#मेरा पहला प्यार - जब उस रब के फरिश्ते ने दी दिल में दस्तक

#मेरा पहला प्यार - जब उस रब के फरिश्ते ने दी दिल में दस्तक

जब प्यार दस्तक देता है तो मायूसी के बादल कब छट जाते हैं पता ही नहीं लगता। इस बार ‘मेरा पहला प्यार’सीरीज में हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही लव स्टोरी के बारे में, जो प्यार की दस्तक से कई दिनों तक रहे अंजान। पढ़िए स्वीटी के पहले प्यार की कहानी, उसी की जुबानी..


मैं नैनीताल की रहने वाली हूं। ये बात उन दिनों की ही, जब मेरे कॉलेज का दूसरा साल था, और मेरे लाइफ का सबसे खूबसूरत साल भी। क्योंकि इसी साल मुझे वो मिला, जिसने मेरी अधूरी जिंदगी को अपने प्यार से भर दिया और मुझे जीने और मुस्कुराने की वजह दी...


उस लड़के से मिलने से पहले मेरी जिंदगी में बहुत अकेलापन था। जिसे आज तक मेरे अलावा किसी अपने ने महसूस नहीं किया। मैं बहुत चंचल किस्म की लड़की थी। बाहर से खुश दिखने वाली लड़की थी। जिसे लोग हरपल हंसते-खिलखलाते देखते थे। लेकिन अंदर से वो कितनी मायूस थी इसका अंदाजा किसी को नहीं था। मैंने अपनी जिंदगी में कभी किसी लड़के को मुझसे प्यार करने की इजाजत नहीं दी लेकिन वो 18 मई की शाम का मैसेज मैंने जब 16 जून को पढ़ा तो मेरे होश उड़ गए। वो दिन मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वॉइंट था जिसने मेरी जिंदगी बदल दी....


मैसेज में लिखा था कि, ''स्वीटी मेरी बात का बुरा मत मानना, मैं तुम्हें पसंद करता हूं, तुमसे दोस्ती करना चाहता हूं। लेकिन बात करने से डरता हूं, लगता है कि अगर मैंने पहल की तो तुमको मैं खो दूंगा। इसलिए ये मैसेज कर रहा हूं। अगर कल सुबह तुम मुझे कॉलेज कैंटीन के बाहर आकर मिलोगी तो मैं समझूंगा कि तुम भी मुझसे दोस्ती करना चाहती हो। अगर तुम नहीं आई तो मैं समझ जाउंगा कि तुम मुझे पसंद नहीं करती। यकीन मानो फिर मैं इसके बाद तुम्हें कभी कॉन्टेक्ट नहीं करूंगा। उम्मीद करता हूं कि तुम मुझसे मिलने कल जरूर आओगी। ''


जिस दिन ये मैसेज आया उसी दिन मेरा मोबाइल टूट गया। जिस वजह से न तो मैसेज मिला और न ही मैं अगले 4 दिन कॉलेज गई। शायद किस्मत को यही मंजूर था कि रोहित का मैसेज मुझे उस दिन मिले। वो कहते हैं न कि सब्र का फल मीठा होता है। जब मैं 4 दिन बाद कॉलेज पहुंची तो मैंने रोहित की ओर देख के मुस्कुराया लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। मुझे उसका ये व्यवहार अजीब लगा। इसी बीच हमारी 25 दिन की गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गई। 16 जून को जब मेरा मोबाइल शॉप से बनकर वापस मिला तो मैंने देखा कि उसमें रोहित का मैसेज आया। लेकिन अब बहुत देर हो गई थी। हां मैं उसे पसंद करती थी उससे दोस्ती करना चाहती थी। अच्छा खासा आया मौका हाथ से गवां बैठी थी।


मेरे से रहा नहीं गया और मैंने सारी बात उसे मैसेज में लिख कर भेज दी। और तुंरत ही उधर से जवाब भी मिल गया। उस मैसेज में लिखा था कि, सॉरी मैंने तुम्हें गलत समझा। अब सबकुछ अच्छा होगा।


फिर क्या था धीरे-धीरे हमारी बात-चीत शुरू हो गई। अब मुझे उसकी आदत सी होने लगी थी। एक दिन भी अगर उसका मैसेज न आए तो दिल घबराने लगता था। फिर एक दिन उसने मुझे 'आई लव यू' बोल दिया। और मैंने भी उसमें हामी भर दी।


आखिरकार मुझे भी अपनी जिंदगी में प्यार का इंतजार था। मैं भी प्यार को हर पल जीना चाहती थी। आगे क्या होगा इसकी चिंता नहीं थी, न मुझे और न उसे। हम दोनों को सारा टाइम एक-दूसरे के साथ ही बीतता था। हम दोनों एक दूसरे को साथ पाकर मानो दुनिया से जन्नत पा गए थे। वो खुद से ज्यादा मेरा ख्याल रखने लगा था। मैं कह सकती हूं, उसके साथ बिताया गया हर पल मुझे हमेशा याद रहेगा। उसने कभी भी मेरे चेहरे की तारीफ नहीं की, कि मैं खूबसूरत हूं। हमेशा मेरे दिल और प्यार को देखा और उसे मेरी कमिया भी मेरी खूबी लगने लगी।


मेरे अंदर क्या चल रहा है मुझे समझ में नहीं आ रहा था। क्यों मैं उसके कॉल का इंतजार करती हूं, क्यों उसके लिए इतना बैचेन रहती हूं? आखिर क्यों वो मेरे लिए मेरा सबकुछ बन चुका है.... जिसे कुछ दिन पहले ठीक से जानती भी नहीं थी आज वही मेरी जान बन चुका है। न जाने क्यों मैं उसकी ओर खिंची चली जा रही थी ? अब हर पल मेरा दिल उसका साथ चाहता था, न जाने क्यों मैं अब खुली आंखों से भी उसके सपने देखने लगी थी। चाहे वो मेरे सामने हो या न हो लेकिन मुझे कभी मायूस नहीं होने देता था।


अब मैं भगवान से कुछ नहीं मांगती क्योंकि वो रोहित के रूप में खुद मेरे साथ हैं.....


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