इस महाशिवरात्रि जानें भारत से बाहर कुछ फेमस शिव मंदिर के बारे में

Shiva temple outside india. Shiv Temple

भगवान शिव (lord shiva) को एकमात्र ऐसा भगवान माना जाता हैं, जो हिमालय पर्वत पर विराजमान हैं। उनका एक नाम भोलेनाथ भी है। कहा जाता है कि अगर कोई सच्चे मन से शिवलिंग पर सिर्फ एक बेलपत्र भी चढ़ा दे तो उसी में भगवान शिव (shiv bhagwan) प्रसन्न हो जाते हैं। उनके प्रति भक्तों की आस्था भी उन्हीं की तरह भोली है। उनका स्वरूप सबसे अलग है। गले में सर्प, सिर पर गंगाधरा और हाथ में त्रिशूल धारण किये भगवान शिव अपने तीनों नेत्रों से हर भक्त पर नज़र रखते हैं और उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। ऐसा माना जाता है कि उनका न तो कोई आरंभ है और न ही अंत। भगवान शिव का सबसे बड़ा त्योहार है महाशिवरात्रि (Mahashivratri ki Hardik Shubhkamnaye)। हर माह की कृष्ण पक्ष चर्तुदशी को मास शिवरात्रि होती है लेकिन फाल्‍गुन मास की कृष्ण पक्ष चर्तुदशी को महाशिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है। भक्त एक दूसरे को इस त्योहार पर महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। वैसे तो भारत में कई शिव मंदिर (shivji temples) मौजूद हैं, जहां महाशिवरात्रि पर भक्त अपनी आस्था लुटाते हैं। मगर हम आपको बता रहे हैं भारत से बाहर स्थित कुछ ऐसे प्राचीन शिव मंदिर (shivji temples) के बारे में जिनकी मान्यता और आस्था भारत के किसी भी मंदिर से कम नहीं।    

Table of Contents

    पशुपति नाथ मंदिर, काठमांडु, नेपाल - Pashupatinath Temple in Kathmandu, Nepal

    नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित यह शिव मंदिर (shivji temples) नेपाल के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यही वजह है इसे नेपाल में बेहद पवित्र माना जाता है। इस मंदिर में शिवरात्रि के त्योहार का काफी महत्त्व है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष ने तीसरी सदी ईसा पूर्व में कराया था। मगर ऐतिहासिक दस्तावेज सिर्फ 13वीं शताब्दी के ही हैं। मूल मंदिर कई बार नष्ट होकर फिर बना। 17वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर में भगवान शिव (shiv bhagwan) की चार मुख वाली मूर्ति है। इस मंदिर में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। इसके चार प्रवेश द्वार हैं, जिनमें से सभी चांदी की चादर में ढंके हुए हैं। इतना ही नहीं यह मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में भी शामिल है।

    प्रम्बानन मंदिर, जावा, इंडोनेशिया - Prambanan Temple in Java, Indonesia

    9 वीं शताब्दी में मातरम साम्राज्य के रकाई पिकाटन द्वारा निर्मित यह मंदिर न केवल साउथ ईस्ट एशिया के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है, बल्कि इंडोनेशिया में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर भी है। ये प्राचीन मंदिर इंडोनेशिया के जावा नाम की जगह पर स्थित है। 'प्रम्बानन' नाम 'परा ब्राह्मण' शब्द से आया है, जो जावानीज़ में 'सर्वोच्च ब्राह्मण' के लिए कहा जाता है। यह मंदिर त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और शिव को समर्पित है। इसमें एक बड़े परिसर के केंद्र में 47 मीटर ऊंची बिल्डिंग है और कई अलग-अलग मंदिर हैं। मूल रूप से, ऐसे 240 मंदिर थे लेकिन कई अब खंडहर बन चुके हैं। भगवान शिव (shiv bhagwan) को समर्पित मंदिर परिसर के सबसे अंदर स्थित है और जहां शिव जी की सबसे बड़ी मूर्ति बनी हुई है। 

