हर लड़की को इन चीजों के लिए थोड़ा सेल्फिश होना ही चाहिए

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मी, माइसेल्फ एंड आई का मतलब है - मैं, खुद के लिए और मेरा। सरल शब्दों में कहें तो इसे सेल्फिश कहा जाता है। जब भी हम किसी को अपने लिए ऐसा कहते सुनते हैं तो हमें लगता है ये कितना सेल्फिश पर्सन है जो सिर्फ अपने बारे में ही सोचता है, दूसरों की तो इसे कोई फ्रिक ही नहीं है। लेकिन अगर आप इसका दूसरा नजरिया देखें तो ये खुद के लिए जीने की प्रेरणा देता है। सेल्फिश होने का मतलब ये नहीं कि आप दूसरों को दुख पहुंचाकर खुद खुशहाली से जीये। सेल्फिश का मतलब है उस स्वार्थ से जो बिना किसी को नुकसान पहुंचाए खुद का संतुष्टि देता है। इस स्वार्थ में अहम नहीं होता बल्कि खुद के लिए प्यार होता है। हमारे समाज में महिलाएं कई किरदार निभाती है। वो कभी किसी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी, कभी किसी मां होती हैं। ऐसे में उन्हें हर पल कहीं न कहीं अपने स्वार्थ यानि उन ख्वाहिशों को दबाना पड़ता है, जो दूसरों की खुशी के आड़े आ रही हों। इस वुमेंस डे (Womens Day Wishes in Hindi) के मौके पर हम आप से कहेंगे कि आपको अपने जीवन में कुछ चीजों के लिए थोड़ा सेल्फिश तो जरूर बनना चाहिए।

महिलाओं को इन चीजों के लिए थोड़ा सेल्फिश होना है जरूरी Why Women Need to be a Little Selfish in Hindi

हम में से ज्यादातर महिलाओं को बचपन से सीखाया जाता है कि तुम्हें अपने घर का ख्याल रखना है, तुमसे पहले तुम्हारा परिवार है, घर की इज्जत रखनी है, एडजस्ट करना सीखों, जवाब देना औरतों को शोभा नहीं देता और भी तमाम तरह की बंदिशें समाज द्वारा धीरे-धीरे हमपर थोपी जाने लगती हैं। ऐसे में हम लोग भी अपना मन मानकर जीना कब सीख जाते हैं पता ही नहीं चलता है। लेकिन कभी-कभी अपने लिए सेल्फिश होना भी जरूरी है। वो एक डायलॉग है न - 'जब जिंदगी एक बार मिली है तो दो बार क्या सोचना'। यही तो हम आपसे कहना चाहते हैं कि क्यों इतना सोचना? सबके साथ अपने लिए भी सोचना चाहिए, क्योंकि अगर आप अंदर से खुश नहीं रहेंगे तो अपने परिवार को कैसे खुश रखेंगे। तो आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिनके लिए थोड़ा सेल्फिश होना जरूरी है -

अक्सर ऐसा होता है कि जब घर में खाना कम पड़ जाता है तो घर की महिलाएं या तो खुद के लिये कम लेती या नहीं खाती हैं ये सोचकर की बाकि लोगों को कम मिलेगा। लेकिन हम चाहें तो आधा-आधा भी तो खा सकते हैं, पूरा देने की भी तो कोई जरूरत नहीं है। 

ये तो हर घर की कहानी है कि महिलाएं ही सारा काम करती हैं। अगर ऐसे में कोई वर्किंग वूमन है तो उसे घर और बाहर दोनों के काम करना है। लेकिन आपके शरीर को भी आराम की जरूरत होती है, आप भी इंसान हैं और मशीन नहीं। घर के कामों को सभी सदस्यों के साथ मिलजुल करें, सबकुछ अकेले करने की कोई जरूरत नहीं है। 

हर किसी को फिट रहने, अच्छा दिखने का अधिकार है और आपको भी। अपने लिये थोड़ा समय निकालें और फिट रहने के लिए वर्कआउट करें, खुद के लिए सजे-संवरे। क्योंकि आप अपना ख्याल नहीं रखेंगी तो घर के कैसे रख पायेंगी।

हर समय आप दूसरों के लिए सोचती रहती हैं। हर काम दूसरों की पसंद और नपसंद को देखते हुए करती हैं। लेकिन जब अपनी बारी आती है तो दिमाग सुनती हैं दिल की नहीं। लेकिन ये भी तो सही नहीं है। 

महिलाओं के पहनावे पे आज से नहीं बल्कि बहुत पहले समय से समाज की तंज कसने की आदत रही हैं। आपको जो अच्छा लगे, जो कंफर्टेबल लगे वो पहनें। ज्यादा मत सोंचे, क्योंकि कुछ तो लोग कहेंगे और लोगों का काम है कहना!

महिलाओं की आवाज तब दबती है जब वो खुद बोलना नहीं जानती। आपको जो बात गलत लगे उसके लिए आपको ही आवाज उठानी होगी। ज्यादा अच्छाई के चक्कर में अपना सुख, चैन और शांति को गंवाये मत। 

हर किसी का एक पैशन होता, जिसे आपको जिंदा रखना चाहिए। घर-परिवार के चक्कर में आप अपनी उस खुशी को मत भुला दीजिए, जो आप में आत्मविश्वास पैदा करती हैं और जो आपको आम से खास बनाती है।

हमारे समाज में महिलाओं के हर फैसले शादी से पहले पिता या भाई और बाद में पति या बेटे लेते आये हैं। लेकिन जरा सोचिए हमारी अपनी जिंदगी और उस पर अधिकार किसी और का, ये तो नाइंसाफी है। अपने फैसले खुद से लेना सीखें, निर्भर रहने की नहीं हैं आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है।

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