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#मेरा पहला प्यार - सपने से भी ज्यादा खूबसूरत थी उस रात की हकीकत

#मेरा पहला प्यार - सपने से भी ज्यादा खूबसूरत थी उस रात की हकीकत

कई बार हम जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका अंजाम हमारी जिंदगी बर्बाद कर सकता है। लेकिन जरूरी नहीं है कि अंजाम बुरा ही हो.. वो खूबसूरत भी हो सकता है। इस बार ‘मेरा पहला प्यार’ सिरीज में हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी ही लव स्टोरी के बारे में, जिसकी हकीकत किसी उसकी सपनों की दुनिया से भी ज्यादा सुंदर और दिलचस्प थी। पढ़िए उस गुमनाम लड़की की पहले प्यार की कहानी उसी की जुबानी..


मैं उस समय 17 साल की थी जब मेरे मम्पी-पापा की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। घर पे सिर्फ बुआ और मैं ही रह गए थे। पढ़ाई में कोई खास दिलचस्पी थी नहीं तो सभी लोग मुझे आवारा किस्म की लड़की समझते थे। मुझे म्यूजिक का शौक था लेकिन बुआ को नहीं। जब भी मैं गाना गाती तो वो मुझे बहुत बुरी तरह से पीटती थी। इस डर की वजह से मैं गाना ही नहीं गाती थी। हमारा घर बहुत बड़ा था और रहने वाले सिर्फ दो ही जन। तो बुआ ने ऊपर का मंजिल किराये पर देने का फैसला कर लिया।
कुछ ही दिनों में किराएदार भी मिल गए। वो दो लड़के थे, एक का नाम रंजीत और दूसरे का नाम मयंक था। दोनों मेडिकल की तैयारी कर रहे थे। पेइंग गेस्ट होने की वजह से उनका खाना हमारे साथ ही बनता था और वो लोग हमारे साथ ही खाते थे। लेकिन वो इतने पढ़ाकू थे कि खाने की टेबल पर भी किताबे लेकर बैठते थे। मयंक को देखकर मुझे अपने बचपन के दोस्त मिट्ठू की झलक दिखाई देती थी, वैसा ही नाक-नक्शा, मासूम चेहरा लेकिन वो शैतान था और बहुत मजाकिया भी। बचपन में हम साथ गुड्डे-गुड्डियों का खेल खेला करते थे। ये खेल कब प्यार में बदल गया हमें पता ही नहीं चला। उस समय हमारी उम्र कुछ 10 साल की रही होगी जब हमने एक-दूसरे को आई लव यू बोला था। तभी कुछ महीनों बाद उसके पापा का लखनऊ ट्रांसफर हो गया और वो लोग बिना बताए वहां से चले गए। लेकिन कहां मिट्ठू और कहां ये महाशय मयंक, ये तो महाबोरिंग था। हैलो का जवाब सिर्फ हैलो ही देता था। मैंने कई बार कोशिश करी कि उससे कुछ बात कंरु लेकिन हमेशा इतनी जल्दी में रहता था कि जैसे उसकी कोई ट्रेन छूटी जा रही हो। मैंने भी सोच लिया कि अब मैं कोई पहल नहीं करुंगी। मैंने हैलो कहना भी छोड़ दिया और उसे भी कोई फर्क नहीं पड़ा। मुझे लगने लगा था कि शायद इसकी कोई गर्लफ्रेंड है इसीलिए ये मुझे भाव नहीं देता है। लेकिन पता नहीं क्यूं मुझे उससे लगाव सा होने लगा था।



