ। कुछ भी खाया नहीं जाता था, न कोई काम करने की इच्छा होती थी। माँ और सास को बताया तो वो हंसकर टाल दिया करती थी। दोनों बस एक ही बात बोलती थीं कि ऐसा तो सबके साथ होता है।

पूनम ने बताया, “मैंने डॉक्टर से कंसल्ट किया। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था की पहली तिमाही तक ये लक्षण ऐसे ही बने रहेंगे। जैसे-तैसे मैंने गर्भावस्था के तीन महीने काट लिए। दूसरी तिमाही आई और अभी भी उल्टी, खाना न पचना व कुछ खाया न जाना आदि का सिलसिला चलता रहा।

इस बात से परेशान होकर मैंने एक बार फिर अपनी डॉक्टर को दिखाया। तब मुझे मालूम हुआ कि कुछ महिलाओं को ये लक्षण पूरी गर्भावस्था के दौरान बने रहते हैं और मेरा केस भी वही था। गर्भावस्था के नौ महीनों के सफर में इन लक्षणों के चलते मैं कई बार टूट गई थी। मेरे लिए ये नौ महीने बिल्कुल आसान नहीं थे।” 

2. शालिनी बेदी

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शालिनी बेदी

शालिनी बेदी उत्तराखंड की रहने वाली हैं। अपने प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस में उन्होंने बताया कि यह अहसास उनके लिए बहुत खास था। शालिनी ने बताया कि गर्भावस्था में उल्टी, चक्कर, सिर घूमना, जी मिचलाना आदि लक्षण सामान्य हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें हद से ज्यादा मूड स्विंग होते थे। उन्हें भी अपने इस लक्षण को समझने में काफी समय लग गया था।

शालिनी ने बताया, “मैं रसोई में खाना बताते-बनाते, तो कभी टीवी देखते समय रोने लगती थी। अपनी पसंद का खाना बनाती और जब बन जाए तो उसे खाने का मन नहीं होता था। शुरुआत में मेरी सास और पति मेरे इस व्यवहार को समझ नहीं पाते थे। मुझे खुद भी समझ नहीं आता था कि छोटी-छोटी बातों को लेकर मैं क्यों इतना उदास हूं। क्यों हर समय मैं इतनी चिड़चिड़ी रहने लगी हूं। 

फिर एक दिन मेरे पति ने मेरे डॉक्टर से इन लक्षणों पर चर्चा की। डॉक्टर ने हमें बताया कि यह भी गर्भावस्था के लक्षण हैं। मेरे पति को डॉक्टर ने मेरा अच्छे से ख्याल रखने के लिए कहा। परिवार के लोगों और मेरे पति ने मेरा इस कदर ध्यान रखा कि यह सफर कब पूरा हो गया मुझे मालूम ही नहीं हुआ। 

इसलिए मैं हर किसी को यह सलाह देना चाहती हूं कि यदि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान मूड स्विंग से जूझ रही है, तो ऐसे समय में परिवार को उसे समझना चाहिए व उसके साथ खड़ा होना चाहिए।”

3. मेघा गुप्ता

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मेघा गुप्ता

मेघा गुप्ता बताती हैं  कि गर्भावस्था की पहली तिमाही ज्यादातर महिलाओं के लिए कष्टदायी होती है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे अभी ये हाल है तो आने वाले समय में क्या होगा। परंतु उनके केस में ऐसा नहीं था। पहली और दूसरी तिमाही कैसे निकल गई, इसका उन्हें पता ही नहीं चला। 

पहली और दूसरी तिमाही के दौरान उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं हुई, लेकिन तीसरी तिमाही आते-आते उनकी हालत खराब होने लग गई थी। वजन बढ़ने के कारण वह सो नहीं पाती थी, जिस वजह से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। 

मेघा ने बताया, “गर्भावस्था की पहली दो तिमाही मेरे लिए जितनी आसान थी आखिरी तिमाही में मुझे उतनी ही ज्यादा तकलीफ हुई थी। बस अच्छी बात ये थी कि मेरे साथ ऐसे समय में मेरी सास और पति खड़े थे। दोनों ने मुझे बहुत अच्छे से संभाला। ऐसे समय में अगर आपका पति और परिवार आपके साथ होता है, तो आपके लिए हर परेशानी को पार करना आसान हो जाता है।”

4. मनीषा देशभरतर

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मनीषा देशभरतर

मनीषा आईटी कंपनी में काम करती हैं। उन्होंने बताया कि वह घर से दूर बैंगलोर में पति के साथ रहती हैं। गर्भावस्था के शुरुआती समय उनके साथ उनकी माँ या सास नहीं थे। जैसे सबको पहली तिमाही में उल्टी, खाना न खा पाना, सिर चकराना जैसे लक्षण होते हैं, वह उनके साथ भी हुआ। उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंट होने से पहले उन्होंने गर्भावस्था पर कई किताबें पढ़ी थी, जिस वजह से गर्भावस्था में होने वाले इन लक्षणों के लिए वह पहले से तैयार थी। 

मनीषा की कहानी में ट्विस्ट तब आया जब एक दिन वह दवा खा रही थी और तभी उनके पति ने उन्हें रोका और पूछा कि तुमने कुछ देर पहले तो यह दवा ली थी। फिर अगले दिन वह किचन में खाना गैस पर रखकर भूल गई। वह हर बार इस चीज को अनदेखा कर रही थी। ऐसे ही बहुत सारे किस्से हुए, तो मनीषा के पति उन्हें उनकी गायनो के पास लेकर गए।

