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क्रैडल कैप (Cradle Cap in hindi)

क्रैडल कैप होने पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं

नवजात शिशुओं के सिर पर पीली पपड़ीदार त्वचा को आसान भाषा में क्रैडल कैप के नाम से जाना जता है। मेडिकल भाषा में इसे सेबोरिक डर्मेटाइटिस (Seborrheic Dermatitis) कहते हैं। क्रैडल कैप की परेशानी होने पर बच्चों के स्कैल्प की कैसे केयर करें, इसे लेकर पैरेंट्स के मन में कई सारे सवाल होते हैं। यही वजह है इस लेख में हम क्रैडल कैप होने पर क्या करें व किन चीजों से परहेज करें, इसके बारे में जानेंगे।

बच्चों में क्रैडल कैप के कारण (Causes of Cradle Cap in Infants in Hindi)

क्रैडल कैप
बच्चों में क्रैडल कैप की परेशानी

बच्चों में क्रैडल कैप की समस्या किन कारणों से हो सकती है, एक नजर इस पर डालते हैं:

एक शोध में दी जानकारी के अनुसार, त्वचा में मौजूद सिबेसियस ग्लैंड्स (तेल ग्रंथियां) द्वारा अधिक स्राव या ऑयल में यीस्ट होने के कारण क्रैडल कैप की परेशानी हो सकती है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान माँ से गर्भ में शिशु को कुछ ऐसे हार्मोन ट्रांसफर हो जाते हैं, जो सीबम के उत्पादन को बढ़ा देते हैं। इससे स्कैल्प ग्रीसी होने लगता है, जिससे त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और क्रैडल कैप की समस्या हो जाती है।

इसके अलावा, वयस्कों की तरह शिशुओं की भी डेड स्किन निकलती है। कई बार यह डेड स्किन त्वचा की सतह पर ऑयल के साथ चिपक जाती हैऔर कुछ समय के बाद ये कठोर पीले रंग की पपड़ीदार का रूप ले लेती है। ऐसे में क्रैडल कैप का एक कारण सतह पर डेड स्किन का एकत्रित होना हो सकता है।

बच्चों में क्रैडल कैप के लक्षण (Symptoms Of Cradle Cap in Infants in Hindi)

नवजात शिशु में क्रैडल कैप यानी सिर में पपड़ी जमने के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • स्कैल्प पर पीले रंग की मोटी और पपड़ीदार परत का जमना
  • स्कैल्प का अत्यधिक ग्रीसी या फ्लेक्स होना
  • फोरहेड के आस-पास की त्वचा पर पैच बनना
  • सिर के ऊपरी हिस्से पर लालिमा नजर आ सकती है

बच्चों में क्रैडल कैप की देखभाल कैसे करें?

शिशुओं में क्रैडल कैप की समस्या होने पर पैरेंट्स को उनकी देखभाल कैसे करनी चाहिए, इसकी जानकारी नीचे सूचीबद्ध दे रहे हैं:

  • रोजाना माइल्ड शैंपू से हेयर वॉश करें- ज्यादातर बच्चों में क्रैडल कैप की समस्या बच्चे के नियमित रूप से हेयर वॉश करने से दूर हो जाती है। शिशु के लिए हमेशा माइल्ड बेबी शैंपू का चयन करें और स्कैल्प पर उंगलियों की मदद से अच्छी तरह मसाज करते हुए लगाएं। बेबीचक्रा के नैचुर स्ट्रेंथनिंग बेबी शैंपू में कुछ ऐसे गुण हैं, जो शिशु में क्रैडल कैप की समस्या को दूर करने में सहायक हो सकते हैं।एक बार बच्चे के स्कैल्प से पपड़ीदार त्वचा खत्म हो जाए, तो इससे बचाव के लिए हफ्ते में तीन बार शिशु का हेयरवॉश करें। धीरे-धीरे आप हफ्ते में दो बार शैंपू कर सकते हैं।
  • सॉफ्ट कॉम्ब से पपड़ीदार त्वचा को हटाएं- कभी भी नाखूनों या कंघी से बच्चे के सिर से फ्लेक्स व पपड़ी निकालने का प्रयास न करें। इससे बच्चे के स्कैल्प में ब्लीडिंग व इंफेक्शन का जोखिम अधिक होता है। इसकी बजाय रात को सोने से पहले बच्चे के स्कैल्प पर पेट्रोलियम जेली या ऑयल लगाकर सोएं। सुबह तक यह त्वचा सॉफ्ट हो जाएगी तो एक सॉफ्ट ब्रश की मदद से शिशु के स्कैल्प से पपड़ीदार त्वचा को निकाला जा सकता है।

अगर शिशु के फोरहेड व गाल पर स्कैल्प से पपड़ी गिरे तो बेबी वाइप्स से उनके चेहरे को साफ करें।

  • मेडिकेटेड लोशन- डॉक्टर से क्रैडल कैप से निजात दिलाने के लिए ओवर-द-काउंटर लोशन लिखवा सकते हैं। इससे बच्चे के शैंपू करने से 15 मिनट पहले लगाकर छोड़ना होता है। 

डॉक्टर को कब दिखाएं?

 वैसे तो क्रैडल कैप का इलाज घर पर कर लिया जाता है। इसकी देखभाल से जुड़ी टिप्स लेख में ऊपर शेयर भी की गई हैं। नीचे कुछ ऐसी स्थिति के बारे में जानेंगे, जिसमें बिना देरी करे डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा:

क्रैडल कैप
बच्चों में क्रैडल कैप के उपाय
  • नियमित रूप से बच्चे की स्कैल्प की सफाई का ध्यान रखने व लोशन लगाने के बाद भी क्रैडल कैप की समस्या कम नहीं हो रही है।
  • बच्चे सिर में अत्यधिक खुजली से परेशान होकर रो रहा हो। यह एग्जिमा का लक्षण हो सकता है। देखने में यह क्रैडल कैप की तरह ही लगता है, लेकिन यह एक गंभीर परेशानी है।
  • क्रैडल कैप की परेशानी बच्चे के स्कैल्प तक सीमित है, तो इसमें घबराने की बात नहीं है। लेकिन बच्चे के कान, फोरहेड, आईब्रो, नाक, गाल और गर्दन में भी पीली पपड़ीदार त्वचा दिखाई दे, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें।
  • स्कैल्प में सूजन होने पर। यह त्वचा के नीचे की लेयर में इंफेक्शन का लक्षण हो सकता है।
  • स्कैल्प की रूखी त्वचा से खून या पीला डिस्चार्ज निकलना। ये लक्षण भी इंफेक्शन की ओर इशारा करते हैं।

ये थी बच्चों में क्रैडल कैप से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी। लेख में क्रैडल कैप से निजात पाने के लिए स्कैल्प की देखभाल से जुड़े टिप्स साझा किए गए हैं। अगर 10 दिनों में बच्चे के स्कैल्प में सुधार नजर नहीं आता, तो डॉक्टर से परामर्श करें।

चित्र स्रोत: Freepik & Pexel

26 Jul 2022

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