समलैंगिकता के प्रति आपका नज़रिया बदल देंगी ये 11 बेहतरीन बॉलीवुड फिल्में

समलैंगिकता के प्रति आपका नज़रिया बदल देंगी ये 11 बेहतरीन बॉलीवुड फिल्में

समलैंगिकता (Homosexuality) अब देश में अपराध नहीं रही। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में सेक्शन 377 को रद्द करके समलैंगिकता को वैध घोषित कर दिया है। देश और सुप्रीम कोर्ट तो इन लोगों की भावनाओं को अब समझ पाया है लेकिन बॉलीवुड ने बहुत पहले से समलैंगिकता के बारे में जागरूकता लाने की कोशिश शुरू कर दी थी। हालांकि बॉलीवुड में फिल्मों के माध्यम से जब भी इस विषय को उठाया गया तो हमेशा इसका विरोध हुआ। इनमें से किसी फिल्म में समलैंगिक रिश्तों को खुलकर दिखाया गया तो किसी में इनकी भावनाओं का अहसास कराया गया।  इसी तरह किसी फिल्म में समलैंगिकों के संघर्ष को दिखाया गया, ताकि समाज यह सच्चाई स्वीकार करे और इन लोगों को अपने बीच स्वीकार करे। यहां हम आपको समलैंगिक रिश्तों पर बनी ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर भी अपनी छाप छोड़ी है।


1. एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा - Ek Ladki ko dekha to aisa laga

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हाल ही में आई सोनम कपूर की फिल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' की थीम भी प्रमुख रूप से समलैंगिकता पर ही आधारित है, जिसमें सोनम कपूर एक समलैंगिक यानि लेस्बियन बनी हैं। जब उनकी शादी की बात चलती है तो लड़के से मिलने के बाद वह उसे बड़ी साफगोई से अपनी लैंगिक प्राथमिकता की सच्चाई बता देती है। किसी भी बड़ी एक्ट्रेस का फिल्म के मेन रोल में एक लेस्बियन बनना काफी बोल्ड स्टेप है, जिसके लिए सोनम कपूर को बधाई दी जानी चाहिए।


2. कपूर एंड सन्स - Kapoor & Sons

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कपूर एंड सन्स 2016 में आई एक फैमिली ड्रामा फिल्म थी। इस फिल्म की थीम में फवाद खान जो परिवार के सबसे बड़े बेटे बने हैं को समलैंगिक दिखाया गया है। इस फिल्म को वैसे तो बहुत बढ़िया नहीं कहा जा सकता, न ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल कर पाई लेकिन हां, इसे इस मामले में जरूर तारीफ के काबिल कहा जा सकता है कि एक आम परिवार में बेटे को समलैंगिक दिखाने का बड़ा बोल्ड कदम इसमें उठाया गया है। इसके अलावा फिल्म के बुजुर्ग यानि ऋषि कपूर को भी फिल्म में रूढ़िवादी नहीं दिखाया जाना काफी अच्छा संदेश देता है। फिल्म में यही दर्शाया है कि समलैंगिक होना कोई अपराध नहीं है।


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3. अलीगढ़ - Aligarh

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मनोज वाजपेयी की 2016 में आई फिल्म अलीगढ़ एक सच्ची घटना पर बनी फिल्म थी। यह फिल्म अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एक समलैंगिक प्रोफेसर की कहानी है, जिनका एक ऐसा वीडियो वायरल हो गया था जिसमें वो एक लड़के के साथ यौन संबंध बना रहे थे। हंसल मेहता ने इस फिल्म यही दर्शाया है कि कैसे रूढ़िवादी लोग किसी व्यक्ति के जीवन पर इतना नकारात्मक असर डाल देते हैं, जो उस व्यक्ति की जान तक ले लेता है।


4. मार्गेरिटा विद अ स्ट्रॉ - Margarita With A Straw

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ये फिल्म 2015 की खूबसूरत फिल्मों में से एक थी जिसमें प्रमुख भूमिका निभाई है कल्कि कोचलिन ने, जो सेरीब्रल पाल्सी से पीड़ित होती हैं। इस फिल्म में उनकी और उनकी नेत्रहीन सहेली के बीच के समलैंगिक रिश्तों को दर्शाया गया है। यह फिल्म समलैंगिकता के साथ- साथ विकलांगों की यौन जरूरतों और इन बातों के प्रति समाज के नकारात्मक रवैये को दर्शाती है।


