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ये हैं इंडिया की वो बेमिसाल सुपरवुमन, जिन्होंने तोड़ीं समाज की बेड़ियां

ये हैं इंडिया की वो बेमिसाल सुपरवुमन, जिन्होंने तोड़ीं समाज की बेड़ियां

”मंजिल उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” ये पंक्तियां सिर्फ एक कहावत नहीं बल्कि उन जुनूनी लोगों की शख्सियतों का आईना हैं जो समाज को दोष नहीं देते बल्कि उन बुराइयों पर जीत हासिल करते हैं। महिलाओं को कमजोर समझने वाले लोग शायद ये बात भूल जाते हैं कि उन्हें पैदा करते समय एक महिला जितना दर्द सहन कर लेती है उतना दर्द कोई पुरुष सहन करने के बारे में सोच भी नहीं सकता। आज हम आपको किसी डॉक्टर, बिजनेस वुमन के बारे में नहीं बताने जा रहे हैं बल्कि यहां हम बात करेंगे उन महिलाओं के बारे में जिन्होंने समाज को नई सोच और नया नजरिया प्रदान किया। इन महिलाओं (#POPxoWomenWantMore) ने साबित कर दिया कि कोई भी काम ऐसा नहीं है जो एक महिला कर नहीं सकती। आइए जानते हैं ऐसी कुछ बेमिसाल सुपरवुमन के बारे में –

शांति देवी, ट्रक मैकेनिक

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ट्रक का टायर बदलना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। इस काम के लिए कम से कम दो पुरुष अपना दम लगाते हैं तब जाकर ट्रक का टायर निकाला जाता है। शांति देवी भारत की पहली महिला ट्रक मैकेनिक हैं जो अकेले ट्रक का टायर बदल लेती हैं।

इशिता मालवीय, वॉटर सर्फर

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27 साल की इशिता मालवीय भारत की पहली प्रोफेशनल महिला सर्फर हैं। इशिता समुंदर की लहरों पर बेधड़क दौड़ती हैं और ये नजारा देखकर अच्छे खासे सर्फर भी दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। इशिता गोवा में सर्फिंग सिखाती हैं और खेल जगत में बढ़- चढ़ के हिस्सा भी लेती हैं।

प्रिया झिंगन, आर्मी ऑफिसर

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प्रिया झिंगन पहली महिला आर्मी ऑफिसर हैं। उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली में फर्स्ट लेडीज अवॉर्ड से सम्मानित भी किया था। उन्होंने बचपन से तय कर लिया था कि वो शादी नहीं करेगीं और देश की सेवा करेगीं। सेना में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के हर पड़ाव पर प्रिया झिंगन का नाम जरूर लिया जाता है।

हर्षिनी कान्हेकर, फायरफाइटर

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अगर कहीं आग लगी हो तो फायर ब्रिगेड को बुलाया जाता है जिसमें आमतौर पर पुरुष कर्मचारी होते हैं। लेकिन हर्षिनी कान्हेकर ने इस सोच को बदलकर रख दिया। भारत की पहली महिला फायर फाइटर बन हर्षिनी ने समाज को दिखा दिया कि महिलाएं आग से अपना भी बचाव कर सकती हैं और दूसरों का भी।

चंद्रा और प्रकाशो तोमर, शूटर दादी

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मन में यदि कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा हो तो उम्र भी राह में बाधक नहीं बनती है। ऐसा ही उदाहरण पेश करती हैं ये हस्तियां। बागपत के बड़ौत कोतवाली के जोहड़ी गांव निवासी प्रकाशी (77) और चन्द्रो (82) को पूरा देश शूटर दादी के नाम से जानता है। रिश्तें में दोनों ये एक दूसरी की देवरानी-जेठानी हैं। 70-80 साल की उम्र में जहाँ कांपते हाथों को किसी का सहारा चाहिए होता है वहां ये बेबाक शूटर दादियां अपनी अचूक निशाने के ज्ञान से जोहाड़ी राइफल क्लब में कई युवा निशानेबाज तैयार कर रही हैं।

अलीशा अब्दुला, सुपरबाइक रेसर

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चेन्नई की अलीशा अब्दुल्ला भारत की पहली और एकमात्र महिला सुपरबाइक रेसर हैं। साथ ही वह भारत की सबसे फास्टेस्ट महिला कार रेसर भी हैं। इन्होंने महज 13 साल की उम्र में नेशनल गो-कार्टिंग चैपिंयनशिप जीतकर अपना सिक्का जमा लिया था। जितनी निडर वो अपने काम को लेकर हैं उतनी ही अपने प्रति भी। अलीशा रेसिंग क्वीन के साथ-साथ खूबसूरत और मल्टी टेलेंटेड भी हैं। वो फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं।

संपत पाल, गुलाबी गैंग लीडर

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संपत पाल देवी एक सामाजिक कार्यकर्ता तथा गुलाबी गैंग नामक संस्था की संस्थापक है। आज गुलाबी साड़ी और हाथों में लाठी लिए महिलाओं के अधिकार और मजदूरों के हक के लिए लड़ने वाला ये गुलाबी गैंग देश में ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में अपनी पहचान बना चुका है। साल 2007 में फ्रांस की महिला लेखिका मैरी और मार्गो ने संपत पाल के संघर्षमय जीवन परिचय को फ्रांस की पत्रिका “फीड्स” में प्रकाशित कर संपत पाल को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्रदान की।

एम. वसंतकुमारी, बस ड्राइवर

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जहां आज भी लोग महिलाओं को खराब ड्राइविंग के लिए उन्हें दोष देते हैं उस नजरिये वाले इस समाज में सन 1993 से बतौर बस ड्राइवर का काम कर रही तमिलनाडु की एम.वसंतकुमारी सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया की पहली महिला बस ड्राइवर बनीं। जब वो बस ड्राइवर के टेस्ट में चुनाव के लिए पहुंची तो लोग हंसने लगे लेकिन जब उन्होंने सारे टेस्ट पार कर लिये तो सभी अधिकारी चौंक गये।

नोरती बाई, कंप्यूटर गुरू

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राजस्थान में 64 साल की नोरती बाई ने कंप्यूटर सीख कर कामयाबी की वो इबारत लिखी जो हर किसी के लिए आज मिसाल बन गई है। नोरती बाई ने गांव की पिछड़ी महिलाओं को हाईटेक बनाने की मुहिम छेड़ी। उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी पर सिर्फ शहर वालों का अधिकार नहीं है बल्कि गांव के लोगों को भी हाई टेक बनने का पूरा हक है जिसे वो पूरा करके रहेगी। नोरती आज गांव के लोगों को कंप्यूटर चलाना सिखाती है और उन्हें देश की मुख्य धारा से जोड़ने का भी काम करती हैं।

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