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ये हैं भगवान बुद्ध से जुड़े ऐसे स्थान जो आज बौद्ध अनुयायियों के लिए ये पवित्र तीर्थ स्थल

Archana ChaturvediArchana Chaturvedi  |  May 24, 2021
बौद्ध धर्म के प्रमुख पवित्र स्थान, famous buddhist places in hindi

सत्य और अहिंसा को अपने जीवन का आधार मनाने वाले और बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध ने लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी। महात्मा गौतम बुद्ध के उपदेश आज के समय में भी बहुत प्रासंगिक हैं। एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया के करीब 2 अरब (29%) लोग बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध जयंती या बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध (Bhagwan Buddha) का महापरिनिर्वाण समारोह भी मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। भारत देश में भगवान बुद्ध से जुड़े कुछ ऐसे पवित्र स्थल हैं जो दुनिया भर के यात्रियों को अपने आध्यात्मिक लहरियों में डूब जाने के लिए आमंत्रित करती है, ताकि वे भगवान बुद्ध के पदचिह्नों पर चल सकें और उस स्थान पर उनके दर्शन को समझ सकें। 

बौद्ध धर्म के 5 प्रमुख पवित्र स्थान famous buddhist places in hindi

बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं 5 ऐसे प्रमुख जगहों (famous indian buddhist places) के बारे में, जिनका भगवान बुद्ध से बहुत गहरा संबंध है और बौद्ध अनुयायियों के लिए ये पवित्र तीर्थ स्थल।

लुम्बिनी (Lumbini)

Lumbin

लुम्बिनी एक बौद्ध तीर्थ है जोकि उत्तर प्रदेश के ककराहा नामक गांव से 14 मील और नेपाल-भारत सीमा से कुछ दूर पर बना रुमिनोदेई नामक गांव में है। ये भगवान बुद्ध का जन्म स्थल है। बुद्ध के जीवन से सम्बंधित, बोध गया, सारनाथ व कुशीनगर के अलावा, यह चौथा मुख्य स्थल है। कहते हैं कि उनकी माता कपिलवस्तु की महारानी मायादेवी जब अपने पीहर कोलिय गणराज्य की राजधानी देवदह जा रही थीं तब उन्होंने रास्ते में लुम्बिनी वन में एक शाल वृक्ष के नीचे बुद्ध को जन्म दिया था। युनेस्को ने बुद्ध के जन्मस्थान को ऐतिहासिक महत्व की वैश्विक धरोहर घोषित कर रखा है। देश-दुनिया से बौद्ध अनुयायी इस पवित्र जगह के दर्शन करने आते हैं।

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सारनाथ (Sarnath)

Sarnath

सारनाथ, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बनारस में स्थित एक प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है। ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था, जिसे “धर्म चक्र प्रवर्तन” का नाम दिया जाता है। भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था। यहीं से उन्होंने धम्मचक्र प्रवर्तन प्रारंभ किया था। इसके अलावा सारनाथ को जैन धर्म और हिन्दू धर्म में भी महत्व प्राप्त है। जैन ग्रन्थों में इसे सिंहपुर कहा गया है। ये जगह काफी सुकून और शांति भरी है। यहां आकर आप खुद को काफी रिलैक्स महसूस करेंगे।

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बोधगया (Bodh Gaya)

Bodh Gaya

बोधगया भारत के बिहार राज्य के गया नामक शहर में स्थित है। यहां महात्मा बुद्ध ने बोधि वृक्ष के तले निर्वाण प्राप्त करा था। गौतम बुद्ध को जिस पीपल के वृक्ष के नीच तपस्या करते हुए ज्ञान मिला था, उस पीपल का वंश-वृक्ष आज भी उसी जगह पर मौजूद है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बोधगया सबसे बड़े तीर्थस्थलों के रूप में प्रसिद्ध है क्योंकि यही पर भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई थी। देश-दुनिया के कोने-कोने से लोग महाबोध‍ि मंदिर के दर्शन करने आते हैं। भव्य महाबोधि मंदिर भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थलों में से एक है, और उस स्थान को चिह्नित करता है जहां उन्होंने आत्मज्ञान प्राप्त किया था। 

कुशीनगर (Kushinagar)

Kushinagar

उत्‍तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित कुशीनगर बुद्ध तीर्थ नाम से प्रसिद्ध है। यहां का महापरिनिर्वाण मंदिर, पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। यहां गौतम बुद्ध की मृत्यु और अंतिम संस्कार हुआ था। मान्यता है कि 80 वर्ष की अवस्था में तथागत बुद्ध ने दो शाल वृक्षों के मध्य यहां महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। यह प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ है। यहां पर बुद्ध के आठ स्तूपों में से एक स्तूप बना है, जहां बुद्ध की अस्थियां रखी थीं। बौद्ध अनुयायियों का कहना है कि इस स्थान में भगवान बुद्ध चिरनिद्रा में हैं।

सांची का स्तूप (Sanchi Stupa)

Sanchi Stupa

सांची का स्तूप भारत के मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 52 किलोमीटर दूर स्थित है। सांची स्तूप एक विशाल अर्ध-परिपत्र, गुंबद के आकार का कक्ष है। ये स्‍तूप विशाल अर्ध गोलाकार गुम्‍बद हैं जिनमें एक केन्‍द्रीय कक्ष है और इस कक्ष में महात्‍मा बुद्ध के अवशेष रखे गए थे। यह सम्राट अशोक की विरासत है, चूंकि वह बौद्ध धर्म को मान चुके थे, इसलिए सांची स्तूप को बौद्ध धर्म से जोड़कर देखा जाता है। सांची का स्तूप भारत में सबसे पुराने पत्थर से बनी इमारतों में से एक है। यूनेस्को ने 1989 में इसे विश्व विरासत स्थल घोषित किया था।

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