एक दिन अचानक बुआ को ऑफिस के काम से दूसरे शहर जाना पड़ा और वो भी 1 हफ्ते के लिए। मेरी तो जैसे बल्ले-बल्ले हो गई। जैसे ही बुआ घर से निकली मैं दौड़ कर अपने कमरे में गई और सालों से धूल खा रहे गिटार को दीवार से उतारा और साफ करके झट से उसे सीने से लगा लिया। शाम का समय था मेरे कमरे की खिड़की खुली हुई थी और ऊपर वाली बालकनी में मयंक पढ़ रहा था। मैंने गिटार उठाया और अपना फेवरेट गाना … ‘‘तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई’’ … गुनगुनाने लगी। तभी थोड़ी ही देर में हमारी कुक गीता आंटी ने आवाज दी कि खाना तैयार है सभी लोग आ जाओ। रोज की तरह उस दिन भी हम आमने-सामने बैठे थे, लेकिन आज मयंक अकेला था रंजीत अपने घर गया हुआ था। प्लेट उठाने के लिए जैसे ही मैंने अपने हाथ आगे बढ़ाए तो उसके हाथों से टकरा गए। वो मुझे तिरछी नजरों से देखे जा रहा था। और तभी अचानक उसने मुझसे कहा तुम गाना वाकई बहुत अच्छा गाती हो। ये सुनते ही मेरे हाथ कांपने लगे, दिल धड़कने लगा। यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही मयंक है जो बात भी नहीं करता था और आज तारीफ कर रहा है। थोड़ी ही देर में आंटी चली गईं और हम दोनों घर में अकेले रह गए।



उन दिनों हमारे यहां अक्सर रात में लाइट कट जाया करती थी। और उस रात भी कुछ ऐसा ही हुआ। मैंने मोमबत्ती जलाई और मयंक को कमरे में देने चली गई। तभी मैंने देखा कि मयंक पढ़ते-पढ़ते टेबल पर ही सो गया है। पता नहीं क्यों उसका मासूम सा चेहरा मुझे उसकी ओर खींचे जा रहा था। मैं उसे एकटक निहारती ही रह गई। इसी बीच मयंक की एकाएक आंख खुली और उसने मुझे इस तरह निहारते हुए देख लिया था। मैं सकपका सी गई और वहां से बाहर जाने के लिए जैसे ही पीछे मुड़ी, मयंक ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला पसंद करती हो न मुझे ? .. उस समय मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी कि ये सब क्या हो रहा है... कहीं मयंक मेरे साथ कुछ गलत तो नहीं करने वाला था। अजीब-अजीब से ख्याल मन को डरा रहे थे। तभी उसने मेरा हाथ छोड़ दिया और गाना गुनगुनाने लगा ... ''हां तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई यूं नहीं दिल लुभाता कोई''..... ये गाना सुनते ही मेरे आंखें भर आई। पर इसके आगे मयंक ने जो मुझसे बोला उसे सुनकर मेरे पांव से मानो जमीन खिसक गई थी। उसने बताया कि वो कोई और नहीं मेरे बचपन का प्यार, मेरा दोस्त, मेरा यार मिट्ठू ही है। उसने अपने पापा से ये वादा लिया कि अगर वो 12वीं क्लास में टॉप करेगा तो मुझे मिलने बनारस जाएगा। और मयंक मुझसे मिलने बनारस आया भी था। लेकिन उसी दिन हमारा घर मातम में डूबा हुआ था, मेरे मां-पापा की डेड बॉडी उसी दिन घर आई थी। उसने मुझे फूट-फूट कर रोते हुए देखा था। उस दिन मयंक ने कसम खा ली थी कि वो मुझे हमेशा खुश रखेगा, मुझसे ही शादी करेगा। मयंक उसी दिन अपने अरमानों को समेटे लखनऊ चला गया। उसके बाद उसने सीपीएमटी के एग्जाम में टॉप किया और डॉक्टरी की पढ़ाई करने बनारस आ गया। और हमारे ही घर पर रहने लगा। जब मयंक ने उस रात ये सारी बातें बताई तो मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि इस झल्ली सी लड़की का कोई चाहने वाला भी है इस दुनिया में। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ये रात जो हकीकत बयां करेगी वो इतनी खूबसूरत होगी। हम दोनों एक-दूसरे की आंखों में डूब गए। उसने मेरा हाथ अपने हाथों में थाम लिया।



अब इस हाथ को थामे हमें 10 साल हो गए हैं। मेरी और मयंक की एक प्यारी सी अपनी दुनिया है। वो डॉक्टर हैं और मैं प्लेबैक सिंगर.. जी हां सिंगर....


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प्रकाशित - अप्रैल 8, 2018
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