लंबी धार्मिक यात्राओं के दौरान इन बातों का रखें ख्याल

लंबी धार्मिक यात्राओं के दौरान इन बातों का रखें ख्याल

धर्म-आस्था भारत की संस्कृति का अटूट हिस्सा है। यहां आए दिन कोई न कोई व्रत-त्योहार, उत्सव वगैरह के अवसर जुटते ही रहते हैं और इन्हीं का एक रूप हैं धार्मिक यात्राएं भी। भारतीय जनमानस इन यात्राओं के प्रति इतनी आस्था रखता है कि उनकी मोक्ष प्राप्ति तक का विश्वास इन यात्राओं से जुड़ा है, इसलिए इन धार्मिक यात्राओं का महत्त्व बहुत ज़्यादा है और सभी लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार तो किसी न किसी धार्मिक यात्रा पर जाना ही चाहते हैं। कुछ लोग ये यात्राएं अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों या परिचितों के साथ करते हैं तो कुछ लोग अकेले ही यात्रा पर निकल जाते हैं। मकसद वही है, आस्थापूर्ण विश्वास से मन की शांति और तन को एक नएपन का एहसास देना। 

धार्मिक यात्राओं के दौरान ध्यान रखने वाली बातें Take Care Of These Things During Religious Trip And Travelling In Hindi

अब ऐसे में जब आपने भी किसी ऐसी ही धार्मिक यात्रा पर जाने का फैसला कर ही लिया है तो हम कुछ ऐसी बातों की जानकारी आपको यहां देने की कोशिश कर रहे हैं, जो इस तरह की यात्रा में हर कदम पर आपके काम आएंगी।

यात्रा से पहलें कर लें प्लानिंग

इस धार्मिक यात्रा पर चाहे आप अकेले जा रहे हों या अपने परिवार, दोस्तों, रिश्तेदारों, परिचितों के साथ, सबसे पहला काम आपको जो करना है, वह है अपनी यात्रा की पूरी प्लानिंग सबके साथ बैठकर करना, जैसे कि कितने लोग जाने वाले हैं, कहां-कहां की यात्रा की प्लानिंग है, एक तीर्थस्थल पर ही जा रहे हैं या फिर उसके आस-पास की जगहों पर भी जाएंगे वगैरह। इसी के साथ अपनी प्लानिंग में मिनट टू मिनट प्रोग्राम भी रखिए, यानी की कितने बजे कहां सभी को इकट्ठा होना है, समूह की सारी जानकारी किसके पास होगी, टीम को कौन लीड करने वाला है वगैरह।

मौसम का पूरी जानकारी लें सबसे पहले

जिस जगह की यात्रा की प्लानिंग की है, सबसे पहले वहां के मौसम की सटीक जानकारी लेना न भूलें। ध्यान देने योग्य बात है कि अधिकांश ऐसे तीर्थस्थल, जहां की यात्रा भारतीय जनमानस करता है, वे पहाड़ी स्थानों पर स्थित हैं, जैसे- बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री, मां वैष्णो देवी, अमरनाथ धाम वगैरह। इन स्थानों पर हालांकि मौसम कभी भी बहुत तेज़ी से बदल जाता है और खराब मौसम संबंधी आशंका हमेशा बनी रहती है। फिर भी यदि पहले से सावधानी बरती जाए तो कई अप्रिय स्थितियों से बचा जा सकता है। बरसात के मौसम में कोई भी पहाड़ी यात्रा पूरी तरह से अवॉइड करें।

