साल 2019 का आखिरी ग्रहण : जानिए कब तक रहेगा सूतक काल और इस दौरान किन बातों का रखें ध्यान

साल 2019 का आखिरी ग्रहण : जानिए कब तक रहेगा सूतक काल और इस दौरान किन बातों का रखें ध्यान

साल 2019 का आखिरी सूर्यग्रहण 26 दिसंबर को लगेगा। इस ग्रहण का असर इस बार भारत पर भी पड़ेगा। इस बार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य आग से भरी अंगूठी के आकार का दिखाई देगा। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। 
जानकारों का कहना है कि ये ग्रहण बहुत ही विचित्र संयोग बना रहा है। लगभग 300 साल के अंतर में ये एक ऐसा ग्रहण पड़ रहा है जिसके प्रभाव में सभी 9 ग्रह होंगे, जिनमें से 7 ग्रह सीधे सूर्य के संपर्क में रहेंगे। वहीं कुछ ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ये ग्रहण देश-दुनिया के लिए अच्छा नहीं साबित होगा। ग्रहण के प्रभाव से तूफान, पाला और ओला पड़ने की आशंकाएं बनी हुई हैं। कुल मिलाकर तीन सदी के बाद ऐसा सूर्य ग्रहण है, जिसका शुभ से ज्यादा अशुभ असर देखने को मिल सकते है। 

राशियों पर सूर्यग्रहण का प्रभाव Effect of Solar Eclipse on Zodiac Signs In Hindi

सूर्य ग्रहण विशेष रूप से सभी राशियों के लिए शक्तिशाली माना जाता है क्योंकि वो सभी विभिन्न संभावनाओं को साथ लाता है। इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को देखा जाएगा, जब सूर्य और चंद्रमा बृहस्पति के साथ संरेखित करेंगे। ज्योतिष के अनुसार, ये वृद्धि, अनुभव और जागरूकता का ग्रह है, जो सभी राशियों के लिए परिवर्तन लाता है। लेकिन उनमें से कुछ राशियां ग्रहण के समय सबसे अधिक बदलाव महसूस करती हैं। इस सूर्यग्रहण का सबसे ज्यादा बुरा असर वृषभ, मेष, मिथुन, कन्या और धनु पर होगा। वहीं कर्क, तुला, कुंभ और मकर को इससे लाभ होगा।

सूर्य ग्रहण का समय Solar Eclipse Local Timings In Hindi

सूतक काल  - 25 दिसंबर शाम 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 26 की सुबह 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
सूर्य ग्रहण शुरू होगा - सुबह 8 बजकर 17 मिनट
सूर्य ग्रहण खत्म होगा - सुबह 10 बजकर 57 मिनट
ग्रहण अवधि - 2 घंटे 41 मिनट

जानिए कहां- कहां दिखेगा ये सूर्य ग्रहण Where is the solar eclipse visible In Hindi

यह ग्रहण भारत सहित यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका में दिखाई देगा। भारत की बात करें तो दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इस ग्रहण को साफ-साफ देखा जा सकता है और वहां इसका असर भी ज्यादा रहेगा। वहीं मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, चेन्नई, मैसूर और कन्याकुमारी में आंशिक सूर्य ग्रहण की स्थिति बनी रहेगी।

जानिए क्यूं और कैसे लगता है ग्रहण What is an Eclipse In Hindi

इस बारे में वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों का कहना है कि सूर्य या चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। दरअसल, जब आकाश में सूर्य और चंदमा अपनी अपनी गति से घूमते रहते हैं तो कई बार दोनों धरती से एक सीध में पड़ जाते हैं जिससे चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और सूर्य का वह भाग धरती वासियों को काला सा दिखने लगता है। इसे ही सूर्य ग्रहण कहा जाता है। ऐसा केवल अमावस्या के दिन ही संभव हो सकता है और चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा पर ही लग सकता है।

ग्रहण काल में बरतें ये सावधानियां Safety Precautions During Solar Eclipse In Hindi

- प्रेग्नेंट महिलाओं को इस दिन घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। गर्भ पर बुरा असर पड़ता है।
- सूतक काल में किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं। 
- ग्रहण के समय कुछ खाना- पीना नहीं चाहिए। क्योंकि ग्रहण के समय प्रकाश की किरणों मे विवर्तन यानि (Diffraction) होता है। जिसकी वजह से कई हजार सूक्ष्म जीवाणु मरते है और कई हजार पैदा होते हैं।
- कहते हैं ग्रहण काल में शारीरिक संबंध भी नहीं बनाने चाहिए।
- ग्रहण काल के दौरान अगर कोई घर से बाहर रहता है तो उसे ग्रहण खत्म होते ही नहा लेना चाहिए।
- इस दौरान चाकू या तेज धार वाली कोई भी चीज इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। ग्रहण के समय में इस तरह की वस्तुओं का प्रयोग वर्जित माना जाता है।
- जिन लोगों की कुंडली में ग्रहण योग है, उन्हें भी इस दौरान बचकर रहना चाहिए और ईश्वर का ध्यान करते रहना चाहिए।