    कटासराज मन्दिर, चकवाल, पाकिस्तान - Katasraj Temple in Chakwal, Pakistan

    पाकिस्तान में लाहौर के पास पंजाब के चकवाल जिले में स्थित यह मंदिर महाभारत के दिनों से अस्तित्व में है। कहा जाता है कि पांडव बंधुओं ने अपने निर्वासन के दिनों में यहां शरण ली थी। विद्वानों की मानें तो जब भगवान शिव की पत्नी सती की मृत्यु होती हैं तो वे इतना रोते हैं कि दो ताल बन गए। एक पुष्कर में स्थित है और दूसरा यहां बनाया गया था, जिसे कटाक्ष कुंड कहते हैं। इसमें सात मंदिर हैं जिनमें भगवान शिव (shiv bhagwan) को समर्पित मंदिर एक वर्गाकार मंच पर बनाया गया है और प्रवेश द्वार पर एक गोल आर्च है। मंदिर परिसर में स्नान के लिए एक पवित्र कुंड भी है। हालांकि 2012 से यह औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भूजल के अत्यधिक उपयोग के कारण सूख रहा है। 

    श्री मुन्नेस्वरम देवस्थानम मंदिर, मुन्नेस्वरम, श्रीलंका - Munneswaram Temple in Munneswaram, Sri Lanka

    भारत के बाहर यह प्राचीन मंदिर श्रीलंका के मुन्नेस्वरम में स्थित है। मुन्नेस्वरम देवस्थानम मंदिर की बनावट दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में की गयी है। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर रामायण काल से अस्तित्व में है। कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद यहां भगवान शिव (shiv bhagwan) की आराधना की थी। यह एक मंदिर परिसर है जिसमें 5 मंदिर हैं। इनमें से भगवान शिव (shiv bhagwan) को समर्पित मंदिर यहां का सबसे बड़ा केंद्र है। यह मंदिर पुर्तगालियों द्वारा अतीत में दो बार नष्ट कर दिया गया था, बाद में इसे जेसुइट्स को सौंप दिया गया था, जिसने इसे फिर से बनवाया। यह मंदिर में शिवरात्रि और नवरात्रि का त्योहार बहुत भव्यता के साथ मनाया जाता है।

    अरुलमिगु श्री राजा कलिअम्मन मंदिर, जोहोर, बाहरू, मलेशिया - Arulmigu Sri Raja Kaliamman Temple in Johor Baru, Malaysia

    अरुलमिगु श्री राजा कलिअम्मन मंदिर के नाम से भगवान शिव (shiv bhagwan) का यह मंदिर 1922 में निर्मित हुआ था। यह जोहोर, बाहरू में स्थित सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। जिस भूमि पर मंदिर खड़ा है वह जोहोर के सुल्तान द्वारा भारतीयों को दी गई थी। शुरू में यह केवल एक झोंपड़ी जैसा था लेकिन धीरे-धीरे इसने एक भव्य रूप धारण कर लिया। इस मंदिर का सबसे अनूठा पहलू इसका रचनात्मक, जटिल और साफ कांच का काम है। गर्भगृह के ऊपर भगवान शिव (shiv bhagwan) का निवास है, जहां 3,00,000 से ज्यादा रुद्राक्ष की मालाएं दीवार पर चिपकाकर सजावट की गई है। यह राज्य के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। मंदिर को 12 मई 2010 को मलेशियाई बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में राष्ट्र के पहले और एकमात्र कांच मंदिर के रूप में शामिल किया गया था।

    मुक्ति गुप्तेश्वर मंदिर, मिंटो, ऑस्ट्रेलिया - Mukti Gupteshwar Temple in Minto, Australia

    13वां और आखिरी ज्योतिर्लिंग को नेपाल के तत्कालीन राजा- स्वर्गीय बीरेंद्र बीर बिक्रम शाह देव ने 1999 में ऑस्ट्रेलिया को उपहार में दिया था। साथ में भगवन शिव की स्तुति में विशेष रूप से गाए जाने वाले आठ खंडों में व्यवस्थित 7996 भजनों का उपहार भी दिया गया। शास्त्रों के अनुसार, इस शिवलिंग का निर्माण दक्षिणी गोलार्ध में होना था जो 'सांप के मुंह' का प्रतीक था, सांप भगवान शिव (shiv bhagwan) के गले में आभूषण की तरह होता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया को चुना गया। खास बात यह है कि इस मंदिर की नींव शिवरात्रि के त्योहार पर 1999 में मिंटो - सिडनी के उपनगर में रखी गई थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि यह मनुष्य द्वारा निर्मित एकमात्र गुफा मंदिर है।13वें ज्योतिर्लिंग के साथ, मंदिर में अन्य 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां भी हैं। मंदिर परिसर में 1128 छोटे मंदिर हैं, जो सभी भगवान शिव (shiv bhagwan) से संबंधित हैं। मुख्य गर्भगृह के अंदर एक 10 मीटर की गहरी तिजोरी है जहां पर भक्तों से 'ओम नमः शिवाय' कहते हुए हाथ से लिखे दो मिलियन नोट हैं।