ट्रांसपोर्ट और होटल बुकिंग सुनिश्चित करा लें

यात्रा आरंभ करने से पहले ही उस स्थान पर आने-जाने के लिए जरूरी ट्रांसपोर्ट और उनकी टिकेट वगैरह का इंतजाम करवा लीजिए। चाहे आप बस से जा रहे हों, ट्रेन से या फिर प्लेन से ही सही। जरूरी नहीं है कि इनकी कनफर्म टिकेट्स भी आपकी यात्रा संबंधी तारीखों के अनुसार ही आसानी से मिल जाएं। सो ऐसे में यदि आप पहले से ही अपनी सभी टिकेट्स कंफर्म करवा लेते हैं तो काफी सारी परेशानी से आप बच सकते हैं। यही बात आगे के कंवेंस संबंधी मामलों पर भी लागू होती है। उस तीर्थस्थल पर आप कहां ठहरने वाले हैं, इसके लिए भी वहां के नजदीकी होटल, गेस्ट हाउस या धर्मशाला वगैरह में पहले से बुकिंग करवाना न भूलें। ये इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि अधिकांश भारतीय तीर्थस्थलों पर अक्सर भीड़-भाड़ ही मिलती है। ऐसे में अगर आपने ये जरूरी इंतजाम नहीं किया होगा तो आपको परेशानी हो सकती है और अगर आपने पहले से ही अपने या अपने ग्रुप के ठहरने का इंतजाम किया हुआ है तो मानसिक तौर पर आप राहत महसूस कर सकते हैं। हां, अपने जाने के एक दिन पहले और पहुंचने से पहले भी उस स्थान पर संपर्क करना न भूलें। ये थोड़ी सी सावधानी बड़ी राहत का काम करेगी।

रजिस्ट्रेशन ज़रूर करवाएं

आजकल सभी तीर्थस्थलों पर प्रॉपर रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था है, इसलिए चाहे आप अकेले यात्रा कर रहें हैं या समूह के साथ, रजिस्ट्रेशन करवाना न भूलें।

ज़रूरी एप डाउनलोड करना न भूलें

अधिकांश जगहों पर अब उस तीर्थस्थल से संबंधित एप भी उपलब्ध हैं। सो यात्रा शुरू करने से पहले ही उस एप को अपने फोन में डाउनलोड कर लीजिए और उस पर दी जा रही सूचनाओं पर निर्देशों के प्रति सतर्क-सचेत रहें।

छोटे बच्चों को साथ ले जाने से बचें

एक अहम सावधानी तो यही है कि इन यात्राओं पर बहुत छोटे बच्चों को  ले जाना अवॉइड करें। यात्रा के दौरान या किसी भी आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा काफी मुश्किल हो जाती है।

जानकार व्यक्ति को बनाएं टीम लीडर

चूंकि हम आमतौर पर देखते ही हैं कि लंबी धार्मिक यात्राओं  पर लोग ज्यादातर समूह में जाना ही पसंद करते हैं तो बेहतर यही होगा कि समूह को लीड करने की जिम्मेदारी किसी एक ऐसे जानकार व्यक्ति को दे दी जाए, जो इस बारे में या फिर यात्राओं का अनुभव रखता हो। समूह से जुड़े लोगों की पूूरी जरूरी जानकारी उसके पास होनी चाहिए, जैसे कि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में उस व्यक्ति से जुड़े किससे संपर्क करना है, सभी का पूरा पता, जरूरी फोन नंबर, परिवार के सदस्यों की जानकारी, दस्तावेज संबंधी जानकारी।

टीम लीडर के निर्देश मानें

एक बात जो निश्चित होनी बहुत जरूरी है कि जब आप ग्रुप के साथ किसी धार्मिक यात्रा पर जाते हैं तो जो भी व्यक्ति टीम को लीड कर रहा हैे, उसके द्वारा बनाए गए नियमों और निर्देशों का पालन पूरी तरह से करें। इसमें किसी भी प्रकार के अहम भाव को आड़े न आने दें। ये नियम और निर्देश आप ही की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं।

पहचान पत्र साथ रखें

अपना कोई पहचान पत्र हमेशा साथ रखें। आप ऐसा भी कर सकते हैं कि किसी कागज पर अपना पूरा नाम, पता, फोन नंबर, आपातकालीन फोन नंबर, परिवार के सदस्यों के नाम, ब्लड ग्रुप वगैरह लिख कर, लेमिनेट करवा कर अपने साथ रखें। यदि ग्रुप में यात्रा कर रहे हैं तो सभी सदस्यों के साथ ऐसा ही पहचान पत्र व्यक्तिगत रूप से होना चाहिए। यदि आप ग्रुप को लीड कर रहे हैं, यानी समूह के नेतृत्व की जिम्मेदारी आपके पास है तो सभी के अहम दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी अपने पास जरूर रखें।

