सिर्फ सहमति न लेना ही नहीं है शादी की वैधता खत्म करने का आधार

सिर्फ सहमति न लेना ही नहीं है शादी की वैधता खत्म करने का आधार

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक निवासी एक 26 वर्षीय युवती की शादी की वैधता सिर्फ इस आधार पर समाप्त करने से इंकार कर दिया, क्योंकि शादी से पहले उसकी सहमति नहीं ली गई थी। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को इस युवती को उसके परिवार से सुरक्षा देने का आदेश दिया है, क्योंकि उसने ऑनर किलिंग की आशंका जताई थी।



जबरन की गई शादी


युवती ने कोर्ट को बताया था कि वो इंजीनियर है और दूसरी जाति के युवक से शादी करना चाहती थी, लेकिन उसकी शादी कर्नाटक के गुलबर्गा में इसी साल 14 मार्च को बिना उसकी मर्जी के जबरन कर दी गई थी। जब उसने अपने पति के साथ रहने से इंकार किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद वह किसी तरह भागकर दिल्ली आ गई जहां वह महिला आयोग के संरक्षण में रह रही है। उसने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा दिलाने के अलावा याचिका में कहा गया है कि ये प्रावधान संविधान में दिये गए अधिकारों के विपरीत हैं।


कर सकती है तलाक की मांग


चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, न्यायाधीश एमएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने युवती की ओर से इस मामले पर जिरह कर रहीं वकील इंदिरा जयसिंह से कहा कि सिर्फ इस आधार पर कोई शादी अवैध घोषित नहीं की जा सकती, कि उससे सहमति नहीं ली गई थी। उन्होंने कहा कि यह युवती सिविल कोर्ट में इस आधार पर तलाक की मांग कर सकती है।


कानून पर दोबारा विचार से इंकार


इस मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधानों पर दोबारा विचार करने से इंकार किया और कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट कानून के मुद्दे पर दोबारा विचार नहीं हो सकता। युवती ने हिंदू मैरिज एक्‍ट में शादी के लिए स्वतंत्र सहमति का प्रावधान न होने के आधार पर कानून की कुछ धाराओं को चुनौती दी थी। युवती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हिंदू विवाह में स्वतंत्र सहमति को अनिवार्य हिस्सा बनाए जाने की मांग भी की थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी। 


सहमति की जरूरत नहीं समझी


इस मामले में पब्लिक अलग-अलग ट्वीट करके हिंदू मैरिज एक्ट की काफी आलोचना कर रही है। संयुक्ता बसु ने अपनी ट्वीट में कहा है कि जहां मुस्लिम और क्रिश्चियन पर्सनल लॉ में शादी तक तक वैध नहीं होती, जब तक कि लड़का और लड़की की सहमति न हो, वहीं हिंदू मैरिज एक्ट में सहमति की कोई जरूरत नहीं समझी गई है। 



माता- पिता को जेल क्यों नहीं


एक और ट्विटर यूजर ने पूछा है कि जबरन शादी करवाने वाले माता- पिता को जेल क्यों नहीं की गई



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