हरतालिका तीज करने से पहले जान लें ये बातें - How To Celebrate Hartalika Teej

हरतालिका तीज करने से पहले जान लें ये बातें - How To Celebrate Hartalika Teej

सावन के महीने को काफी पवित्र माना जाता है और इसीलिए सावन से सुहागिनों के लिए कई खास पर्वों की शुरुआत हो जाती है। सावन के खत्म होते ही तीज पर्व की तैयारी शुरू हो जाती है। जहां कई महिलाएं तीज के पर्व को हरतालिका के रूप में मनाती हैं तो वहीं सिंधी महिलाएं इसे अलग तरह से मनाती हैं। कई जगह हरियाली तीज भी मनाई जाती है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में हरतालिका तीज मनाई जाती है। इसके अलावा कजरी तीज भी काफी लोकप्रिय है।

सिंधी महिलाएं इसे तीजरी के तौर पर मनाती हैं। हालांकि सबसे अधिक हरतालिका तीज ही मनाई जाती है। यही वजह है कि इस आलेख में हम आपको सुहागिनों के प्रमुख पर्व हरतालिका तीज से जुड़ी सारी अहम जानकारी देंगे। इस वर्ष हरतालिका तीज एक सितंबर को मनाई जा रही है। हरतालिका तीज मुख्यत: उत्तर भारतीय मनाते हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हस्त नक्षत्र में सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए इस पर्व को मनाती हैं। तो आइए जान लेते हैं इस व्रत की विधि और इसे मनाने के सभी तरीकों के बारे में।

Table of Contents

    क्यों मनाई जाती है तीज, इसका महत्व और कथा - Importance Of Teej

    हरतालिका तीज पूजन को लेकर मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। इस पर्व को हरतालिका तीज के अलावा सौभाग्यवती व्रत और अखंड सौभाग्यवती व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान तो मिलता ही है, साथ में मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। मान्यता है कि यह पर्व वास्तव में सत्यम शिवम सुंदरम के प्रति आस्था और प्रेम का पर्व है। कहा जाता है कि इसी दिन शिव और पार्वती मिले थे। यह शिव-पार्वती के मिलन समारोह के रूप में मनाया जाता है। इसे सुहागिनों द्वारा शिव और पार्वती जैसे सुखी पारिवारिक जीवन जीने की कामना का पर्व माना जाता है। वास्तव में हरतालिका तीज सुहागिनों का त्योहार है लेकिन भारत के कुछ स्थानों में कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं।

    इस पर्व को मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं मशहूर हैं। मान्यता है कि माता पार्वती महादेव को अपना पति बनाना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या भी की। इसी तपस्या के दौरान पार्वती जी की सहेलियों ने उनका हरण कर लिया था। हरत हरण शब्द से बना है और आलिका का मतलब सखी होता है, इसी कारण इस तीज को हरतालिका तीज कहते हैं।

    एक कहानी यह भी मशहूर है कि पर्वत राज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती की शादी विष्णु भगवान से कराना चाहते थे लेकिन पार्वती बचपन से ही भगवान शिव से शादी करना चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने गंगा नदी के पास जाकर एक गुफा में तप शुरू कर दिया था। यह सब देख कर भगवान शिव प्रसन्न हुए और भाद्र शुक्ल पक्ष के हस्त नक्षत्र पर देवी पार्वती को दर्शन दिए थे। उसके बाद पार्वती ने पूरी पूजा सामग्री नदी में प्रवाहित कर उपवास तोड़ा था। इसलिए भी यह पर्व मनाया जाता है।

