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Poem on Independence Day in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर वीर रस की कविता

{30+ Best} Poem on Independence Day in Hindi | 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर कविता

भारत का स्वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को पूरे देश में मनाया जाता है। यह दिन हर भारतीय को एक नई शुरुआत, एक नए युग की शुरुआत की याद दिलाता है। 200 से अधिक सालों के ब्रिटिश रूल के चंगुल से मुक्ति भारत को इसी दिन प्राप्त हुई थी। 15 अगस्त 1947 को भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्वतंत्र घोषित किया गया था, और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई थी। भारत की स्वतंत्रता प्राप्त करना नियति के साथ एक प्रयास था, क्योंकि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष काफी एक लंबा था, जिसमें कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगा दी। उनके बलिदानों को याद रखने के लिए 15 अगस्त से बेहतर दिन और भला क्या हो सकता है। अगर आप भी इस खास मौके को दोगुना स्पेशल बनाने चाहतें हैं और अपने साथ दोस्तों, रिश्तेदारों और जानने वालों को देश भक्ति के मायने समझाना चाहते हो तो उन्हें (Poem on Independence Day in Hindi) स्वतंत्रता दिवस कविता शेयर करें। 

Poem on Independence Day in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर कविता इन हिंदी 

Poem on Independence Day in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर कविता इन हिंदी 
Poem on Independence Day in Hindi

स्वतंत्रता दिवस को पूरे भारत में ध्वजारोहण समारोह, भारतीय राष्ट्रगान के गायन के साथ चिह्नित किया जाता है। इसके अलावा राज्यों की राजधानियों में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी कराया जाता है। पुरानी दिल्ली में लाल किले के ऐतिहासिक स्मारक पर ध्वजारोहण समारोह में प्रधान मंत्री के भाग लेने के बाद, सशस्त्र बलों और पुलिस के सदस्यों के साथ एक परेड शुरू होती है। प्रधान मंत्री तब देश को संबोधित करते हैं, जिसमें पिछले वर्ष के दौरान भारत की प्रमुख उपलब्धियों का वर्णन किया जाता है और भविष्य की चुनौतियों और लक्ष्यों को रेखांकित किया जाता है। वहीं आमजन की बात करें तो कुछ लोग इस दिन सोशल मीडिया पर Independence Day Quotes in Hindi शेयर करते हैं। आप चाहें तो स्वतंत्रता दिवस पर वीर रस की कविता (Poems on Azadi in Hindi) के जरिये भी इस दिन को सेलिब्रेट कर सकते हैं।

  1. दुनिया में कुछ भी मुश्किल नहीं होता, मन में विश्वास होना चाहिए, बदलाव लाने के लिए, मन मिटने का भाव होना चाहिए। बात उस दौर की है जब भारत एक गुलाम था, हम पर हुकूमत था करता, वो ब्रितानी ताज था। जुल्म का स्तर कुछ इस प्रकार था की भरी दोपहर में अंधकार था, हर पल मन एक ही ख्याल सताता, कि अब अगला कौन शिकार था। किन्तु फिर भी मन में विश्वास था, क्योंकि कलम का ताकत पास था, जो मौखिक शब्द न कर पाते, ऐसे में ये एक शांत हथियार था।
  2. आक्रोश की ज्वाला धधक रही थी, आंदोलन बन के वो दमक रही थी, स्वतंत्रता की बात क्या उठी, चिंगारी शोले बन चमक रही थी। लिख-लिख कर हमने भी गाथा, दिलो में शोलों को भड़काया था, सत्य अहिंसा को हथियार बनाकर, अंग्रेजों को बाहर का मार्ग दिखाया था। आसान नहीं था ये सब कर पाना, इतने बड़े स्वप्न को साकार कर पाना, श्रेय तो जाता उन योद्धाओं को, जिन्होने रातों को भी दिन था माना। बहुत मिन्नतों बाद दिखा हमें, आजादी का ये सवेरा था, आओ मिलकर इसे मनाये, फहरा के आज तिरंगा अपना। भारत माता की जय।
  3. 15 अगस्त का दिन है आया, लाल किले पर तिरंगा है फहराना, ये शुभ दिन है हम भारतीयों के जीवन का, सन् 1947 में इस दिन के महान अवसर पर, वतन हमारा आजाद हुआ था। न जाने कितने अमर देशभक्त शहीदों के बलिदानों पर, न जाने कितने वीरों की कुर्बानियों के बाद, हमने आजादी को पाया था। भारत माता की आजादी की खातिर, वीरों ने अपना सर्वस्व लुटाया था उनके बलिदानों की खातिर ही, दिलानी है भारत को एक नई पहचान। विकास की राह पर कदमों को बस अब यूं-ही बढ़ाते जाना है। देश को बनाकर एक विकसित राष्ट्र एक नया इतिहास बनाना है। जाति-पाति, ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाना है, हर भारतवासी को अब अखंडता का पाठ सिखाना है, वीर शहीदों की कुर्बानियों को अब व्यर्थ नहीं गवाना है, राष्ट्र का बनाकर उज्ज्वल भविष्य अब, भारतीयों को आजादी का अर्थ समझाना है। जय हिन्द, जय भारत।
  4. लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर सौ सौ बार फिसलती है। मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना नहीं अखरता है। आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाते हैं, जा जा कर गहरे पानी में खाली लौट आते हैं।
  5. मिलते ना मोती सहज ही गहरे पानी में, बढ़ता दूना उत्साह इसी हैरानी में। मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो, कहां कमी रह गई देखो और सुधार करो।जब तक सफल न हो नींद चैन की त्यागो तुम, संघर्षो का मैदान छोड़ मत भागो तुम। किए कुछ बिना जय जयकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।जय हिन्द, जय भारत।

heart touching poem on independence day in hindi | दिल को छू लेने वाली स्वतंत्रता दिवस पर कविता

