विटामिन डी लेना क्यों है ज़रूरी, जानिए इसकी कमी के कारण, लक्षण व इन्हें दूर करने के उपाय

विटामिन डी लेना क्यों है ज़रूरी, जानिए इसकी कमी के कारण, लक्षण व इन्हें दूर करने के उपाय

विटामिन डी न सिर्फ हमारी मजबूत और स्वस्थ हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ये अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है। यह हमारी मांसपेशियों, हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क के अच्छी तरह से काम करने का एक महत्वपूर्ण कारक है। विटामिन डी से भरपूर शरीर हर तरह के संक्रमण से लड़ सकता है। हमारी त्वचा जब सूर्य के प्रकाश, यानी धूप के संपर्क में आती है तो शरीर में विटामिन डी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। विटामिन डी की मदद से शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं रहती। कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद आवश्यक होता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर होती हैं और टूट भी सकती हैं। इतना ही नहीं, विटामिन डी कैंसर व क्षय रोग जैसे रोगों से भी बचाव करता है।

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    विटामिन डी लेना क्यों जरूरी है (Why Vitamin D Is Important For You)

    अच्छे स्वास्थ्य के लिए शरीर को विटामिन्स की आवश्यकता होती है। विटामिन्स सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि आपका शरीर अच्छी तरह से काम कर रहा है। ये बीमारी से लड़ने और शरीर को स्वस्थ बनाने में पूरी तरह से सक्षम हैं। विटामिन डी और मजबूत स्वस्थ हड्डियों के बीच की कड़ी बहुत पुरानी है। जब डॉक्टरों ने महसूस किया था कि सूरज की रोशनी, जो हमारे शरीर में विटामिन डी का उत्पादन करती है या कॉड लिवर ऑयल, जिसमें विटामिन डी होता है, बच्चों में रिकेट्स नामक हड्डियों के रोग को उभरने से रोकने में मदद करता है। विटामिन डी को अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी माना जाता है। यह न केवल हड्डियों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कई स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने और उनका इलाज करने में भी कारगर साबित हो सकता है। 
    विटामिन डी बाकी विटामिन्स की तरह नहीं काम करता। जब आप अपनी त्वचा पर सूरज की रोशनी पड़ने देते हैं तो आपका शरीर खुद विटामिन डी बना सकता है, लेकिन आपका शरीर अन्य विटामिन्स नहीं बना सकता है। आपके द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों से ही आपको अन्य विटामिन प्राप्त होते हैं, जैसे- विटामिन सी प्राप्त करने के लिए आपको फलों और सब्जियों का सेवन करना पड़ता है। 
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    अगर आप सोच रहे हैं कि अन्य विटामिन्स की तुलना में विटामिन डी में क्या खास है तो हम आपको बता दें कि जब आपके शरीर को विटामिन डी मिलता है तो यह विटामिन डी को एक हार्मोन में बदल देता है। इस हार्मोन को कभी-कभी "सक्रिय विटामिन डी" या "कैल्सीट्रियाॅल" भी कहा जाता है।
    मजबूत हड्डियों के लिए विटामिन डी बहुत जरूरी है। कैल्शियम और फास्फोरस आपकी हड्डियों की संरचना और ताकत को विकसित करने के लिए आवश्यक हैं। यहां तक ​​कि अगर पर्याप्त विटामिन डी के बिना कैल्शियम और फास्फोरस वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं तो आप उन्हें अपने शरीर में एब्सॉर्ब नहीं कर सकते। विटामिन डी सामान्य अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन डी हड्डियों के अच्छे स्वास्थ्य के अलावा भी शरीर के लिए कई अन्य कारणों से महत्वपूर्ण है, जैसे- इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना, जिससे हमारा शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार रहता है। विटामिन डी से हमारी मसल्स अच्छी तरह से फंक्शन करती हैं। हमारी श्वसन प्रणाली व स्वस्थ फेफड़ों के लिए भी विटामिन डी ज़रूरी है। इसके अलावा मस्तिष्क वृद्धि में भी विटामिन डी एक अहम भूमिका निभाता है। रोज़ाना विटामिन डी लेने से कैंसर जैसी घातक बीमारी होने की आशंका भी कम रहती है।

    विटामिन डी के महत्वपूर्ण स्त्रोत (Important Source Of Vitamin D)

    हमारे शरीर को मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश से विटामिन डी मिलता है। हालांकि कुछ खाद्य पदार्थों में भी विटामिन डी सीमित मात्रा में भी पाया जाता है। हम यहां आपको ऐसे ही कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं। 
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    अंडे की जर्दी

