मेरा पहला प्यार - उस लम्हे ने लिख दिया था मोहब्बत का नया अफ़साना

मेरा पहला प्यार - उस लम्हे ने लिख दिया था मोहब्बत का नया अफ़साना

‘दिल के मुआमले में नतीजे की फिक्र क्या


आगे है इश्क़ जुर्म-ओ-सज़ा के मक़ाम से’


साहिर लुधियानवी का यह शेर इस प्रेम कहानी के लिए बिल्कुल सटीक है। कहते हैं कि इश्क और जंग में सब जायज़ होता है। जब दिल किसी खास पर आ जाता है तो वह हर बंधन से परे होता है। उस समय उम्र, धर्म, जाति, सामाजिक स्थिति, गुण-अवगुण… किसी भी चीज़ का बोध नहीं रहता है। समाज द्वारा बनाए गए नियम भी उस समय खोखले प्रतीत होने लगते हैं। कभी-कभी प्रेम अपूर्ण होकर भी संपूर्णता का एहसास दे जाता है। पढ़िए ‘पहले प्यार की याद’ सीरीज़ में एक प्रेमिका की चिट्ठी। हालांकि, यह उनके पहले प्यार की कहानी नहीं है पर ज़ेहन में प्रेम शब्द आते ही इनके सामने यही एक नाम और चेहरा कौंधता है इसलिए वे इस रिश्ते को ही पहले प्यार का दर्जा देती हैं। प्यार का यह खत हमें भेजा है, शमाइन अग्रवाल ने। वैलेंटाइन वीक का स्वागत कीजिए इस खूबसूरत लव स्टोरी के साथ।


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डियर ए.,


आप सोच रहे होंगे कि मैंने अपना नाम तो लिख दिया पर आपका क्यों नहीं… इस बात को जाने देते हैं क्योंकि हर बात पर बहस करना ज़रूरी नहीं है। लोग अकसर मुझसे पूछते हैं कि मैं इस रिश्ते में क्यों हूं? उनका सवाल वाज़िब है क्योंकि हमारे रिश्ते का दुनिया के सामने शायद कोई मोल है भी नहीं पर यह चिट्ठी मैं हमारे प्यार की सफाई देने के लिए नहीं लिख रही हूं। हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं, हम दोनों के लिए इतना काफी है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं आपसे प्यार कर बैठूंगी। शायद आपने भी नहीं सोचा होगा। तमाम अंतरों के बीच हम दोनों समाज की बंदिशों से भी तो जकड़े हुए थे। वैलेंटाइन वीक से पहले इस लेटर के सहारे मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं क्योंकि सामने कहती तो आप चुप करवा देते।


… उस रात जब आप मुझे घर छोड़ने आए तो हमारे बीच की पूरी इक्वेशन बदल चुकी थी। ऐसा नहीं है कि हम पहली बार साथ थे पर शायद नियति ने उस दिन कुछ और ही लिख रखा था। उससे पहले भी कई बार देर रात आप मुझे अपनी कार से ड्रॉप करने आए थे, कितनी ही बार मुंबई के रेस्त्रां हम दोनों की अंतहीन बातों और हंसी का गवाह बने थे। चौपाटी की चाट हो या एक-दो ड्रिंक्स के लिए मेरा साथ देना, आपने मुझे कभी किसी चीज़ के लिए मना नहीं किया। शायद हमारे बीच दोस्ती की शुरूआत हो चुकी थी, जिसे हम दोनों समझ नहीं पा रहे थे या जान कर भी अनजान बन रहे थे। मुझे पता था कि आपका अपना परिवार है, एक दुनिया है… पर मैं यह कभी नहीं जान पाई कि मैं कब उसका हिस्सा बन गई। आपने कभी इस बात को महत्व नहीं दिया कि आपकी तुलना में मैं नासमझ हूं, आप बस हर राह पर मेरा हाथ थामे मुझे सही दिशा दिखाते रहे।


