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RTI में ‘कोहिनूर’ हीरे को लेकर हुआ अहम खुलासा, जानिए उससे जुड़े विवाद और उनकी सच्चाई

RTI में ‘कोहिनूर’ हीरे को लेकर हुआ अहम खुलासा, जानिए उससे जुड़े विवाद और उनकी सच्चाई

कोहिनूर हीरा (Kohinoor Diamond) हमेशा से ही लोगों में कौतूहल का विषय रहा है। देश- विदेश के लोग यह जानने को आतुर रहते हैं कि भारत का यह बेशकीमती हीरा आखिर ब्रिटेन पहुंचा कैसे। इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिहाज़ से हाल ही में एक सोशल एक्टिविस्ट ने RTI दायर कर कुछ ज़रूरी सवालों के जवाब मांगे हैं।

खुलासा – गिफ्ट में नहीं दिया था कोहिनूर

लुधियाना के सोशल एक्टिविस्ट रोहित सभरवाल ने दुनिया भर में चर्चित कोहिनूर हीरे के बारे में पीएमओ से सवाल किया था। वे जानना चाहते थे कि कोहिनूर को उपहार स्वरूप दिया गया था या वह अन्य किन्हीं कारणों से ब्रिटेन तक पहुंचा था। उनके इस प्रश्न का जवाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई, ASI) की ओर से दिया गया है। जवाब में बताया गया है कि लाहौर के महाराजा ने करीब 170 वर्ष पहले इंग्लैंड की महारानी को कोहिनूर डायमंड ‘समर्पित’ किया था। राष्ट्रीय अभिलेखागार में रखे रिकॉर्ड के मुताबिक, लॉर्ड डलहौजी और महाराजा दिलीप सिंह के बीच 1849 में लाहौर संधि हुई थी, जिसके तहत यह हीरा इंग्लैंड की महारानी को समर्पित कर दिया गया था। संधि से पता चलता है कि यह हीरा दिलीप सिंह ने अपनी मर्जी से अंग्रेजों को नहीं सौंपा था। गौरतलब है कि इस अहम संधि के वक्त दिलीप सिंह नाबालिग थे।

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सरकार से विरोधाभास

आरटीआई दायर करने पर एएसआई के खुलासे और 2016 में केंद्र सरकार की ओर से दिए गए जवाब में  विरोधाभास है। केंद्र सरकार ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस कोहिनूर हीरे की अनुमानित कीमत 20 करोड़ डॉलर से ज्यादा है। केंद्र सरकार के मुताबिक, इस हीरे को न तो चुराया गया था और न ही अंग्रेजी शासक इसे जबरन भारत से ले गए थे, बल्कि पंजाब के शासकों ने यह हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को उपहार स्वरूप दिया था। 10 अक्टूबर को मिले आरटीआई के जवाब से सरकार द्वारा की गई बात गलत साबित होती है। रोहित सभरवाल हाल ही में इंग्लैंड गए थे और वहां एक म्यूजियम में उन्होंने कोहिनूर हीरा देखा था। इसके बारे में जब उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की तो उन्हें बताया गया कि यह हीरा ब्रिटेन को उपहार स्वरूप दिया गया था। वहां से यह जानकारी हासिल करने के बाद ही रोहित को इस विषय में अधिक जानने का कौतूहल हुआ था।

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लोगों को पसंद नहीं था कोहिनूर

ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय पत्रकार अनीता आनंद ने मशहूर इतिहासकार विलियम डेलरिंपल के साथ मिलकर कोहिनूर पर एक किताब लिखी है। इस किताब का नाम है – ‘कोहिनूर – द स्टोरी ऑफ द वर्ल्ड्स मोस्ट इनफेमस डायमंड’। जयपुर साहित्य महोत्सव के 10 वें आयोजन के एक सत्र में जब अनीता आई थीं तो उन्होंने कोहिनूर हीरे से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा लोगों के साथ शेयर किया था। उन्होंने बताया था, ‘इंग्लैंड में लोगों ने कोहिनूर को एक क्रिस्टल का टुकड़ा मानते हुए इसका मज़ाक उड़ाया था क्योंकि वह चमक नहीं रहा था।’ उन्होंने यह जानकारी भी साझा की थी कि अब कोहिनूर अपने मूल आकार का आधा ही बचा है। दरअसल, राजकुमार अल्बर्ट ने इस हीरो की चमक बढ़वाने के लिए इसे कटवाया था। इंग्लैंड पहुंचने पर इस हीरे को चमकीले पिंजड़े में रखा गया था पर चमक न होने की वजह से लोग इससे प्रभावित नहीं हो सके थे।

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‘कोहिनूर’ के बारे में 10 बातें

1. कोहिनूर का मतलब ‘प्रकाश का पर्वत’ होता है।

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2. यह एक बड़ा और रंगहीन हीरा है, जो 14 वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण भारत में पाया गया था।

3. यह दुनिया का सबसे कीमती हीरा है और अपने मूल रूप में यह 793 कैरेट का था। इस हीरे को अभिशप्त भी माना जाता है।

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4. ऐसी मान्यता है कि यह हीरा जिसके पास भी रहता है, उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है। इस हीरे ने कई राजपरिवारों को तबाह भी किया है।

5. भारत के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान भी कोहिनूर पर अपना दावा जताते हैं।

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6. कहते हैं कि कोहिनूर हीरा आंध्रप्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा की खदानों से निकला था।

7. 1306 में कोहिनूर पहनने वाले एक शख्स ने लिखा था कि जो भी इसे पहनेगा, वह दुनिया पर राज करेगा पर उसके साथ ही उसका दुर्भाग्य भी शुरू हो जाएगा।

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8. वहीं, यह भी मान्यता है कि इस हीरे का पहला ज़िक्र बाबर की आत्मकथा ‘बाबर’ में किया गया था।

9. उसमें लिखा है कि बाबर के बेटे हुमायूं ने जब इसकी कीमत आंकनी चाही थी तो बाबर ने उसकी कीमत एक लट्ठ बताई थी। इसका मतलब है कि जिसके हाथ में पावर होगी, हीरा उसी के पास रहेगा।

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10. भारत में अभी तक माना जाता था कि 29 मार्च 1849 को को यह हीरा रानी विक्टोरिया को भेंट स्वरूप दिया गया था। इस बेशकीमती हीरे को रानी ने अपने मुकुट में जड़वा लिया था और तब से ‘कोहिनूर’ ब्रिटेन में है।

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भले ही इस समय यह हीरा ब्रिटिश राजपरिवार के पास है पर भारतीय चाहते हैं कि इसे वापस भारत लाया जाए।

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