    हरतालिका तीज मनाने की विधि, शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष यह पर्व एक सितंबर को मनाया जा रहा है। हालांकि इस वर्ष दो तिथियों को लेकर कंफ्यूजन भी है, कुछ लोगों का मानना है कि यह व्रत 2 सितंबर को है जबकि कुछ लोग 1 सितंबर की बात कह रहे हैं। दरअसल 1 सितंबर की सुबह द्वितीय तिथि की मौजूदगी भी संभावित है। चित्रा पक्षीय पंचांग के अनुसार, द्वितीय तिथि 1 सितंबर को सुबह 8.27 बजे तक है। इसके बाद तृतीय तिथि शुरू हो रही है और यह अगले दिन यानी 2 सितंबर को सुबह 8.58 पर खत्म होगी। ऐसे में इसे 1 सितंबर को मनाया जाना चाहिए। वहीं निर्मित पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज 2 सितंबर को मनाया जाना चाहिए। 

    कुछ पुरोहित 1 सितंबर को तीज के लिए शुभ मान रहे हैं क्योंकि अगर 2 सितंबर को तीज की पूजा की जाएगी तो चतुर्थी तिथि लग जाएगी। ऐसे में बेहतर है कि आप अपने पंडित जी से पूछ कर ही निर्णय लें कि पूजा किस दिन करनी है। अगर आप 1 सितंबर को हरतालिका तीज मना रही हैं तो इसके लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6.05 बजे से रात 8.23 बजे तक रहेगा।

    दरअसल, हरतालिका व्रत के नियम इसे करने के तीन दिन पहले से ही शुरू हो जाते हैं। प्रथम दिन व्रती नहा-धोकर खाना खाती है, जिसे नहा खा का दिन कहा जाता है। दूसरे दिन व्रती सुबह सूर्य के उगने से पहले सरगी करती है, जिसमें कुछ मीठा खाने का नियम होता है। उसे खाने के बाद सीधा दूसरे दिन ही अनाज खाती है। दिन भर उपवास रह कर संध्या समय में स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर पार्वती और शिव की मिट्टी की प्रतिमा बना कर शिव और गौरी की पूजा करती है। तीसरे दिन व्रती अपना उपवास तोड़ती है और चढ़ाई गई पूजा सामग्री को ब्राह्मण को दे देती है और पूजन में जिस रेत की मिट्टी का इस्तेमाल होता है, उसे जल में प्रवाह कर देती है। तीज में शिव और पार्वती के साथ गणेश की भी रेत, बालू या काली मिट्टी से प्रतिमा बनाई जाती है।

    इसके अलावा महिलाएं रंगोली बनाती हैं और फूलों से भी प्रतिमा और पूजा स्थल को सजाती हैं। पूजन के लिए चौकी पर एक सतिया बनाकर उस पर थाल रखें। फिर उसमें केले के पत्ते रखें। इसके बाद तीनों प्रतिमाओं को केले के पत्ते पर स्थापित करना चाहिए। उसके बाद कलश के ऊपर श्रीफल और दीपक जलाना चाहिए। फिर कुमकुम, हल्दी, चावल और पुष्प से कलश का पूजन करना चाहिए। कलश पूजा के उपरांत गणपति पूजा और शिव और माता गौरी की पूजा करनी चाहिए।

    पूजा के दौरान सुहाग की पिटारी में साड़ी रख कर मां पार्वती को चढ़ानी चाहिए। शिव जी को धोती और अंगोछा चढ़ाना चाहिए। पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद हरतालिका व्रत की कथा पढ़नी और सुननी चाहिए। कथा पढ़ने और सुनने के बाद सर्व प्रथम गणेश जी की आरती, फिर शिव जी की और अंत में माता गौरी की आरती करनी चाहिए। आरती के बाद भगवान की परिक्रमा की जाती है। रात भर जग कर गौरी-शंकर की पूजा, कीर्तन और स्तुति करनी चाहिए।

    दूसरे दिन प्रातः काल स्नान कर पूजा के बाद माता गौरी को जो सिन्दूर चढ़ाया जाता है, उस सिन्दूर को सुहागन स्त्री को सुहाग के रूप में मांग में भरना चाहिए। साथ ही सिंदौरे में उस पूजा के सिन्दूर को मिला लेना चाहिए। इसके बाद चढ़ाए हुए प्रसाद से ही अपना उपवास खोलना चाहिए और पूजा में चढ़ाई गई सामग्री ब्राह्मण को दे देनी चाहिए।

    पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री

    हरतालिका तीज में काफी पूजा सामग्री का इस्तेमाल होता है इसलिए यह जरूरी है कि इसे एक दिन पहले ही इकट्ठा कर लिया जाए ताकि पूजा के समय किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।

    पंचामृत के लिए घी, दही, शक्कर और शहद तैयार रखा जाना चाहिए वहीं पूजा के लिए दीपक, कपूर, कुमकुम, सिन्दूर, चंदन, अबीर, जनेऊ, वस्त्र, श्री फल, कलश, बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल, तुलसी, मंजरी, काली मिट्टी, बालू, केले का पत्ता और फल-फूल की जरूरत होती है।

    तीज में पहनने वाले कपड़ों और गहनों की तैयारी

    तीज के दिन व्रत करने वाली महिलाओं को नए कपड़े ही पहनने चाहिए। यह बेहद जरूरी है कि साफ़-सुथरे और शुद्ध कपड़े पहनकर ही पूजा की जाए। अपने कपड़ों की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए। तीज में सबसे ज्यादा हरे रंग की साड़ी पहनी जाती है क्योंकि तीज पूजा शिव जी के लिए की जाती है और भगवान शिव को हरे रंग से प्यार है।

    इस दिन ज्यादातर महिलाएं रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं। उसके साथ ही अपने पारंपरिक गहने भी पहनती हैं। नथ और माथे का टीका वे खासतौर पर अपने पारिवारिक और पारंपरिक जूलरी में से ही पहनती हैं। तीज के बाजार में साड़ी और गहनों की धूम होती है क्योंकि महिलाएं इसकी जम कर खरीदारी करती हैं। इस दिन महिलाएं हाथों में मेहंदी भी लगाती हैं, जिसे सुहाग की निशानी माना जाता है। यही नहीं, महिलाएं रंग-बिरंगी चूड़ियों का श्रृंगार कर पैरों को भी आलता से सजाती हैं। वे खुद को दुल्हन की तरह सजाने में कोई कमी नहीं रखती हैं।

    तीज में बनने वाले पकवान और प्रसाद की तैयारी - Prasad And Dishes For Hartalika Teej Pooja

    तीज पूजन में बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में प्रचलित गुजिया, जिसे पेड़किया भी कहते हैं, बनाने का प्रचलन है। सूजी, खोया, मावा और चीनी के मिश्रण को मैदे के आटे में भरने के बाद उसे तल कर तैयार किया जाता है। इसे प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है। इसे पूजन से एक दिन पहले ही बना लिया जाता है। शुद्ध घी में इसे तला जाता है और शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता है। पूजन से पहले किसी को भी उसे झूठा करने की इजाज़त नहीं होती है।

    इसके अलावा आटे का चूरमा भी बनाया जाता है। आटे के अलावा चावल को बारीक पीस कर उसका सत्तू भी बनाते हैं। प्रसाद के रूप में सूजी का हलवा और दूध का चरणामृत भी बनाया जाता है क्योंकि भगवान शिव को दूध से बेहद प्यार है। इन सबके अलावा केला, सेब, नाशपाती, खीरा जैसे फल भी ज़रूर चढ़ाए जाते हैं। इस बात का ख्याल रखना जरूरी है कि दूसरे दिन विसर्जन के बाद ही सबको प्रसाद बांटा जाए।

    विवाहिताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है तीज पर्व - Importance Of Hartalika Teej Fast For Married Women

    ऐसी मान्यता है कि जिस तरह देवी पार्वती को पति के रूप में शिव जी मिले हैं, उसी तरह विवाहिताओं को भी पारिवारिक जीवन में पति का प्यार मिले और शिव जी की तरह ही पति हमेशा अपनी पत्नी के मान और सम्मान की रक्षा करने के लिए तैयार रहे। साथ ही पति की लंबी आयु के लिए भी इस व्रत को किया जाना चाहिए।  इसका पालन करने से महिलाओं को सुहागिन रहने का आशीर्वाद मिलता है।

