वर्कआउट के लिए फिजिकल और मेंटल तैयारी है वॉर्मअप

वर्कआउट के लिए फिजिकल और मेंटल तैयारी है वॉर्मअप

आपकी सामान्य एक्‍सरसाइज (exercise) हो, योगा हो या फिर जिमिंग, सभी फिटनेस एक्‍सपर्ट्स किसी भी तरह की फिज़िकल एक्टिविटी से पहले वॉर्मअप (warmup) करने की सलाह जरूर देते हैं। वॉर्मअप को एक्‍सरसाइज करने का बेहद जरूरी हिस्‍सा माना जाता है : यह न सिर्फ आपकी बॉडी बल्कि माइंड को भी एक्‍सरसाइज करने के लिए प्रिपेयर करता है। हालांकि, आज के बिजी लाइफ शेड्यूल में ज्यादातर लोग वॉर्मअप वाले प्रोसेस को स्किप कर जाते हैं और नतीजा ये होता है कि बॉडी 0 से सीधा 60 की स्‍पीड पर काम करने लगती है।

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    इससे जिमिंग या एक्‍सरसाइजिंग के दौरान बॉडी की एफिशियंसी कम होने लगती है और इंजरी का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी ये है कि वॉर्मअप को स्किप न किया जाए और उसे सही तरीके से भी किया जाए। तो जानते हैं वॉर्मअप से जुड़ी कुछ जरूरी बातें।

    वॉर्मअप करने के सही तरीके

    एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले वॉर्मअप (warmup) करना बहुत महत्वपूर्ण है और इसे एक्सरसाइज़ का ही एक हिस्सा माना जाना चाहिए। बॉडी को वॉर्मअप करना ज़रूरी है पर इसका यह मतलब नहीं है कि आप कैसे भी वॉर्मअप करने लग जाएं। इसका एक सही तरीका होता है, जिसे अमल में लाया जाना चाहिए। जानिए, वॉर्मअप करने के 5 सही तरीके।

    • टेंशन रिलीज करें
    • ब्रीदिंग पर फोकस करें
    • बॉडी को एक्‍शन में लाएं
    • न भूलें स्‍पाइन को
    • हार्ट रेट को बढ़ने दें

    टेंशन रिलीज करें

    वॉर्मअप करने से बॉडी और माइंड को एक्‍सरसाइज के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे में बॉडी की ज़रूरतों को समझा जाना बहुत ज़रूरी है। शुरुआत करें माइंड से बिना मतलब की टेंशन को रिलीज करने से। एक्‍सरसाइज खड़े होकर करनी हो या लेटकर, सबसे पहले पैरों को अच्‍छी तरह से जमीन पर रखें। ऐसा करने से न सिर्फ बॉडी का बैलेंस रीस्‍टोर होता है, बल्कि टेंशन भी रिलीज होती है।

    ब्रीदिंग पर फोकस करें

    ब्रीदिंग एक्‍सरसाइजेस या मेडिटेशन करने से माइंड तो स्‍टेबल होता ही है, साथ ही हार्ट और लंग्‍स भी एक्‍शन में आ जाते हैं। ये आपके वर्कआउट और दूसरी फिजिकल एक्‍टिविटीज को बेहतर बनाने में सपोर्ट करते हैं। कई फिटनेस एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि पांच मिनट की फोकस्‍ड ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज बॉडी को पूरी तरह से रेजुवनेट कर सकती है।

    बॉडी को एक्‍शन में लाएं

    आप फिजिकल एक्टिविटी करने जा रहे हैं इसलिए जरूरी है कि बॉडी को धीरे-धीरे एक्‍शन में लाया जाए। अगर आप सीधे हार्ड एक्‍सरसाइजेस करना शुरू कर देते हैं तो बॉडी की स्‍पीड अचानक से बढ़ जाती है, जिसकी वजह से हमारी बॉडी बहुत जल्दी थकने लग जाती है और चोट लगने की आशंका भी बढ़ जाती है। वॉर्मअप के दौरान बॉडी को लाइट से मीडियम पेस पर मूव करें ताकि वो कंप्‍लीट एक्‍सरसाइज के लिए पूरी तरह तैयार हो जाए।