स्वतंत्रता दिवस पर कविता पढ़ना और उन्हें शेयर करना देशभक्ति के जज़्बात को और ज्यादा बढ़ा देता है। कई बार स्कूली बच्चों को भी कहा जाता है कि वो Poem on Independence Day in Hindi Language पढ़ें या भाषण तैयार करके लेकर आएं। इसके लिए आप हमारी मदद ले सकते हैं, नीचे पढ़ें स्वतंत्रता दिवस पर कविता यानि A Poem on Independence Day in Hindi।

  1. जब भारत आज़ाद हुआ था, आजादी का राज हुआ था, वीरों ने क़ुरबानी दी थी, तब भारत आज़ाद हुआ था, भगत सिंह ने फांसी ली थी|इंदिरा का जनाज़ा उठा था,इस मिटटी की खुशबू ऐसी थी,तब खून की आँधी बहती थी, वतन का ज़ज्बा ऐसा था,जो सबसे लड़ता जा रहा था|| लड़ते लड़ते जाने गयी थी| तब भारत आज़ाद हुआ था|| फिरंगियों ने ये वतन छोड़ा था| इस देश के रिश्तों को तोडा था|| फिर भारत दो भागो में बाटा था| एक हिस्सा हिन्दुस्तान था|| दूसरा पाकिस्तान कहलाया था| सरहद नाम की रेखा खींची थी|| जिसे कोई पार ना कर पाया था| ना जाने कितनी माँ रोइ थी, ना जाने कितने बच्चे भूके सोए थे, हम सब ने साथ रहकर,एक ऐसा समय भी काटा था|| वीरों ने क़ुरबानी दी थी तब भारत आज़ाद हुआ था||
  2. आज़ादी के साल हुए कई, पर क्या हमने पाया है. सोचा था क्या होगा लेकिन सामने पर क्या आया है, रामराज्य-सा देश हो अपना, बापू का था सपना, चाचा बोले आगे बढ़ कर, कर लो सब को अपना. आज़ादी फिर छीने न अपनी, दिया शास्त्री ने नारा, जय-जयकार किसान की अपनी, जय जवान हमारा, सोचो इनके सपनों को हम कैसे साकार करेंगे, भ्रष्टाचार हटा देंगे हम, आगे तभी बढ़ेंगे, मुश्किल नहीं पूरा करना, इन सपनों का भारत, अपने अन्दर की शक्ति को, करो अगर तुम जाग्रत, आओ मिलकर कसम ये खायें, ऐसा सभी करेंगे, शिक्षित हो अगर हर बच्चा, उन्नति तभी हम करेंगे।
  3. कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएंगे, आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे, हटने के नहीं पीछे, डरकर कभी जुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे, बेशस्त्र नहीं हैं हम, बल है हमें चरख़े का,चरख़े से ज़मीं को हम, ता चर्ख़ गुंजा देंगे, परवाह नहीं कुछ दम की, ग़म की नहीं, मातम की, है जान हथेली पर, एक दम में गंवा देंगे, उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे, तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे, सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका, चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे, दिलवाओ हमें फांसी, ऐलान से कहते हैं, ख़ूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे, मुसाफ़िर जो अंडमान के, तूने बनाए, ज़ालिम, आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

4 line poem on independence day in hindi | स्वतंत्रता दिवस पर 4 पंक्ति की कविता हिंदी में

साहित्य में कम शब्दों में अधिक भावनाओं को व्यक्त कर देना उच्च कोटि का लेखन माना जाता है, इसलिए नीचे दी गई देशभक्ति कविता (Rhyming Poem on independence Day in Hindi) में चार लाइनों में भावनाएं व्यक्त की गई हैं। यकीन मानिए ये सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति कविताएँ , Best Poem on Independence Day in Hindi) हैं।

  1. आज हम आजादी की गाथा, गाकर खूब सुनाएंगे। आजादी का अमृत महोत्सव, मिल कर आज मनाएंगे। कारगिल युद्ध की कहानी, सबको आज सुनाएंगे। हम शहीदों की आज, शहादत दिवस मनाएंगे। अग्रेजों से हमने भी, सीना तान लड़ी लड़ाई। फांसी के फंदे पर लटके और सीने पर गोली खाई। गांधी, सुभाष, भगत सिंह की, कुर्बानी मिलकर याद करेंगे। वीर शिवा जी, मंगल पांडे की, जवानी को याद करेंगे। नेहरु और सरदार पटेल की, आज हम गुन गाएंगे। लेकर हाथ में तिरंगा, आजादी का जश्न मनाएंगे।
  2. भारत मेरा प्यारा देश, सब देशो से न्यारा देश, भारत मेरा प्यारा देश, सब देशो से न्यारा देश|, हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई, मिलकर रहते सिख-ईसाई, हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई मिलकर रहते सिख-ईसाई| इसकी धरती उगले सोना, ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना| इसकी धरती उगले सोना, ऊँचा हिमगिरी बड़ा सलोना| सागर धोता इसके पाँव, हैं इसके अलबेले गाँव| सागर धोता इसके पाँव, हैं इसके अलबेले गाँव|भारत मेरा प्यारा देश, सब देशो से न्यारा देश|

