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रिश्तों को निभाना हो तो दिमाग को नहीं दिल को दें तवज्जो, अपनाएं ये तरीके

रिश्तों को निभाना हो तो दिमाग को नहीं दिल को दें तवज्जो, अपनाएं ये तरीके

किसी शायर ने सही कहा है कि- “जब थोड़ी फुर्सत मिले दिल की बात कह दीजिए, बहुत खामोश रिश्ते भी ज्यादा दिनों तक ज़िंदा नहीं रहते”… वर्तमान समय में रिश्ते निभाने की बात पर ये पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं। सच ही तो है कि इन दिनों रिश्ते लाइक और कमेंट में उलझ कर रह गए हैं। लोग मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से ही एक-दूसरे के टच में रहते हैं। वास्तविक दुनिया में टच में रहना या रखना अब गैर जरूरी सा होता जा रहा है। ऐसे में जिंदगी के सारे अहम रिश्ते दम तोड़ रहे हैं और हम वर्चुअल दुनिया में रह कर ही खुशियां मना रहे हैं और उन्हीं रिश्तों को अपनी जागीर मान रहे हैं, जबकि हकीकत यही है कि वह झूठी और बनावटी दुनिया है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि हम हमेशा अपने खास रिश्तों को तवज्जो देने की बजाय यह मान कर चलते हैं कि वे तो अपने हैं, समझ ही जाएंगे, लेकिन कई बार अपनों को भी अपनाइयत जताना जरूरी होता है। यह समझने में हमें वक्त लग जाता है और हमें पता भी नहीं होता है कि वे रिश्ते कब साथ छोड़ जाते हैं। अंत में पछताने से भी कोई फायदा नहीं होता है। सिर्फ कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए आप अपने बहुमुल्य रिश्तों को जीवन भर अपना बना कर रख सकते हैं, फिर चाहे वे आपके अपने दोस्त हों या परिवार के सदस्य। आइए, जान लेते हैं कि वे कौन-कौन सी बातें हैं, जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है एक रिश्ते मज़बूत बनाने के लिए।

रिश्तों में मजबूती बनाएं रखने के टिप्स – Important Tips For Successful Relationship

किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सबसे अहम बात विश्वास होती है। सो, यही सबसे महत्वपूर्ण बात है कि रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए पहले उन पर विश्वास करना सीखें। फिर चाहे वह दो दोस्त के बीच हो, प्रेमी-प्रेमिका के बीच हो या परिवार के किसी भी सदस्य के बीच हो। जरूरी है कि सबसे पहले हम एक-दूसरे पर विश्वास करना सीखें। तभी मजबूत रिश्ते की नींव पड़ती है। बात-बात पर शक करना सही नहीं है। ऐसा कई बार होता है कि जो हम सोच रहे होते हैं, वह सच नहीं होता है, इसलिए कोई भी नतीजा निकालने से पहले सामने वाले की पूरी बात सुननी चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उस इंसान से आपका कैसा रिश्ता है।

रिश्तों को  पैसों से न तौलें 

कई बार ऐसा होता है कि हम अपने रिश्तों को अहमियत देने के बजाय उन्हें पैसों से तौलने लग जाते हैं। यह सोचे-समझे बगैर कि जो आपके गहरे रिश्ते हैं, वे आपकी जिंदगी का हिस्सा तब बनते हैं, जब आपके पास कुछ भी नहीं होता है। आप अपने गहरे दोस्तों या परिवार के किसी भी सदस्य के सामने बात करते हुए अगर केवल अपने पैसों की बातें करेंगे तो जाहिर है कि उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा। बात-बात में अपना स्टेटस दिखाना, चीजों की तुलना करना, यह सब सही नहीं होता है। इस बात को हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए कि पैसों से व्यापार होता है, रिश्ते नहीं बनते हैं और जो रिश्ते पैसों के दम पर बनते हैं, वे अधिक दिन टिकते भी नहीं हैं। अगर आपके पास पैसे हैं और आपके करीबी रिश्ते में किसी को जरूरत है तो आपको उसकी मदद करनी चाहिए, न कि अपनी चीज़ों का दिखावा करना चाहिए। यह बात तो गांठ बांध कर रख लेनी चाहिए कि पैसा कभी रिश्ते के बीच न आने पाए।

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रिश्तों को दिल से सोचें, दिमाग से नहीं 