    न भूलें स्‍पाइन को

    अक्‍सर लोग स्‍पाइन के वॉर्मअप को भूल जाते हैं। स्पाइन आपके पूरे शरीर को संभालती है और इस लिहाज से यह वॉर्मअप का एक बेहद ज़रूरी हिस्सा है। अपने वॉर्मअप को इस तरह से डिजाइन करना चाहिए कि उसमें स्‍पाइन का मूवमेंट शामिल हो सके। इसके लिए एक्‍सटेंशन, रोटेशन और जेंटल बेंडिंग एक्‍सरसाइजेस कारगर रहती हैं। नेक रोटेशन को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।

    हार्ट रेट को बढ़ने दें

    हार्ट रेट यानि उसकी गति बढ़ने से मसल्‍स को एनर्जी प्रोडक्‍शन के लिए ज्‍यादा ऑक्‍सीजन और ग्‍लूकोज़ मिलता है। यह मोटर नर्व्‍स के जरिए सिग्‍नल्‍स को बेहतर तरीके से शरीर में पहुंचाता है ताकि मसल्‍स संतुलन में काम कर सकें। इसके लिए वॉकिंग, फिर ब्रिस्‍क वॉकिंग और फिर ईजी रनिंग फायदेमंद होती है क्‍योंकि ये हार्ट रेट को बढाने में मदद करती हैं। इसके अलावा स्विमिंग भी हार्ट रेट को बढ़ाने का अच्‍छा जरिया है।

    हर एज ग्रुप के लिये कारगर हैं ये वॉर्मअप ट्रिक्स

    आमतौर पर वॉर्मअप आपके वर्कआउट या एक्‍सरसाइज की इंटेंसिटी और उसके स्‍ट्रक्‍चर पर निर्भर करता है लेकिन कुछ ऐसी वॉर्मअप एक्‍सरसाइजेस भी होती हैं, जिन्‍हें कोई भी कर सकता है। ये हैं कुछ ऐसी एक्‍सरसाइजेस, जिन्‍हें किसी भी उम्र के लोग अपने सामान्य रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

    • ज़रूरत के मुताबिक 10 से 20 मिनट की लाइट कार्डियोवेस्‍कुलर एक्टिविटी की जा सकती है। यह जॉगिंग हो सकती है या ट्रेडमिल का यूज भी हो सकता है।

    • स्किपिंग भी हर एज ग्रुप के लिए फायदेमंद होती है लेकिन इसमें इस बात का ध्‍यान रखना होगा कि पैरों पर कितना स्‍ट्रेस देना है।
    • वॉर्मअप के तौर पर आप साइकिल भी चला सकते हैं।

    • सूर्य नमस्‍कार भी वॉर्मअप के लिए बेहद कारगर है।

    • अगर वेट ट्रेनिंग करने जा रहे हैं तो कंधों और बैक यानि स्‍पाइन पर फोकस करना चाहिए।

    • लिफ्टिंग, पुशअप्‍स, स्‍क्‍वॉट्स और जंपिंग भी हर उम्र के लोगों के लिए आइडियल वॉर्मअप एक्‍सरसाइजेस हैं।

    • वॉर्मअप के दौरान बॉडी के लार्ज पार्ट्स जैसे चेस्‍ट, ऐब्‍स, बैक और लेग्‍स पर फोकस करना चाहिए।

    सही वॉर्मअप से बेहतर होती है एक्सरसाइज

    सभी फिटनेस एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी तरह की एक्‍सरसाइज या वर्कआउट से पहले कुछ मिनट का वॉर्मअप जरूरी है पर उससे भी ज्‍यादा जरूरी है सही वॉर्मअप। जैसा भी वर्कआउट या एक्‍सरसाइजिंग का स्‍ट्रक्‍चर हो, वॉर्मअप भी उसी के हिसाब से होना चाहिए। एक्‍सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर अपर बॉडी वेट ट्रेनिंग करनी हो तो उसके लिए रोइंग मशीन पर वॉर्मअप करना फायदेमंद होगा। इसके साथ ही पुशअप्‍स या लाइट लिफ्टिंग करना भी फायदेमंद रहेगा।

    वहीं अगर लोअर बॉडी पर वर्कआउट करना हो तो इसके लिए स्किपिंग, ट्रेडमिल, बाइकिंग और स्‍क्‍वॉट्स जैसी एक्‍सरसाइजेस करना फायदेमंद रहता है। वहीं ब्रिस्‍क वॉकिंग, जॉगिंग, साइकलिंग, फॉरवर्ड लंज, लैटरल स्‍क्‍वॉट्स, आर्म सर्कल्‍स जैसी एक्‍सरसाइजेस ओवरऑल वॉर्मअप के लिए परफेक्‍ट हैं।

