किस दिन मनाई जाएगी रामनवमी, जानें श्री राम जन्म कथा

राम जन्म कथा और राम के 108 नाम - Ram Janam Katha in Hindi

देशभर में रामनवमी (ram janam katha) का त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था और इस वजह से रामनवमी की विशेष मान्यता है। हर साल यह त्यौहार चैत्र नवरात्रि के खत्म होने के बाद आने वाली रामनवमी के दिन मनाया जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 13 अप्रैल को हो रही है और इसके बाद 21 अप्रैल को रामनवमी का त्यौहार मनाया जाएगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को रामनवमी (रामनवमी स्टेटस) मनाई जाती है। भगवान श्रीराम की जन्म कथा काफी रोचक है। दरअसल, उनका जन्म लंका के राजा रावण का वध करने के लिए हुआ था और इस वजह से भगवान विष्णु ने राम के रूप में त्रेता युग में अवतार लिया था। तो चलिए इस रामनवमी आपको बताते हैं भगवान राम की जन्म कथा।

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    भगवान श्री राम जन्म कथा - Ram Janam Katha in Hindi

    अयोध्या के महाराज दशरथ की कोई संतान नहीं थी। इस वजह से उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए एक यज्ञ करने का फैसला किया। यज्ञ शुरू करने के साथ ही उन्होंने अपनी चतुरंगिनी सेना के साथ श्यामकर्ण नाम का घोड़ा छोड़ दिया। इसके बाद उनका यज्ञ शुरू हुआ। इस यज्ञ में राजा दशरथ के सभी ऋषि-मुनी, तपस्वी, विद्वान, मित्र, राजा-महाराजा और उनके गुरु वशिष्ठ भी शामिल हुए। इन सभी लोगों की उपस्थिति में यज्ञ का आरंभ हुआ।
    मंत्रोच्चार से चारों दिशाएं गूंज उठी और यज्ञ की आहुति से सभी दिशाएं महक उठी। यज्ञ के लिए विशेष खीर भी बनाई गई। यज्ञ के समाप्त होने के बाद महाराज दशरथ ने अपने सभी अतिथियों, ऋषि-मुनियों, ब्राह्मणों आदि को दान देकर सकुशल विदा किया। वहीं उन्होंने अपनी तीनों पत्नियों को उन्होंने प्रसाद की खीर खिलाई। इस यज्ञ के प्रभाव से उनकी तीनों पत्नियां गर्भवती हो गईं। 
    चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (राम जन्म कथा) को पुनर्वसु नक्षत्र में राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने शिशु को जन्म दिया। वह शिशु बेहद ही आकर्षक, तेजस्वी था और वह और कोई नहीं बल्कि भगवान विष्णु का ही स्वरूप था। इसके बाद रानी कैकेयी ने एक और रानी सुमित्रा ने दो तेजस्वी पुत्रों को जन्म दिया। चार पुत्रों को पाने के बाद महाराज दशरथ बहुत ही प्रसन्न हो गए और उन्होंने पूरे राज्य में उत्सव मनाया। 
    कुछ समय बाद चारों पुत्रों का नामकरण किया गया। महर्षि वशिष्ठ ने दशरथ जी के बड़े पुत्र का नाम राम, दूसरे का भरत, तीसरे का लक्ष्मण और सबसे छोटे पुत्र का नाम शत्रुघ्न रखा। चारों बालकों की किलकारियों से पूरा महल गूंज उठा। महाराज दशरथ अपनी तीनों रानियों के साथ अपने बालकों से स्नेह करते थे। 
    गुरु विश्वामित्र ने ही भगवान श्रीराम (bhagwan ram history in hindi) को धनुर्विद्या और शास्त्र विद्या का ज्ञान दिया। वहीं ऋषि वशिष्ठ ने भगवान राम को राजपाट और वेदों के बारे में सिखाया। उन्होंने ही भगवान राम का राज्याभिषेक भी किया था। 

    भगवान राम बाल कथा - Bal Ram Katha in Hindi

    यह तो सभी जानते हैं कि प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया था और इसकी कहानी भी आपने कई बार सुनी होगी लेकिन आज हम आपको भगवान श्रीराम के बाल काल की एक कहानी सुनाने वाले हैं। दरअसल, एक बार मैया ने भगवान राम को स्नान करवाया और फिर सुंदर सा श्रृंगार किया और उन्हें पालने में सुला दिया। इसके बाद मां ने अपने कुल के इष्ट देव की पूजा के लिए स्नान किया। फिर भगवान की पूजा की और भोग चढ़ाया और मैया रसोई घर में चली गई। जैसी ही माता पूजा के स्थान पर लौटती है तो देखती है कि राम इष्टदेव के लिए चढ़ाया हुआ प्रसाद खा रहे हैं।
    माता डर जाती है और सोचती है कि मैंने तो लला को पालने में सुलाया था फिर यहां किसने लाकर उन्हें बैठा दिया। इसलिए वह डर कर पुत्र के पास जाती है और उन्हें सोया हुआ देखती है। फिर वह दोबारा पूजा स्थान पर जाती है और लला को भोजन करते हुए देखती है। उनके हृदय में कम्प होने लगा है और मन को चैन नहीं मिलता है। 
    माता सोच में पड़ जाती है कि 2 बालक सही में हैं, या उनकी बुद्धि का भ्रम है। मां बहुत घबरा जाती है लेकिन भगवान मां को देखकर मुस्कुरा देते हैं और वह माता को अपना अद्भुत रूप दिखाते हैं। 
    जिसके एक-एक रोम में करोड़ों ब्राह्माण लगे हुए हैं। अगणित सूर्य, चंद्रमा, शिव, ब्रह्मा, बहुत से पर्वत, नदियां, समुद्र, पृथ्वी, वन, गुण, ज्ञान दिखते हैं। भगवान की माया दर्शन के बाद मां हाथ जोड़कर खड़ी हो जाती है। मां का शरीर पुलकित हो जाता है और आंखें बंद हो जाती हैं। मां भगवान श्रीराम के चरणों में शीश झुका लेती है। माता को आश्चर्यचकित देख, भगवान राम एक बार फिर से बाल रूप में लौट आते हैं। मां इतना डर जाती है कि वह कुछ नहीं बोल पाती। कौशल्या जी बार-बार हाथ जोड़कर विनय करती हैं कि हे प्रभु, मुझे आपकी माया अब कभी न व्यापे। इस प्रकार प्रभु राम ने अपना विराट रूप  माता कौशल्या को दिखाया था। 

    रामनवमी से जुड़ें सवाल जवाब -

    2021 में चैत्र रामनवमी कितने तारीख को है?

    2021 में चैत्र रामवमी 21 अप्रौल को मनाई जाएगी।

    राम का जन्म कब हुआ था?

    प्रभू श्रीराम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को हुआ था।

    रामचरितमानस क्या है?

    रामचरितमानस तुलसीदास की सबसे प्रमुख कृति है।

    भगवान राम का जन्म कहाँ हुआ?

    भगवान श्रीराम का जन्म माता कौशल्या की कोख से अयोध्या में हुआ था।

    रामायण किसने लिखी?

    रामायण के रचयिता महर्षी वालमिकी हैं।

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