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जानें, हरियाली तीज, हरतालिता तीज और कजरी तीज में क्या है अंतर

जानें, हरियाली तीज, हरतालिता तीज और कजरी तीज में क्या है अंतर

देशभर के कई हिस्सों में तीज का त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार बेहद ही धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि, साल में केवल एक ही नहीं बल्कि तीन तरह की तीज मनाई जाती हैं। इन तीनों तीजों में पर भगवान शिव और पार्वती माता की ही पूजा होती है। साथ ही इन तीनों तीजों यानि कि हरियाली तीज (Hariyali Teej), कजरी तीज (kajari Teej) और हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। इसके बावजूद तीनों तीजों (happy teej wishes in hindi) में काफी अंतर है तो चलिए आपको इन तीनों तीजों के बीच के अंतर के बारे में विस्तार से बताते हैं। 

कजरी तीज

कजरी तीज को सातूड़ी तीज और भादो तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को विवाहित महिलाएं, अखंड सौभाग्यवती रहने के लिए करती हैं। साथ ही कुंवारी कन्याएं भी मनपसंद वर प्राप्त करने के लिए ये व्रत रखती हैं। इस तीज के पीछे एक पौराणिक कथा भी मौजूद है और मध्य प्रदेश में कजली नाम का एक वन था। वहां के लोग कजली के नाम पर कई सारे गीत भी गाया करते थे। एक बार वहां के राजा की मृत्यु हो गई और उनकी पत्नी भी साथ में सती हो गई। तभी से कजली के गीत पति और पत्नी के साथ जोड़कर गाए जाने लगे। कजरी तीज पर गायों की भी पूजा की जाती है। शाम को महिलाएं अपना व्रत तोड़ने से पहले सात रोटियों पर चना और गुड़ रखकर गायों को खिलाती हैं। 

हरतालिका तीज

तीनों तीज में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हरतालिका तीज होती है। इसकी मान्यता है कि पर्वतराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे लेकिन पार्वती बचपन से ही महादेव को अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं। इस वजह से उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए गंगा नदी के किनार, गुफा में जाकर उनकी आराधना की। यहां तक कि उन्होंने अन्न और जल को त्याग कर कठिन उपवास भी रखा। इसे देख भोलेनाथ ने भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को हस्त नक्षत्र में माता पार्वती को अपने दर्शन दिए। इसके बाद माता पार्वती ने पूजा की सभी सामग्री को गंगा में प्रवाहित कर अपना व्रत तोड़ा। इस वजह से हरतालिका तीज के मौके पर महिलाएं मंडप सजाकर बालू से शिवजी और पार्वती जी की प्रतिमाएं बनाकर उनका गठबंधन करती हैं। 

हरियाली तीज

हरियाली तीज पर भी सुहागन महिलाएं उपवास करती हैं। हरियाली तीज का क्रेज शहरों में अधिक देखने को मिलता है। सावन शक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता गौरी की पूजा होती है। इस दिन महिलाएं बिना अन्न और जल का ग्रहण किए रहती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती से अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।  

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11 Aug 2021

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