    वॉर्मअप के फायदे

    • कम हो जाता है इंजरी का खतरा
    • बढ़ती है फ्लेक्सिबिलिटी
    • ब्‍लड सर्कुलेशन होगा बेहतर
    • बढ़ता है मेंटल फोकस
    • बॉडी के स्‍ट्रेस को कम करता है

    एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि सुबह उठते ही सीधे एक्‍सरसाइज करना स्वस्थ आदत नहीं है। ऐसा करने से बॉडी को पूरा फायदा नहीं मिलता है। वे सलाह देते हैं कि भले ही एक्‍सरसाइजिंग या वर्कआउट से 10 मिनट कम कर दिए जाएं लेकिन वॉर्मअप को स्किप नहीं किया जाना चाहिए क्‍योंकि यह व्यायाम के पूरे प्रोसेस को बेहतर बनाता है। आइए जानते हैं कैसे।

    कम हो जाता है इंजरी का खतरा

    अगर सीधे हेवी या स्‍ट्रॉन्‍ग वर्कआउट शुरू कर दिया जाता है तो बॉडी के जॉइंट्स और मसल्‍स उन मूवमेंट्स के लिए तैयार नहीं होते हैं। ऐसे में जॉइंट्स में फ्रिक्‍शन और मसल्‍स में स्‍ट्रेच होता है, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। वॉर्मअप करने से जॉइंट्स से स्‍ट्रेस को दूर किया जा सकता है।

    बढ़ती है फ्लेक्सिबिलिटी

    वर्कआउट या एक्‍सरसाइजिंग के लिए बॉडी में मस्‍कुलर इलास्टिसिटी का होना बहुत जरूरी है। अगर आप अपने वॉर्मअप में स्‍ट्रेचिंग को शामिल करते हैं तो मसल्‍स की इलास्टिसिटी बढ़ती है, जिससे वर्कआउट करते वक्‍त मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्या नहीं होती।

    ब्‍लड सर्कुलेशन होगा बेहतर

    वॉर्मअप करने से शरीर का तापमान बढ़ता है और साथ ही ब्‍लड सर्कुलेशन भी। वॉर्मअप के दौरान स्किपिंग, स्विमिंग या लाइट स्‍ट्रेचिंग करने से बॉडी में ब्‍लड और ऑक्‍सीजन, दोनों का ही सर्कुलेशन बढ़ जाता है। जब ब्‍लड और ऑक्‍सीजन मसल्‍स, टेंडंस, लिगामेंट्स जैसे सॉफ्ट टिश्यूज़ तक तेजी से पहुंचती है तो वर्कआउट के दौरान बॉडी बेहतर परफॉर्म कर पाती है।

    बढ़ता है मेंटल फोकस

    वर्कआउट सेशंस के लिए सिर्फ फिजिकली फिट होना काफी नहीं है, बल्कि मेंटली फिट और स्‍ट्रॉन्‍ग होना भी बहुत जरूरी है। एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि जब कोई व्यक्ति एंगेजिंग वॉर्मअप करता है तो वह अपने वर्कआउट सेशन पर ज्‍यादा बेहतर तरह से फोकस कर पाता है। इसका फायदा ये होता है कि सेशन के दौरान वर्कआउट लेसंस को आसानी से और कम वक्‍त में सीखने में मदद मिलती है। वॉर्मअप माइंड को रिलैक्‍स और पॉजिटिव रखता है, जो आपको टफ वर्कआउट सेशंस के लिए मानसिक तौर पर तैयार करता है।

    बॉडी के स्‍ट्रेस को कम करता है

    उचित वॉर्मअप से बॉडी पर एक्‍सरसाइजिंग का स्‍ट्रेस कम पड़ता है और थकावट भी महसूस नहीं होती। वॉर्मअप स्किप करने से न सिर्फ फिजिकल बल्कि मेंटल स्‍ट्रेस भी बढ़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि बॉडी सीधे टफ मूवमेंट्स में एंगेज हो जाती है और फिर चाहे जॉइंट्स हों या मसल्‍स, सभी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

