भाई दूज की कहानी और पूजा विधि - Bhai Dooj Stories, Bhaidooj Muhurat, Bhai Dooj Puja Vidhi, Bhaidooj | POPxo

जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है भाई दूज, क्या है इसकी सही पूजा विधि

जानिए आखिर क्यों मनाया जाता है भाई दूज, क्या है इसकी सही पूजा विधि

हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाए जाते हैं, एक रक्षाबंधन, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है। दूसरा त्योहार, 'भाई दूज' होता है। इसे बहनें भाई की लम्बी उम्र के लिए मनाती हैं। आप सभी जानते ही हैं कि भाई दूज पर्व भाइयों के प्रति बहनों की श्रद्धा और विश्वास का पर्व है। इस पर्व को हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन ही मनाया जाता है, लेकिन इसे मनाने की वजह क्या है, इस बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। दरअसल, भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक यह पर्व दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। पूरे देश में भाई-बहनों के लिए ये दिन बहुत ही खास होता है और वे इसका इंतजार दिल से करते हैं।

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    क्या है भाई दूज की परंपरा - Bhai Dooj Tradition

    हिंदुओं के बाकी त्योहारों की तरह यह त्योहार भी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर और उपहार देकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। इस दिन भाई का अपनी बहन के घर भोजन करना विशेष रूप से शुभ होता है। यह कार्तिक के महीने (अक्टूबर और नवंबर के बीच) में शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन आता है। सभी बहनें सुबह बहुत जल्दी उठती हैं, पूजा करती हैं और अपने भाइयों के बेहतर भविष्य और स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। पूजा के अनुष्ठान के के बाद उनके माथे पर दही, रोली और चावल लगाकर टीके की रस्म को पूरा करती हैं। इसके बाद वे भाई की आरती करती हैं और खाने के लिए मिठाई देती हैं। अंत में उपहारों का आदान-प्रदान होता हैं और बड़ों के पैरों को छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।
    भाई दूज देश के बाहर भी मनाया जाता है। यह भाइयों और बहनों के बीच प्यार के बंधन को बढ़ाने के लिए रक्षा बंधन त्योहार की तरह ही है। इस शुभ दिन को बहनें अपने भाइयों की भलाई और कल्याण के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों के प्रति प्रेम दिखाने और उनकी देखभाल करने के लिए उपहार प्रदान करते हैं। मिथिला नगरी में इस पर्व को आज भी यमद्वितीया के नाम से जाना जाता है।
    इस दिन चावलों को पीसकर एक लेप भाइयों के दोनों हाथों में लगाया जाता है। साथ ही कुछ स्थानों पर भाई के हाथों में सिंदूर लगाने की भी परंपरा देखी जाती है। भाई के हाथों में सिंदूर और चावल का लेप लगाने के बाद उस पर पान के पांच पत्ते, सुपारी और चांदी का सिक्का रखा जाता है। उस पर जल उड़ेलते हुए भाई की दीर्घायु के लिए मंत्र पढ़ा जाता है। भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।

    भाई दूज की कहानी - Bhai Dooj Stories

    शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने जाते हैं। उन्हीं का अनुकरण करते हुए यह भारतीय भ्रातृ परंपरा अपनी बहनों से मिलती है और उनका यथेष्ट सम्मान पूजनादि कर, उनसे आशीर्वाद स्वरूप तिलक प्राप्त कर कृतकृत्य होती है। बहनों को इस दिन नित्य कर्म से निवृत्त होकर अपने भाई की दीर्घ आयु, कल्याण एवं उत्कर्ष तथा स्वयं के सौभाग्य के लिए अक्षत (चावल) कुंकुमादि से अष्टदल कमल बनाकर इस व्रत का संकल्प कर मृत्यु के देवता यमराज की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसके पश्चात यमभगिनी यमुना, चित्रगुप्त और यमदूतों की पूजा करनी चाहिए। तदंतर भाई को तिलक लगाकर भोजन कराना चाहिए। इस विधि के संपन्न होने तक दोनों को व्रती रहना चाहिए।

    इस पर्व के संबंध में पौराणिक कथा इस प्रकार मिलती है। सूर्य की संज्ञा से 2 संतानें थीं- पुत्र यमराज तथा पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण कर उसे ही अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई। छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव न था, किंतु यम और यमुना में बहुत प्रेम था। बहन के स्नेह से एक बार यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने यमुना को विविध भेंटें अर्पित कीं। जब वे वहां से चलने लगे, तब उन्होंने यमुना से कोई भी मनोवांछित वर मांगने का अनुरोध किया। यमुना ने उनके आग्रह को देखकर कहा- भैया! यदि आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन प्रतिवर्ष आप मेरे यहां आया करेंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार किया करेंगे। इसी प्रकार जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसका आतिथ्य स्वीकार करे तथा उसे भेंट दें, उसकी सब अभिलाषाएं आप पूर्ण किया करें एवं उसे आपका भय न हो। यमुना की प्रार्थना को यमराज ने स्वीकार कर लिया। तभी से बहन-भाई का यह त्योहार मनाया जाने लगा।

