बच्चों को कोरोना वायरस से कैसे बचाएं, बरतें ये जरूरी सावधानियां

how to protect your child from corona virus, बच्चों को कोरोना वायरस से कैसे बचाएं

कोरोना वायरस की दूसरी लहर पूरे देश में कहर बनकर टूटी है। हर रोज़ कोरोना के लाखों केस दर्ज किये जा रहे हैं। लोग अपनों की जान बचाने के लिए मजबूर हैं। किसी को हॉस्पिटल में बेड नहीं मिल रहा तो किसी को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इन सबके बीच सबसे खतरनाक बात यह है कि कोरोना की दूसरी लहर छोटे बच्चों को भी अपना शिकार बना रही है। अब तक कई छोटे बच्चे कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि बच्चों में कोरोना के बहुत ज्यादा लक्षण देखने को नहीं मिल रहे हैं। अभी तक छोटे बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण ही देखने को मिले हैं। फिर भी इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हम बच्चों को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतें। अगर आप भी कोरोना वायरस की इस दूसरी लहर में अपने बच्चे को लेकर परेशान हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि बच्चों को कोरोना वायरस से कैसे बचाएं और बच्चों को लेकर कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। 

ब्रेस्टफीड जरूर कराएं

अगर आपके बच्चे की उम्र 0-2 साल है तो कोविड पॉजिटिव होने के बाद भी उसे ब्रेस्टफीड जरूर कराएं। दरअसल, मां का दूध बच्चे के लिए अमृत की तरह होता है। यही वजह है कि ब्रेस्टमिल्क को लिक्विड गोल्ड भी कहा जाता है। WHO ने भी पिछले साल कोरोना होने पर बच्चों को ब्रेस्टफीड कराने को लेकर गाइडलाइंस जारी की थीं, जिसमें उन्होंने बताया था कि कोरोना के दौरान बच्चे के लिए मां का दूध एकदम सेफ है। इसीलिए भले ही आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव और बेबी की रिपोर्ट नेगेटिव आई हो, उसके बाद भी उसे ब्रेस्टफीड कराना न छोड़ें। नहीं तो 15 दिन के आइसोलेशन के बाद बेबी आपका डायरेक्ट फीड लेने से मना कर सकता है क्योंकि तब तक उसे बॉटल फीड की आदत पड़ चुकी होगी।

हाइजीन का पूरा ख्याल रखें

अब आपके मन में ये सवाल उठ रहा होगा कि जब कोरोना होने पर बच्चे के पास ही नहीं जा सकते तो उसे फीड कैसे कराएं। तो हम आपको बता दें कि इस दौरान आप पूरी सेफ्टी और हाइजीन का ख्याल रखते हुए बच्चे के पास जाएं। जैसे डबल मास्क, हैंड ग्लव्स, फेस शील्ड और साफ धुले कपडे पहनकर ही बच्चे को गोद में लें और ब्रेस्टफीड कराएं। इसके अलावा घर को भी साफ-सुथरा रखें और समय-समय पर हाथ धोने के साथ सैनिटाइज़र भी लगाती रहें।

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डिलीवरी के तुरंत बाद ऐसे रखें ख्याल

अगर आपकी डिलीवरी हाल ही में हुई है और आप अभी भी हॉस्पिटल में एडमिट हैं तो कोशिश करिये वहां आपके साथ कम से कम अटेंडेंट हों। इसके अलावा आप हॉस्पिटल से घर भी आ गई हैं तो घर पर बच्चे से मिलने न के बराबर रिश्तेदारों को ही बुलाएं। आप उन्हें वीडियो कॉल कर बच्चे से मिलवा सकती हैं। अगर इस दौरान कोई घर का ही बाहर से आकर बच्चे को छूने की कोशिश करता है तो उससे कहें कि वो हाथ पैर धोकर या बेहतर होगा सीधा नहाकर ही बच्चे को हाथ लगाए। 

0-2 साल के बच्चों को मास्क न लगाएं

यह बात सही है कि डबल मास्क हमें कोरोना वायरस से बचाने में काफी अहम भूमिका निभा रहा है लेकिन 0-2 साल के बच्चों को मास्क लगाना काफी खतरे वाला साबित हो सकता है। दरअसल, 0-2 साल के बच्चों की सांस की नली काफी छोटी होती हैं। मास्क लगाने के दौरान उनका दम घुटने का खतरा बना रहता है। साथ ही इतने छोटे बच्चे कोई तकलीफ होने पर आपको बता भी नहीं पाएंगे। इसके अलावा मास्क लगा होने पर बच्चे बार-बार अपने मास्क को हाथ लगाने की कोशिश करते हैं, यह कोरोना वायरस के रिस्क को और भी बढ़ा सकता है।

बच्चे को कोरोना होने पर क्या करें

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कई बच्चे इस संक्रमण का शिकार हुए हैं। अगर आपके बच्चे में भी इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो सबसे पहले पैनिक बिलकुल न हों और तुरंत बच्चों के डॉक्टर से संपर्क करें। वो जो भी मेडिसिन या उपाय बताते हैं उसे आंख बंद कर फॉलो करें। इसके अलावा बच्चों की लिक्विड डाइट को बढ़ा दें। इसके लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा पानी पिलायें। आप उन्हें नारियल पानी या फिर फलों का जूस भी दे सकती हैं। साथ ही उन्हें खूब सारा आराम करने दें। हालांकि कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर भी बच्चों में इसके हल्के लक्षण ही देखने को मिल रहे हैं, इसलिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।     

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