    वॉर्मअप के लिए ज़रूरी टाइम लिमिट

    जितना ज़रूरी वॉर्मअप करना है, उतना ही ज़रूरी है कि उसके लिए एक टाइम लिमिट भी सेट की जाए। अगर आप इसे जरूरत से ज्‍यादा टाइम देंगे तो बॉडी की काफी ऊर्जा इसमें ही एब्‍जॉर्ब हो जाएगी। एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, अगर 20 मिनट का वर्कआउट है तो पांच मिनट का वॉर्मअप और तीन मिनट का कूल डाउन काफी होगा। वहीं अगर 30 मिनट का वर्कआउट है तो भी पांच मिनट ही वॉर्मअप करना चाहिए। इसके अलावा अगर वर्कआउट 60 मिनट का है तो पांच से दस मिनट तक वॉर्मअप और पांच मिनट का कूल डाउन टाइम काफी रहता है।

    वॉर्मअप के दौरान भारी पड़ सकती हैं ये गलतियां

    अक्‍सर लोग वॉर्मअप के दौरान कुछ गलतियां भी कर देते हैं, जिसका असर उनके ओवरऑल वर्कआउट और एक्‍सरसाइजिंग सेशन पर पड़ता है। वॉर्मअप के दौरान इन गलतियों से बचना चाहिए।

    • न करें इंटेंस वॉर्मअप
    • बचें स्‍टैटिक स्‍ट्रेचिंग से
    • न करें सेम वर्कआउट
    • वॉर्मअप बंद कर देना

    न करें इंटेंस वॉर्मअप

    वॉर्मअप जितना लाइट हो, उतना ही अच्‍छा रहेगा क्‍योंकि इसका काम बॉडी को सिर्फ वर्कआउट के लिए तैयार करना होता है। वॉर्मअप के इंटेंस होने से मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे चोट लगने की आशंका बढ़ती है।

    बचें स्‍टैटिक स्‍ट्रेचिंग से

    वॉर्मअप के दौरान स्‍ट्रेचिंग करना अच्‍छी बादत है लेकिन सिर्फ डायनमिक स्‍ट्रेचिंग। अगर आप स्‍टैटिक स्‍ट्रेचिंग करते हैं तो मसल स्‍ट्रेंथ कम हो जाती है।

    न करें सेम वर्कआउट

    रोजाना एक जैसा ही वर्कआउट करना एक बड़ी गलती है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि अगर वॉर्मअप में वेरिएशन नहीं होगा तो वर्कआउट भी इफेक्टिव नहीं होगा। उनका कहना है कि जैसा वर्कआउट हो, वॉर्मअप भी उसके हिसाब से ही प्‍लान करना चाहिए।

    वॉर्मअप बंद कर देना

    अचानक से वॉर्मअप को बंद कर देना भी बड़ी भूल है क्‍योंकि इससे बॉडी में ब्‍लड सर्कुलेशन चेंज होता है, जिसका बॉडी पर खराब असर होता है।

    वॉर्मअप से जुड़े आम सवाल-जवाब

    लोगों के मन में वॉर्मअप से जुड़े तमाम सवाल रहते हैं। अगर आप अपना फिटनेस रिजीम तय कर रहे हैं तो आपके मन में भी ऐसे सवालों का आना स्वाभविक है। जानिए, वॉर्मअप से जुड़े कुछ आम सवालों के जवाब।
    1. क्या वॉर्मअप भी एक्सपर्ट या ट्रेनर की देख-रेख में ही किया जाना चाहिए?
    जी नहीं, वॉर्मअप को किसी की देख-रेख में किया जाना ज़रूरी नहीं है। हालांकि, आप चाहें तो अपने ट्रेनर से वॉर्मअप के सही तरीकों के बारे में राय ले सकते हैं।
    2. क्या वॉर्मअप कोई भी कर सकता है?
    जी हां, वॉर्मअप करने के लिए कोई आयु या जेंडर नियत नहीं है। अपना व्यायाम शुरू करने से पहले हर किसी को वॉर्मअप ज़रूर करना चाहिए।

    3. अगर मैं एक दिन वॉर्मअप नहीं करूंगी तो उससे मेरे एक्सरसाइज़ सेशन पर क्या फर्क पड़ेगा?
    एक दिन भी वर्कआउट मिस करने से आप व्यायाम के बाद काफी थकान महसूस करेंगे और सच तो यही है कि व्यायाम के दौरान भी आपको भारीपन सा महसूस होगा।
    4. क्या वॉर्मअप घर पर किया जा सकता है या जिम पहुंचकर ही?
    यह तो आप पर निर्भर करता है। अगर जिम आपके घर से 10-15 मिनट की दूरी पर स्थित है और आप वहां तक पैदल जाती हैं तो उसे वॉर्मअप की श्रेणी में रखा जाएगा।
     
    लेखिका- कृतिका अग्रवाल