    भाई दूज का महत्व - Importance of Bhai Dooj

    यह पर्व भाई-बहन के बीच स्नेह के बंधन को और भी मजबूत करता है। भारतीय परंपरा के अनुसार विवाह के बाद कन्या का अपने घर, मायके में कभी-कभार ही आना होता है। मायके की ओर से भी परिवार के सदस्य कभी-कभार ही उससे मिलने जा पाते हैं। ऐसे में भाई अपनी बहन के प्रति उदासीन न हों, उनमें सदा स्नेह बना रहे, बहन के सुख:दुख का पता चलता रहें, भाई अपनी बहनों की उपेक्षा न करें और दोनों के संबंध मधुर बने रहें, इन्हीं भावनाओं के साथ भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।  यमुना अपने भाई यमराज के यहां प्राय: जाती और उनके सुख-दुख की बातें पूछा करती। यमुना यमराज को अपने घर पर आने के लिए कहती, किंतु व्यस्तता तथा दायित्व बोझ के कारण वे उसके घर न जा पाते थे। एक बार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर अचानक जा पहुंचे। बहन यमुना ने अपने सहोदर भाई का बड़ा आदर-सत्कार किया। विविध व्यंजन बनाकर उन्हें भोजन कराया तथा भाल पर तिलक लगाया। यमराज अपनी बहन के निश्छल स्नेह और आतित्थ्य को देखकर बहुत प्रसन्न हुए, जिससे उन दोनों भाई-बहन का प्यार और गहरा होकर मिसाल बन गया और इस दिन को इसी संबंध को समर्पित मान लिया गया।
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    भाई दूज मुहूर्त - Bhaidooj Muhurat

    साल 2019 में भाई दूज के दिन तिलक लगाने का शुभ समय दिन में 01 बजकर 10 मिनट से लेकर 03 बजकर 18 मिनट तक का है। प्रयास करके भाई दूज मुहूर्त के अनुसार ही मनाना चाहिए, ताकि भाई की उम्र लंबी हो और उसे अधिक से अधिक तरक्की मिले।

    भाई दूज पूजा विधि - Bhai Dooj Puja Vidhi

    भाई दूज के दिन बहनों को सुबह पहले स्नान करके भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए। इसके उपरांत भाई को तिलक लगाना चाहिए। स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन पूजा की विधि कुछ इस तरह है। इस दिन भाई को बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए। अगर बहन की शादी न हुई हो तो उसके हाथों का बना भोजन करना चाहिए। अपनी सगी बहन न होने पर चाचा, ताऊ, मामा आदि की पुत्री अथवा पिता की बहन के घर जाकर भोजन करना चाहिए। साथ ही भोजन करने के पश्चात बहन को उपहार स्वरूप कुछ देना चाहिए। इस दिन यमुना जी में स्नान का विशेष महत्व है।

    भाई दूज के दिन बहन को करने चाहिए ये 3 जरूरी काम

    भाई की लंबी उम्र और उसके मान-सम्मान को बढ़ाने के लिए बहनों को भाईदूज के दिन ये काम जरूर करने चाहिए।

    1- इस दिन आसमान में उड़ती हुई चील देखने के विषय में यह मान्यता है कि बहनें भाइयों की आयु के लिए जो दुआ मांगती हैं, वह पूरी होती है, इसलिए उस दिन सुबह आप आसमान में यदि उड़ती हुई चील देखें तो उससे अपने भाई के लिए जरूर दुआ करें।
    2- भाई दूज के दिन बहनों को अपने हाथ से बने खाने के द्वारा ही भाई का जिमाना चाहिए। कहते हैं कि उससे भाई के तमाम कष्ट दूर होते हैं। इस दिन भाई को चावल खिलाना शुभ माना जाता है। यदि किसी की बहन न हो तो वह गाय या फिर नदी की पूजा करके अपने कष्ट दूर कर सकता है।
    3- कई जगहों पर बहनें अपने ईष्ट देव की पूजा करके चावल के आटे से चौक तैयार करती हैं। इस चौक पर भाई को बिठाया जाता है और उनके हाथों की पूजा की जाती है। भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती है। उसके ऊपर सिन्दूर लगाकर कद्दु के फूल, सुपारी, मुद्रा आदि रख कर धीरे धीरे हाथों पर पानी छोड़ा जाता है। उससे भाई के ऊपर की सारी मुसीबतें दूर होती हैं। आप भी अपने भाई की सफलता के लिए ऐसा कर सकती हैं।

    भाई दूज से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

    • भाई दूज कई अलग-अलग नामों से जाता है। इसे बंगाल, भाई बीज, भाऊ बीज या भाव बिज तथा गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में भाई फोटा कहा जाता है।
    • भाई दूज नेपाल में एक प्रमुख त्योहार है और भाई टीका नाम से जाता है।
    • हरियाणा और महाराष्ट्र में, जिन महिलाओं के भाई नहीं होते हैं, वे चंद्रमा भगवान की पूजा करती हैं।
    • यदि भाई दूर रहता है और अपनी बहन से मिलने नहीं जाता है तो वह अपने भाई के लिए चन्द्र देवता के माध्यम से लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।
    • इन दिनों बहनें पोस्ट के माध्यम से टिक्स भेज सकती हैं। वर्चुअल टिक और ई-कार्ड भी काफी लोकप्रिय हो गए हैं।

