क्या है स्मॉग और कैसे करें इससे अपना बचाव - How to Prevent Smog in Hindi

क्या है स्मॉग और कैसे करें इससे अपना बचाव - How to Prevent Smog in Hindi

स्माॅग का नाम सुनते ही जो सबसे पहला विचार हमारे दिमाग में आता है, वह ये है कि स्मॉग आखिर है क्या। (what is smog) असल में यह वायु प्रदूषण का एक प्रकार है, जिसमें प्रदूषण के कारण धुंध की एक चादर सी वातावरण पर छा जाती है। इसके कारण लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- अस्थमा, फेफड़े के ऊतकों, यानी लंग्स के टिश्यूज़ की हानि, फेफड़ों का संक्रमण, हृदय की समस्याएं, त्वचा रोग, बालों का गिरना, आंख, नाक, गले में जलन, उच्च रक्तचाप, शरीर की रक्षा प्रणाली का कमजोर होना और ब्रेन स्ट्रोक जैसे रोगों की संभावना आदि। 

Table of Contents

    स्माॅग के प्रकार - Types of Smog

    स्माॅग कई प्रकार का होता है। जानिए स्माॅग के प्रकार

    सल्फर स्माॅग - Sulfur Smog

    जब कोयले और पेट्रोलियम पदार्थों का अधिक उपयोग होता है तो हवा में सल्फर ऑक्साइड बनने लगती है, जो सांस संंबंधी समस्याओं का कारण बनती है। 

    प्रकाश रासायनिक स्मॉग - Photochemical Smog

    शहरों में ऑटोमोबाइल या जेनरेटर जैसे वैकल्पिक स्रोतों से निकलने वाले धुंए से नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन  में  फोटो केमिकल रिएक्शन के कारण फोटोकेमिकल स्मॉग, यानी प्रकाश रासायनिक स्मॉग बनता है। यह भी स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट है।

    औद्योगिक स्माॅग

    इसे ग्रे एयर स्मॉग भी कहा जाता है। यह कारखानों या फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुंए से उत्पन्न मरकरी और सल्फर ऑक्साइड के कारण होता है।

    ओजोन (O3) क्या है ? - What is Ozone (O3)?

    जो परत सूरज से निकलने वाली हानिकारक किरणों से वायुमंडल में हमारे लिए सुरक्षा परत का काम करती है, ओजोन परत कहलाती है। यदि यही ओजोन गैस  हमारे वायुमंडल की सतह पर, यानी पृथ्वी पर बनने लगती है तो यह हम सभी के लिए बहुत हानिकारक है। इसके कारण आंखों में जलन, सांस की तकलीफ़ आदि बीमारियां हो जाती हैं। यह  सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों तक के लिए भी  हानिकारक है।

    स्मॉग की स्थिति के मुख्य कारण - Causes of Smog

    ठंडे मौसम में हवाओं की गति कम होती हैं। अतः धूल के कण वायुमंडल में स्थिर हो जाते हैं। ऐसे में प्रदूषण के चलते ये स्वास्थ्य के लिए भयानक रूप ले लेते हैं, जिससे न सिर्फ सामान्य जन-जीवन प्रभावित होता है, बल्कि पहले से बीमार चल रहे लोग अथवा बच्चे तो एक तरह से घरों के भीतर ही कैद होकर रह जाते हैं। आइए, जानते हैं कि क्या हैं स्मॉग (smog kya hai) की स्थिति के मुख्य कारण-

    भारी यातायात

    स्मॉग का एक मुख्य कारण भारी यातायात, जैसे कि डीज़ल से चलने वाले वाहन ट्रक, कार आदि हैं। उनसे निकलने वाले धुंए में कार्बन डाइऑक्साइड की अत्यधिक मात्रा स्वच्छ वातावरण को प्रदूषित करती है। इस धुंए से लोगों में डिमेंशिया होने की संभावना अधिक रहती है।

    उच्च तापमान

    जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है और हवा की गति कम होती है तो यह धुंए और धुंध को एक जगह स्थिर करके स्मॉग बनाती है और प्रदूषण को बहुत अधिक बढ़ा देती है। इससे वातावरण में कुछ भी साफ-साफ देख पाना तक मुश्किल हो जाता है और यह पर्यावरण को भी अस्त-व्यस्त कर देती है।

