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गर्भावस्था मिथक

ये 5 अजीबोगरीब मिथक गर्भावस्था के बारे में महिलाओं को पता होने चाहिए

महिलाओं का प्रेग्नेंट होना उनकी जिंदगी का सबसे स्पेशल और अनफॉरगेटेबल पीरियड होता है। इस पीरियड में गर्भवती महिलाएं खुद का और गर्भ में पल रहे शिशु का पूरा ख्याल रखने की कोशिश करती हैं। इन दिनों में उन्हें आस-पास के लोगों से कई तरह की सलाह मिलना आम बात है। लेकिन, आपको ध्यान रखना होगा कि कुछ बातें सिर्फ गर्भावस्था मिथक हैं।

प्रेग्नेंसी पर मिलने वाली अलग-अलग राय और नसीहत से कई बार महिलाएं कन्फ्यूज हो जाती हैं। ऐसे में वे अपना ख्याल अच्छे से रखने के बाद भी भटक जाती हैं और ‘जितने मुंह-उतनी बातें’ वाली स्थिति उन्हें भ्रम में डाल देती हैं। 

अगर आप भी ऐसी ही बातों से परेशान हैं, तो अब आप बिल्कुल निश्चिंत रहिए। क्योंकि इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं गर्भावस्था से जुड़े उन पांच अजीबोगरीब मिथक के बारे में, जो बिल्कुल भी सच नहीं हैं। अगर आप प्रेग्नेंट हैं और प्रेग्नेंसी से जुड़े अजीबोगरीब मिथक ने आपको उलझा दिया है तो यह लेख आपके लिए बहुत काम का साबित हो सकता है।

गर्भावस्था मिथक और इनकी सच्चाई (Pregnancy Myths And Facts In Hindi)

अकसर गर्भवती महिलाओं को आस-पास से मिलने वाली हिदायतों के चलते कुछ बातों को लेकर मन में असंमजस की स्थिति बन जाती है। नीचे कुछ ऐसी ही 5 गर्भावस्था मिथक के बारे में बता रहे हैं। इन बातों का सच हर महिला को पता होना चाहिए।

1. गर्भावस्था के दौरान नारियल और केसर का सेवन करने से बच्चा गोरा होता है

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गर्भावस्था में नारियल पानी

हां, गर्भावस्था में सीमित मात्रा में केसर और नारियल खाने के फायदे हासिल किए जा सकते हैं। एक तरफ केसर गर्भवती के रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ घबराहट से राहत प्रदान करता है। वहीं, नारियल से गर्भवती महिला को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। परंतु, इन दोनों चीजों का बच्चे के रंग से कुछ लेना देना नहीं है। बच्चे का रंग आनुवांशिकता से जुड़ा होता है। 

2. पपीते का सेवन करने से मिसकैरेज का जोखिम होता है

घर के बड़े बुजुर्गों के मुंह से गर्भवती को कई बार पपीते से परहेज करने के लिए कहते सुना होगा। यहां तक कि जागरुक लोग भी इस बात को सच मान लेते हैं। इस मिथक की सच्चाई यह है कि कच्चे व अधपके पपीते में लैटेक्स उच्च मात्रा में मौजूद होता है। इससे ऑक्सीटोसिन और प्रोस्टाग्लैडिंस नामक हार्मोन एक्टिव हो सकते हैं, जिससे असमय संकुचन हो सकता है। 

कई शोध में इस बात की पुष्टि होती है कि प्रेग्नेंसी के दौरान पका हुआ पपीते का सेवन किया जा सकता है। पपीता गर्भावस्था के दौरान होने वाली कब्ज, उल्टी, गैस व सीने में जलन की शिकायत को दूर कर सकता है। लेकिन डॉक्टर से सलाह लेकर नियंत्रित मात्रा में खाना सुरक्षित होता है

3. बेबी बंप से लड़का या लड़की का पता लगाना

ऐसी धारणा है कि यदि बेबी बंप नीचे की तरफ झुका है तो लड़का और बेबी बंप ऊपर की तरफ उठा है तो यह लड़की का इशारा देता है। इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। बेबी बंप पेट के वास्तविक आकार और गर्भ में बच्चे की पोजिशन पर निर्भर करता है। इसके अलावा, पहली प्रेग्नेंसी है या दूसरी, बेबी बंप के आकार का एक फैक्टर यह भी होता है । जैसे दूसरी प्रेग्नेंसी में बेबी बंप पहली प्रेग्नेंसी से बड़ा होता है।

4. देसी घी खाने से डिलीवरी आसान होती है

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गर्भावस्था में घी का सेवन

कई लोगों का मानना है कि गर्भावस्था के आखिरी कुछ हफ्तों में घी का सेवन वजाइना को लुब्रिकेट कर डिलीवरी को आसान बनाता है। यह भी एक मिथ है। हां, घी में कई तरह के गुण होते हैं, जो गर्भावस्था में पोषण प्रदान कर सकते हैं। हालांकि इसका सीमित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसमें वसा की मात्रा अधिक होती है। अधिक मात्रा में घी खाने से गर्भवती का वजन बढ़ेगा। इससे प्रसव में मुश्किल पैदा हो सकती है।

5. प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाने से बच्चे को होगा नुकसान

कई लोग कहते हैं कि गर्भावस्था के दौरान संबंध बनाने से बच्चे को चोट पहुंच सकती है। इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। गर्भ में बच्चे को एमनियोटिक सेक और यूटेरिन मांसपेशियां सुरक्षा प्रदान करते हैं। वास्तव में गर्भावस्था में संबंध बनाने से इसलिए मना किया जाता है क्योंकि इससे इंफेक्शन होने का खतरा होता है। वहीं, कुछ मेडिकल कंडिशन में चिकित्सक प्रेग्नेंसी के दौरान संबंध बनाने से मना कर सकते हैं।

लेख में आपने 5 गर्भावस्था मिथक के बारे में जाना, जिन्हें सुनकर कई गर्भवती महिलाओं के मन में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। उम्मीद करते हैं आपके मन में इन सवालों को लेकर अब किसी तरह का कोई संशय नहीं होगा। इस लेख को ज्यादा से ज्यादा गर्भवती महिलाओं संग शेयर कर उन्हें भी इन मिथक के सच से रूबरू कराएं। हैप्पी प्रेग्नेंसी।

चित्र स्रोत: Freepik/Pexel

12 Apr 2022

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