समूह के साथ रहें

समूह में यात्रा के दौरान रोज़ का रुटीन पहले से बना कर चलें और उसका पूरी तरह से पालन कीजिए। ग्रुप में यात्रा करने के दौरान अपने समूह के साथ-साथ रहें और बार-बार इधर-उधर न जाएं, न ही टीम को छोड़कर आगे-आगे भागें। इससे ग्रुप के सदस्यों के भटकने का भी डर रहता है, साथ ही इसके चलते ग्रुप के बाकी सदस्यों को परेशानी भी हो सकती है।

दूसरों के समय का ध्यान रखें

बार-बार फोटो खींचने या खरीदारी वगैरह करने के लिए भी न रुकें। इससे बाकी सदस्यों को दिक्कत होती है। बेहतर तो यही है कि ऐसा सामूहिक रूप से करने के लिए समय और स्थान एक साथ चुन लीजिए। जहां भी पहुंचना हो या इकट्ठा होना है, पहले से तय किए गए समय के पाबंद रहें। इससे आपके साथ-साथ दूसरों का समय भी बचेगा।

सिर्फ ज़रूरी चीजें साथ लें

यात्रा के सामान में केवल जरूरी चीजों को ही शामिल करें। आपका सामान जितना कम से कम और हल्का रहेगा, यात्रा के दौरान आप उतनी ही ज्यादा सुविधा और राहत महसूस करेंगे। जैसाकि आप जानते ही हैं कि लंबी यात्राओं वाले ज्यादातर तीर्थस्थल पहाड़ी जगहों पर ही स्थित हैं और पहाड़ों पर मौसम अचानक ही ठंडा हो जाता है, इसलिए अपने दूसरों कपड़ों के साथ कुछ गर्म कपड़े रखना भी न भूलिएगा।

कपड़े और जूते हों आरामदेह

यात्रा के दौरान पहने वाले कपड़े आरामदायक होने बहुत जरूरी हैं। साथ ही ये ऐसे भी होने चाहिए कि अगर ये भीग भी जाएं तो जल्दी ही सूख जाएं, जैसे- नायलॉन वगैरह। फुटवेयर का कंफर्टेबल होना बहुत जरूरी है, वर्ना थके पैरों से आप ज्यादा दूर नहीं चल पाएंगे। बेहतर तो यही होगा कि इस दौरान हल्के स्पोर्ट्स शूज़ ही पहनें। पहाड़ी या लंबी दूरी की यात्रा में इनसे बेहतर कोई विकल्प नहीं है।

ज़रूरी दवाएं और सेफ्टी किट न भूलें

अपना सामान पैक करते समय उनमें कपड़ों के साथ-साथ कुछ और चीजें भी जरूर रखें, जैसे कि अपनी नियमित दवाओं, अगर आप कोई ले रहे हों तो, के साथ-साथ कुछ आपातकालीन दवाएं, एक या दो जोड़ी नायलॉन के कपड़े, छाता, टार्च, छोटा चाकू, छोटी रस्सी, रेनकोट,कुछ सूखा खाने का सामान जैसे- बिस्कुट, नमकीन वगैरह, पीने का पानी, ग्लूकोस और कुछ खुले पैसे वगैरह। ऊंचाई पर अक्सर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में अगर आपको सांस संबंधी कोई भी समस्या है तो जरूरी दवाएं व उपकरण साथ रखना न भूलें। आपातकालीन किट सभी के साथ होनी चाहिए। इसे किसी एक को न सौंपें।

सादा रखें खान-पान

यात्रा के दौरान भारी या भूख से ज्यादा खाने की बजाय खान-पान हल्का ही रखें। ये चलने के दौरान दिक्कत नहीं करेंगे और आपका पाचन भी ठीक बना रहेगा। पीने का पानी सादा ही पीएं। अगर संभव हो सके तो हल्का गुनगुना पानी पीने का प्रयास करें। ये आपको मौसमी बीमारियों से बचाने में मदद करेगा।