ऐसा होता है कि कई बार रिलेशनशिप को स्ट्रांग बनाने के लिए आप जो निर्णय ले रहे हैं, वह दिमागी तौर पर सही नहीं है, लेकिन अगर दिल से सोचने पर लगे कि आप सही कर रहे हैं तो दिल की ही सुननी चाहिए। कई बार रिश्तों को निभाने के लिए कुछ नादानियां करना भी जरूरी होता है। अगर आप दिल पर दिमाग को हावी होने देंगे तो हर बात प्रैक्टिकल होकर सोचेंगे। इससे आप कभी भी सामने वाले की भावना को मान नहीं दे पाएंगे। कई बार ऐसा भी होता है कि हम बहुत सोच-समझ कर लोगों से रिश्ता जोड़ने की कोशिश करते हैं, जो कि सही नहीं है। ऐसे में एक बात याद रखने वाली है कि  दिमाग लगा कर बनाए गए रिश्ते अक्सर लंबे समय तक साथ नहीं चलते हैं। दिल से बनाए गए रिश्ते वास्तविक खुशियां देते हैं, जबकि सिर्फ दिमाग लगा कर बनाए गए रिश्तों को निभाने के लिए आपको बहुत सारे जतन भी करने पड़ते हैं।

रिश्तों में फायदे-नुकसान के बारे में न सोचें – Do Not Think About the Pros and Cons of Relationships

लाभ-हानि का रिश्ता व्यापार में अच्छा लगता है। उन्हें अपने काम तक ही सीमित रखें। अपने खास लोगों के साथ कभी यह बात न सोचें कि उनके साथ रहने से या उन्हें वक्त देने से आपका क्या नुकसान या फायदा होगा। खास रिश्ता तभी बनता है और टिकता है, जब आप फायदे और नुकसान को देखे बगैर, जरूरत पड़ने पर उनके सुख-दुख के समय उनके साथ मजबूती से खड़े रहें। अगर आप उनकी कोई मदद कर रहे हैं या वह आपसे मदद मांग रहे हैं तो फिर से फायदे-नुकसान के बारे में न सोचें। बस मदद कर देनी चाहिए। अच्छे रिश्तों को निभाते हुए हो सकता है कि आपको नुकसान भी हो, लेकिन कभी उन चीजों को अहमियत न दें। कई बार ऐसा होता है कि आपके किसी दोस्त ने आपकी महंगी घड़ी खराब कर दी। अब आप ऐसे में उस दोस्त को यह न जताएं कि ऐसा क्यों किया, क्योंकि ज़ाहिर है कि ऐसा गलती से ही हुआ होगा। आप सिर्फ उससे अपने रिश्ते के बारे में सोचें, क्योंकि बुरे वक्त में सामान नहीं, रिश्ते ही काम आते हैं।

अनदेखी न करें रिलेशनशिप में ये गलतियां – Avoid These Relationship Mistakes

अक्सर हम अपनी जिंदगी में मान लेते हैं कि जो हमारे करीब हैं, वे हमें पूरी तरह से समझेंगे, लेकिन हमेशा ऐसा ही हो, ये ज़रूरी नहीं है। स्थिति कई बार इसके उलट भी हो जाती है। जिनकी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी हम महत्व देते हैं, वे कई बार हमारी बड़ी बातों को भी नज़रअंदाज़ कर देते हैं या उसे समझ तक नहीं पाते हैं। यहां तक कि कई बार ऐसा भी होता है कि हम सबसे करीबी रिश्तों में ही सबसे ज्यादा लापरवाह हो जाते हैं और फॉर ग्रांटेंड लेने लगते हैं। आइए जानते है कि रिलेशनशिप में ऐसी कौन- सी गलतियां होती है जिन्हें भूलकर भी अनदेखा नहीं करना चाहिए –

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रिश्तों को कभी भी हल्के में न लें

कई बार अपने खास रिश्तों का ही सभी के सामने मजाक भी बना देते हैं, जैसे- मां की किसी रुटीन आदत का, पति या पिता के सेंस ऑफ ह्यूमर का, दोस्त की किसी कमी का, वह भी बिना यह सोचे कि सामने वाले को बात कितनी बुरी लगी होगी। कई बार हम उनके प्यार तक की अनदेखी कर देते हैं। यही सारी बातें रिश्तों को धीरे-धीरे खोखला बनाती जाती हैं, क्योंकि भले ही जताई न गई हो, लेकिन अंदर ही अंदर सामने वाले के दिमाग में ऐसी बातें घर कर जाती हैं और फिर वह आपसे दूरी बनाने की कोशिश करने लग सकता है। सो इस बात का खासतौर पर ध्यान रखें। अपने लोगों के प्यार की अनदेखी न करें। उन्हें तवज्जो दें। आप उनके रिश्ते की अनदेखी नहीं कर रहे हैं, ये बात समय-समय पर उन्हें जताते रहें, ताकि वे खुद को उपेक्षित न समझें। 