Poem on Veer Ras in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर वीर रस की कविता

15 अगस्त 1947 को, भारत के प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाहौरी गेट के ऊपर भारतीय ध्वज फहराया। कुछ मायनों में यह एक रिवाज बन गया और प्रत्येक बाद के भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर, मौजूदा प्रधान मंत्री ने देशों का झंडा फहराया और राष्ट्र को एक संबोधन दिया। पिछले कई सालों से तो पतंग उड़ाना भी स्वतंत्रता दिवस की परंपरा बन गई है, खासतौर पर देश की राजधानी दिल्ली में। इस दौरान विभिन्न आकार, प्रकार और रंगों की पतंगें आसमान को भर देती हैं। इस मौके पर गीत और सरल कविताएँ (Easy Poem on Independence day in hindi) बहुत गाई जाती हैं। कई कार्यक्रमों में Poem on veer ras in hindi का गायन वीर रस की कविता (Desh veer ras ki kavita) गाकर हर्षोल्लास का माहौल भी बनाया रहता है।  नीचे पढ़ें ऐसी Easy poem on independence day in hindi –

Poem on Veer Ras in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर वीर रस की कविता
Desh Bhakti Poem in Hindi
  1. आज तिरंगा लहराता है अपनी पूरी शान से। हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।। आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी। लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।। व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया। हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।। हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से। हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।। गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है। जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।। प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर। हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।। लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से। हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।। हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है। उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।। हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे। सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।। विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से। हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।। भारत माता की जय।
  2. 14 अगस्त की शाम लिखा मैने क्या आजादी का दीप जलेगा कभी जो जले थे कभी वो भी बुझ गए, अगर सरकारें करती रहीं मक्कारी तो न सुधरेगी जनता की बदहाली ऐसे मे आजादी का दीप जलेगा कभी ,कब तक लुटेगी बेटी की आबरु क्या न मिलेंगी बेटी को आजादी ऐसे मे आजादी का दीप जलेगा कभी कब तक रहेगी अब बेरोजगारी,क्या अब न मिटेगी गरीबी कभी, ऐसे मे आजादी का दीप जलेगा कभी।भारत माता की जय।
  3. लाल रक्त से धरा नहाई। श्वेत नभ पर लालिमा छायी आजादी के नव उद्घोष पे, सबने वीरो की गाथा गायी ,गाँधी ,नेहरु ,पटेल , सुभाष की ध्वनि चारो और है छायी, भगत , राजगुरु और , सुखदेव की, क़ुरबानी से आँखे भर आई, ऐ भारत माता तुझसे अनोखी और अद्भुत माँ न हमने पायी , हमारे रगों में तेरे क़र्ज़ की, एक एक बूँद समायी, माथे पर है बांधे कफ़न और तेरी रक्षा की कसम है खायी, सरहद पे खड़े रहकर, आजादी की रीत निभाई… भारत माता की जय।
  4. बस इतना सा कहना है अब आजाद ही रहना है। पाकिस्तान और अब तो चाइना भी है जलता हमसे भाई जलता हमसे जमाना है। नाम है हिंदुस्तानी और ये ही हम सबका खजाना है। प्यार दो- प्यार लो जब दिल में प्यार बसाना है, और बेटे काँपते हमसे हर वो बंदे जो चाहे आतंकवाद फैलाना है। भारत , भारत, भारत है नाम हमारा और न अब कोई ठिकाना है, हम है किसमत वाले जन्मे भारत जो की देश सबसे निराला है।भारत माता की जय।

Deshbhakti Veer Ras Kavita In Hindi | देश भक्ति वीर रस की कविता

देशभक्ति के खुमार में डूबे हुए, स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा वीर रस की कविताओं का आदान-प्रदान किया जाता है।
इसलिए हम नीचे कुछ Rhyming Short Poem on Independence day in Hindi और Hindi Veer Ras Kavita साझा कर कर रहें हैं।

