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इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जानें महिला सशक्तिकरण क्या है, इन महिलाओं से लें प्रेरणा

Megha SharmaMegha Sharma  |  Feb 8, 2021
इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जानें महिला सशक्तिकरण क्या है, इन महिलाओं से लें प्रेरणा

विश्व भर में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (mahila diwas) मनाया जाता है। वैसे तो महिला दिवस की शुरुआत 1908 में हुई थी लेकिन इसे 1975 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दी गई थी। इसके बाद से विश्व के अलग-अलग हिस्सों में 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा। यहां तक कि हर साल महिला दिवस के लिए एक थीम भी निर्धारित की जाती है। इस साल यूएन द्वारा अंतरराष्ट्री महिला दिवस की थीम ‘’Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world’’ रखी गई है। यह थीम COVID-19 महामारी के समय में भविष्य को आकार देने में दुनिया भर की महिलाओं और लड़कियों द्वारा किए गए जबरदस्त प्रयासों का जश्न मनाती है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कब मनाया जाता है?

International Women's Day 2021

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। दरअसल, बीते वक्त में भी महिलाओं के सामने कम चुनौतियाँ नहीं थी और इस वजह से अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर महिलाएं अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आती रही हैं। 1908 में अमेरिका में एक मजदूर आंदोलन की शुरुआत हुई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं (प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति) के काम के घंटे बहुत अधिक थे और इस वजह से उन्हें काफी परेशानी होती थी। इसके चलते उन्होंने आंदोलन करने का फैसला किया और काम के घंटे कम किए जाने की मांग रखी। इसके बाद महिलाओं को अपने आंदोलन में सफलता मिली और सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने इस दिन को राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया।

महिला सशक्तिकरण क्या है?

Women's Day 2021

महिला सशक्तिकरण से हमारा तात्पर्य महिलाओं की सामाजिक,आध्यात्मिक, राजनीतिक और आर्थिक शक्ति में वृद्धि करना है। भारत में महिलाएं (भारत में महिलाओं की वर्तमान स्थिति) आज के वक्त में मीडिया, राजनीति, शिक्षा, कला व संस्कृति, सेवा क्षेत्रों आदि में भागीदारी बनती है। इतना ही नहीं भारत का संविधान भी महिलाओं की समानता की गारंटी देता है। राज्यों द्वारा भी महिलाओं के साथ लैंगिग आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। यहां तक कि सरकार द्वारा आज के वक्त में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन सभी योजनाओं को उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक आजादी देना है। 
हालांकि, फिर भी यदि जमीनी स्तर पर देखा जाए तो भी देश के कई हिस्सों में महिला सशक्तिकरण की स्थिति उलट ही दिखाई देती है। महिलाएं आज भी अपने परिजनों या फिर अपने पतियों पर निर्भर हैं और आज भी उनके ऊपर काफी बंदिशे हैं। इस वजह से देश में महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर बहुत से जागरुकता कार्यक्रम भी कराए जाने लगे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य?

मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का उद्देश्य महिलाओं के अधिकार को बढ़ावा देना है और विश्व शांति को बनाए रखना है। दरअसल, दुनियाभर में ऐसे बहुत से देश हैं जहां महिलाओं को अपने हक के लिए हमेशा ही आंदोलन करते रहना पड़ा है। हालांकि, कई देशों में समय के साथ महिलाओं को उनके आंदोलनों में जीत भी मिली है और महिलाओं प्रति स्थिति भी बदली है। लेकिन अब दुनियाभर में ही महिलाओं के लिए लोगों का नजरिया बदलने लगा है। ऐसे में राजनीति से लेकर शिक्षा, कला और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने लगी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य भी आने वाले वक्त में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ता हुआ देखना ही है। 

भारत की महान महिलाओं के नाम

भारतीय महिलाओं (महान महिलाओं के नाम) का इतिहास उन महिलाओं (inspiring women of india) से भरा है, जिन्होंने लैंगिक बाधाओं को तोड़ा है और अपने अधिकारों के लिए कड़ी मेहनत की है और राजनीति, कला, विज्ञान, कानून आदि के क्षेत्र में खुद के लिए महत्वपूर्ण पहचान बनाई है और अन्य महिलाओं (भारत की आदर्श महिलाएं) को प्रेरणा दी है। इस महिला दिवस आपको बताते हैं भारत की कुछ उन प्रेरणादायक महिलाओं (भारत में सफल महिलाओं के नाम) के बारे में जो अपने क्षेत्र में ऐसा करने वाली भारत की पहली महिलाएं ( famous indian women) बनी।

आनंदीबाई गोपालराव जोशी

anandibai Gopalrao Joshi

आनंदीबाई गोपालराव जोशी वर्ष 1887 में पहली भारतीय महिला चिकित्सक बनीं थी। वह पहली भारतीय महिला भी थीं, जिन्हें पश्चिमी चिकित्सा में प्रशिक्षित किया गया था और वह पहली महिला थीं जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की थी।