रिश्तों में किए गए कमिटमेंट को पूरा करने का वक्त निकालें 

रिश्तों को मजबूत और ठोस बनाना है तो यह बात भी हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि जब भी आप किसी से कोई कमिटमेंट कर रहे हैं तो उसे पूरा करें। यह सोच कर न बैठ जाएं कि अगर आपने अपना वादा पूरी नहीं भी किया, तब भी वह आपकी मजबूरी समझ जाएंगे। ज़रूरी नहीं है कि हर बार आपकी सोची बात ही पूरी हो, इसलिए अगर आपके किसी करीबी को आपके वक्त की जरूरत है तो उसके लिए वक्त ज़रूर निकालें। यह याद रखना जरूरी है कि आपके बुरे दौर में किसने आपका साथ दिया।
कई बार हम ये गलती कर जाते हैं कि अपने अच्छे दौर में उन लोगों को भूल जाते हैं, जो हमारे बुरे दौर में हर पल साथ रहें। ऐसा हरगिज न करें। अपनों के लिए थोड़ा ही सही, मुश्किल से ही सही, वक्त ज़रूर निकालें। जिस तरह पौधे को पानी और खाद की जरूरत होती है, उसी तरह अच्छे रिश्ते को सींचने के लिए आपसी बातचीत और मिलना-जुलना ज़रूरी होता है। साथ ही अगर आपने किसी बात का वादा किया है तो मुकरें नहीं, बल्कि उसे हर हाल में पूरा करने की कोशिश करें। समय मिलने पर घूमने-फिरने जाएं। साल में एक बार दोस्तों या करीबियों के साथ कोई टूर या गेट टू गेदर भी प्लान किया जा सकता है। इससे भी आप अपने रिश्तों को गहरा बना सकते हैं। इससे आपको भी काम से अलग थोड़ा वक्त अपनों के साथ बिताने का मौका मिलेगा।

किसी को नीचा न दिखाएं 

अक्सर हम रिश्ते निभाते वक्त अपनी बुुद्धिजीवी सोच को दूसरों पर हावी कर देते हैं। हमें लगने लगता है कि हम महान हैं और हर वक्त अपने करीबियों के साथ भी ऐसी ही बातें करते हैं, जिसमें सिर्फ ज्ञान की बातें होती हैं। इससे सामने वाले यह महसूस करने लगते हैं कि वे तो कुछ जानते ही नहीं हैं। ऐसे में अनजाने में ही आप उन्हें तकलीफ पहुंचा रहे होते हैं। जरूरी है कि आप अपने किसी भी रिश्ते को, कभी किसी के सामने नीचा न दिखाएं। हो सकता है कि वह व्यक्ति इसके बारे में कुछ न कहे। आपको महसूस भी न होने दे, लेकिन सच यही है कि उसके दिमाग में यह बात घर कर सकती है और फिर वह धीरे-धीरे आपसे दूरी बनाने लगता है। 

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रिश्तों को स्पेस भी दें

हम इस बात का एहसास नहीं कर पाते हैं, लेकिन हकीकत यही है कि कई बार अपने करीबी लोगों के साथ, उनकी जिंदगी में हमारी दखलअंदाज़ी इस कदर बढ़ जाती है कि न चाह कर भी सामने वाला व्यक्ति दूरी बनाने या हमसे बचने लगता है। हकीकत यही है कि कई बार रिश्तों में दूरी भी जरूरी होती है। मान लें कि सामने वाला व्यक्ति कुछ दिन अकेला रहना चाहता है, वह मिलना-मिलाना न कर रहा हो तो आपको इस बात का बुरा मानने की बजाय, उन्हें उनका स्पेस देना चाहिए। मान लीजिए कि वह व्यक्ति आपसे हर बात शेयर करता है, लेकिन कभी वह आपको कोई बात नहीं भी बताना चाहता है तो इसे इश्यू न बनाएं, बल्कि उसके फैसले का मान रखें। उसे स्पेस दें। हर बात में दखल देना जरूरी नहीं है। यह भी बिल्कुल जरूरी नहीं है कि वह आपके करीब है तो सब कुछ आपसे पूछ कर ही करे या बता कर ही करे। फिर इन बातों को लेकर गलतफहमी पालना भी सही नहीं है। एक बात जो और जरूरी है, वह ये कि जिस व्यक्ति से आपके रिश्ते अच्छे हैं, उन्हें अगर आप स्पेस देंगे तो उन्हें भी इस बात का एहसास होगा कि आपके बिना उनका जीवन अधूरा है। इससे आपकी अहमियत और बढ़ जाएगी। 

बुरी बातों को भूलना और गलतियां माफ करना ज़रूरी 

आप एक इंसान हैं, कभी आपसे तो कभी आपके करीबी लोगों से गलतियां हो सकती हैं। हो सकता है कि एक-दूसरे की बातें ही बुरी लग गई हों, लेकिन उन्हें पकड़ कर रखने की बजाय भूला देना और आगे बढ़ जाना ही सही होता है। गलतियों को माफ कर देने में ही भलाई है। जब आप अपने किसी रिश्ते को खास बनाना चाहते हैं तो उम्मीद करते हैं कि सामने वाला भी पूरी तरह से ईमानदार रहे, लेकिन ऐसा न होने पर रिश्ता तोड़ लेना, बात करना बंद करके दूरी बना लेना समझदारी नहीं है। बुरी बातों को याद रख रिश्ते खो देना बेवकूफी है।