5. बॉम्बे टॉकीज़ - Bombay Talkies

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Bombay Talkies 2013 में सिनेमाहॉल में प्रदर्शित की गई थी जिसमें एक नहीं, बल्कि एक साथ चलने वाली 4 कहानियां थीं। इन कहानियों को करण जौहर, अनुराग कश्यप, जोया अख्तर और दिबाकर बनर्जी ने निर्देशित किया था। इनमें से एक कहानी एक समलैंगिक जोड़े पर फोकस्ड थी, जिसे रणदीप हुडा और सकीब सलीम पर फिल्माया गया था। इनके लिप लॉक सीन को लेकर खासी चर्चा में रही थी यह फिल्म।


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6. डोन्नो वाई, ना जाने क्यों...सीरीज़ - Dunno Y Film series

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वर्ष 2010 में आई डोन्नो वाई की पहली फिल्म - डोन्नो वाई, ना जाने क्यों ने भी समलैंगिकता की भावनात्मकता के साथ-साथ सामाजिक तौर पर इसे मान्यता न मिलने को काफी खूबसूरती से फिल्माया है। फिल्म का निर्देशन संजय शर्मा ने किया है। फिल्म में एक ईसाई परिवार की पृष्ठभूमि में पारिवारिक और सामाजिक मान्यताओं का बखूबी वर्णन है। इस फिल्म में भारतीय सिनेमा का पहली समलैंगिक किस दिखाया गया था। फिल्म के कलाकारों युवराज पाराशर और कपिल शर्मा को कशिश क्वीयर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल- 2010 में बेस्ट सेंसिटिव अवॉर्ड और सिडनी में सतरंग फिल्म फेस्टिवल में व्यूअर चॉइस अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अलावा भी इस फिल्म ने अनेक पुरस्कार जीते। फिल्म के लीड एक्टर्स को ग्रीस फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्टर्स का अवॉर्ड मिला। इसके बाद इसके कलाकारों- जीनत अमान, हेलन को ही लेकर इसका सीक्वेल - डोन्नो वाई-2, लाइफ इज़ अ मूमेंट (Dunno Y 2... Life Is a Moment) भी आया, लेकिन इसे इतना पसंद नहीं किया गया।


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7. आय एम - I Am

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ओनीर ने 2010 में फिल्म I Am बनाई थी जो समलैंगिक रिश्तों पर बनी ऐसी पहली फिल्म थी जिसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। यह ऐसी फिल्म भी थी जिसके बाद समलैंगिकता के प्रति लोगों का दृष्टिकोण कुछ कुछ बदलना शुरू हुआ। इस फिल्म में भी एक साथ चल रही चार बेहतरीन कहानियां थीं।


8. माई ब्रदर निखिल - My Brother Nikhil

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ओनीर के निर्देशन में बनी और 2005 में आई फिल्म My Brother Nikhil में समलैंगिकता और एड्स के बारे में काफी अच्छी जानकारी दर्शकों को बहुत सहजता और भावनात्मकता से परोसी गई थी। इस फिल्म में प्रमुख भूमिकाओं में जूही चावला और संजय सूरी थे।


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9. दरमियां - Darmiyaan

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1997 में कल्पना लाजिमी ने दरमियां- In between बनाई थी जो एक फिल्म एक्ट्रेस और उसके किन्नर बेटे की कहानी पर आधारित थी। इसमें फिल्म एक्ट्रेस की भूमिका निभाई है किरण खेर ने और उनके किन्नर बेटे की भूमिका आरिफ जकारिया ने निभाई है। इस फिल्म के जरिए ट्रांसजेंडर का दर्द और जीवन संघर्षों को बखूबी चित्राया गया है।


10. तमन्ना - Tamanna

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फिल्म तमन्ना परेश रावल की यादगार फिल्मों में से एक है। 1997 में आई इस फिल्म का निर्देशन महेश भट्ट ने किया है और फिल्म में परेश रावल ने एक किन्नर की भूमिका निभाई है। यह किन्नर कूड़े के ढेर से मिली एक बच्ची (पूजा भट्ट) को पालता है। फिल्म का विषय किन्नरों के प्रति विपरीत सामाजिक रवैया और बेटी को जन्म होती ही मार डालने पर केंद्रित था। तमन्ना को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।


11. फायर - Fire

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वर्ष 1996 में बॉलीवुड ने पहली बार खुलकर समलैंगिकता को सिनेमा में दर्शाया था। दीपा मेहता की इस बोल्ड फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में शबाना आजमी और नंदिता दास थीं जिन्होंने लेस्बियन्स की भूमिका बखूबी निभाई थी। उस वक्त समलैंगिकता को बहुत बुरी नजर से देखा जाता है, लिहाजा इस फिल्म को भी बहुत सी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था।


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