    धूप और ठंडी हवाएं

    वायुमंडल में स्मॉग बनने के और भी कई कारण हैं, जैसे कि सर्दियों के समय हवा की गति कुछ कम हो जाती है। तब यह हानिकारक गैसें और कोहरे का मिश्रण जमीन पर प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने लगता है। नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन छोड़ने वाले वाहनों का धुंआ सूरज की रोशनी में हानिकारक गैस में बदल जाता है। 

    पराली - Straw

    पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के राज्यों से दिल्ली की सीमाएं लगती हैं, जहां बड़े पैमाने पर खेती होती है। यहां लोग अपनी फसल कटाई के बाद पीछे बचे झाड़-फूस, यानी पराली को जला देते हैं। यह भी स्मॉग होने का और प्रदूषण बढ़ने का एक बहुत बड़ा कारण है।

    स्मॉग के अन्य कारण - Other Causes of Smog

    • वाहन
    • निर्माण
    • खुले में जलने वाला कूड़ा
    • इंसीनरेटर 
    • कारखाने
    • कोयला आधारित बिजली उत्पादन स्टेशन
    • डीजल और पेट्रोल वाहन
    • सॉल्वैंट्स
    • क्लीनर और ऑयल पेंट
    • कीटनाशक 
    • प्रदूषक हवाएं आदि।

    स्मॉग का हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव - Effect of Smog on Health

    स्माॅग का हमारे स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन जाता है । आइए जानते हैं, स्माॅग से होने वाली बीमारियों के बारे में।
    सावधानियां- पुरानी कहावत भी है ,"दुर्घटना से सावधानी भली" !! एक्सपर्ट्स का कहना है कि 85 से 90 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण असावधानी ही होता है।

    दिल के मरीज

    दिल के मरीजों को स्माॅग से बच कर रहना चाहिए, क्योंकि हवा में मौजूद लैड सेहत के लिए खतरनाक होते हैं। जब यह स्माॅग सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। दिमाग को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन न पहुंचने के कारण व्यक्ति हार्टअटैक और स्ट्रोक का शिकार हो सकता है। ऐसे लोगों को प्रदूषण ज्यादा रहने पर घर में ही रहना चाहिए।

    अस्थमा के मरीज

    दमा, सीओपीडी या एलर्जिक रहाइनिटिस से पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों बढ़ जाती है। हवा में मौजूद छोटे कण सेहत पर बुरा असर डालते हैं, जिसका असर फेफड़ों पर पड़ता है. सरदी के दौरान हवा में पीएम बढ़ जाता है। पीएम बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इससे आंख, गले और फेफड़े की तकलीफ बढ़ती है। खांसी और सांस लेने में भी तकलीफ होती है। ऐसे मरीज प्रदूषण ज्यादा होने पर घरों से बाहर न निकलें। अगर जरूरी हो तो मास्क और घर में वेपोराइजर लगा लें, ताकि पाल्यूशन से बचा जा सके। दमा आदि के मरीज अपना इन्हेलर हमेशा साथ रखें और सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत इसका इस्तेमाल करें। 

    आंखों के लिए

    वैसे तो वायु प्रदूषण हमेशा ही नुकसानदायक  होता है, लेकिन जिस समय पराली जलाई जाती है, उस समय पर इसका लेवल काफी ज्यादा बढ़ा हुआ होता है। इससे निकलने वाले धुंए से आंखों में जलन हो  सकती है। कई लोगों को तो इसके चलते इतना नुकसान पहुंचता है कि ठीक प्रकार से दिखाई देना बंद हो जाता है। इससे बचने के लिए ऐसे समय में बाहर निकलते हुए चश्मे का प्रयोग करें। ऐसे बुजुर्ग, जिनकी आंखोंं का लेज़र या ऑपरेशन हुआ हो, वे भी काला चश्मा पहन कर रहें।

    मिर्गी के मरीज

    स्मॉग मिर्गी के मरीजों के लिए भी घातक है, क्योंकि जब ऑक्सीजन नहीं मिलती तो मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को भी नुकसान पहुंचता है। 

    अल्जाइमर का खतरा

    स्मॉग के कारण हवा में मौजूद प्रदूषित छोटे चुंबकीय कणों से अल्जाइमर होने का खतरा  बढ़ जाता है।

    जन्म दोष

    कुछ शोध बताते हैं कि स्मॉग के दुष्प्रभाव इतने ज्यादा हैं कि इसके कारण स्पाइना बिफिडा और एनासेफली जैसी अनुवांशिक बीमारियां तक हो जाती हैं।

