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गणेश चतुर्थी कब है, Ganesh Chaturthi Kab Hai, गणेश चतुर्थी व्रत कथा, Ganesh Chaturthi  Vrat Katha

जानिए गणेश चतुर्थी कब है और इसकी कथा व महत्व – Ganesh Chaturthi Kab Hai

गणेश चतुर्थी सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है और यह भगवान गणेश को समर्पित है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ काम से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। यहां तक कि किसी भी देवी देवता की पूजा करने से पहले भी भगवान गणेश ही पूजे जाते हैं। गणेश चतुर्थी हर साल भगवान गणेश के जन्म के रूप में मनाई जाती है। विशेष रूप में महाराष्ट्र में इस त्योहार की धूम बस देखते ही बनती है। गणेश चतुर्थी (ganesh chaturthi in hindi) के दौरान वहां गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं देकर ही दिन की शुरुआत होती है। गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश को ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यहां जानिए गणेश चतुर्थी कब है (ganesh chaturthi kab hai 2021), गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चतुर्थी का महत्व, गणेश चतुर्थी पूजा विधि, गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा और भी बहुत कुछ। 

गणेश चतुर्थी कब है? – Ganesh Chaturthi Kab Hai

 Ganesh Chaturthi Kab Hai

यह त्योहार भाद्र के महीने में पड़ता है, त्योहार की तारीख हिंदू कैलेंडर के अनुसार और अगस्त / सितंबर में ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है। इस साल गणेश चतुर्थी 2021 (ganesh chaturthi 2021) शुक्रवार, 10 सितंबर को पड़ रही है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, मध्याह्न काल गणेश पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त 11:03 से 13:33 तक (अवधि: 02 घंटे 30 मिनट) है। गणेश चतुर्थी तिथि 10 सितंबर, 2021 को 00:18 से शुरू हो रही है और उसी दिन 21:57 बजे समाप्त हो जाएगी।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा – Ganesh Chaturthi Vrat Katha

गणेश चतुर्थी व्रत कथा भी काफी रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव और देवी पार्वती नर्मदा नदी के तट पर विराजमान थे। वहां मां पार्वती ने भगवान शिव से चौपड़ खेलने का अनुरोध किया, उस वक्त शिवजी ने मां पार्वती से सवाल किया, चौपड़ तो हम खेल लेंगे लेकिन हमारी हार-जीत का फैसला कौन करेगा? सवाल सुनकर मां पार्वती ने वहां पड़े कुछ घास के तिनके बटोरकर एक पुतला बनाया और उसमें प्राण डाल दिए और उससे कहा- पूत्र! हम चौपड़ खेलना चाहते हैं, लेकिन यहां हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है, इसलिए तुम हमारे खेल के साक्षी बनों और आखिरी में तुम ही हमें बताना कि कौन जीता, कौन हारा?
महादेव और देवी पार्वती ने चौपड़ का खेल शुरू कर दिया। तीनों बार इस खेल में देवी पार्वती ही जीतीं, लेकिन जब उस बालक से हार जीत के बारे में पूछा गया, तो उसने महादेव को विजयी बताया। ये बात सुनकर देवी पार्वती क्रोधित हो गईं और उस बालक को एक पैर से लंगड़ा होने और वहीं नदी किनारे कीचड़ में पड़े रहकर दुख भोगने का शाप दे दिया।

Ganesh Chaturthi  Vrat Katha

मां को क्रोधित देख बालक ने तुरंत ही अपनी भूल की क्षमा मांगी और कहा कि मुझसे अज्ञानवश ऐसा हो गया। कृपया मुझे माफ करें और मुक्ति का मार्ग बताएं। तब मां पार्वती उस बालक को माफ करते हुए बोलीं कि यहां नाग-कन्याएं गणेश-पूजन के लिए आएंगी। उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो इसके बाद ही तुम मुझे प्राप्त कर सकोगे। इतना कहकर देवी पार्वती कैलाश पर्वत चली गईं। उनके साथ महादेव भी कैलाश चले गए। 
एक साल बाद वहां श्रावण मास में नाग-कन्याएं गणेश पूजन के लिए आईं। उन्होंने गणेशजी का व्रत कर उस बालक को भी व्रत की विधि बताई, जिसके बाद बालक ने 12 दिन तक गणेश जी का व्रत किया। व्रत से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उसे दर्शन दिए और बालक को उसकी इच्छा के अनुसार वर दिया कि वो स्वंय चलकर कैलाश पर्वत पर अपने माता-पिता के पास पहुंच सके। गणेश जी से वरदान मिलने के बाद बालक ने कैलाश पहुंचकर अपने माता पिता के दर्शन किए।