मनीषा की बताया, मेरी डॉक्टर ने बताया कि यह भी गर्भावस्था का एक लक्षण है। गर्भावस्था के दौरान दिमाग के हार्मोन्स में कई बदलाव होते हैं, जिस वजह से कुछ महिलाओं की याददाश्त कमजोर हो जाती है। इसके बाद मैं अपने साथ हमेशा एक नोटपेड रखती थी। मैं दिनभर जो भी काम करने वाली होती थी या कर चुकी होती थी, इसकी रोजाना एक सूची तैयार करती थी।”

5. मौसमी दत्ता

प्रेग्नेंसी एक्सपीरियंस स्टोरीज
मौसमी दत्ता

मौसमी दत्ता की कहानी भी दूसरी गर्भवती महिलाओं की तरह ही है। उनकी कहानी भी कुछ-कुछ पूनम रावत से मिलती जुलती है। उनके केस में भी गर्भावस्था की पहली तिमाही से अंतिम दिन तक उल्टी और जी मिचलाने जैसी परेशानियों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। 

मौसमी घर से दूर मुंबई में नौकरी करती हैं। तीसरी तिमाही में मौसमी को ससुराल जाना पड़ा था और वहाँ के डॉक्टर ने उन्हें गलत दवा दे दी, जिस वजह से उनके शरीर में फ्लुइड की कमी हो गई थी। इसके चलते मौसमी और उनके बच्चे की स्थिति काफी गंभीर हो गई थी। 

मौसमी की डिलीवरी में 20 दिन बचे थे, लेकिन मौसमी की बिगड़ती हालत को देखते हुए उनके माता-पिता उन्हें दूसरे डॉक्टर्स के पास लेकर गए। डॉक्टर्स ने उनकी तत्काल सिजेरियन डिलीवरी करने का फैसला लिया।

मौसमी बताती हैं कि गर्भावस्था के सफर के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें टेस्ट बड खराब होने से हुई। वह किसी भी खाने का लुत्फ नहीं उठा पाती थी। उस समय बस उन्हें घी, चावल और परवल के अलावा कुछ देखने का मन नहीं करता था। इतनी परेशानियों के बीच में उनके लिए सुखद पल रात को आता था, जब उनका बेबी एक्टिव होता था।

हर माँ के लिए उसके बच्चे का स्पर्श या किक मारने का एहसास बड़ा ही सुखद होता है। मौसमी का बेबी रात को बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता था। 

मौसमी बताती हैं, “गर्भावस्था के दौरान एसिडिटी की समस्या से राहत पाने के लिए मैं गुनगुने पानी के साथ अजवाइन का सेवन करती थी। बार-बार उल्टी के कारण शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए मैं मौसंबी का जूस, नींबू पानी और ओआरएस का घोल पीती थी। मौसंबी का जूस पीने के कारण बच्चे को जन्म लेने के बाद पीलिया होने का खतरा कम होता है, जो कि आम तौर पर शिशु को जन्म लेने के बाद होता है।”

6. पल्लवी त्यागी

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पल्लवी त्यागी

पल्लवी त्यागी एक प्रोफेसर हैं। अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी को वह बेहद खास मानती हैं। वह बताती हैं कि गर्भावस्था के समय वह ऑनलाइन दूसरी महिलाओं की प्रेग्नेंसी जर्नी के वीडियो देखा करती थी। वह गर्भावस्था के हर दिन खुद के लिए इतना खास महसूस करती थी, जिसे वह शब्दों में पिरो नहीं सकती हैं। 

गर्भावस्था के दौरान होने वाले हर अल्ट्रासाउंड को वह बार-बार देखती थी कि उनका बच्चा कितना बड़ा हो गया है। उन्हें इंतजार रहता था कि बेबी से मिलने में कितना समय बचा है।

गर्भावस्था के दौरान उन्हें भी दूसरी महिलाओं की तरह मॉर्निंग सिकनेस हुई, लेकिन उन्होंने इसका हंसकर सामना किया। वह बच्चे के आने की खुशी में इन सब पर इतना ध्यान ही नहीं दे पाती थी। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के समय उन्हें बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता था। उन्हें हर दूसरे मिनट टॉयलेट लगने का एहसास होता था। वह कुछ भी खा नहीं पाती थी। उनका खाना देखने तक का मन नहीं करता था। यहां तक कि इंस्टाग्राम पर खाने की फोटोज देखकर भी जी मिचलाता था।

पल्लवी ने बताया, “मुझे हर चीज की गंध से परेशानी होती थी। घर में खाना बनता था तो मैं घर से बाहर चली जाती थी। बाजार में या मेट्रो में किसी के परफ्यूम की खूशबू मुझसे बर्दाश्त नहीं होती थी। फिर आखिरकार मेरी डिलीवरी का दिन आया। मैंने जितने प्रेग्नेंट महिलाओं के वीडियो देखे थे व लोगों से बात कि थी, हर कोई प्रसव में होने वाले दर्दनाक अनुभव के बारे में बात करता था। कोई भी यह नहीं बताता कि बच्चे को जन्म देना एक महिला के लिए कितना खूबसूरत और खास अनुभव है। ऑपरेशन रूम में अचिंत्य के जन्म का वो अनुभव मेरे लिए बेहद खास है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती।”

इस ब्लॉग में आपने 6 अलग-अलग महिलाओं की प्रेग्नेंसी स्टोरी पढ़ी। उम्मीद करते हैं गर्भावस्था का इनका सफर आपके लिए ज्ञानवर्धक साबित होगा। अगर आपमें से भी किसी की गर्भावस्था की कहानी ऐसी है, जिसे आप पाठकों के साथ शेयर करना चाहती हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में आप अपनी प्रेग्नेंसी स्टोरी साझा कर सकती हैं।

06 Apr 2022

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