    विटामिन डी के मुख्य स्त्रोत में से एक है अंडे की जर्दी, यानी अंडे का पीला वाला भाग। अंडे की जर्दी में कई सारे पोषक तत्व होते हैं। इसमें मौजूद विटामिन डी न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। रोज़ एक अंडा खाने से शरीर स्वस्थ रहता है व कई बीमारियों से भी बचाव होता है। अंडे की जर्दी में विटामिन डी के अलावा विटामिन ए, बी-6, बी-12 और जिंक भी होता है। साथ ही इसमें मौजूद फैट शरीर को एनर्जी भी प्रदान करता है। 

    दूध

    अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो दूध पीने में आना-कानी करते हैं तो जल्द ही इस आदत को सुधार लीजिए। दूध विटामिन डी के बेहतरीन स्त्रोत में से एक है। दिन भर में शरीर के लिए जितना विटामिन डी ज़रूरी होता है, उसका 20 प्रतिशत हिस्सा दूध से पूरा हो जाता है। वैसे तो गाय के दूध को सबसे बेहतर माना जाता है, लेकिन भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में 12 प्रतिशत कैल्शियम, 37 प्रतिशत आयरन और 118 प्रतिशत अधिक फॉस्फोरस होता है। ये सभी तत्व हड्डियों को मजबूत करते हैं, जिससे शरीर स्वस्थ बना रहता है।

    मछली

    अगर आप मछली खाने के शौकीन हैं तो सॉल्‍मन और टुना फिश खाने से भी विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। हालांकि काफी लोग मछली खाना एवॉयड भी करते हैं। ऐसे में सूरज की रोशनी तथा विटामिन डी वाले अन्य खाद्य पदार्थ आदि से भी इस कमी को दूर किया जा सकता है।

    सूरज की रोशनी

    आहार में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा ले पाना कई बार संभव नहीं होता है। ऐसे में सूरज की रोशनी, यानी धूप से सीधा सम्पर्क ही हमारे शरीर में विटामिन डी उत्पन्न करने का एकमात्र विश्वसनीय तरीका है। रोज़ाना 10-15 मिनट धूप ज़रूर सेंकें। खासतौर पर सर्दियों के दौरान इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना न भूलें। 

    मक्खन

    मक्खन, यानी बटर भी विटामिन डी का एक मुख्य स्त्रोत है। अपने आहार में मक्खन की सीमित मात्रा को शामिल करके विटामिन डी की पूर्ति की जा सकती है।  मक्खन में वसा पाया जाता है, जो एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन डी के गुणों से भरपूर होता है। 

    विटामिन डी की कमी के सामान्य कारण (Causes Of Vitamin D Deficiency)

    यदि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी नहीं मिलता है तो इसे विटामिन डी की कमी कहा जाता है, जिसके चलते कभी-कभी बच्चों में रिकेट्स नामक रोग और वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया नामक रोग पैदा हो सकता है। इसके अलावा हड्डी के पतला और कमजोर होने को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। शरीर में विटामिन डी की कमी के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ हम आपको यहां बता रहे हैं। 
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    इम्यून सिस्टम कमज़ोर होना

    जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता है, उन्हें विटामिन डी की कमी के रिस्क ज्यादा होते हैं। इसके अलावा, जो लोग अपने घर में ज्यादा रहते हैं, बाहर नहीं निकलते, दूध, अंडे आदि डेयरी पदार्थों का सेवन नहीं करते, उनमें विटामिन डी की कमी अक्सर पाई जाती है। इस लिस्ट में वृद्ध, अधिक वजन वाले लोग और मेनोपॉज़ से गुज़र चुकी महिलाएं शामिल हैं।

    सूरज की रोशनी के संपर्क में न होना

    वैसे तो सूरज की रोशनी हर किसी को बराबर लाभ देती है, लेकिन ऐसी जगह पर रहने वाले लोग, जहां साल भर धूप की रोशनी बहुत कम आती है, वे भी विटामिन डी की कमी से ग्रस्त रहते हैं।

    सनस्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल

    हमें सनबर्न न हो जाए या फिर हमारी त्वचा धूप से बदरंग न जाए, इस वजह से कई लोग घर से सनस्क्रीन लगाए बिना बिल्कुल नहीं निकलते। सनस्क्रीन सूरज से निकलने वाली अल्ट्रा वायलट किरणों को त्वचा के संपर्क में आने से रोकता है, जबकि ये किरणें शरीर मे विटामिन डी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में विटामिन डी की कमी होने का रिस्क बना रहता है। 

    एसी के संपर्क में अधिक रहना

    आजकल की लाइफस्टाइल में हम घर से निकलकर वातानुकूलित गाड़ी में बैठते हैं और फिर सीधा एसी वाले स्कूल, कॉलेज या ऑफिस पहुंच जाते हैं। ऐसे में त्वचा का धूप से संपर्क न के बराबर ही रहता है। इस तरह की लाइफस्टाइल जी रहे कई लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है। 

    विटामिन डी की कमी के लक्षण (Symptoms Of Vitamin D Deficiency)