    भाई दूज के दिन बहनों के लिए बेस्ट तोहफे

    बदलते समय के साथ बहनों को दिए जाने वाले तोहफों में भी बदलाव होने लगा है। आपको अपनी बहन की पसंद और मौजूदा ट्रेंड के हिसाब से कोई गिफ्ट लेना चाहिए, जो उन्हें पसंद आए और आपके बजट पर भी भारी न पड़े। इस भाई दूज पर आप अपनी बहन को कुछ खास देना चाहते हैं तो इससे आपको मदद मिल सकती है।

    प्रिंट कराएं बहनों का नाम डॉल्स पर

    बहनें चाहें कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाएं, लेकिन भाइयों के लिए गुड़िया की तरह होती हैं। इस बात को ध्यान में रखकर म्यूजिकल डॉल, स्पीकिंग डॉल, डांसिंग डॉल, सॉफ्ट टॉय डॉल जैसी कई वेराइटी आप अपनी बहन को दे सकते हैं। इन खूबसूरत डॉल्स पर बहनों के नाम भी प्रिंट किए जा रहे हैं। खास बात ये है कि ये डॉल्स हर एज ग्रुप की बहनों को लुभा रही हैं।

    जूलरी से करें खुश

    लड़कियों को ज्वेलरी से काफी प्यार होता है, इसलिए आप उन्हें ज्वेलरी दे सकते हैं। ज्वेलरी में  पतली रिंग्स, छोटे ईयररिंग, नोजपिन और ब्रेसलेट भी गिफ्ट कर सकते हैं। बहनों के लिए उनके भाई का दिया हुआ तोहफा बहुत खास होता है, इसलिए जब भी आपकी बहन आपका दिया हुआ तोहफा देखेंगी तो वे बहुत खुश हो जाएंगी।

    एसेसरीज कर सकते हैं गिफ्ट

    आजकल बाजार में ऐसे कई तोहफे मौजूद हैं, जो हर उम्र की महिलाओं को पसंद आते हैं। बहनों के लिए वॉलेट्स, हेयर एसेसरीज, परफ्यूम, वॉचेस, आर्टिफिशियल ईयर रिंग, ब्रेसलेट, नेक पीस की भी बड़ी रेंज मार्केट में है। वहीं हैंड मेड चॉकलेट, परफ्यूम, वॉच, मिलाकर स्टायलिश गिफ्ट हैंपर भी उपलब्ध हैं, जिन पर प्यार भरा मैसेज लिख सकते हैं। इनमें से आप अपने बजट के अनुसार अपनी बहन के लिए तोहफा ले सकते हैं।

    मेकअप बॉक्स

    अगर आप कुछ क्लासिक और स्टाइलिश देना चाहते हैं तो इस भाई दूज पर उन्हें लेदर का मेकअप बॉक्स दे सकते हैं। वे इसमें अपने रोजाना की ज्वेलरी, मेकअप प्रोडक्ट्स वगैरह रख सकती हैं।

    स्पेशल केक या चॉकलेट

    स्पेशल केक आप अपने हाथों से उनके लिए छोटा सा केक या चॉकलेट तैयार कर सकते हैं। भले ही ये परफेक्ट न हो, लेकिन आपका एफर्ट उन्हें जरूर अच्छा लगेगा।

    भाई दूज के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल FAQ's

    भाई दूज पर किसकी पूजा का महत्व ज्यादा होता है और बहनों को किसकी पूजा करनी चाहिए?
    भाई दूज के दिन यमराज और यमुना जी की पूजा का खास महत्व होता है। भाई चाहें तो यमुना जी में नहाकर पूजा भी कर सकते हैं।
    भाई दूज के दिन अगर उपहार लेने का समय न हो तो क्या करें?
    अगर उपहार खरीदने के लिए आपके पास समय की कमी है या आपके लिए तय कर पाना मुश्किल हो रहा हो कि उसे क्या पसंद आएगा तो ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में कुछ भी लाकर देने की जगह उनके किसी पसंदीदा स्टोर का गिफ्ट वाउचर देना अच्छा आइडिया रहेगा। कुछ भी न हो पाने की स्थिति में कैश तो कभी भी और कितना भी दिया जा सकता है। वैसे सबसे अहम बात ये है कि इस त्योहार पर सबसे अहम भाई-बहन का एक-दूसरे के प्रति आपसी प्यार होता है।
    बहनों से दूर रहने वाले भाई ऐसा क्या करें, जिससे बहनों को उनकी कमी महसूस न हो?
    ​यदि आप अपनी बहन से दूर हैं तो उनके लिए कुछ भी ऑनलाइट तोहफा भिजवा दीजिए। उसके साथ एक प्यार भरा कार्ड भी भिजवाइए, ताकि वह आपकी कमी को ज्यादा महसूस न करें। एक फोन करना तो बनता ही है साथ में।

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