गणेश चतुर्थी का महत्व – Importance of Ganesh Chaturthi in Hindi

गणेश चतुर्थी सबसे महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक है और यह भगवान गणेश को समर्पित है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने चंदन के लेप का उपयोग करके एक छोटे लड़के की मूर्ति बनाई और अपनी दिव्य शक्तियों से उसमें जीवन का संचार किया। इस मूर्ति से एक युवा लड़का निकला जो उन्हें अपनी मां के रूप में संबोधित करने लगा। देवी पार्वती एक पुत्र को पाकर प्रसन्न थीं, और वह जानती थीं कि यह हमेशा उनकी सेवा के लिए समर्पित रहेंगे। बड़े ही प्यार से उन्होंने अपने पुत्र का नाम गणेश रखा।

Importance of Ganesh Chaturthi in Hindi

इसके बाद, उन्होंने अपने पुत्र को स्नान करते समय प्रवेश द्वार देखने के लिए कहा। जब महादेव वहां देवी पार्वती से मिलने आये तो गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इस बात से क्रुद्ध होकर उन्होंने गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया। जब देवी पार्वती को यह बात पता चली तो उन्होंने महादेव पर अपना क्रोध जताया। जिसके बाद उन्हें एक हाथी के बच्चे का सिर लगाया गया। साथ ही यह आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ कि हर शुभ काम से पहले उनकी पूजा की जाएगी। इतना ही नहीं किसी भी देवी देवता से पहले भगवन गणेश ही पूजे जाएंगे। 

गणेश चतुर्थी पूजा विधि – Ganesh Chaturthi Puja Vidhi

Ganesh Chaturthi Puja Vidhi

1- पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पूजा आरंभ करें। जैसे- पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि
2- अब एक साफ चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाकर इसके ऊपर गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। 
3- इसके बाद गंगा जल का छिड़काव करके पूरे स्थान को पवित्र करें। भगवान श्री गणेश को पुष्प की मदद से जल अर्पित करें। 
4- अब लाल रंग का पुष्प, जनेऊ, दूर्वा, पान, सुपारी. लौंग, इलायची, नारियल और मिठाई भगवान को समर्पित करें।
5- भगवान श्री गणेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। उन्हें शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए। 

Ganesh Chaturthi Prasad

6- श्री गणेश भगवान को मोदक सबसे अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए।
7- श्रीगणेश के दिव्य मंत्र ‘ॐ श्री गं गणपतये नम:’ का 108 बार जप करें। ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
8- श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा भी साथ में करें। 
9- व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें। शांत चित्त होकर ही गणेश भगवान का पूजन करें। 
10- शास्त्रानुसार श्रीगणेश की प्रतिमा प्राणप्रति‍ष्ठित कर पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित कर देनी चाहिए। इस दौरान आप अपनी सुविधानुसार 1, 2, 3, 5, 7, 10 आदि दिनों तक भजन-कीर्तन आदि आयोजनों और सांस्कृतिक आयोजनों, पूजन अर्चन करते हुए प्रतिमा का विसर्जन कर सकते हैं। 

गणेश चतुर्थी से जुड़े सवाल और जवाब – FAQ’s

गणेश चतुर्थी व्रत का क्या महत्व है?

इस व्रत का काफी महत्व हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गणेश चतुर्थी का पर्व कैसे मनाया जाता है?

भारत के विभिन्न भागों में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र में इसे बडी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

गणेश स्थापना क्यों की जाती है?

ऐसा माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दौरान घर पर गणेश स्थापना करने से सुख-शांति आती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

गणेश चतुर्थी व्रत में क्या खाएं?

गणेश चतुर्थी व्रत में कुट्टु के आटे की रोटी या परांठा बनाकर खा सकते हैं।

गणेश चतुर्थी के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

गणेश चतुर्थी के दिन भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे चंद्रमा को न देखें। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा को देखता है, वह मिथ्या दोष या मिथ्या कलंक बनाता है, जिसका अर्थ है कुछ चुराने का झूठा आरोप लगना।

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