शीला दावरे

Shila Dawre

शीला दावरे देश की पहली महिला ऑटो रिक्शा चालक बन गईं, जब उन्होंने पहली बार वर्ष 1988 में ‘पुरुष-प्रधान’ क्षेत्र में कदम रखा था। पुणे स्थित दावरे अब प्रशिक्षित ऑटो चालक बनने के इच्छुक महिलाओं के लिए एक अकादमी शुरू करना चाहती हैं।

अरुणिमा सिन्हा

Arunima Sinha

अरुणिमा सिन्हा माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला एमुपी हैं। वह एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय एंप्यूटी भी हैं। वह एक राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी थी, जिसे 2011 में चोरों द्वारा एक चलती ट्रेन से धक्का दे दिया गया था क्योंकि वह उनका विरोध कर रही थी। इस दुर्घटना का सामना करने के बाद, उसके एक पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा था।

रीता फारिया पॉवेल

Reita Faria Powel

रीता फारिया पॉवेल एक भारतीय मॉडल, डॉक्टर और ब्यूटी क्वीन हैं, जिन्होंने मिस वर्ल्ड 1966 का खिताब जीता था और वह इस खिताब को जीतने वाली पहली एशियाई महिला बन गईं थी। वह एक डॉक्टर के रूप में क्वालीफाई करने वाली पहली मिस वर्ल्ड विजेता भी बनीं।

आरती साहा

Arati Saha

आरती साहा वर्ष 1959 में अंग्रेजी चैनल पर तैरने वाली पहली भारतीय और एशियाई महिला बनीं। वह 1960 में पद्म श्री से सम्मानित होने वाली पहली महिला खिलाड़ी भी बनीं।

मिताली राज

Mithali Raj

मिताली राज टेस्ट क्रिकेट में दोहरा शतक बनाने वाली पहली महिला थीं (वेलिंगटन, 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 214 *)। वह दुनिया में इस मुकाम को हासिल करने वाली पहली महिला हैं।

इंदिरा गांधी

Indira Gandhi

इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और 1966 से 1977 तक सेवा की। इंदिरा गांधी को “वुमन ऑफ़ द मिलेनियम” के रूप में एक सर्वेक्षण में नामित किया गया था जो 1999 में बीबीसी द्वारा आयोजित किया गया था। 1971 में, वह भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं।

कल्पना चावला

Kalpana Chawla

कल्पना चावला पहली भारतीय महिला थीं जो अंतरिक्ष में पहुंची थीं। एक मिशन विशेषज्ञ और एक प्राथमिक रोबोटिक आर्म ऑपरेटर के रूप में, वह 1997 में अंतरिक्ष में गई थी।

किरण बेदी

Kiran Bedi

किरण बेदी 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुई, किरण बेदी भारत की पहली महिला अधिकारी बनीं। इसके अलावा 2003 में, किरण बेदी पहली महिला भी बनीं जिन्हें संयुक्त राष्ट्र के सिविल पुलिस सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था।

अंजली गुप्ता

Anjali Gupta

अंजलि गुप्ता भारतीय वायु सेना में पहली महिला फ्लाइंग ऑफिसर हैं, जिन्हें कोर्ट मार्शल किया गया है। वह बैंगलोर में एयरक्राफ़्ट सिस्टम एंड टेस्टिंग इस्टैब्लिशमेंट यूनिट के लिए काम करती थी। अंजलि ने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की और 2001 में पहली बार बेलगाम में तैनात हुईं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से जुड़ें सवाल – FAQ’s

Mahila Diwas 2021

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पहली बार कब मनाया गया?

पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 1975 में मनाया गया था। हालांकि, उससे पहले भी कई देशों में साल के अलग-अलग दिनों पर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता था।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 की थीम क्या थी?

हर साल महिला दिवस (Women’s Day) को अलग-अलग थीम के साथ मनाया जाता है. साल 2020 में महिला दिवस की थीम ”I am Generation Equality: Realizing Women’s Rights” थी. वहीं 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ’Women in leadership: Achieving an equal future in a COVID-19 world’’ है।

क्या हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अलग थीम होती है?

हां, हर साल महिला दिवस पर अलग-अलग थीम होती है और इन थीमों को यूएन यानी कि अंतरराष्ट्रीय संघ द्वारा निर्धारित किया जाता है।

महिला दिवस 8 मार्च को क्यों मनाया जाता है?

1917 में रूस में महिलाओं ने ब्रेड यानी कि खाने और शांति के लिए हड़ताल की थी। यहां तक कि महिलाओं ने अपनी इस हड़ताल के दौरान अपने पतियों की मांगों को भी पूरा करने से इंकार कर दिया था और उन्हें युद्ध छोड़ने के लिए राजी कराया था। इसके बाद रूस के राजा निकोलस को अपना पद छोड़ना पड़ा था और महिलाओं को रूस में मतदान का अधिकार प्राप्त हुआ था। रूस की महिलाओं द्वारा ये विरोध 28 फरवरी को किया गया था। वहीं यूरोप में भी 8 मार्च को पीस एक्टिविस्ट के समर्थन में महिलाओं द्वारा रैलियां की गई थी और इसी वजह से 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

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