    हरतालिका तीज में भूल कर भी न करें ये गलतियां

    हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है, जिसमें विधि का बहुत महत्व है। ऐसे में भूल कर भी कोई गलती नहीं करनी चाहिए। तो आइए जानते हैं कि इस पूजन में क्या-क्या नहीं करना चाहिए। इस दिन नए वस्त्र ही पहनने चाहिए। इस दिन घर में मदिरा पान या मांसाहारी भोजन बिल्कुल नहीं बनाना चाहिए, घर के दूसरे लोग भी जो खाना बनाएं, उसमें लहसुन और प्याज वर्जित रखना चाहिए। इस पूजन में चढ़ाए गए प्रसाद को उस दिन किसी को भी नहीं बांटना चाहिए। दूसरे दिन विसर्जन के बाद से ही सबको प्रसाद बांटना चाहिए। इस दिन झूठ या किसी की चुगली नहीं करनी चाहिए। दिन भर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। साथ ही गरीबों को दान भी देना चाहिए।

    जो स्त्री या कन्या इस व्रत को एक बार कर लेती है, उसे हर वर्ष पूरे विधि और विधान से यह व्रत हर साल करना चाहिए। इस पूजन का खंडन नहीं करना चाहिए।

    हरतालिका तीज में पूछे गये सवाल और उनके जवाब (FAQ's)

    1. सवाल : हरतालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर होता है?

    जवाब : हरतालिका तीज जहां भाद्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है, वहीं हरियाली तीज सावन पर्व की शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि में मनाई जाती है। हालांकि इसमें भी भगवान शिव की ही पूजा की जाती है। हरियाली तीज के बारे में यह भी मान्यता है कि इसे प्रकृति की खूबसूरती को समर्पित करते हुए भी मनाया जाता है क्योंकि सावन महीने में हर जगह हरियाली होती है।

    2. सवाल : क्या तीज सिर्फ विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं?

    जवाब : नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को कर सकती हैं लेकिन उन्हें इसकी पूजन विधि की पूरी जानकारी अपने घर के पुरोहित से ले लेनी चाहिए और विधि पूर्वक ही इस पूजा को करना चाहिए।

    3. सवाल : क्या गर्भवती महिलाएं भी यह व्रत रख सकती हैं?

    जवाब : नहीं, गर्भवती महिलाओं को यह व्रत नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्हें भूखा रहना मना होता है और इसमें पानी भी नहीं पिया जाता है। इसलिए उन्हें यह व्रत नहीं करना चाहिए। साथ ही अपने पुरोहित से बिना व्रत किए सिर्फ पूजन की विधि पूछ कर भी इस पूजा को किया जा सकता है।

    4. सवाल : जिन महिलाओं के पास बहुत अधिक सामग्री जुटाने की स्थिति नहीं है, वे  सामान्य रूप से इस पर्व को किस तरह से मना सकती हैं?

    जवाब : पूजा कोई भी हो, श्रद्धा जरूरी होती है, न कि यह जरूरी है कि आपने भगवान को क्या चढ़ावा चढ़ाया या क्या पकवान बनाए। आप जितनी समर्थ हैं, आप उस अनुसार भगवान की पूजा कर सकती हैं। हां, मगर प्रतिमा के रूप में मिट्टी या रेत से शिव जी की मूर्ति ज़रूर बनाई जानी चाहिए। भगवान को धतूरा, थोड़ा दूध और बेलपत्र चढ़ा कर भी आप भगवान की पूजा कर  सकती हैं। फल न मिले तो गुड़ से भी भगवान की पूजा की जा सकती है।

    5. सवाल : क्या हरतालिका पूजा घर पर की जाती है या फिर मंदिर जाना अनिवार्य है?

    जवाब : इस पूजा की यही खासियत है कि इसे घर में ही किया जाना चाहिए। आप खुद पूरी कथा पढ़ सकती हैं और पूरे विधि-विधान से इस पूजा को घर में कर सकती हैं।

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