  1. विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।। सदा शक्ति बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला, वीरों को हर्षाने वाला, मातृभूमि का तन-मन सारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।। स्वतंत्रता के भीषण रण में, लखकर जोश बढ़े क्षण-क्षण में, काँपे शत्रु देखकर मन में, मिट जाये भय संकट सारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।। इस झंडे के नीचे निर्भय, हो स्वराज जनता का निश्चय, बोलो भारत माता की जय, स्वतंत्रता ही ध्येय हमारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा।। आओ प्यारे वीरों आओ, देश-जाति पर बलि-बलि जाओ एक साथ सब मिलकर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा झंडा ऊँचा रहे हमारा।। इसकी शान न जाने पावे, चाहे जान भले ही जावे विश्व-विजय करके दिखलावे, तब होवे प्रण-पूर्ण हमारा झंडा ऊँचा रहे हमारा।।
  2. नौजवान आओ रे, नौजवान गाओ रे।। लो क़दम बढ़ाओ रे, लो क़दम मिलाओ रे। ऐ वतन के नौजवान, इक चमन के बागवान। एक साथ बढ़ चलो, मुश्किलों से लड़ चलो। इस महान देश को नया बनाओ रे।। नौजवान… धर्म की दुहाइयाँ, प्रांत की जुदाइयाँ।भाषा की लड़ाइयाँ, पाट दो ये खाइयाँ। एक माँ के लाल, एक निशां उठाओ रे।। नौजवान… एक बनो नेक बनो, ख़ुद की भाग्य रेखा बनो। सर्वोदय के तुम हो लाल, तुमसे यह जग निहाल। शांति के लिए जहाँ को तुम जगाओ रे।। नौजवान… माँ निहारती तुम्हें, माँ पुकारती तुम्हें। श्रम के गीत गाते जाओ, हँसते मुस्कराते जाओ। कोटि कण्ठ एकता के गान गाओ रे।। नौजवान…
  3. भारत माँ के अमर सपूतो, पथ पर आगे बढ़ते जाना, पर्वत, नदिया और समन्दर, हंस कर पार सभी कर जाना, तुममे हिमगिरी की ऊँचाई सागर जैसी गहराई है,लहरों की मस्ती और सूरज जैसी तरुनाई है तुममे, भगत सिंह, राणा प्रताप का बहता रक्त तुम्हारे तन में, गौतम, गाँधी, महावीर सा रहता सत्य तुम्हारे मन में, संकट आया जब धरती पर तुमने भीषण संग्राम किया, मार भगाया दुश्मन को फिर जग में अपना नाम किया, आने वाले नए विश्व में तुम भी कुछ करके दिखाना, भारत के उन्नत ललाट को जग में ऊँचा और उठाना।
  4. लाल किले के आस-पास है आजादी का मेला सबसे ऊपर नाच रहा है झंडा एक अकेला कदम बढ़ाके सीना ताने फौजी आते – जाते, छोटे – बड़े बच्चे सारे चने कुरकुरे खाते सभी कहते है आज के दिन आजाद हुआ था देश, सभी कहते है आज के दिन आजाद हुआ था देश,अभी कुछ तो समझ माँ आए आजादी और देश, हम तो छत से देख रहे हैं पतंगो के पेच, हमसे कोई पूछे बच्चों आजादी क्या होती हैं, हम कह देंगे उस दिन सबकी पूरी छुट्टी होती हैं।

  Short poem on independence day in hindi | वीर रस की छोटी कविता

वैसे आप चाहें तो Hindi Veer Ras Kavita, Short Poem on Independence Day in Hindi वीर रस की छोटी कविता के जरिये भी अपने दोस्तों व परिवारजनों को 15 अगस्त की शुभकामनाएं दे सकते हैं। यकीन मानिये आपके इस छोटे से जेस्चर से उनका दिन बन जायेगा। 

  1. बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक, गर बुरी नजर दुश्मन डाले, हस्ती उसकी मिलाएं खाक में, करे कभी जो हमला वे, भाईचारा रखें परस्पर, अमन चैन का नारा हो, सद्भावना, शांति रखें दिलों में, जाति, धर्म का न बंटवारा.. बनें पहिए प्रगति के रथ के,सबसे आगे बढ़ते जाएं, कर दें रौशन नाम जहां में, देश का अपने मान बढ़ाएं, आजादी की वर्षगांठ की ,छटा निराली बढ़ती जाए खुशहाली के फूल हों बिखरे,खुश्बू से चमन महकाएं, आओ आज़ादी दिवस मनाएं, आओ आज़ादी दिवस मनाएं…
  2. हम बच्चे हँसते गाते हैं, हम आगे बढ़ते जाते हैं। पथ पर बिखरे कंकड़ काँटे, हम चुन चुन दूर हटाते हैं। आयें कितनी भी बाधाएँ, हम कभी नही घबराते हैं। धन दौलत से ऊपर उठ कर, सपनों के महल बनाते हैं। हम खुशी बाँटते दुनिया को, हम हँसते और हँसाते हैं। सारे जग में सबसे अच्छे, हम भारतीय कहलाते हैं।
  3. प्यारा प्यारा मेरा देश, सबसे न्यारा मेरा देश। दुनिया जिस पर गर्व करे, ऐसा सितारा मेरा देश। चांदी सोना मेरा देश, सफ़ल सलोना मेरा देश।गंगा जमुना की माला का, फूलोँ वाला मेरा देश।आगे जाए मेरा देश, नित नए मुस्काएं मेरा देश। इतिहासों में बढ़ चढ़ कर, नाम लिखायें मेरा देश।
  4. हम तो आज़ाद हुए लड़कर पर, आज़ादी के बाद भी लड़ रहे है, पहले अंग्रेजो से लड़े थे, अब अपनों से लड़ रहे है, आज़ादी से पहले कितने, ख्वाब आँखों में संजो रखे थे, अब आजादी के बाद वो ख्वाब ,ख्वाब ही रह गए है अब तो अंग्रेज़ी राज और इस राज में फर्क न लगे पहले की वह बद स्थिति अब बदतर हो गई है…
  5. जिस देश का कण-कण सोना हो, जिस देश की नारी देवी हो जिस देश में गंगा बहती है, उस देश को भारत कहते हैं जहां भाई-भाई में प्रेम हो, भाईचारे का नेम हो, जहां जात-पांत का भेद न है, उस देश को भारत कहते हैं जहां नभ से भू का नाता है, जहां धरा हमारी माता है।जहां सत्य धर्म मन भाता है, उस देश को भारत कहते हैं !