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    हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए सामान्य तौर पर डॉक्टर्स विटामिन डी का टेस्ट कराते हैं। हम आपको यहां कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जो बिना डॉक्टर के पास जाए आपके लिए विटामिन डी की कमी का संकेत बन सकते हैं। ऐसे लक्षणों का अंदाज़ा लगते ही आप इस कमी को दूर करने के उपाय अपना सकते हैं या फिर सीधा किसी डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। 
    1- सर्दियां शुरू होते ही अगर आपकी हड्डियों में दर्द भी शुरू हो जाता है तो ये विटामिन डी की कमी का बड़ा लक्षण हो सकता है। 
    2- ये दर्द ज्यादातर जोड़ों या कमर में अधिक रहता है। कई बार दर्द वाली जगह पर सूजन आने लगती है या फिर चोट लगने जैसा दर्द रहने लगता है। इसकी वजह से न सिर्फ चलने में तकलीफ होती है, बल्कि सामान्य जीवन भी उथल-पुथल हो जाता है। 
    3- अगर आप जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहे हैं, थोड़ा सा चलने पर थक जाते हैं, सारा दिन थकावट महसूस होती है, मौसम बदलते ही वायरस की चपेट में आ जाते हैं तो इसका मतलब है कि आपका इम्यून सिस्टम काफी कमज़ोर है। ये भी विटामिन डी की कमी का बड़ा लक्षण है। 
    4- अगर अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायत होने लगे तो ये भी विटामिन डी की कमी का एक लक्षण हो सकता है।  
    5- जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, वे उदास रहने के अलावा तनाव में भी रहती हैं। 
    6- विटामिन डी की कमी के कारण मसूड़ों से संबंधित बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
    7- मोटापा बढ़ने के साथ ही शरीर में विटामिन डी का स्तर कम होता जाता है। ऐसे में अगर आपको महसूस हो रहा है कि कुछ दिनों से बिना किसी ठोस कारण के भी आपका वजन बढ़ रहा है तो एक बार डॉक्टर से सलाह ज़रूर ले लें।  
    8- अगर बिना ज्यादा मेहनत किए ही आपको बहुत पसीना आ रहा है तो यह बात सामान्य नहीं है। ऐसे में आपको अपने विटामिन डी के स्तर की जांच जरूर करानी चाहिए। 
    9- विटामिन डी की कमी होने से कई बार पाचन संबंधी परेशानियां भी होने लगती हैं।  
    10- विटामिन डी की कमी से बहुत से लोगों को बाल झड़ने की समस्या हो जाती है। हालांकि महिलाओं में ये समस्या आम है, मगर विटामिन डी की कमी से पुरुषों में भी ये समस्या हो सकती है। 
    11- अगर आपकी मांसपेशियों में बहुत दर्द रहता है तो हो सकता है कि इसकी वजह विटामिन डी की कमी हो।

    शरीर में विटामिन डी की अधिकता (Excess of Vitamin D in Body)

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    जिस तरह से शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उसी तरह इसकी अधिकता भी कई बीमारियों को न्योता देती है। विटामिन डी की अधिकता से शरीर के विभिन्न अंगों, जैसे गुर्दों में, हृदय में, ब्लड सेल्स आदि में समस्या उत्पन्न हो सकती है। विटामिन डी कैल्शियम का बना होता है, इसलिए इसके द्वारा पथरी भी बन सकती है। विटामिन डी की अधिकता से ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ा सकती है, ब्लड में कोलेस्टेरॉल बढ़ सकता है और हृदय पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही चक्कर आना, कमजोरी लगना और सिरदर्द, जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। विटामिन डी के अधिक हो जाने से पेट खराब रहने के साथ-साथ दस्त जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    विटामिन डी की कमी को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब (FAQ's)

    सवाल- शरीर में सामान्य तौर पर कितना विटामिन डी ज़रूरी होता है?
    जवाब- आमतौर पर हर इंसान को रोज़ाना 10 से 15 माइक्रोग्राम विटामिन डी की ज़रूरत बताई गई है। इसे सूरज की रोशनी यानी धूप से भी हासिल किया जा सकता है, लेकिन किसी के शरीर में अगर विटामिन डी की भारी कमी है तो वह डाॅक्टर द्वारा सुझाए गए विटामिन डी के वैकल्पिक रूपों का भी सहारा ले सकता है। 
    सवाल- क्या विटामिन डी की कमी से मसल्स में दर्द भी बना रहता है?
    जवाब- बिल्कुल, विटामिन डी की कमी से मसल्स में दर्द, खिंचाव और कमज़ोरी की समस्या आम है। इससे निजात पाने के लिए धूप की पर्याप्त सिंकाई करें। दर्द फिर भी कम न हो तो किसी डॉक्टर से संपर्क करें।  

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