नवरात्रि पर जानिए देवी मां के 9 रूप और उनके वाहनों के बारे में

nine faces of maa durga and their vehicle

13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि (Navratri Wishes in Hindi) का शुभारंभ हो चुका है। अब 9 दिन तक सब जगह माता रानी के जयकारे सुनाई देंगे। देवी मां के भक्तों को इन 9 दिनों का खास इंतज़ार होता है। इस दौरान भक्त देवी मां अपने सबसे करीब पाते हैं। इन 9 दिनों में देवी मां की पूजा-अर्चना पूरे श्रद्धा पूर्वक की जाती है। कहना गलत नहीं होगा कि एक तरह यह 9 दिन पूरी तरह से देवी मां के 9 रूपों को समर्पित होते हैं। देवी मां के यह 9 रूप हर मायने में अलग-अलग होते हैं। यहां तक कि इनकी शक्तियां, पसंदीदा रंग और भोग भी अलग होते हैं। इसी तरह अलग होते हैं इन 9 रूपों में देवी मां के वाहन। वैसे तो देवी मां सिंह पर सवारी करती हैं लेकिन जिस तरह देवी मां के यह 9 रूप अलग होते हैं उसी तरह उनके वाहन भी अलग होते हैं। इतना ही नहीं वाहनों के साथ इन 9 देवियों के अस्त्र-शस्त्र भी अलग-अलग होते हैं। जानिए देवी के 9 रूप और उनके वाहनों के बारे में। 

मां शैलपुत्री

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। मां शैलपुत्री ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और उनके बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। माता शैलपुत्री के रूप में देवी मां बैल पर सवारी करती हैं। 

मां ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में वह कमंडल धारण किए हैं। खास बात यह है कि देवी मां इस रूप में बिना किसी वाहन के दर्शन देती हैं। 

मां चंद्रघंटा

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। मां चंद्रघंटा के दस हाथ हैं और हर हाथ में वे खड्ग, गदा और धनुष सहित अलग-अलग शस्त्र धारण किये हुए हैं। देवी मां के इस रूप यानी मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। 

मां कूष्मांडा

नवरात्रि का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। कूष्मांडा देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। वहीं आठवें हाथ में जप माला है। देवी मां के रूप का वाहन भी सिंह है। 

मां स्कंदमाता

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। इस देवी की चार भुजाएं हैं। यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा वर मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। यह कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। मां स्कंदमाता के रूप में देवी मां सिंह पर सवारी करती हैं।

मां कात्यायनी

नवरात्रि के छठवें दिन मां कात्यायनी की उपासना की जाती है। इनकी चार भुजाएं हैं। दायीं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभय मुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है व नीचे वाले हाथ में तलवार है। इनका वाहन भी सिंह है।

मां कालरात्रि

नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। इनका रूप भयानक है, सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इस देवी के तीन नेत्र हैं। इनका वाहन गधा है। इनकी भी चार भुजाएं हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है, नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। वहीं बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है।

भगवती महागौरी

देवी मां की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। यानी नवरात्रि का आठवां दिन महागौरी को समर्पित होता है। भगवती महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। महागौरी का वाहन बैल है। 

मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नवें और आखिरी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। इनकी भी चार भुजाएं हैं। दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है। मां सिद्धिदात्री सिंह की सवारी करती हैं। 

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