नवरात्रि पर जानिए दुर्गा सप्तशती पाठ और इसके 13 अध्यायों की विशेषता

Importance of Durga Saptshati Path, 13 chapters of Durga Saptshati path

इस साल की चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ (Navratri Wishes in Hindi) हो चुका है। देवी मैया का दरबार भी सज चुका है। घरों में मां दुर्गा और उनके 9 रूपों का पूजन भी शुरू हो गया है। नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ का भी प्रावधान है। भक्त गण पूरे मन से इन 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करते हैं। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ बेहद फलदायी है। इसे पढ़ने से मनुष्य के सभी दुःख दर्द दूर हो जाते हैं और माता रानी उस व्यक्ति पर अपना सारा आशीर्वाद भी लुटा देती हैं। हो सकता है आपने दुर्गा सप्तशती के इन 13 अध्यायों का पाठ कई बार किया हो। मगर क्या आप दुर्गा सप्तशती के इन 13 अध्यायों की विशेषता से वाकिफ हैं। अगर नहीं तो हम आपको यहां इन 13 अध्यायों की विशेषता से अवगत करा रहे हैं। 

प्रथम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का प्रथम अध्याय मधु कैटभ वध और योगमाया देवी की उत्पत्ति के बारे में बताता है। इसका पाठ करने से मनुष्य की सभी चिंताएं दूर होती हैं और शत्रुओं से किसी भी तरह का भय नहीं रहता। 

द्वितीय और तृतीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती का द्वितीय और तृतीय अध्याय त्रिदेव सहित सभी देवताओं के तेज से मां दुर्गा का अवतरण और महिषासुर सेना, उसके सेनापति और खुद महिषासुर के वध की गाथा बताता है। इसका पाठ करने से मनुष्य को कोर्ट कचहरी के मामले में सफलता मिलती है साथ ही हर प्रकार के झूठे आरोपों से मुक्ति भी मिलती है।

चौथा अध्याय

दुर्गा सप्तशती का चौथा अध्याय इंद्र आदि देवताओं द्वारा मां दुर्गा की स्तुति को समर्पित है। इस अध्याय का पाठ करने से न सिर्फ देवी की भक्ति प्राप्त होती है बल्कि अच्छा जीवनसाथी भी मिलता है।

पंचम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का पंचम अध्याय देवताओं की स्तुति द्वारा मां का दर्शन और चंड-मुंड द्वारा शुम्भ के सामने देवी की सुंदरता का वृतांत कहता है। इस अध्याय का पाठ करने से शरीर और आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही किसी भी तरह का भय, तंत्र-मंत्र और बुरे सपनों का भी नाश होता है।

छठा अध्याय

दुर्गा सप्तशती का छठा अध्याय धूम्रलोचन वध की गाथा बताता है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधा का नाश किया जा सकता है। 

सप्तम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का सप्तम अध्याय चामुंडा देवी द्वारा चंड-मुंड वध को समर्पित है। इसका पाठ करने से मन के छिपी हुई विशेष कामनाओं की पूर्ति होती है।

अष्टम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का अष्टम अध्याय मां काली द्वारा रक्तबीज वध की कहानी कहता है। रक्तबीज को वरदान था कि उसके रक्त की जितनी बूंदे धरती पर गिरेंगी उतने ही अधिक रक्तबीज पैदा होंगे। तब मां काली ने उसके सभी रक्त को पीकर रक्तबीज का वध किया था। इस अध्याय का पाठ करने से वशीकरण की शक्ति मिलती है और साथ ही नियमित रूप से धन लाभ होता है। 

नवम और दशम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का नवम और दशम अध्याय देवी मां द्वारा शुम्भ-निशुम्भ के वध और सभी राक्षस गणों के पाताल लोक जाने की गाथा को बताता है। इस अध्याय का पाठ करने से संपत्ति का लाभ होता है और साथ ही साथ खोये हुए व्यक्ति का पता भी मिलता है। इतना ही नहीं अपूर्व शक्ति और संतान सुख की प्राप्ति भी होती है।

ग्यारहवां अध्याय

दुर्गा सप्तशती का ग्यारहवां अध्याय समस्त देवताओं द्वारा देवी मां की स्तुति और देवी के द्वारा देवताओं को वरदान की कहानी कहता है। इसका पाठ करने से हर तरह की चिंता दूर हो जाती है और व्यापार में खूब सफलता भी प्राप्त होती है।

बारहवां अध्याय

दुर्गा सप्तशती का बारहवां अध्याय देवी भक्ति और दुर्गा सप्तशती के पाठ और फल की महिमा का बखान करता है। इस अध्याय का पाठ करने से रोगों से छुटकारा मिलता है। साथ ही यश और मान सम्मान की प्राप्ति होती है। 

तेरहवां अध्याय

दुर्गा सप्तशती का तेरहवां अध्याय राजा सुरथ और वैश्य की घोर तपस्या व मां दुर्गा द्वारा उन्हें मनोवांछित वरदान देने की कहानी कहता है। इसका पाठ करने से देवी की कृपा और भक्ति की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति की हर तरह के संकट से रक्षा होती है।...और इसी के साथ देवी मां के 13 अध्यायों का समापन हो जाता है। 

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