खुश रहने के लिए जिंदगी में इमोशनल डीटाॅक्स भी है जरूरी

 Emotional detox, इमोशनल डीटाॅक्स

आपने डीटॉक्स शब्द के बारे में तो सुना ही होगा। फिर चाहे वो पानी के लिए हो, भोजन के लिए हो या फिर डिजिटल दुनिया से हो। डीटॉक्स का मतलब है अपने शरीर से अशुद्धियों को निकालना। वहीं डिजिटल डीटॉक्स का मतलब है कुछ समय के लिए फोन, टीवी, लैपटॉप या फिर और किसी इलेक्ट्रिक डिवाइस से दूरी बना लेना। मगर क्या आपने कभी इमोशनल डीटॉक्स (Emotional Detox) के बारे में सुना है। आजकल लोगों में डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य जैसी चीज़ें अधिक जन्म ले रही हैं। लोग मानसिक और भावनातमत रूप से खुद को कमजोर महसूस करने लगे हैं। कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन में तो यह और भी अधिक देखने को मिल रहा है। ऐसे में खुद के अंदर सकारात्मक बदलाव यानि Positive Change लाना बहुत जरूरी हो जाता है।   

कुछ दिनों पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने भी इस विषय पर अपनी चिंता जाहिर की थी। इमोशनल डीटॉक्स एक तरह से अपनी भरी हुई अलमारी और फ़ोन से कैशे क्लियर करने जैसा है। बस यहां आपको भावनात्मक रूप से अपने अंदर सकारात्मक बदलाव करने है। इससे न सिर्फ आपको एक नया दृष्टिकोण मिलता है बल्कि आपके दिमाग पर हावी होने वाली अनावश्यक चीजों को भी काट देता है। इमोशनल डीटॉक्स (Emotional Detox) आपके दिमाग को ही नहीं बल्कि आपके मन और आपकी आत्मा को भी शांति पहुंचाता है।

कड़वे अनुभवों के बारे में न सोचें

हर किसी को जिंदगी में कुछ कड़वे अनुभव होते हैं। अगर हम उनके बारे में सोचते रहेंगे तो आगे कब बढ़ेंगे। अब समय आ गया है, जब आप इन कड़वे अनुभवों का इमोशनल डीटॉक्स कर खुद में सकारात्मक बदलाव लाएं। अतीत में रहेंगे तो कभी खुश नहीं रहेंगे। उन्हें पीछे छोड़कर आगे बढ़िए। इसके लिए आप अपने दोस्तों और परिवार वालों की मदद ले सकते हैं। उनसे बात करिये, वीडियो चैट करिये, मुमकिन हो तो मिलने भी जाइये। ये सब भावनात्मक रूप से जाने-अनजाने आपकी काफी मदद करते हैं।

अधिक ऊर्जावान बनाता है

आपने महसूस किया होगा कि सुबह होने के बाद भी आपकी आंखें काफी मुश्किल से खुलती हैं। उसके बाद दिनभर शरीर में आलस छाया रहता है। इमोशनल डीटॉक्स करने से आपको इसमें काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। आपकी आत्मा और दिमाग हल्का और तरोताजा महसूस करेंगे, जिससे ऊर्जा में वृद्धि होगी और एक नए सिरे से जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी। इतना ही नहीं इसके जरिये जल्द ही आप खुद को एक्सरसाइज और योग के लिए भी प्रेरित कर सकेंगे। 

खुद के लिए समय निकालें

अब आप कहेंगे लॉकडाउन में इसके सिवा और कर क्या रहे हैं। तो हम आपको बता दें खुद के लिए समय निकालना सिर्फ अकेले रहना नहीं होता। बल्कि उन सब चीज़ों को करना होता है, जो आपको पसंद होती हैं। उदाहरण के तौर पर अगर बचपन में आपको लूडो खेलना पसंद है तो दोस्तों का ग्रुप बनाइये और ऑनलाइन लूडो खेलना शुरू करिये। वहीं अगर पेंटिंग करना या फिर कोई म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बजाना पसंद है तो भी करिये। हर वो काम, जिसे करना आप एन्जॉय करती हैं, वो करें। 

मस्तिष्क को एकाग्र करें

जब आपका मस्तिष्क एकाग्र होता है, तो आपका पूरा शरीर इसके अनुरूप काम करता है। इमोशनल डीटॉक्स का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि यह आपके मस्तिष्क को कैसे साफ करेगा। यह आक्रोश, कड़वाहट और ईर्ष्या की नकारात्मक भावनाओं को मिटा देगा जो आपको रोके हुए हैं। यह आपको नकारात्मक बातों और सोच से निकालकर सकारात्मकता की ओर ले जायेगा। 

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