    स्मॉग से बचाव के तरीके - Smog Prevention Methods

    दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे स्माॅग से बचाव भी जरूरी है। आइए जानते हैं, बचाव के कुछ उपायों के बारे में-
    1.जरूरी है कि आप अपने शहर की वातावरण से संबंधित हर खबर पर अपडेट रहें, ताकि आपको मालूम रहे कि आपके शहर का ओजोन स्तर क्या है और कब आपको और आपके अपनों को विशेष सावधानी या सुरक्षा की जरूरत है।
    2- प्रदूषण होने पर कोशिश  करें कि ज्यादा देर तक घर से बाहर न रहें। यदि ऐसा करना बहुत जरूरी है तो मास्क का प्रयोग करें। 
    3.संभव हो सके तो वाहनों का प्रयोग कम से कम करें या फिर कार पूल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
    4.एलोवेरा, आइवी और स्पाइडर प्लांट जैसे वायु को शुद्ध करने वाले पौधों को घर और कार्यालयों में रखा जा सकता है।
    5.घर का  कचरा न जलाएं। इसकी बजाय कूड़ा एकत्र करने वाले की सहायता इस काम के लिए लीजिए।
    6.घर से निकलते समय  चश्मा  पहनें।
    7.जो लोग हार्ट और अस्थमा के मरीज़ हैं, वे इनहेलर का प्रयोग करें। 
    8. हवा को साफ रखने वाला यंत्र ऐयर प्योरिफायर लगाएं। 
    देखभाल
    वैसे तो स्मॉग सभी के लिए हानिकारक है लेकिन विशेष रुप से यह बच्चों और बुजुर्गों को नुकसान पहुंचाता है। यह जानते हैं कैसे।
    बच्चे 
    5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए स्मॉग इसलिए हानिकारक है, क्योंकि उनके शरीर के साथ-साथ उनकी रोग प्रतिरोधक प्रणाली, यानी इम्यून सिस्टम भी पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता। इस मौसम में बच्चों को इंडोर गेम्स के लिए ही प्रेरित करना चाहिए। बच्चों के साथ कहीं बाहर जा रहे हैं तो उन्हें बंद वाहन से ही लेकर जाएं। बच्चों को थोड़े-थोड़े समय बाद पानी पिलाते रहें, ताकि उनका शरीर हाइड्रेटेड रहे। बच्चों की जिद के आगे अक्सर खराब वातावरण होने पर भी उन्हें बाहर जाने से रोकना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में अगर बच्चे बाहर से खेल कर आएं तो उनके हाथ-मुंह तुरंत ही अच्छी तरह से धुलवा दें। 
    बुजुर्ग
    स्माॅग बुजुर्गों के लिए भी घातक है। इन दिनों में उनके लिए खुली जगह पर व्यायाम या योग करना उचित नहीं होता। यदि वे कहीं बाहर जा रहे हैं तो उन्हें चश्मे और मास्क का प्रयोग जरूर करना चाहिए।

    स्मॉग के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट - WHO Report about Smog

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, स्मॉग में ओजोन नाइट्रोजन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे सूक्ष्म कण होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही नुकसानदायक है। इसे नियंत्रित करने की जरूरत है। अधिकांश लोगों को मालूम ही नहीं होता कि यह स्मोक कितना खतरनाक होता है। जर्मनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्मोक से मारे जाने वाले लोगों की संख्या सड़क दुर्घटना में मारे जाने वाले लोगों से कहीं ज्यादा है। यदि समय पर इलाज न करा जाए तो यह बीमारियां फेफड़ों और मूत्राशय के कैंसर में भी बदल सकती हैं।

    स्मॉग से बचाव के घरेलू उपाय - Home Remedies for Smog in Hindi

    ज़रूरी नहीं है स्माॅग से बचाव के लिए आपको हर बार मास्क या डाॅक्टर की ज़रूरत ही पड़े। कुछ घरेलू उपायों की मदद से भी आप स्माॅग से अपना बचाव कर सकते हैं। 

    हल्दी का प्रयोग

    हर घर में हल्दी का प्रयोग होता है। हल्दी में बहुत से औषधीय गुण होते हैं, जैसे कि एंटी ऑक्सीडेंट, पॉलिफिनॉल्स, इंम्यूनोमॉड्यूलेशन आदि। यदि इसका सेवन किया जाए तो यह  प्रदूषण से हाेने वाली  समस्याओं जैसे कि खांसी, गले में दर्द, बंद नाक, नाक या गले में जलन, राइनाइटिस, साइनसाइटिस आदि में राहत प्रदान करती है। अपनी डाइट में विटामिन सी, ओमेगा 3 और मैग्नीशियम, हल्दी, गुड़, अखरोट आदि नियमित रूप से शामिल करें। 