इज़हार भी है जरूरी – Express is Also Necessary

अच्छे रिश्तों की मजबूती के लिए क्वांटिटी में नहीं, क्वालिटी में विश्वास करें। अच्छे समय को याद करते रहें। कभी-कभी अपने करीबी लोगों को तोहफे दें। कई बार इज़हार करना भी ज़रूरी होता है। एक-दूसरे के प्रति ईमानदार रहें। एक-दूसरे को सपोर्ट करें। एक-दूसरे की जिंदगी में पॉजिटिवीटी लाने की कोशिश करें।

रिश्ते निभाने को लेकर पूछे गए सवाल और उसके जवाब – FAQ’s

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1. सवाल :  प्रोफेशनल रिश्ते और पर्सनल रिश्ते में संतुलन कैसे बनाना चाहिए?
जवाब : इसका सबसे आसान तरीका ये है कि प्रोफेशनल रिश्तों को सिर्फ काम तक ही सीमित रखें। उनसे बहुत ज्यादा दोस्ती करने या उन्हें अपना हमराज़ बनाने की कोशिश न करें। आपके जो पर्सनल रिश्ते हैं, वही आपकी जिंदगी में अहम होने चाहिए। पर्सनल और प्रोफेशनल रिश्तों को मिक्स न करें। कभी दोनों के बारे में एक-दूसरे से बातें न करें। एक-दूसरे के गुण-अवगुण न बताने लग जाएं। इन्हीं बातों से रिश्तों में संतुलन बना रहेगा।
2. सवाल : रिश्तों में शर्तें रखना या जबरन कुछ करवाना कितना सही होता है?
जवाब: जो रिश्ते बेहद खास होते हैं, उनमें कभी भी शर्त रख कर या जबरन कुछ करवाना सही नहीं होता है। जो रिश्ते जबरदस्ती के होते हैं, वह टिकते भी नहीं हैं और आपके दिल के करीब तो कभी नहीं पहुंच पाएंगे, इसलिए जरूरी है कि रिश्तों में शर्तें न रखें, न ही किसी से उसकी मर्जी के खिलाफ कुछ करवाएं। रिश्ता मजबूत करने के लिए बस भाव होना चाहिए और वह बात अंदर से आती है। आप किसी से जबर्दस्ती का रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं निभा सकते हैं।
3. सवाल:   खास रिश्तों के बीच वैसी बातें छिपाना, जो किसी को बुरी लग सकती हैं, कितना उचित है?
जवाब : यूं तो करीबी रिश्तों में बातें छिपानी ही नहीं चाहिए, लेकिन अगर कभी ऐसा लगे कि सामने वाले को कोई बात बुरी लग सकती है तो फैसला सूझ-बूझ से ही लेना चाहिए। ऐसे में कुछ बातें छिपा लेनी चाहिए, क्योंकि आपके लिए जो खास हैं, आप उन्हें हमेशा खुश ही देखना चाहेंगे 
4.  सवाल : दो रिश्ते साथ-साथ निभाने के लिए क्वालिटी टाइम किस तरह निकालना  चाहिए?
जवाब : आप अपने दोस्तों या करीबियों के लिए जरूरी नहीं कि हर दिन वक्त निकालें। कभी-कभी चाय की चुस्की भी साथ में ले लें या फोन पर ही बातें कर लें तो भी आप अपने रिश्ते को खास बनाए रख सकते हैं।
5. सवाल : यह कैसे तय हो कि किसी इंसान से एक गहरा रिश्ता बनाया जा सकता हैं या नहीं? ये किन बातों के आधार पर तय होता है?
जवाब: अच्छे और गहरे रिश्ते बनाने में वक्त लगता है। कोई एकदम से आपका करीबी नहीं बन जाता है। इसके लिए उस व्यक्ति के साथ वक्त बिताना और उसके स्वभाव को समझना जरूरी होता है। कभी एक जैसे स्वभाव वाले से खास रिश्ता बनता है, कभी अलग स्वभाव वालों से, लेकिन वक्त तो हर रिश्ते को देना ही होता है। साथ ही वैसे लोग, जो आपके बुरे वक्त में काम आए हों, वैसे लोगों का साथ आपको कभी नहीं छोड़ना चाहिए। आपको भी अच्छे-बुरे लोगों को परखने की कला आनी चाहिए। हर किसी को अपना न समझें। ऐसा होना संभव ही नहीं है। जरूरी है कि आप सही इंसान को परख कर ही उसे अपना हमराज़ बनाएं।
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29 Aug 2019

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