उस रात ने हमारे बीच एक नई कहानी लिख दी थी। तब वन नाइट स्टैंड जैसा कुछ नहीं हुआ था, वह बस एक लम्हा था, जब हमने एक-दूसरे की आंखों में देखा था। उस एक झलक में कई वादे थे, हमारे भविष्य का आईना भी था शायद। कुछ खोया तो कुछ पाया था मैंने। मेरे ब्रेकअप को लगभग साल भर हो चुका था पर मैं उस दर्द से बाहर नहीं निकल पाई थी। उस एक पल में मैं सब भूल गई थी। हां, मुझे फिर से प्यार हो गया था। आपको पता है, उस रात आप तो अपने घर चले गए थे पर मैं रात भर सो नहीं पाई थी। मेरे मन में एक अनजाना सा डर था कि कहीं आपका आना, हमारी नज़रों का टकराना महज़ एक ख़्वाब तो नहीं था! सुबह आपकी कॉल से मुझे हकीकत का एहसास हुआ था। हां, वह रात सच थी। वह सिर्फ एक मनगढ़ंत कहानी नहीं, बल्कि हकीकत थी। हमारे रिश्ते की नींव डल चुकी थी। सुबह आपने मुझे भरोसा दिलाया कि हम हर कदम पर साथ हैं। सच कहूं तो उस वक्त आपकी बातों पर बहुत भरोसा नहीं हुआ था। मेरा दिल कहता था कि सब अच्छा होगा पर दिमाग इसकी गवाही नहीं दे रहा था। आखिर में दिल और दिमाग की इस जंग में दिल जीत चुका था।


कुछ दिनों तक लोगों से अपने इस रिश्ते को छिपाए रखने के बाद हम दोनों सबके सामने हाथ में हाथ डाले घूमने लगे थे। अब तो हम दोनों को साथ हुए लगभग 4 साल बीत चुके हैं। इन 4 सालों में मुझे नहीं याद है कि हम एक-दूसरे से 4-5 घंटे से ज़्यादा कभी नाराज़ रहे हों। यही तो ताकत होती है प्यार की, एक नाराज़ हो तो दूसरा झट से मना लेता है। एक अकेला महसूस करे तो दूसरा उसका साया बन जाता है। एक परेशान हो तो दूसरा सलाहकार बन जाता है। एक की आंखों में आंसू हों तो दूसरा उसके होंठों की हंसी बन जाता है। मैं इस मायानगरी में अकेले रहती हूं, जबकि आप अपने परिवार के साथ पर मजाल हो कभी कि मुझे अकेला महसूस करने दिया हो। आज भी आप जब मेरा हाथ थामते हो या चिढ़ाने के लिए मुझे ज़रा सा छू देते हो न तो मन बल्लियों उछलने लगता है। दुनिया को भूल मैं आपकी बांहों में सिमट जाती हूं। कुछ तो है आपमें, जिसने मुझे आपसे जोड़कर रखा है। कोई तो कशिश है आपके प्यार में कि उसके एहसास मात्र से मैं जी उठती हूं। कई बार मैं आपसे बेतुकी शिकायतें कर बैठती हूं, कुछ ऐसा मांगने लगती हूं, जिसे दे पाना आपके बस में नहीं होता है। उन कुछ पलों के लिए मैं शर्मिंदा हो जाती हूं, मुझे बाद में महसूस होता है कि मैंने ऐसा कहा ही क्यों। फिर भी आप कुछ नहीं कहते हो। मेरी हर गलती को नज़रअंदाज़ कर मेरी ज़िंदगी को इतना खूबसूरत बनाने के लिए शुक्रिया। आपको पता है, हमारी इस खूबसूरत कहानी में 15 साल का उम्र का अंतर भी मायने नहीं रखता है।


हां वैसे वैलेंटाइन वीक की शुरूआत होने वाली है। ऐसे में आपकी एक बात पर अपनी स्वीकृति देना चाहती हूं। आप हमेशा कहते हैं कि आप मुझे ज़्यादा प्यार करते हो। यह सच है, जितना प्यार आप मुझसे करते हैं, उतना शायद मैं कभी आपसे नहीं कर सकती। आप बेशक मेरा पहला प्यार नहीं हैं पर प्यार के तौर पर मैं सिर्फ आपको ही याद रखना चाहती हूं।


आपकी वैलेंटाइन,


शमाइन


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