हेल्दी और फिट रहने के लिए जरूर अपनाएं ये आयुर्वेदिक टिप्स

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आयुर्वेद एक पुरानी मेडिकल हेल्थकेयर प्रणाली है जिसमें समय के साथ अनेक आधुनिक बदलाव भी आये हैं। आयुर्वेद उपचार की बजाय बचाव पर जोर देता है और दवाइयों के रूप में खाद्य पदार्थों का उपयोग करता है ताकि स्वास्थ्य से संबंधित गंभीर मामलों और जटिलताओं से बचा सके। इसी के साथ आयुर्वेद में स्वस्थ्य रहने के कई तरीके बताएं गये हैं, जिन्हें आप अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बना कर फिट रह सकत हैं। बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद (Ayurvedic Tips For Good Health) बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।

हेल्दी और फिट रहने के आयुर्वेदिक टिप्स Ayurvedic Tips for Fitness and Good Health in Hindi

भारतीय संस्कृति में आयुर्वेद का बहुत महत्त्व है और अब तो आयुर्वेद ने देश के साथ विदेशों में भी खूब ख्याति प्राप्त कर ली है। आजकल की लाइफस्टाइल में घर और ऑफिस का बढ़ता काम तनाव को जल्दी जन्म देता है, जिसका सीधा असर हमारी हेल्थ पर पड़ रहा है। इसीलिए यहां हम आपके लिए लाएं कुछ ऐसे आयुर्वेदिक टिप्स, जिनकी मदद से आप पा सकते हैं अच्छा स्वास्थ्य और परफेक्ट फिट बॉडी। आइए जानते हैं कौन-से हैं वो आयुर्वेदिक हेल्थ टिप्स (Ayurvedic Health Tips) जो आपकी अपने डेली रूटीन में शामिल करने चाहिए -

आठ घंटे की नींद लेना

आपको शरीर के सभी हिस्सों के साथ- साथ अपने दिमाग के टिश्युज़ को भी तरोताजा करने के लिए पर्याप्त नींद की जरूरत होती है। पर्याप्त नींद आपके शरीर के सभी दोषों को बैलेंस करने के साथ- साथ ओजस फॉर्मेशन की प्रक्रिया में भी मदद करती है। अगर आप रात के वक्त पर्याप्त आराम नहीं करते या नींद पूरी नहीं करते तो अगले पूरे दिन थकान और कमजोरी महसूस करते रहेंगे। अगर रात को किसी वजह से आपको नींद नहीं आ रही है तो अपने सर और तलवों पर थोड़ा सा तिल का तेल लगा लें और गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पी लें। इससे आपको रिलेक्स महसूस होगा।

मसाज और हल्की एक्सरसाइज

आयुर्वेद का कहना है कि शरीर के लिए मसाज बेहद जरूरी है। रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और मालिश से वात दोष बैलेंस होता है। इसलिए सुबह -सुबह तिल के तेल से हल्की मसाज और हल्की सी एक्सरसाइज (अभ्यंग) करें, ताकि आपके शरीर के सभी दोष दूर हों और आपकी लिम्फेटिक वैसेल्स के अलावा नर्वस सिस्टम का भी सर्कुलेशन बेहतर हो जाए। अपने घर पर आप अपनी मसाज भी आसानी से खुद ही कर सकते हैं या फिर किसी पंचकर्मा सेंटर पर जाकर किसी अच्छे प्रोफेशनल से भी मसाज करवा सकते हैं।

अपना वजन बैलेंस रखना

अगर आपको अपना शरीर और मस्तिष्क हेल्दी रखना है तो इसके लिए आपके शरीर का वजन भी बैलेंस होना चाहिए। यह आपके ब्लड प्रेशर को हेल्दी और कंट्रोल में रखने के लिए भी बेहद जरूरी है। इसके लिए जंक फूड, पैकेज्ड फूड या फिर प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर रखें तो बेहतर होगा। क्योंकि ऐसे भोजन में ताजा फल और सब्जियों की तरह प्राणा एनर्जी यानि प्राण ऊर्जा नहीं होती, जो लाइफस्टाइल बीमारियों को जन्म देती है और कफ बढ़ाने वाली डाइट मानी जाती है।

एक्टिव रहें और एडिक्शन को ना कहें

हल्के अभ्यास आपके दिल को मजबूत रखते हैं और अच्छे मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देते हैं। हर दिन 20-30 मिनट के लिए बस तेज चलने से आपकी कैलोरी जलेंगी, कोलेस्टेरॉल कम होगा और विषैले पदार्थ निकल जाएंगे। साथ ही, जब आप नियमित रूप से योग या व्यायाम का अभ्यास करते हैं, तो आप अपने एडिक्शंस से भी दूर रहते हैं।

प्रार्थना और ध्यान की शक्ति

जब आप किसी मंदिर में घंटी बजते सुनते हैं, या जब आप अज़ान या गाना कोई गीत सुनते हैं, तो यह आपके दिल को शांति और सुकून क्यों देता है? दरअसल प्रकृति में कुछ फ्रीक्वेंसी ऐसी होती हैं जिनका प्रभाव मन और शरीर पर बहुत शांति वाला होता है। हर सुबह एक शांत जगह पर बैठें और 15 मिनट के लिए 'ओम' का उच्चारण करें। जब आप अपनी आंखें खोलेंगे तो आप सात्त्विक महसूस करेंगे। इसका मतलब यह है कि आपने अपने दिमाग को पोषित किया है और मानसिक अमा को निकाल दिया है। दिमाग को पोषित करने के दूसरे तरीकों में मेडिटेशन, सात्त्विक साहित्य पढ़ना और सुखदायक संगीत सुनना है।

दिमाग को शांत रखें

तनाव के चलते अकसर हमारा दिमाग आशांत रहता है। लेकिन बेहतर स्वास्थ्य के लिए दिमाग को शांत रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको कम से कम 15-20 मिनट के लिए हर रोज सुबह मेडिटेशन करना चाहिए। इसके अलावा अनुलोम- विलोम या फिर भ्रामरी जैसी ब्रीदिंग टेक्नीक का इस्तेमाल करना चाहिए। मेडिटेशन के दौरान ओम शब्द को बोलने से सकारात्मकता आती है जो शरीर, दिमाग और आत्मा को शांति प्रदान करती है।

सही से पिएं पानी

आयुर्वेद के अनुसार खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर के सामान है। बहुत जरूरी हो तो एक घूंट पानी ले सकते हैं लेकिन इससे ज्यादा तो भूलकर भी न पिएं। आयुर्वेद में बताया गया है कि अपने शरीर के वजन के 10 वे भाग को 2 से घटाने पर जो संख्या आती है उतने लीटर पानी पीना सही माना जाता है।

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