#मेरा पहला प्यार- जब पति की बेवफाई के बाद उसने हाथ थामा

#मेरा पहला प्यार- जब पति की बेवफाई के बाद उसने हाथ थामा

कुछ एहसास बहुत खास होते हैं, और जब वो हमारी उमस भरी जिंदगी में दस्तक देते हैं तो बारिश की एक बूंद भी हमें प्यार के कई रंगों में भिगो देती है। प्यार भी एक एेसा ही एहसास है और बात जब पहले प्यार की हो तो कहना ही क्या। गीली मिट्टी की सौंधी खुशबू है पहला प्यार, ठंडी हवाओं में घुला किसी का एहसास है पहला प्यार, किसी को याद करके चेहरे पर खिलने वाली बड़ी सी मुस्कान है पहला प्यार, किसी का नाम सुनकर जब दिल जोरों से धड़कने लगे, तब उस दिल की धड़कन है पहला प्यार। अपने इसी पहले प्यार को हमसे साझा कर रहीं है लखनऊ की इशिता खन्ना। आइए जानते हैं इशिता की कहानी, खुद इन्हीं का जुबानी।


“बात आज से 15 साल पुरानी है। महज 20 साल की उम्र में मेरी शादी करा दी गई। मेरे पति आशीष मुझसे उम्र में 6 साल बड़े थे। मैं इस शादी के लिए मन से बिल्कुल भी तैयार नहीं थी और शायद मेरे पति भी। हम एक कमरे में तो रहते थे, पर दो अजनबियों का तरह। हां परिवार के सामने ये जरूर मुझसे थोड़ी बहुत बात कर लेते, पर अकेले में जब भी मैं उनसे बात करने की कोशिश करती तो ये मुझे झिड़क देते। मुझे अपने प्रति इनका यह रवैया बिल्कुल भी समझ नहीं अाता। धीरे-धीरे मेरे स्वभाव में भी चिड़चिड़ापन बढ़ने लगा, जिसे देखकर मेरी सासू मां ने एक दिन मुझसे इस बारे में बात की और मैंने अपने दिल की सारी बातें उनके सामने खोल कर रख दीं। तब सासू मां ने मुझे इनके रूखे रवैये का कारण बताया।


दरअसल, वो एक दूसरे धर्म की लड़की से प्यार करते थे मगर ससुर जी ने जिद में आशीष की शादी मुझसे करा दी। ससुर जी की इस जिद की सजा आशीष मुझे दे रहे थे क्योंकि वो अभी भी उस लड़की भुला नहीं पा रहे थे। इस सच ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया और मैं डिप्रेशन में जाने लगी। मेरी हालत देखकर सासू मां ने ससुर जी से बात करके मेरा एडमिशन शहर के ही एक एम.बी.ए. काॅलेज में करा दिया। जिससे मेरा मन भी बहल जाए और मैं खुद अपने पैरों पर खड़ी होने के काबिल बन जाऊं। यह कहना गलत नहीं होगा कि सास के रूप में मुझे मेरी मां और एक प्यारी सी सहेली मिल गई थी। जिसने मुझे बहू बनाकर कैद करने के बजाय उड़ने के लिए एक खुला आसमान दे दिया था।


काॅलेज का वो पहला दिन मुझे आज भी याद है। मैं डरी-सहमी सी क्लास में दाखिल हुई ही थी कि वहां कुछ सीनियर छात्रों ने मेरी रैगिंग शुरू कर दी। उन्हीं मे से एक थे गौरव। गौरव सारे सीनियर्स के साथ मिलकर मेरी रैगिंग कर रहे थे। वो सब कभी मुझे गाना गाने के लिए बाेलते, तो कभी डांस करने के लिए। मेरे मना करने सभी मुझे घेर कर खड़े हो गए और मेरे चारों आेर घूम कर शाेर मचाने लगे। ये सब देखकर मैं बहुत डर गई और नजरें झुका कर रोने लगी। तभी उनमें से एक लड़के ने चिल्लाकर सबको शांत करा दिया और देखते ही देखते सभी लोग वहां से चले गए। वो और कोई नहीं, गौरव थे। जिनसे ये मेरी पहली मुलाकात थी।


उसके बाद गौरव हर छाेटी-बड़ी चीज में मेरी मदद करने लगे और इस तरह हमारी दोस्ती हो गई। गौरव बहुत ही खुशमिजाज थे । कोई भी लड़की उनकी तरफ आसानी से आकर्षित हो जाया करती थी। फिर वही हुआ जिसका डर था। एक पल में ही जैसे सब कुछ बदल गया। न जाने कब उनकी बातें मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गईं, उनसे रोज मिलना मुझे अच्छा लगने लगा। मुझे उनकी आदत हो गई। जिंदगी में पहली बार मुझे इस एहसास ने छुआ था। हां, मुझे गौरव से पहला प्यार हो गया था।


मैंने अपनी जिंदगी में वो गुस्ताखी कर दी थी, जिसकी इजाजत ये समाज हमें नहीं देता। एक शादीशुदा लड़की होकर मैंने किसी और से प्यार कर लिया था। मगर मैं नहीं जानती थी कि गौरव मेरे बारे में क्या सोचते थे। इसलिए मैंने अपनी भावनाआें को दिल में दबाए रखना ही ठीक समझा और गौरव से दूरियां बढ़ा ली। मेरा यूं दूरियां बढ़ा लेना गौरव को बैचेन कर गया और एक दिन पूरे काॅलेज के सामने उसने मुझे प्रपोज कर दिया। मैंने भी दिल के हाथों मजबूर होकर गौरव को हां कर दी। हमने फैसला कर लिया कि हम अपने प्यार को मुकाम तक पहुंचा कर रहेंगे।


घर पहुंचते ही मैंने ये बात अपने पति को बता दी। पति ने ये बात सुनते ही घर पर तूफान खड़ा कर दिया। यहां तक कि मेरे माता-पिता ने भी आशीष का ही साथ दिया। मेरे चरित्र पर उंगलियां उठाई गईं। एेसे में मां बनकर मेरा साथ दिया मेरी सासू मां ने। वो समाज के खिलाफ न सिर्फ मेरी ढाल बनकर खड़ी हुईं, बल्कि उन्होंने गौरव के घर जाकर हमारी शादी की भी बात की। जल्द ही आशीष से मेरा तलाक हो गया, जिसके बाद मैं और गौरव शादी के अटूट बंधन में बंध गए। आज मैं और गौरव एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते हैं। हमारी दो प्यारी सी बेटियां हैं और हम खुशहाल दांपत्य जीवन जी रहे हैं। गौरव मेरा पहला प्यार हैं और उनके प्यार से ही मुझे ये दूसरी जिंदगी मिली है।”


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