कहानी - तुम क्यों बदल गए आरव….

कहानी - तुम क्यों बदल गए आरव….

ये हिंदी कहानी है आपसी रिश्तों की, एक ऐसी रिलेशनशिप, जिसमेंं आपसी प्रेम है, विश्वास है लेकिन साथ ही हल्का सा शक भी है। ये कहानी रिश्तों में बातचीत के माध्यम से आपसी समझ बढ़ाने की सीख देती है।


ईजी चेयर पर सिर टिका कर मेघना अपने टूटी हुई जिंदगी को देख रही थी। अंधेरा हो गया था लेकिन उसकी जिंदगी में तो उसी दिन अंधेरा हो गया था जब आरव को उसकी बाहों में देखा।


“ऐसा कैसे कर सकते हो तुम आरव? कितना प्रेम करते थे मुझ से… पागलों की तरह मेरे पीछे पड़े थे। मुझे आज भी याद है वो दिन जब मुझे प्रपोज किया था, बिलकुल एक हीरो की तरह ...पेड़ पर चढ़ कर ….कितना हंसी थी मैं… कितना।


अचानक हंस पड़ी वो ….और फिर जोर जोर से रोने लगी।


कितने खुश थे हम... किसकी नजर लग गई हमारी जिंदगी को। सब कुछ छोड़ कर तुमसे शादी की, तुम्हें अपनी जिंदगी बनाया और सब तुम्हें सौंप दिया लेकिन तुम क्यों बदल गए आरव।”


गुजरी जिंदगी रह रह कर याद आ रही थी वो एक मल्टीनेशनल कंपनी में हेड ऑफ डिपार्टमेंट और आरव उसके अंडर काम करता था। पद में वरिष्ठ होकर भी वो आरव से प्रेम कर बैठी। उसका हंसमुख स्वभाव खींचता था अपनी ओर और उसकी एक्टिंग का जनून ….आफिस को भी थियेटर बना देता था।


हर कदम पर तुम्हारा साथ दिया ...तुम्हारा करियर बनाने में भी तुम्हारे साथ रही। और आज जब सफल हो गए तो मुझ से धोखा।


नहीं ऐसा नहीं कर सकते तुम यूं चुपचाप तुम्हें जाने नहीं दूंगी... ऐसे माफ नहीं कर सकती। झटके के साथ उठी और चल पड़ी।


कितने अंगारे बरस रहे थे आंखों से ….आरव और वो एक साथ...हम बिस्तर… घृणा से मुंह पर गाली आ गई।


गाड़ी की रफ्तार लगातार बढ़ाती जा रही थी मेघना, एक्सीलेटर पर पैर का दबाव बढ़ता जा रहा था…..


अचानक जोर से हार्न की आवाज आई……


पीछे पुलिस की गाड़ी थी शायद... ट्रैफिक नियमों को तोड़ दिया था उसने और ट्रैफिक पुलिस पीछे लग गई। जोर से ब्रेक मारे ...टायरों के रगड़ने की आवाज जोर से गूंजी।


“बाहर निकलो मैडम जी …” शीशे पर हाथ मार कर पुलिस वाला बोला।


“क्या हुआ आफिसर?”


“क्या हुआ है आपको पता नहीं क्या? सिग्नल तोड कर आई हैं आप और स्पीड भी इतनी तेज, शराब पी है क्या?”


मेघना की लाल आंखों को देख कर पुलिस वाला बोला।


“नहीं आफिसर, आप चेक कर सकते हैं थोड़ा जल्दी में थी, इसलिए ध्यान नहीं रहा। आप फाइन ले लीजिए,


लेकिन मुझे जाने दीजिए”


“क्या हुआ मैडम सब ठीक है ना? कोई समस्या तो नहीं, चाहो तो पुलिस की मदद ले सकती हो अगर कोई परेशान कर रहा हो”


“अगर अपनी जिंदगी ही परेशान करें तो?”


“क्या मतलब मैडम?”


“कुछ नहीं आफिसर वर्किंग लोड है और कुछ नहीं... मुझे माफ कर दीजिए मेरी गलती के लिए”


“ठीक है मैडम फाइन भर दीजिए और आगे से ध्यान रखिए।”


“और हां एक बात कहूंगा, जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा होता है जो हम नहीं चाहते लेकिन झेलना पड़ता है। किसी एक वजह से न टूटते और न ही बिखरते बल्कि और हिम्मत से खड़े होते हैं और लडते हैं कठिनाई से…


मैं जानता हूं आप आरव जी की पत्नी हैं। मैगजीन में आपकी फोटो उनके साथ देखी है और यह भी जानता हूं कि उनका नाम किसी के साथ उछाला जा रहा है, इसीलिए शायद आप परेशान हैं। हो सकता है मैडम जी यह सच हो या झूठ। खुद को तड़पाने से अच्छा है कि सही बात का पता लगाइये। “


“अच्छा जी चलते हैं.. गाड़ी आराम से चलाना जी”


जवाब में मुस्कुरा दी मेघना।


“हैलो आरव “


“हैलो मेघना ,प्लीज डार्लिंग.. मेरी एक बार बात सुन लो प्लीज, मैं सच बताना चाहता हूं, मुझे फंसाया जा रहा है। प्लीज मुझे अकेला न छोड़ो ..प्लीज मेघना”


“आरव आ रही हूं मैं और सच सुनना चाहती हूं”


कह कर फोन काट दिया मेघना ने... आंखों से आंसुओं को साफ कर सुरक्षित गाड़ी चलाती, सच की तलाश में निकल गई।


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