    शिव विष्णु मंदिर, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया - Shiva Vishnu Temple in Melbourne, Australia

    1984 में, कैरम डाउन में 14 एकड़ जमीन 72,300 डॉलर में खरीदी गई थी। इस भूमि को शास्त्रों के अनुसार चुना गया था, क्योंकि कहते हैं कि शिव मंदिर (shivji temples) बनाने के लिए भूमि बिना इस्तेमाल हुई एकदम नई होनी चाहिए। पहली पूजा 1986 की शुरुआत में की गई थी, जिसके बाद भगवान शिव (shiv bhagwan) और विष्णु को समर्पित दो प्राथमिक मंदिरों का निर्माण 1987 में शुरू हुआ था। तब से, विक्टोरिया के हिंदू समाज द्वारा सालों योजना बनाने के बाद भारत से बुलाई गई कुशल कारीगरों की एक टीम की कड़ी मेहनत के बाद कैरम डाउन में शिव विष्णु मंदिर 1994 में भक्तों के लिए खोला गया था। इसके उद्घाटन के लिए कांचीपुरम और श्रीलंका के दस पुजारियों को पूजा करने के लिए बुलाया गया था। मंदिर के अंदर लगभग 32 देवताओं की पूजा की विस्तृत अनुष्ठानों के आधार पर पूजा की जाती है और भारतीय त्योहारों जैसे- शिवरात्रि, होली और दिवाली को भी यहां बहुत भव्यता के साथ मनाया जाता है।

    शिव विष्णु मंदिर, लिवरमोर, कैलिफोर्निया - Shiva Vishnu Temple in Livermore, California

    कैलिफोर्निया के लिवरमोर में स्थित शिव विष्णु मंदिर खाड़ी क्षेत्र के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक है। वास्तुकला के संबंध में, यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारतीय हिंदू मंदिरों में सर्वश्रेष्ठ है। एक बार जब आप मंदिर में प्रवेश करते हैं, तो आप असंख्य देवताओं और देवी-देवताओं को नोटिस करेंगे। जैसे- भगवान शिव, भगवान गणेश, देवी दुर्गा, अयप्पा, मां लक्ष्मी आदि। अधिकांश मूर्तियों को 1985 में तमिलनाडु सरकार द्वारा दान किया गया था। मंदिर परिसर के भीतर का आंगन साफ और स्वच्छ है और यहां का वातावरण शांत है। मंदिर अपने सभी भक्तों को प्रसाद भी प्रदान करता है।

    शिव मंदिर, ज़्यूरिख़, स्विट्ज़रलैंड - Shiva Temple in Zurich, Switzerland

    स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख़ में बना शिव मंदिर एक छोटा मंदिर है, जो एक इमारत की पहली मंजिल पर स्थित है। हालांकि यह साफ है और काफी अच्छी तरह से मेंटेन किया हुआ है। शिव लिंग के पीछे 'गर्भ गृह' में नटराज और शक्ति की मूर्तियां स्थापित हैं। भगवान शिव (shiv bhagwan) के बगल में दो नंदियों की मूर्तियां भी हैं। मंदिर मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक प्रार्थना के लिए खुला रहता है। शिवरात्रि का त्योहार यहां पर बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।

    शिव मंदिर, ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड - Shiva Temple in Auckland, New Zealand

    इस मंदिर की स्थापना 1998 में सनातन शिवार्चन ट्रस्ट द्वारा भूमि के एक भूखंड को खरीदने के बाद हुआ था। बाद में इस मंदिर को मई 2004 में सभी के लिए खोल दिया गया था। न्यूजीलैंड में इस मंदिर की स्थापना न केवल भक्तों के बीच सनातन धर्म की सराहना को बढ़ावा देती है, बल्कि हर रविवार को मुफ्त हिंदी कक्षाएं प्रदान करके युवाओं के लिए उन्नति का केंद्र भी है। इस मंदिर में भगवान शिव (shiv bhagwan) का शिवलिंग नवदेश्वर शिवलिंग के रूप में है। इस मंदिर का निर्माण हिंदू शास्त्रों के अनुसार आचार्य महा मंडलेश्वर स्वामी शिवेंद्र पुरीजी महाराज या यज्ञ बाबा के मार्गदर्शन में किया गया था। मंदिर सुबह 8 बजे से दोपहर तक खुला रहता है और शाम को 5 बजे से शाम 7.30 बजे तक खुला रहता है। 
     
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