Poem on Freedom Fighter in Hindi | स्वतंत्रता सेनानी पर कविता

Poem on Freedom Fighter in Hindi | स्वतंत्रता सेनानी पर कविता
Desh Bhakti Kavita

लगभग 75 वर्ष पूर्व 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक तिथि को भारत अंग्रेजों के आधिपत्य से मुक्त हुआ था। यह कई आंदोलनों और संघर्षों की परिणति थी जो 1857 के ऐतिहासिक विद्रोह सहित ब्रिटिश शासन के दौरान व्याप्त थे। यह स्वतंत्रता कई क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों के माध्यम से प्राप्त की गई थी, जिन्होंने उस संघर्ष को संगठित करने का बीड़ा उठाया, जिसके कारण भारत देश आजाद हुआ। भारत देश के ऐसे कई लाल हैं जो कवितायें लिखने में भी माहिर थे। तो क्यों न उन poem on freedom fighter in hindi, easy poem on independence day in hindi स्वतंत्रता सेनानी पर कविता लिखी जाए। 

  1. हम तो आज़ाद हुए लड़कर पर, आज़ादी के बाद भी लड़ रहे है, पहले अंग्रेजो से लड़े थे, अब अपनों से लड़ रहे है, आज़ादी से पहले कितनेख्वाब आँखों में संजो रखे थे, अब आजादी के बाद वो, ख्वाब ,ख्वाब ही रह गए है, अब तो अंग्रेज़ी राज और इस राज में फर्क न लगे, पहले की वह बद स्थिति,अब बदतर हो गई है भारत माता की जय
  2. ये कैसी आज़ादी है, हर तरफ बर्बादी है, कही दंगे तो कही फसाद है, कही जात पात तो कही, छुवा छूत की बीमारी है, हर जगह नफरत ही नफरत, तो कही दहशत के अंगारे है,क्या नेता क्या वर्दी वाले, सभी इसके भागीदारी है… भारत माता की जय।
  3. चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है, हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है, हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है, जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है, जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है, जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है, त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है, ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है, हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है, जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है, जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है, जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है , हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है तिलक किया मस्तक चूमा बोली ये ले कफन तुम्हारा, मैं मां हूं पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा धन्य है मैया तुम्हारी भेंट में बलिदान में झुक गया है देश उसके दूध के सम्मान में दे दिया है लाल जिसने पुत्र मोह छोड़कर चाहता हूं आंसुओं से पांव वो पखार दूं, ए शहीद की मां आ तेरी मैं आरती उतार लूं… भारत माता की जय।
  4. अगर आजादी को बचाना चाहते हो, तो देश के लिए लहू बहाना होगा जो देश की खातिर जीते-मरते हैं, उनके आगे अपना शीश झुकाना होगा, जो चाहते हो, जय हिन्द का नारा बुलंद रहे, तो तुम्हें सुभाष बन जाना होगा, अगर अकबर को उसकी औकात दिखानी है, तो खुद को प्रताप बनाना होगा, मुगलों से लोहा लेना है, तो शिवाजी बनकर आना होगा, गौरी को मौत की नींद सुलानी है, तो पृथ्वीराज सा बाण चलाना होगा, अगर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने हो, तो लक्ष्मीबाई बन जाना होगा, कभी मंगल, कभी भगत, तो कभी आजाद बनकर धरती में आना होगा, जाति धर्म देखे बिना, देशद्रोहियों को अपने हाथों से मिटाना होगा नई पीढ़ी को अभिमन्यु सा, गर्भ में देशभक्ति का पाठ पढ़ाना होगा तुम्हें व्यक्तिवाद छोड़कर राष्ट्रवाद अपनाना होगा हर व्यक्ति में भारतीय होने का स्वाभिमान जगाना होगा लोकतंत्र को स्त्तालोलुपों से मुक्त कराना होगा, देशभक्ति को भारत का सबसे बड़ा धर्म बनाना होगा, वीरता की परम्परा को आगे बढ़ाना होगा, हर भारतीय को देश के लिए जीना सिखाना होगा भारत माता की जय।
  5. शत् शत् नमन करें शहीदों को, ये बहादुर वीर । न्योछावर-किये प्राण अपने, लिख गये देश की तकदीर ।। अपने बलबुतो, देशभक्ति के जज्बो से, हमे आजादी दिलाई है । दिलो में रहेंगे अमरशहीद सदा, लिखा जिससे वो स्लकी स्याही है ।। वतन की खुशीयों की खातिर, अपना खून बहाये हो । मिलती रहेगी हमे प्ररेणा, हमारे दिलो में समाये हो ।। दिलायी हमे आजादी, नभ में फैली है सूरज की लाली । प्रकृति भी गूंज उठी है, है पतन में आजादी की हरियाली ।। है हम आजाद, देश में फैली है आजादी की खुशहाली । फर्ज है हमारा, मरते दम तक करें देश की रखवाली ।। रहे देश सुरक्षित, करे प्रगति हमारा वतन । सुख शान्ति रहे देश में, करते रहे हम पुरे जतन ।। होगा देश का विकास, जब निभायेगे अपने फर्ज । रहे तैयार देश सेवाखातिर, सुरेश करे है आपसे अर्ज ।।