    ओमेगा 3 फैटी एसिड्स

    हमें ओमेगा 3 फैटी एसिड्स, चाहे हम शाकाहारी हों या मांसाहारी, दोनों ही स्त्रोतों से मिल सकता है। सूखे मेवे जैसे कि अखरोट, बादाम, किशमिश या सोयाबीन टोफू, अलसी, सूरजमुखी और हरी बींस, अंकुरित अनाज, पत्तेदार सब्जियां, बेरीज फल, दूध आदि में ओमेगा-3 मौजूद है। ट्यूना, सामन, हिलसा, सार्डिन जैसी मछलियां, शैवाल, झींगा जैसे सी-फूड में ओमेगा-3 प्रचुर मात्रा में होता हैं, लेकिन ओमेगा 3 डाइट का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसकेे अधिक सेवन से मोटापा जैसी समस्याएं हो जाती हैं। 

    स्मॉग से बचाव में सहायक पौधे - Plants that Helps to Prevent Smog

    पर्यावरण को साफ-स्वच्छ रखने में पेड़-पौधों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। इनकी सहायता से आप घर के अंदर की वायु को बहुत आसानी से शुद्ध रख सकते हैं।

    ऐरेका पाम ट्री

    ऐरेका पाम ट्री प्राकृतिक रूप से नमी को बनाए रखता है।

    फिचुस ट्री

    इसे वीपिंग फिग के नाम से भी जाना जाता है। यह कमरे की हवा को साफ़ करता है। इसकी देखभाल करना आसान होता है, क्योंकि यह कम प्रकाश और कम पानी में भी रह सकता है। यह हवा के प्रदूषण को भी कम करता है।

    बेबी रबर प्लांट

    ये पौधे कमरे और हवा से अशुद्धियों को दूर करते हैं। इसे नियमित रूप से पानी देने की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि इसे अच्छी मिट्टी और फिल्टर्ड लाइट की आवश्यकता होती है।

    फर्न

    फर्न नमी को बनाए रखने के लिए सबसे उत्तम है। यह कमरे की हवा को साफ़ करने में बेहद उपयोगी है।

    गोल्डन पोथोस

    आप इसे सिल्वर लाइन या डेविल्स एवी भी कह सकते हैं। इसकी सदाबहार पत्तियां आपके कमरे की शोभा बढ़ाती हैं और साथ ही साथ यह हवा से अशुद्धियों को हटाता है। इसे रखना आसान होता है और इसे अधिक पानी की आवश्यकता भी नहीं होती।

    स्मॉग के संबंध में किए जाने वाले कुछ सवाल और उनके जवाब - FAQ's

    1- सवाल- स्माॅग से क्या त्वचा संबंधी बीमारियां भी होती हैं?
    जवाब- हां। जिन लोगों को त्वचा की एलर्जी हो, उनको स्माॅग से बचना चाहिए,  क्योंकि इन प्रदूषकों के संपर्क में आने पर  एलर्जी का कारण बढ़ जाता है। अगर एलर्जी जैसी परेशानी दिखती है तो तुंरत डॉक्टर की सलाह से एंटी एलर्जी दवा ले लेनी चाहिए। 
    2- सवाल- स्माॅग से रिकेट की समस्या भी हो सकती है?
    जवाब- हां! स्मॉग की वजह से प्राकृतिक तत्व विटामिन डी का उत्पादन कम होता है, जिसके कारण रिकेट्स की समस्या बढ़ जाती है।
    3- सवाल- क्या कोहरा ही स्मॉग होता है?
    जवाब- नहीं! केवल धुंध की वही परत, जो प्रदूषण के कारण होती है, वही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
    4- सवाल- क्या स्मॉग ग्रीन लाइफ को भी प्रभावित करता है?
    जवाब -हां, स्माॅग सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि फसलों और पौधों के लिए भी नुकसानदायक है।
    (डॉक्टर वी एम अग्रवाल, सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन, सीएमओ राष्ट्रपति भवन और डॉक्टर अनूप धीर, सीनियर कंसलटेंट कॉस्मेटिक सर्जरी ,अपोलो हॉस्पिटल, दिल्ली से बातचीत पर आधारित)

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