गर्म पानी से नहाएं

नहाने का पानी भी अगर गर्म ही रखेंगे तो उसका सबसे बड़ा लाभ ये होगा कि आप यात्रा की थकान, मांसपेशियों के दर्द और अचानक बदलते मौसम के प्रभाव से बचे रहेंगे।

रास्ते संभलकर तय करें

यात्रा चाहे आप पैदल कर रहे हों या गाड़ी से, सतर्कता हर रूप में जरूरी है। गाड़ी से वहीं तक जाएं, जहां तक का निर्देश सुरक्षा बलों द्वारा दिया गया हो। उससे आगे गाड़ी ले जाने की ज़िद न करें। अगर पैदल चल रहे हों तो भी सुरक्षा और सतर्कता हर कदम पर जरूरी है।

कीमती सामान साथ ले जाने से बचें

यात्रा के दौरान कीमती गहने या सामान वगैरह साथ ले जाने या पहनने से बचें। इसके अलावा बहुत ज्यादा कैश भी कैरी न करें। अपने सामान की सुरक्षा का ख्याल खुद रखें और नितांत अजनबी लोगों से बहुत ज्यादा घुलने-मिलने से बचें।

परिवार से संपर्क बनाए रखें

अगर अकेले यात्रा कर रहे हैं तो जहां तक संभव हो, अपने परिवार के साथ संपर्क बनाए रखें। थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें अपनी स्थिति और जिस जगह मौजूद हैं, उसकी सूचना देते रहें।

नदी के ज्यादा पास न जाएं

नदी के बहुत ज्यादा किनारे पर, बर्फ के किसी बड़े ढेर के आस-पास या ग्लेशियर के पास जाना पूरी तरह से अवॉइड ही कीजिए। इनकी अनिश्चित स्थिति के चलते ऐसा करना खतरे से खाली नहीं होता। चाहे ऐसा आप फोटो खींचने भर के लिए ही क्यों न कर रहे हों।

नशीले पदार्थों का सेवन न करें

किसी भी तरह का नशा करने या नशीले पदार्थ साथ रखने से बचें। ये आपके स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षा के लिए भी ठीक नहीं है।

मुख्य मंदिरों में रात्रि पड़ाव से बचें

मंदिरों में दर्शन के बाद रात में ठहरने से बचें। रात्रि पड़ाव अपने निर्धारित गेस्ट हाउस या होटल वगैरह में ही करें, क्योंकि पहाड़ों पर मौसम रात में तेजी से बदल जाता है और बाहरी स्थानों पर सुरक्षा  व्यवस्था की दिक्कत हो सकती है। पहाड़ी यात्रा रात में करने की बजाय सुबह जल्दी शुरू करके रात में जल्दी से जल्दी अपने पड़ाव पर पहुंचने की कोशिश करें।

हड़बड़ी से हमेशा बचें

धार्मिक स्थलों पर भीड़-भाड़ या लंबी लाइनें होना स्वाभाविक है। ऐसी जगहों पर संयम और नियम बनाए रखें। जल्दबाजी या हडड़बड़ी बिल्कुल न करें। इससे दूसरे लोग भी ऐसा करने लगेंगे और अव्यवस्था फैलेगी।

सुरक्षाबलों की पाबंदियों के ख़िलाफ़ न जाएं

तीर्थस्थलों पर सुरक्षा बलों द्वारा लगाई जाने वाली पाबंदियों व नियमों का पालन पूरी तरह से करें। इनकी प्रति उपेक्षा हर्गिज़ न बरतें।

आपातस्थिति में संयम रखें

किसी भी आपात स्थिति में धैर्य न खोएं और सबसे पहले नजदीकी सुरक्षित स्थान पर पहुंचें या सुरक्षा बलों अथवा प्रशासनिक सहायता केंद्र से संपर्क करें। स्थिति बिगड़ने पर यदि मना किया जा रहा है तो यात्रा पूरी करने की ज़िद न करें, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर लौट कर सुरक्षा बलों को स्थिति को संभालने में मदद करें।

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