Short Poem On 15 August In Hindi | 15 अगस्त के अवसर पर छोटी कविता हिंदी में

15 अगस्त पर लिखी कविताएँ (Poem on 15 August in Hindi) न केवल शहीदों के प्रति मन में सम्मान जगाती हैं बल्कि ये देशभक्ति कविताएँ हमें खुद पर गर्व करने का जरिया भी बन जाती हैं। यहाँ नीचें ऐसी ही 5 Poem on 15 August in Hindi दी गई हैं जो आपकी रगों में देशभक्ति पैदा करने का माद्दा रखती हैं।

  1. करने आये हैं हम नमन, बलिदानी वीरों को। चल पड़ते थे जो अंगारों पर, मातृभूमि को करके नमन। उम्र ना पूछो,धर्म ना पूछो इस मिट्टी के रखवालों की। चल पड़े जो अंधियारों में। अत्याचारों का करने अन्त। लहू बहाया धरती पर। जैसे बहता हो गंगा का पावन जल। नहीं रुके यह, नही झुके यह,वीर अमर बलिदानी थे। कल का सूरज देखेगें वह अपने ध्वज के नीचे। करके प्रण जब बढे कदम अग्रेजों के भी छक्के छूटे थे। कोई नरम था, कोई गरम था। कोई थी बेटी जैसे लक्ष्मी बाई। आजाद होगा देश हमारा। मन में सबने ठानी थी।
  2. हवाएँ मिट्टी की यह खुशबू, आखिर कहाँ से लाती है। जब शहीद होता है कोई वतन पर, तो वो अपनी महक इस मिट्टी मे छोड़ जाते है।अगर वतन एक गुलीशता है, तो यह फूल बन जाते है।चलती है जब भी मन्द हवा इस बगीया से, तो देशभक्ति की सुगंध साथ ले आती है।
  3. फूल तो खिलकर, फिर मुरझा जाते है। जो होते है शहिद वतन पर,वो सदा के लिए खिले रह जाते है। कहानियाँ इनकी सबको है भाती, जब मिलता है मौका,कुछ इनके जैसे बनने का, ये हमारी प्रेरणा शक्ति बन जाते।
  4. हाथ में तलवार जिसने ठानी थी, हाँ वो झाँसी की ही  रानी थी, जिसके खून में मर्द सी रवानी थी, हाँ वो झाँसी की ही रानी थी, अंग्रेज़ो को जिसने याद दिलाई नानी थी, हाँ वो झाँसी की ही रानी थी, झाँसी के शहर की जो महारानी थी, हाँ वो झाँसी की ही रानी थी
  5. भारत माँ के अमर सपूतो, पथ पर आगे बढ़ते जाना, पर्वत, नदिया और समन्दर, हंस कर पार सभी कर जाना, तुममे हिमगिरी की ऊँचाई सागर जैसी गहराई है, लहरों की मस्ती और सूरज जैसी तरुनाई है तुममे, भगत सिंह, राणा प्रताप का बहता रक्त तुम्हारे तन में, गौतम, गाँधी, महावीर सा रहता सत्य तुम्हारे मन में, संकट आया जब धरती पर तुमने भीषण संग्राम किया, मार भगाया दुश्मन को फिर जग में अपना नाम किया, आने वाले नए विश्व में तुम भी कुछ करके दिखाना, भारत के उन्नत ललाट को जग में ऊँचा और उठाना।

Desh Bhakti Poem in Hindi | देश भक्ति कविता इन हिंदी

Desh Bhakti Poem in Hindi | देश भक्ति कविता इन हिंदी
Desh Bhakti par Kavita

Heart touching poem on independence day in hindi – किसी भी देश के लिए देशभक्ति वहां रहने वाले लोगों के दिलों में पैदा नहीं की जाती बल्कि वो दिल में देशभक्ति लेकर ही पैदा होते हैं। हो सकता है, एक समय यहां रहते हुए आपको अपने ही देश में डर लगने लगे, उस समय याद कीजियेगा स्वतंत्रता सेनानियों के उन बलिदानों को, जो उन्होंने आपके लिए 75 साल पहले दिए थे। आने वाली पीढ़ी आज़ाद होकर रह सके इसलिए उन्होंने अपनी जानें गंवा दीं। अगर आप भी एक सच्चे देशभक्त हैं तो अपने आस-पास के लोगों को swatantrata diwas kavita स्वतंत्रता संग्राम पर कविता जरूर शेयर करें। 

  1. हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे, आजादी का मतलब नहीं है समझते। इस दिन पर स्कूल में तिरंगा है फहराते, गाकर अपना राष्ट्रगान फिर हम, तिरंगे का सम्मान है करते, कुछ देशभक्ति की झांकियों से, दर्शकों को मोहित है करते हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे,आजादी का अर्थ सिर्फ यही है समझते। वक्ता अपने भाषणों में, न जाने क्या-क्या है कहते, उनके अन्तिम शब्दों पर, बस हम तो ताली है बजाते। हम नन्हें-मुन्ने है बच्चे, आजादी का अर्थ सिर्फ इतना ही है समझते। विद्यालय में सभा की समाप्ति पर, गुलदाना है बाँटा जाता, भारत माता की जय के साथ,स्कूल का अवकाश है हो जाता, शिक्षकों का डाँट का डर, इस दिन न हमको है सताता छुट्टी के बाद पतंगबाजी का,लुफ्त बहुत ही है आता, हम नन्हें-मुन्ने हैं बच्चे, बस इतना ही है समझते आजादी के अवसर पर हम, खुल कर बहुत ही मस्ती है करते।। भारत माता की जय।
  2. बच्चा-बच्चा बन जाए सैनिक, गर बुरी नजर दुश्मन डाले, हस्ती उसकी मिलाएं खाक में, करे कभी जो हमला वे, भाईचारा रखें परस्पर, अमन चैन का नारा हो, सद्भावना, शांति रखें दिलों में, जाति, धर्म का न बंटवारा, बनें पहिए प्रगति के रथ के,सबसे आगे बढ़ते जाएं, कर दें रौशन नाम जहां में, देश का अपने मान बढ़ाएं, आजादी की वर्षगांठ की ,छटा निराली बढ़ती जाए, खुशहाली के फूल हों बिखरे,खुश्बू से चमन महकाएं, आओ आज़ादी दिवस मनाएं, आओ आज़ादी दिवस मनाएं, भारत माता की जय।
  3. नमो, नमो, नमो। नमो स्वतंत्र भारत की ध्वजा, नमो, नमो! नमो नगाधिराज – शृंग की विहारिणी! नमो अनंत सौख्य – शक्ति – शील – धारिणी!प्रणय – प्रसारिणी, नमो अरिष्ट – वारिणी! नमो मनुष्य की शुभेषणा – प्रचारिणी! नवीन सूर्य की नई प्रभा, नमो, नमो! हम न किसी का चाहते तनिक अहित, अपकार। प्रेमी सकल जहान का भारतवर्ष उदार। सत्य न्याय के हेतु, फहर-फहर ओ केतु, हम विचरेंगे देश-देश के बीच मिलन का सेतु पवित्र सौम्य, शांति की शिखा, नमो, नमो! तार-तार में हैं गुँथा ध्वजे, तुम्हारा त्याग! दहक रही है आज भी, तुम में बलि की आग। सेवक सैन्य कठोर, हम चालीस करोड़ कौन देख सकता कुभाव से ध्वजे, तुम्हारी ओर करते तव जय गान, वीर हुए बलिदान, अंगारों पर चला तुम्हें ले सारा हिंदुस्तान! प्रताप की विभा, कृषानुजा, नमो, नमो! भारत माता की जय।
  4. आपसी कलह के कारण से, वर्षों पहले परतंत्र हुआ, पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस, को अपना देश स्वतंत्र हुआ उन वीरों को हम नमन करें, जिनने अपनी कुरबानी दी, निज प्राणों की परवाह न कर, भारत को नई रवानी दी, उन माताओं को याद करें, जिनने अपने प्रिय लाल दिए, मस्तक मां का ऊंचा करने, को उनने बड़े कमाल किए, बिस्मिल, सुभाष, तात्या टोपे, आजाद, भगत सिंह दीवाने, सिर कफन बांधकर चलते थे, आजादी के यह परवाने, देश आजाद कराने को जब, पहना केसरिया बाना, तिलक लगा बहनें बोली, भैया, विजयी होकर आना, माताएं बोल रही बेटा, बन सिंह कूदना तुम रण में, साहस व शौर्य-पराक्रम से, मार भगाना क्षणभर में, दुश्मन को धूल चटा करके, वीरों ने ध्वज फहराया था, जांबाजी से पा विजयश्री, भारत आजाद कराया था, स्वर्णिम इतिहास लिए आया, यह गौरवशाली दिवस आज, श्रद्धा से नमन कर रहा है, भारत का यह सारा समाज,जय हिन्द हमारे वीरों का, सबसे सशक्त शुभ मंत्र हुआ,पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस, को अपना देश स्वतंत्र हुआ

patriotic poem in hindi for independence day | स्वतंत्रता दिवस के लिए देशभक्ति कविता

स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं जिनमें सभी बच्चे बड़े उत्साह से प्रतिभाग करते हैं, इसलिए Short Poem on Independence Day in Hindi भी हमने इस ख़ास ब्लॉग में शामिल की हैं जो बच्चों को याद कराई जा सकती हैं।

  1. हम बच्चे मतवाले हैं, हम चाँद को छूने वाले हैं ! जो हम से टकराएगा, कभी ना वो बच पाएगा !! हम भारत माता के प्यारे, देश के राज दुलारे हैं ! आजादी के रखवाले हम, नये युग का आगाज हम !! देश का नाम सदा करेंगे, तिरंगे की शान रखेंगे ! अपना जीवन हम सब, देश के नाम करेंगे !! हम बच्चे मतवाले है, हम चाँद को छूने वाले हैं !
  2. पन्द्रह अगस्त देश की शान है, यह मेरे देश का अभिमान है, गर्व होता है इस दिन पर मुझे, यही मेरी आन यही मेरा पहचान है, देश की आजादी के लिए, शहीदों ने प्राण गवाएं, उन शहीदों की शहादत का, पन्द्रह अगस्त सम्मान है, न भूलना कभी इस दिन को, यह देश की पहचान है, स्वतन्त्रता दिवस के नाम से, प्रसिद्ध देश की शान है।
  3. पुण्य तिरंगा से हमें, मिलती है पहचान। तीन रंग मन में भरे, देशभक्ति का मान।। भर देता मन प्राण में, अतुलित पावन गर्व। जब आता है देश में, आजादी का पर्व।। लहर-लहर लहरा रहा, गर्वित हो आकाश। आज तिरंगा भर रहा, मन में परम प्रकाश।। केसरिया बलिदान का, सत्य शांति का श्वेत। हरा प्रकृति प्रतीक जहाँ, उर्वर पोषित खेत।। चक्र प्रतीक है धर्म का, सद्भावों के संग। शोभित निज ध्वज को करे, तीनों पावन रंग।। नित-नित यह झण्डा भरे, तन-मन में विश्वास। संप्रभुता का है सखा, जन-जन को आभास।। पुण्य तिरंगा दे रहा, जग को शुभ संदेश। प्रेम भाव ही बाँटता, अपना भारत देश।। केसर की घाटी जहाँ, नित ही बाँटें प्यार। और हिमालय से बहे, पावन गंगा धार।।  वीरों की है वीरता, ज्ञानी का शुभ ज्ञान। परिपाटी पावन जहाँ, भारत देश महान।। सर्वप्रथम निज देश है, बाकी सब कुछ बाद। आजादी के पर्व को, रखो प्रेम नित याद।।
  4. इलाही ख़ैर! वो हरदम नई बेदाद करते हैं, हमें तोहमत लगाते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं कभी आज़ाद करते हैं, कभी बेदाद करते हैं, मगर इस पर भी हम सौ जी से उनको याद करते हैं असीराने-क़फ़स से काश, यह सैयाद कह देता, रहो आज़ाद होकर, हम तुम्हें आज़ाद करते हैं, रहा करता है अहले-ग़म को क्या-क्या इंतज़ार इसका, कि देखें वो दिले-नाशाद को कब शाद करते हैं,यह कह-कहकर बसर की, उम्र हमने कै़दे-उल्फ़त में, वो अब आज़ाद करते हैं, वो अब आज़ाद करते हैं। सितम ऐसा नहीं देखा, जफ़ा ऐसी नहीं देखी, वो चुप रहने को कहते हैं, जो हम फ़रियाद करते हैं ,यह बात अच्छी नहीं होती, यह बात अच्छी नहीं करते, हमें बेकस समझकर आप क्यों बरबाद करते हैं?कोई बिस्मिल बनाता है, जो मक़तल में हमें ‘बिस्मिल’, तो हम डरकर दबी आवाज़ से फ़रियाद करते हैं।

Best Poem on Independence Day in Hindi | स्वतंत्रता दिवस पर सबसे अच्छी कविता

देशभक्ति के माहौल में सभी अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए कुछ न कुछ बेहतरीन कविता साझा करना चाहते हैं। देशभक्ति कविता (Veer Ras ki Kavita) अपनी भावनाओं को बताने का सशक्त माध्यम हो सकती हैं पढ़ें कुछ बेहतरीन कवितायेँ –

  1. आज हिमालय की चोटी से फिर हम ने ललकरा है,दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है। जहाँ हमारा ताज-महल है और क़ुतब-मीनारा है,जहाँ हमारे मन्दिर मस्जिद सिक्खों का गुरुद्वारा है, इस धरती पर क़दम बढ़ाना अत्याचार तुम्हारा है। शुरू हुआ है जंग तुम्हारा जाग उठो हिन्दुस्तानी, तुम न किसी के आगे झुकना जर्मन हो या जापानी, आज सभी के लिये हमारा यही क़ौमी नारा है, दूर हटो ऐ दुनिया वालों हिन्दुस्तान हमारा है।
  2. उठो धरा के अमर सपूतो, पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से, नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है,,नई किरण है, ज्योति नई-नई उमंगें, नई तरंगे,नई आस है, साँस नई, युग-युग के मुरझे सुमनों में, नई-नई मुसकान भरो।
  3. जो अगणित लघु दीप हमारे,तूफ़ानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन, मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल। कलम, आज उनकी जय बोल। पीकर जिनकी लाल शिखाएं, उगल रही सौ लपट दिशाएं, जिनके सिंहनाद से सहमी, धरती रही अभी तक डोल। कलम, आज उनकी जय बोल। अंधा चकाचौंध का मारा, क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के, सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल। कलम, आज उनकी जय बोल। – रामधारी सिंह दिनकर

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History of Independence Day in Hindi

भारत की आज़ादी का श्रेय किसी एक को नहीं बल्कि कई महान शूरवीरों को जाता है। जिन्होनें अपनी सूझ बूझ, शौर्य और बलिदान से आज़ादी का चेहरा हर भारतवासी को दिखाया। 

Independence Day Slogans in Hindi

भारत देश की आज़ादी के लिए कई वीर शहीद हुए। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता के नारे भी लगाए। आजादी के नारे हमेशा से ही दिल में देशभक्ति की अलख जगा देते हैं।

Movies on Independence Day in Hindi

बॉलिवुड में कई देशभक्ति फिल्में बनी हैं। जिन्हें देखकर न सिर्फ आप आजादी के बारे में बहुत कुछ जानेंगे बल्कि भारतीय होने पर गर्व भी महसूस करेंगे।

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